Category: मध्य प्रदेश

  • मध्य प्रदेश कांग्रेस में जल्द होगा बड़ा संगठनात्मक बदलाव,  नई टीम में दिखेंगे नए चेहरे


    भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए संगठन में बड़ा बदलाव करने जा रही है। प्रदेश कांग्रेस की मौजूदा कार्यकारिणी जल्द भंग कर नई टीम गठित की जाएगी। अगले दो से तीन माह में नई कार्यकारिणी का गठन पूरा होने की संभावना है।
    वर्तमान कार्यकारिणी में करीब 253 पदाधिकारी हैं। नई व्यवस्था में इनकी संख्या घटाकर लगभग 125 करने की तैयारी है। विधायकों के साथ जिला अध्यक्ष और प्रदेश पदाधिकारी की दोहरी जिम्मेदारी रखने वालों को भी प्रदेश संगठन के दायित्व से मुक्त किया जा सकता है।


    युवा चेहरे और अनुभवी नेताओं का संतुलन


    नई टीम में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन के साथ ऐसे नेताओं को प्राथमिकता देने की रणनीति है, जो चुनाव लड़ने के बजाय संगठन को मजबूत करने और चुनाव लड़ाने की भूमिका निभाएं। युवा चेहरों के साथ अनुभवी नेताओं को भी जगह दी जाएगी।
    प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा है कि नई टीम सभी से विचार-विमर्श के बाद बनाई जाएगी और पार्टी का मुख्य लक्ष्य मिशन-2028 रहेगा।


    253 से घटकर 125 पदाधिकारी


    पटवारी की मौजूदा टीम में संतुलन बनाने के प्रयासों के चलते पदाधिकारियों की संख्या बढ़कर 253 तक पहुंच गई थी। पार्टी का मानना है कि बड़ी कार्यकारिणी के बावजूद अपेक्षित संगठनात्मक सक्रियता नहीं दिखी। इसी कारण अब कार्यकारिणी को छोटा और अधिक सक्रिय बनाने पर जोर है।


    युवाओं पर भी कांग्रेस का फोकस


    कांग्रेस ने युवाओं को जोड़ने के लिए युवा संवाद, आंदोलन और प्रदेशस्तरीय युवा सम्मेलन की योजना बनाई है। इसके बाद जिलों में भी युवा संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पार्टी सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को प्रदेशस्तरीय युवा सम्मेलन में बुलाने की तैयारी कर रही है। छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को 2028 के चुनाव की रणनीति में महत्वपूर्ण स्थान दिया जाएगा।

    वरिष्ठ कांग्रेस नेता मानक अग्रवाल को मिली बड़ी जिम्मेदारी..!

    काँग्रेस ने अपनी रणनीति पर अमल शुरू कर दिया है । शनिवार को इसका आगाज करते हुए
    प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कांग्रेस के वरिष्ठ और कद्दावर नेता मानक अग्रवाल को कांग्रेस के पूर्व विधायकों के बीच समन्वय बनाने के लिए समन्वयक बनाया है। श्री अग्रवाल पीसीसी में बैठकर पूर्व विधायकों के और पीसीसी के बीच तालमेल का कार्य करेंगे।
    श्री अग्रवाल को इस जिम्मेदारी मिलने से कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान को गति मिलेगी!


    कांग्रेस का लक्ष्य: 

    नई संगठनात्मक टीम के जरिए अगले दो वर्षों में बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करना और 2028 विधानसभा चुनाव की मजबूत तैयारी करना है।

  • कांग्रेस अब सड़क पर उतरेगी, संभागवार आंदोलन से सरकार को घेरेगी; चुनाव के लिए अलग टीम बनाने की तैयारी

    भोपाल। संगठन सृजन अभियान पूरा करने के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस अब सीधे मैदान में उतरने की तैयारी में है। पार्टी संभागवार आंदोलन के जरिए सरकार को घेरने के साथ ही चुनावी मशीनरी को बूथ तक मजबूत करेगी। मंगलवार को भोपाल में होने वाली राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक में आंदोलन के मुद्दों से लेकर चुनाव प्रबंधन की नई रणनीति पर मुहर लग सकती है।

    खास बात यह है कि कांग्रेस इस बार आंदोलन को सिर्फ विरोध-प्रदर्शन तक सीमित नहीं रखना चाहती। वरिष्ठ नेताओं को मैदान में उतारकर कार्यकर्ताओं में एकजुटता का संदेश देने और संगठन को चुनावी मोड में लाने की तैयारी है।

    कांग्रेस की रणनीति में क्या बदलेगा?

    1. आंदोलन अब संभाग के हिसाब से होंगे
      भोपाल में बैठकर प्रदेशव्यापी आंदोलन करने के बजाय स्थानीय मुद्दों के आधार पर संभागवार अभियान चलाने की तैयारी है। इससे स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं की भूमिका बढ़ेगी।
    2. आंदोलन में बड़े चेहरे भी उतरेंगे
      पार्टी की कोशिश होगी कि वरिष्ठ नेता खुद आंदोलन में मौजूद रहें। मकसद साफ है—कार्यकर्ताओं को यह संदेश देना कि नेतृत्व सिर्फ निर्देश नहीं देगा, बल्कि सड़क पर भी साथ खड़ा दिखाई देगा।
    3. चुनाव प्रबंधन के लिए अलग टीम
      जीतू पटवारी की रणनीति में चुनाव प्रबंधन को संगठन के सामान्य काम से अलग रखने पर जोर है। संभागवार टीम स्थानीय समीकरण देखेगी और बूथ तक चुनावी प्लान लागू कराएगी।
    4. संगठन का चार महीने में नया सेटअप
      भंग किए गए विभागों और प्रकोष्ठों का प्रदेश से लेकर मैदानी स्तर तक पुनर्गठन होगा। इसके लिए समयबद्ध कार्यक्रम बनाया जाएगा।
    5. दतिया के नतीजे से निकलेगा सबक
      बैठक में दतिया उपचुनाव की बूथवार रिपोर्ट पर भी चर्चा होगी। जिन नेताओं को दो से 30 बूथ तक के क्लस्टर की जिम्मेदारी दी गई थी, उनसे जमीनी रिपोर्ट ली जाएगी।

    दतिया के बाद अब अगली परीक्षा संगठन की

    कांग्रेस के लिए दतिया उपचुनाव सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि संगठन की जमीनी सक्रियता को परखने का मौका भी रहा। इसलिए पार्टी बूथवार रिपोर्ट के जरिए यह देखना चाहती है कि कौन-से क्षेत्र में संगठन ने बेहतर काम किया और कहां कमजोरी रह गई।

    इसी रिपोर्ट के आधार पर आगामी चुनावों के लिए संभाग से बूथ तक जिम्मेदारी तय करने की कवायद आगे बढ़ेगी। पार्टी की कोशिश है कि चुनाव आने का इंतजार करने के बजाय संगठन को अभी से सक्रिय कर दिया जाए।

    इंदौर में पटवारी के मुद्दे पर शक्ति प्रदर्शन की तैयारी

    कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को घेरने के लिए पुलिस-प्रशासन के इस्तेमाल और उनके स्वजन को निशाना बनाए जाने के आरोपों को भी पार्टी बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाएगी। इसके विरोध में इंदौर में बड़ा प्रदर्शन प्रस्तावित है।

    इसके जरिए कांग्रेस दो संदेश देना चाहती है—पहला, सरकार के खिलाफ आक्रामक तेवर और दूसरा, पटवारी के पीछे पूरी पार्टी खड़ी है।

    बैठक में कौन-कौन रहेगा मौजूद?

    प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, विवेक तन्खा, अशोक सिंह, अरुण यादव, कांतिलाल भूरिया, अजय सिंह, मीनाक्षी नटराजन और कमलेश्वर पटेल सहित वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।

    पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ व्यक्तिगत कारणों से बैठक में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने इसकी सूचना पार्टी को दे दी है। उनके पुत्र और पूर्व सांसद नकुल नाथ बैठक में मौजूद रहेंगे।

    अंदर की बात : आंदोलन के बहाने संगठन की परीक्षा

    कांग्रेस के लिए संभागवार आंदोलन सिर्फ सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की कवायद नहीं है। इसके जरिए पार्टी यह भी परखना चाहती है कि कौन-सा नेता कितने कार्यकर्ताओं को सड़क पर उतार सकता है और कौन-सा संगठन जमीन पर कितना सक्रिय है।

    यही वजह है कि आंदोलन की जिम्मेदारी, बूथवार रिपोर्ट और वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी—तीनों को एक ही रणनीति से जोड़ा जा रहा है। आने वाले चुनावों से पहले कांग्रेस के लिए यह अपने संगठन की ताकत और नेताओं की सक्रियता नापने का भी मौका होगा।

    5 पॉइंट में कांग्रेस का पूरा प्लान

    • संभागवार आंदोलन — स्थानीय मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी।
    • बड़े नेताओं की एंट्री — वरिष्ठ नेताओं को आंदोलनों में उतारा जाएगा।
    • अलग चुनाव टीम — चुनाव प्रबंधन को अलग सिस्टम से चलाने की तैयारी।
    • बूथ पर फोकस — दतिया की रिपोर्ट के आधार पर बूथ स्तर की कमजोरियां चिन्हित होंगी।
    • चार महीने में संगठन — विभागों और प्रकोष्ठों का नए सिरे से गठन होगा।

  • कांग्रेस की जिला कार्यकारणी के लिए अभी करना होगा इंतजार….?

    कांग्रेस की जिला कार्यकारणी के लिए अभी करना होगा इंतजार….?

    भोपाल// वैसे तो जोर शोर से शुरू हुए कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के तहत 15फरवरी तक प्रदेश भर में जिला कार्यकारणी घोषित हो जानी थीं , नेताओं और कार्यकर्ताओं को इसका बेसब्री से इंतजार भी था, अब यह इंतजार थोड़ा लंबा हो गया है, वैसे एक पखवाड़े पहले करीब 4 जिला कांग्रेस कमेटियां घोषित भी कर दी गईं थीं, पर अब अखिल भारतीय कांग्रेस ने इस पर रोक लगा दी है कहा जा रहा है कि अब नए सिरे से जिला कार्यकारणी गठित की जाएंगी, और यह सब फरवरी माह के अंत तक होने की संभावना है।

    15 दिन पहले छिंदवाड़ा, मऊगंज, सागर शहर और फिर झाबुआ जिला कांग्रेस की कार्यकारिणी घोषित की गई थी। अखिल भारतीय कांग्रेस ने जिला कार्यकारिणी के लिए 31 से लेकर 51 की संख्या निर्धारित की है लेकिन इन जिलों में संख्या अधिक हो गई। छिंदवाड़ा की कार्यकारिणी 250, सागर की 141 और मऊगंज में 59 की बनी।  इस कारण अब प्रदेश कांग्रेस ने चारों जिला कार्यकारिणी पर रोक लगाते हुए नई कार्यकारिणी के लिए नाम मांग लिए हैं। इनकी घोषणा हुई थी तब अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की इसको लेकर दिशा-निर्देश नहीं थे, लेकिन जंबो कार्यकारिणी को लेकर सवाल हमेशा उठते थे। इस बीच कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सभी राज्यों को परिपत्र भेजकर कहा कि जिला कार्यकारिणी 31 से लेकर 51 की होगी।  यह फैसला अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के निर्देश के बाद लिया गया है। अब नई गाइडलाइन के अनुसार दोबारा कार्यकारिणी का गठन किया जाएगा।

    कितनी बड़ी होगी कार्यकारणी

    अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) की ओर से प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) और जिला अध्यक्षों को भेजे गए पत्र में जिला कार्यकारिणी का नया स्वरूप तय किया गया है. निर्देश के अनुसार, बड़े जिलों में अधिकतम 51 और छोटे जिलों में 31 सदस्य ही कार्यकारिणी में शामिल किए जा सकेंगे. इससे अधिक सदस्यों को शामिल करने की अनुमति नहीं होगी. इसी मानक के आधार पर अब सभी जिलों में पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई है. दरअसल, जिला अध्यक्षों ने करीब तीन महीने की मशक्कत के बाद कार्यकारिणी की सूची तैयार कर पीसीसी को भेजी थी.

    पीसीसी स्तर पर परीक्षण के बाद चार जिलों की कार्यकारिणी घोषित भी कर दी गई थी, जबकि शेष जिलों की घोषणा 15 फरवरी तक करने की तैयारी थी. इसी बीच केंद्रीय नेतृत्व का नया फरमान आ गया, जिससे पूरी प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी पड़ेगी या पड़ रही

    अध्यक्षों के सामने नई चुनौती.?

    नई मानक लागू होने के बाद जिला अध्यक्षों के सामने सबसे बड़ी चुनौती पहले से घोषित या प्रस्तावित नामों में कटौती की है. जिन नेताओं के नाम कार्यकारिणी से हटाए जाएंगे, उनकी नाराजगी स्वाभाविक मानी जा रही है. वहीं, पीसीसी को भी सभी जिलों की संशोधित सूचियों का दोबारा परीक्षण करना होगा, जिसके बाद ही अंतिम घोषणा संभव होगी.

    कमलनाथ के जिले में बनी जंबो कार्यकारिणी

    प्रदेश संगठन महामंत्री डॉ. संजय कामले ने पुष्टि करते हुए कहा कि सभी जिलों की कार्यकारिणी नए सिरे से बनाई जाएगी. प्रयास है कि फरवरी माह के भीतर सभी जिलों की कार्यकारिणी घोषित कर दी जाए. वहीं छिंदवाड़ा जिले की कार्यकारिणी सबसे बड़ी थी, जिसमें कुल 261 सदस्य शामिल थे. इसमें 73 महामंत्री, 68 सचिव, 62 आमंत्रित सदस्य और अन्य पदाधिकारी थे. सूत्रों के अनुसार, इसी तरह की भारी-भरकम कार्यकारिणियों को देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने आकार सीमित करने का निर्णय लिया है, ताकि संगठन अधिक चुस्त-दुरुस्त और सक्रिय बने तथा पदाधिकारियों की जवाबदेही तय हो सके.

    अब पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि संगठन में संतुलन और अनुशासन बनाए रखने के लिए तय मानकों के अनुसार ही नई कार्यकारिणी गठित की जाएगी। 

  • सूबे में पंद्रह लाख कार्यकर्ता जुटा  पाएगी काँग्रेस ?

    सूबे में पंद्रह लाख कार्यकर्ता जुटा पाएगी काँग्रेस ?

    भोपाल // सूबे में कांग्रेस संगठन सृजन  अभियान के जरिए अपने  को मजबूत करने में जुटी हुई है। जिला और ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद अब अगले चरण में  पंचायत वार्ड और मोहल्ला समितियों पर  फोकस किया जा रहा है। यह दावा किया जा रहा इसके  माध्यम से  करीब पंद्रह लाख कार्यकर्ता तैयार करने का लक्ष्य है और 20फरवरी तक प्रदेश भर में यह इकाइयां गठित कर इनके प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू कर दिए जाएंगे ।
    इन समितियों को स्थानीय निकायों और पंचायत चुनावों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जाएंगी।
    हर पंचायत समितियों में पच्चीस  सदस्य रहेंगे और इनका गठन प्रदेश कार्यकारणी की तर्ज पर होगा। जिसमें युवा कांग्रेस महिला कांग्रेस एनएसयूआई आदिवासी कांग्रेस के प्रतिनिधि रहेंगे । शहरी क्षेत्रों में वार्ड समिति बनेगी पर उसमें सदस्यों की संख्या वार्ड की जनसंख्या पर निर्भर करेगी। नगर निगम में एक वार्ड में अधिकतम सौ, और नगर पालिका की वार्ड समिति में ज्यादा से ज्यादा पचास सदस्य होंगे। वार्डों के भीतर मोहल्ला समिति बनेगी।
    इन सबका समितियों का काम पार्टी अभियानों को आम जन तक पहुंचना, और हर तरह के सोशल मीडिया के माध्यम से आम आदमी तक पहुंच बनाना होगा।
    पर जानकारों का कहना कि कांग्रेस को अपने इस दावे को पूरा करने में काफी मशक्कत करनी होगी क्योंकि कांग्रेस के  संगठन सृजन अभियान के तहत पूरे सूबे में लगभग 71 जिलाध्यक्षों की घोषणा की गई थी। लेकिन करीब 5 महीने बीत जाने के बाद भी जिलाध्यक्ष अकेले काम कर रहे हैं. जिला कार्यकारणी की घोषणा तक नहीं हो पाई है। यही स्थिति ब्लॉक कमेटियों को लेकर भी है, ऐसे में मंडल , पंचायत, वार्ड ,मोहल्ला समितियां बनाने का काम कैसे गति ले पाएगा

    संगठन की स्थिति को लेकर संतुष्ट नहीं है आलाकमान
    पिछले हफ्ते दिल्ली में कांग्रेस  के प्रदेश संगठन को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल  गांधी मौजूद थे. कहा जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान प्रदेश कांग्रेस संगठन और उसको स्थिति को लेकर संतुष्ट नही है।
    प्रदेश में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी माना है कि कांग्रेस  का संगठन प्रदेश में अभी पूरी तरह से मजबूत नहीं है।  सूत्रों की माने तो काँग्रेस आलाकमान बहुत से जिलाध्यक्षों के काम काज से खुश नहीं है. उन्हें अपनी परफारमेंस सुधारने की चेतावनी मिल सकती है, फिलहाल तो प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी से जिलाध्यक्षों  के साथ व्यक्तिगत रूप से बैठकर सक्रियता और संगठन को मजबूत करने को कहा गया है। यदि फिर भी सुधार नहीं होता है तो विकल्पों को देखा जाएगा।
    खबर  है कि संगठन के महासचिव केसी वेनुगोपाल ने   प्रदेश संगठन को अल्टीमेटम दे दिया है कि 15 दिवस के भीतर जिला समितियां और  30दिन के भीतर ब्लाक समितियों की  घोषणा  की जाए ।

    देर कर रहा है प्रदेश संगठन
    वैसे बहुत से जिलाध्यक्षों ने समितियां बना कर प्रदेश संगठन को सौंप दी हैं, घोषणा में देरी प्रदेश स्तर से हो रही है। कहा जा रहा है कि प्रदेश संगठन को प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी से हरि झंडी नहीं मिली है। अब महासचिव केसी बेलुगोपाल ने 30 दिन में ब्लॉक समितियों और 60 दिन में मोहल्ला स्तर की समितियों का  गठन  करने को कहा है। समितियों में एससी, एसटी, ओबीसी ,अल्पसंख्यक का प्रतिनिधित्व भी सुनिश्चित करने को कहा है।
    पहली बार है कि कांग्रेस  में  जमीनी स्तर तक संगठन की गतिविधियों की केंद्र स्तर से निगरानी हो रही है । जिलाध्यक्षों के कामों की मासिक समीक्षा की जा रही है।
    संगठन सृजन अभियान की अवधारणा राहुल गांधी की है इसलिए इस पर ज्यादा फोकस है।

  • गौ शालाओं में बनेंगी गायों की समाधी, गायों के शवों के सम्मानजनक तरीके से निष्पादन की योजना 

    गौ शालाओं में बनेंगी गायों की समाधी, गायों के शवों के सम्मानजनक तरीके से निष्पादन की योजना 

     भोपाल//  गायों की मौत को लेकर किरकिरी झेलने वाली मध्य प्रदेश सरकार ने अब गायों के शवों को खुले में छोड़ने के बजाय सम्मानजनक तरीके से निष्पादन की योजना बनाई है । सरकार ने ऐलान किया है कि अब मृत गोवंश पशुओं को गौशाला में समाधि दी जाएगी । 

     शिवराज सरकार दवारा इसके लिए मनरेगा से गो समाधिया बनवाई जाएंगी। 

     इसमें 6 फीट लंबा 4 फीट चौड़ा और इतने ही ऊंचाई का गड्ढा खोदकर समाधि दी जाएगी। सबसे पहले गड्ढे के तल में ताजे गोवर की आधी फिट की तह बिछाई जाएगी इसमें 20 किलो नमक और इतना ही चुना डाला जाएगा। जिससे 6 माह बाद शव खाद बन जाएगा।

    जिसके बाद वो खाद सरकार किसानों के साथ-साथ अन्य लोगों को देगी। यह फैसला सरकार ने लिया है, गौ संवर्धन बोर्ड इस स्कीम का क्रियान्वयन कराएगा।

     पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज श्रीवास्तव ने इस संबंध में सभी जिला कलेक्टरों और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं ।

    पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि गौशालाओं में 1 वर्ष में 15% पशुओं की मौत होती है प्रदेश में 1772 गौशालाओं में 2, लाख 87हजार गोवंशीय पशु हैं ।इस अनुमान से हर वर्ष लगभग 43हजार, 50 पशुओं की मौत होती है। अभी तक शव खुले में फेंक दिया जाता था। जिससे गंदगी होती थी ।कई बार विवाद की स्थिति भी बनती है। गौशालाओं के आसपास वर्षों तक कंकाल पड़ा रहता है। गोवंशीय पशुओं के शव का सम्मानजनक तरीके से निष्पादन के लिए उन्हें समाधि दी जाएगी।

     दिल्ली ने दिखाई राह

     दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए लंपी स्कीन डिसीज से पीड़ित पशुओं का निष्पादन व्यवस्थित तरीके से करने के लिए दिल्ली सरकार को निर्देशित किया था । साथ ही कहा था कि समाधि की प्रक्रिया जन भावनाओं के अनुरूप होनी चाहिए।

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    पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने मनरेगा के अंतर्गत गो समाधि बनाने के लिए सभी जिलों को निर्देशित किया है जिसमें गोवंश पशुओं के समूह को व्यवस्थित तरीके से निष्पादित किया जा सके

     गुलशन बामरा प्रमुख सचिव पशुपालन

  • कौन फाइनल करेगा कांग्रेस के टिकट ? दिग्विजय सिंह ने किया बड़ा खुलासा !

    कौन फाइनल करेगा कांग्रेस के टिकट ? दिग्विजय सिंह ने किया बड़ा खुलासा !

    भोपाल// मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने तैयारियां तेज कर दी हैं। वहीं टिकटों को लेकर दावेदारों में घमासान मचा हुआ है इस बीच टिकट को लेकर फार्मूले पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्य मंत्री  दिग्विजय सिंह ने भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम में साफ किया कि इस बार कमलनाथ ही सर्वे-सर्वा हैं। उन्हीं के सर्वे के आधार पर उम्मीदवार फाइनल किया जाएगा। इस दिग्विजय ने कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा-  आपस में लड़ाई नहीं करें!

    मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस जल्द ही उम्मीदवारों की घोषणा कर सकती है। कांग्रेस उम्मीदवारों के चयन के लिए अलग-अलग सर्वे कर रही है। कांग्रेस के सीनियर नेता और एमपी के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने बड़ा खुलासा किया है। भोपाल में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि इस बार के विधानसभा चुनाव के लिए नेता आपस में लड़ें नहीं। उन्होंने कहा कि उम्मीदवार वही फाइनल होगा जिसे कमलनाथ फाइनल करेंगे। दिग्विजय सिंह ने कहा कि विधानसभा चुनाव के लिए कमलनाथ ही सर्वेसर्वा हैं। उन्होंने कहा कि इस बार बीजेपी सरकार को हराना है।
    दिग्विजय सिंह ने कार्य कर्ताओं और नेताओं से कहा कि समझ जाओ भैया,  लड़ो मत। उन्होंने कहा कि टिकट के कई दावेदार मुझसे मिले। उम्मीदवार इतने खड़े हो गए हैं कि मुसीबत हो रही है किस-किस को समझाएं किसको ना समझाएं हमने तो कह दिया है कि हमारे कमलनाथ जी सर्वे सर्वा हैं उनका जो सर्वे है सब पत्थर की लकीर है उनके हिसाब से टिकट मिलेगा किसी और के पास जाने की जरूरत नहीं है।क्योंकि फाइनल टिकट कमलनाथ के सर्वे के आधार पर ही मिलेगा।टिकट हमारे बस का काम नहीं है सर्वे से ही काम होगा। इसीलिए एकजुट हो जाओ लड़ो मत, डरो मत और भाजपा की सरकार मिटाओ । यही आप से मेरी प्रार्थना है ..!

    पूर्व मुख्यमंत्री ने स भोपाल में महाकाल लोक में भ्रष्ट्राचार ,सतपुड़ा भवन में आग ,महगाई ,बेरोजगारी सहित सरकार की जन विरोधी नीतियों के विरोध में आयोजित धरना प्रदर्शन को सम्बोधित करते हुए यह बात कही है .
    विधानसभा चुनाव के लिए कमलनाथ ने दिग्विजय सिंह को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। दिग्विजय सिंह के पास 66 विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी है जहां बीजेपी लगातार चुनाव जीत रही है। दिग्विजय सिंह इन 66 विधानसभा सीटों का दौरा कर चुके हैं।

    दिग्विजय सिंह ने इन 66 विधानसभा सीटों की सर्वे रिपोर्ट पार्टी हाई कमान को सौंप दी थी। इसके बाद से ही अटकलें लगाई जा रही हैं थी कि इसके सर्वे के आधार पर टिकट मिलेगा। कमलनाथ राज्य की 230 विधानसभा सीटों के लिए अलग से सर्वे करवा रहे हैं। माना जा रहा है कि इसी सर्वे रिपोर्ट के आधार पर उम्मीदवारों का टिकट फाइनल होगा।
    राज्य में इसी साल होंगे चुनाव
    मध्यप्रदेश में इसी साल विधानसभा के चुनाव होने हैं। विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी और कांग्रेस अपनी-अपनी रणनीति पर काम कर रहे हैं। कांग्रेस उम्मीदवारों के नाम पहले से घोषित करने की योजना बना रही है जिससे उम्मीदवार को जनसंपर्क करने के लिए अधिक से अधिक समय मिले।

  • कांग्रेस के सॉफ्ट हिंदुत्व का सच उजागर करेगी भाजपा ?

    भोपाल //पांच राज्यों में कांग्रेस विधानसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दों पर गारंटी कार्यक्रमों के साथ हिंदुत्व के मुद्दे को भी लेकर मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। कभी इस तरह की छवि से दूर रहने वाली कांग्रेस अब एक नए अवतार में खुलकर मंचों से’ जय श्री राम, जय बजरंगबली’ जैसे नारे लगा रही है। पिछले दिनों कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने जबलपुर में  नर्मदा पूजन कर चुनाव अभियान की शुरुआत कर स्पष्ट इशारा कर दिया है कि कांग्रेस के चुनाव की रणनीति क्या होगी। पिछले 1 साल से ज्यादा समय से कमलनाथ प्रदेश में खुलकर सॉफ्ट हिंदुत्व को आगे बढ़ाते नजर आ रहे हैं।

    एंटी इनकंबेंसी और अन्य मामलों के कारण भाजपा के रणनीति कार चिंता में हैं, वहीं कांग्रेस का यह नया अवतार ने उनकी परेशानी को बढ़ा दिया है । अब भाजपा कांग्रेस के इस नए अवतार पर हमला करने की रणनीति बना रही है। 

    हाल ही में कर्नाटक में बनी कांग्रेसी सरकार के कुछ निर्णय ने भाजपा को कांग्रेस पर हमला और उसे कथित रुप से हिंदू विरोधी साबित करने का के मुद्दे दे दिए हैं। बताया जा रहा है कि भाजपा ने इन फैसलों को आधार बनाकर प्रदेश के चुनाव में कांग्रेस को हिंदू विरोधी साबित करने की योजना और रणनीति बना  रही है। कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार ने धर्मांतरण विरोधी कानून की वापसी, पाठ्य पुस्तकों में से सावरकर और हेडगेवार सहित विवादित लेखकों के पाठ हटाने के फैसलों  के साथ कर्नाटक के पशु पालन मंत्री के गौ हत्या कानून को लेकर दिए बयान जैसे मामलों को मध्यप्रदेश में भाजपा राजनीति को गरमाने का प्रयास कर रही है।

    प्रदेश के गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने कहा है कि कर्नाटक सरकार के फैसले को देखते हुए प्रदेश की जनता को आने वाले समय में फैसला लेना चाहिए कि वह किसके साथ जाना चाहती है। कर्नाटक में धर्मांतरण विरोधी कानून वापस लेने का फैसला लव जिहाद को बढ़ावा देगा । गृहमंत्री का कहना है कि कांग्रेस के फैसले ने उसकी मानसिकता को स्पष्ट कर दिया है ।कांग्रेस   दिखावा करती है ,कहती कुछ है और करती कुछ और है। वही प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा ने कांग्रेस के खून में मुगलों के खून की मिलावट तक का दावा कर दिया है।

    भाजपा के नेताओं का मानना है कि कर्नाटक में कांग्रेस के फैसले यह साबित करते हैं की कांग्रेस हिंदुओं के साथ धोखा कर रही है। कांग्रेस का सॉफ्ट हिंदुत्व एक दिखावा भर है। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि भविष्य में पार्टी कांग्रेस के इस दोहरे चरित्र को उजागर करने के लिए पूरे जोर-शोर से काम करेगीऔर इस मुद्दे पर कांग्रेस को सवालों से घेरेगी।

    वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस भी  भाजपा की रणनीति का जवाब देने की तैयारी में जुट गई है।

  • पर्यवेक्षक के दौरे के बीच नर्मदापुरम से ब्राह्मण उम्मीदवार उतारने की चर्चा ?

    पर्यवेक्षक के दौरे के बीच नर्मदापुरम से ब्राह्मण उम्मीदवार उतारने की चर्चा ?

    नर्मदा पुरम/ इटारसी//  जिले की दो विधानसभा नर्मदापुरम( होशंगाबाद ) और पिपरिया के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस के पर्यवेक्षक के रूप में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा शुक्रवार को नर्मदापुरम आ रहे हैं जो शाम के समय कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर भावी प्रत्याशियों के लिए उनकी पसंद को जानेंगे।

    केंद्रीय पर्यवेक्षक के आने से टिकट के दावेदारों में सरगर्मियां हैं। वे वरिष्ठ नेताओं से मिल कर या फ़ोन कर अपना नाम पर्यवेक्षक के सामने प्रस्तावित  करने की गुजारिश करते नज़र आए हैं।

    वैसे कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि जैसे आप पूर्व का इतिहास रहा है पर्यवेक्षकों का आना महज़ औपचारिकता ही रहती आई है, टिकट तो अंतिम समय पर जिले के माई बाप नेताओं के की मर्जी से ही तय होती है और इस बार भी तस्वीर कोई अलग होगी ऐसा नहीं लगता।

    दो दर्जन दावेदार?

     जैसी कि कांग्रेस की परंपरा रही है लगातार दो दशकों से ज्यादा समय तक भाजपा की इस अजेय सीट पर कांग्रेस के पास भले ही कार्यकर्ता न हों टिकट के  दावेदारों की कमी नहीं रहती है ।

    अभी भी कहां जा रहा है कि लगभग दो दर्जन दावेदार अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं। इस बार भी जो नाम चर्चा में हैं उनमें पूर्व जिला पंचायत सदस्य चंद्र गोपाल मलैया, कांग्रेस के जिला कार्यकारी जिलाध्यक्ष शिवराज चंद्रोल, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष मीना वर्मा, पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष सतेंद्र फौजदार, कपिल फौजदार,पूर्व युवक कांग्रेस जिला अध्यक्ष प्रेम सिंह सोलंकी, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य शिवाकांत पांडे (गुड्डन), प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारी महेंद्र शर्मा, प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष मानक अग्रवाल , प्रदेश एन एस यू आई अध्यक्ष आशुतोष चौकसे ,रश्मि दीक्षित, नीरजा फौजदार, राजकुमार उपाध्याय केलू, राममोहन मलैया ,मोहन झलिया, नर्मदा पुरम नगर कांग्रेस अध्यक्ष धर्मेंद्र तिवारी , इटारसी के पूर्व नगर अध्यक्ष पंकज राठौर,अजय सैनी, सेवा दल यंग ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष गजानन तिवारी (गज्जू तिवारी) शामिल हैं । इनके आलावा भी कुछ नामों की चर्चा बनी हुई है, और यदि अखबारों की खबरों पर भरोसा किया जाए तो यह नाम कांग्रेसी विचारधारा होने के कारण कथित सर्वे टीम के माध्यम से आलाकमान तक पहुंचे हैं उसमें पूर्व विधायक अंबिका शुक्ला के बेटे हेमंत शुक्ला वरिष्ठ कांग्रेसी नेता रहे स्वर्गीय समीरमल के पुत्र संजय गोठी और सर्व ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष जितेंद्र ओझा का नाम शामिल है। एक नाम को एक समाचार पत्र में प्रकाशित किया है वह सविता दीवान का, पर बताया जा रहा है कि उनकी दावेदारी सोहागपुर से है।

    एक रोचक बात यह भी कही जा रही है कि कांग्रेस के इन दावेदारों में से कुछ दावेदार ऐसे हैं वह तभी चुनाव लड़ेंगे जब भाजपा के वर्तमान विधायक चुनाव में चुनाव मैदान में नहीं होंगे, इसलिए उनकी दावेदारी तो है पर आधे अधूरे मन से, वे असमंजस में है की टिकट मांगे या न मांगे?

    एक डर ऐसा भी ?

    पिछले दिनों दिग्विजय सिंह के सामने कांग्रेस पार्टी कार्यकर्ताओं ने एक स्वर से भाजपा के आए व्यक्ति को टिकट न दिए जाने की मांग की थी, ऐसा माना जा रहा है कि नेताओं और कार्यकर्त्ताओं के रूख को देखकर फिलहाल इस तरह की चर्चाओं पर विराम सा लग गया है, पर कुछ नेता  अभी भी इस पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं उन्हें लगता है कि प्रदेश आलाकमान अंतिम समय पर भाजपा से आने वाले किसी व्यक्ति को टिकट दे सकता है।

    ब्राह्मण होगा उम्मीदवार?

    एक चर्चा क्षेत्र के राजनीतिक गली गलियारों में यह भी है कि जिले की 4 सीटों में से एक पर कांग्रेस किसी ब्राह्मण उम्मीदवार को उतारना चाहती है और फिलहाल वोटों के गणित के हिसाब से इसके लिए नर्मदापुरम सीट को ज्यादा मुफीद माना जा रहा है। क्योंकि क्षेत्र में कुर्मी और ब्राह्मण मतदाताओं की खासी संख्या रही है और ब्राह्मण उम्मीदवार यहां से जीते भी रहे हैं । पार्टी के सूत्र बताते हैं कि जिले की कांग्रेस की राजनीति के जिम्मेदार नेता सुरेश पचौरी भी यही चाहते हैं और क्षेत्र का टिकट उनकी सहमति से ही तय होगा । पर ब्राह्मण दावेदारों में से उनका पसंदीदा कौन है या होगा इसको लेकर सस्पेंस है! वैसे आधा दर्जन से ज्यादा ब्राह्मण उम्मीदवार इस क्षेत्र से टिकट के दावेदार हैं .

    मलैया की सक्रियता चर्चा में!

    पर वही कुर्मी समाज से आने वाले कांग्रेस के नेता चंद्र गोपाल मलैया सक्रिय हो गए हैं। बताया जाता है कि उन्हें प्रदेश नेतृत्व ने फील्ड पर काम करने का इशारा दे दिया है। क्षेत्र में कुर्मी मतदाताओं की खासी संख्या है और यह माना जाता है कि यदि में लामबंद हो जाए तो विधायक उनका हो सकता है पर क्षेत्र में अभी तक ऐसा नहीं हो सका है।  पिछले कई सालों से इस समाज को भाजपा समर्थक माना जाता रहा है पर अब कहा जा रहा है कि कुर्मियों में इस बात की मांग उठने लगी है कि विधायक हमारे समाज का होना चाहिए और इस बार वे दोनों ही दलों से कुर्मी समाज के किसी व्यक्ति को टिकट देने की मांग करेंगे।

  • भाजपा कांग्रेस – किसके लिए सत्ता की चाबी साबित होगा महाकौशल ?

    भाजपा कांग्रेस – किसके लिए सत्ता की चाबी साबित होगा महाकौशल ?

    भोपाल /जबलपुर // चुनावी तैयारियों में जुटी प्रदेश की दोनों प्रमुख राजनीतिक पार्टियों का फोकस इस बार महाकौशल क्षेत्र पर है । इन दलों के नेता तो इस क्षेत्र को सत्ता की चाबी तक बता रहे हैं । सत्ताधारी भाजपा बुंदेलखंड, चंबल इलाके में मचे घमासान और मालवा निमाड़ सहित अन्य क्षेत्रों के असंतोष की भरपाई महाकौशल से करना चाहती है।
    पिछले चुनाव में कांग्रेस का महाकौशल में प्रदर्शन काफी अच्छा रहा था । वह न सिर्फ इसे दोहराना चाहती है, बल्कि इसमें इजाफा करने का इरादा भी रखती है।  इन कारणों के चलते महाकौशल क्षेत्र आगामी कुछ दिनों तक राजनीतिक आयोजनों की सरगर्मियां का केंद्र नजर आने वाला है।
    दिग्गजों का जमावड़ा
    आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर महत्वपूर्ण हुए महाकौशल क्षेत्र में अगले 3 हफ्ते सरगर्मी भरे हो सकते हैं। दोनों ही दल अपने-अपने दिग्गजों और महत्वपूर्ण नेताओं के कार्यक्रम क्षेत्र में आयोजित करवाने जा रही है । 10 जून को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जबलपुर में लाडली बहना योजना की पात्र हितग्राही बहनों के खाते में ₹1000 की रकम ट्रांसफर करेंगे। वही 2 दिन बाद यानी 12 जून को प्रियंका गांधी महाकौशल के केंद्र नगर जबलपुर से विधानसभा चुनाव अभियान का आगाज करने वाली है । नर्मदा पूजन के साथ-साथ रोड शो और रैली का भी को भी संबोधित करेंगी। कांग्रेस इस आयोजन की तैयारी में जुट गई है। बताया जाता है कि प्रियंका की रैली में एक लाख लोगों को जुटाने की कवायद इस क्षेत्र के नेता कर रहे हैं ।
    योग दिवस पर प्रधानमंत्री उपराष्ट्रपति?
    प्रदेश का आयुष विभाग 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस बड़े पैमाने पर आयोजित करने जा रहा है। खबर है कि विभाग इस आयोजन के लिए उपराष्ट्रपति जगदीप धनकर को आमंत्रित कर रहा है ,वैसे दो-तीन दिन पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में यह खबर भी थी कि इस आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिरकत कर सकते हैं।
    महाकौशल क्यों बना जरूरी?
    2018 के चुनाव में कांग्रेस ने महाकौशल में बढ़िया प्रदर्शन किया था।महाकौशल की 38 में से 24 सीटें कांग्रेस के खाते में गईं थीं । बीजेपी को महाकौशल इलाके से निराशा हाथ लगी थी. बीजेपी को 13 सीटों से ही संतोष करना पड़ा । 1 सीट निर्दलीय के खाते में गई थी,और इसकी बड़ी वजह आदिवासियों की नाराजगी मानी गईं थी । 2018 में कांग्रेस ने कमलनाथ को सीएम का चेहरा बनाकर चुनाव लड़ा था. इससे उनके गृह जिले छिंदवाड़ा की सभी 7 सीट कांग्रेस ने जीत ली थीं. वहीं जबलपुर में कांग्रेस को 8 में से 4 सीटें मिली थीं. ।
    अब बड़ा सवाल है कि क्या 2023 के चुनाव में भी कांग्रेस ऐसा ही प्रदर्शन कर पाएगी या बीजेपी को बड़ी सफलता मिलेगी? वैसे फ़िलहाल कांग्रेस ने महाकौशल से आने वाले कमलनाथ को ही अपना सीएम चेहरा बनाया है इसके चलते  भी अगले चुनाव में यहां से कांग्रेस को बेहतर नतीजों की उम्मीद है।
    कांग्रेस को लगता है कि पिछ्ले चुनाव में खासी बढ़त बनाने वाले महाकौशल क्षेत्र से चुनावी आभियान का आगाज़ कर वह ज्यादा फायदा उठा सकती है, क्योंकि बुंदेलखंड और बघेल खंड की सीमाएं इस क्षेत्र को छूती हैं, यहां का माहौल इन क्षेत्रो को भी प्रभावित करेगा। वहीं मध्य भारत के नर्मदापुरम, बैतूल और हरदा जिले जो कि कभी महाकोशल का हिस्सा थे, सांस्कृतिक और राजनीतिक रुप से उसके जैसे ही है, जैसे नर्मदापुरम जिला  महाकौशल के नरसिंहपुर क्षेत्र से लोकसभा सीट को साझा करता है, प्रभावित किया जा सकता है।
    वहीं भाजपा की बात करें तो दूसरे अंचलों में जिस तरह भीतरी खींचतान है, उतनी इस अंचल में नजर नहीं आती है, इसलिए भाजपा यहां अपने को कुछ हद तक कंफर्टेबल मान रही है। उसे पिछ्ले कुछ सालों में अपने आदिवासियों के लिए किए कामों का भी भरोसा है। भाजपा दूसरे क्षेत्रो के नुकसान की भारपाई भी यहां से करने के मूड में है।
    महाकौशल क्षेत्र?
    राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण महाकौशल इलाके में जबलपुर, छिंदवाड़ा, कटनी, सिवनी, नरसिंहपुर, मंडला, डिंडोरी और बालाघाट जिले है  शामिल है

  • शहरों के स्कूलों में सालों  से जमे शिक्षकों को भेजा जाएगा गावों में,15 जून से होंगे शिक्षा विभाग में ट्रांसफर

    भोपाल // सूबे में स्कूल शिक्षा विभाग की नई ट्रांसफर पॉलिसी के तहत ट्रांसफर का काम शुरू हो गया है इसकी महत्वपूर्ण बात यह बताई जा रही है कि शहरी स्कूलों में सालों से जमे शिक्षकों को अनिवार्य रूप से गांव में भेजा जा सकता है। स्कूली शिक्षा विभाग के तबादले की प्रक्रिया 15 मई तक पूरी होनी थी लेकिन वरिष्ठ पदों पर प्रभार देने की प्रक्रिया के चलते तबादले 15 जून के बाद ही हो सकेंगे। सरकार ने पिछले साल स्कूल शिक्षा विभाग की नई स्थानांतरण नीति को मंजूरी दी है यह व्यवस्था इस साल यानी 2023 24 से लागू होना है वैसे तो स्थानांतरण नीति के अंतर्गत शिक्षा विभाग में सभी संवर्ग ओं के लिए स्थानांतरण की प्रक्रिया 31 मार्च से 15 मई के बीच पूरी की जानी थी लेकिन वरिष्ठ पदों पर प्रभाव की प्रक्रिया में हुई देरी के चलते अब पूरी प्रक्रिया 15 जून के बाद शुरू होगी।
    ऑनलाइन होगी आवेदन की प्रक्रिया
    स्कूल शिक्षा विभाग के तबादलों के लिए आवेदन ऑनलाइन ही लिए जाएंगे उत्कृष्ट स्कूल मॉडल स्कूल और सीएम राइस स्कूलों में स्वैच्छिक स्थानांतरण नहीं होंगे साथ ही प्राचार्य सहायक संचालक गया उससे वरिष्ठ पदों के स्वैच्छिक स्थानांतरण आवेदन ऑनलाइन लिए जाएंगे लेकिन उनका निराकरण ऑफलाइन भी किया जा सकेगा रिलीविंग और जॉइनिंग की कार्यवाही ऑनलाइन होगी।
    इन्हें मिल सकती है छूट?
    ऐसी शिक्षक जिनकी सेवानिवृत्ति 3 वर्ष शेष है और गंभीर बीमारी या विकलांगता से पीड़ित है उन्हें इस प्रक्रिया से मुक्त रखा जाएगा स्थानांतरण प्रक्रिया में वरीयता क्रम निर्धारित किया गया है नई नीति के अनुसार शिक्षकों को निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की निजी पदस्थापना में पदस्थ नहीं किया जाएगा
    3 साल तक तबादला नहीं
    शिक्षा विभाग की नई स्थानांतरण नीति में एक बार स्वैच्छिक स्थानांतरण होने के बाद विशेष परिस्थितियों को छोड़कर 3 वर्ष तक स्थानांतरण नहीं किया जा सकेगा सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई शाला शिक्षक भी ना हो जाए प्रथम श्रेणी अधिकारियों के स्थानांतरण समन्वय मुख्यमंत्री के अनुमोदन से किए जाएंगे।
    नई शिक्षा नीति के अंतर्गत नए नियुक्त शिक्षकों को ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों में कम से कम 3 वर्ष तक और अपने संपूर्ण सेवाकाल में कम से कम 10 साल तक कार्य करना होगा।  10 वर्ष या इससे अधिक अवधि तक एक ही संस्था विशेषकर शहरी क्षेत्रों में पदस्थ शिक्षकों को ग्रामीण क्षेत्र की शिक्षक विहीन और शिक्षकों की कमी वाले विद्यालयों में पदस्थ किया जाएगा।
    प्रभारी मंत्रियों की भूमिका खत्म
    अभी तक शिक्षकों के तबादले में प्रभारी मंत्रियों की चलती थी, नई नीति के तहत प्रभारी मंत्रियों की इसमें कोई भूमिका नहीं रहेगी। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन ही होगी शिक्षकों की पोस्टिंग उपलब्ध सीटों के आधार पर होगी