कांग्रेस अब सड़क पर उतरेगी, संभागवार आंदोलन से सरकार को घेरेगी; चुनाव के लिए अलग टीम बनाने की तैयारी

भोपाल। संगठन सृजन अभियान पूरा करने के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस अब सीधे मैदान में उतरने की तैयारी में है। पार्टी संभागवार आंदोलन के जरिए सरकार को घेरने के साथ ही चुनावी मशीनरी को बूथ तक मजबूत करेगी। मंगलवार को भोपाल में होने वाली राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक में आंदोलन के मुद्दों से लेकर चुनाव प्रबंधन की नई रणनीति पर मुहर लग सकती है।

खास बात यह है कि कांग्रेस इस बार आंदोलन को सिर्फ विरोध-प्रदर्शन तक सीमित नहीं रखना चाहती। वरिष्ठ नेताओं को मैदान में उतारकर कार्यकर्ताओं में एकजुटता का संदेश देने और संगठन को चुनावी मोड में लाने की तैयारी है।

कांग्रेस की रणनीति में क्या बदलेगा?

  1. आंदोलन अब संभाग के हिसाब से होंगे
    भोपाल में बैठकर प्रदेशव्यापी आंदोलन करने के बजाय स्थानीय मुद्दों के आधार पर संभागवार अभियान चलाने की तैयारी है। इससे स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं की भूमिका बढ़ेगी।
  2. आंदोलन में बड़े चेहरे भी उतरेंगे
    पार्टी की कोशिश होगी कि वरिष्ठ नेता खुद आंदोलन में मौजूद रहें। मकसद साफ है—कार्यकर्ताओं को यह संदेश देना कि नेतृत्व सिर्फ निर्देश नहीं देगा, बल्कि सड़क पर भी साथ खड़ा दिखाई देगा।
  3. चुनाव प्रबंधन के लिए अलग टीम
    जीतू पटवारी की रणनीति में चुनाव प्रबंधन को संगठन के सामान्य काम से अलग रखने पर जोर है। संभागवार टीम स्थानीय समीकरण देखेगी और बूथ तक चुनावी प्लान लागू कराएगी।
  4. संगठन का चार महीने में नया सेटअप
    भंग किए गए विभागों और प्रकोष्ठों का प्रदेश से लेकर मैदानी स्तर तक पुनर्गठन होगा। इसके लिए समयबद्ध कार्यक्रम बनाया जाएगा।
  5. दतिया के नतीजे से निकलेगा सबक
    बैठक में दतिया उपचुनाव की बूथवार रिपोर्ट पर भी चर्चा होगी। जिन नेताओं को दो से 30 बूथ तक के क्लस्टर की जिम्मेदारी दी गई थी, उनसे जमीनी रिपोर्ट ली जाएगी।

दतिया के बाद अब अगली परीक्षा संगठन की

कांग्रेस के लिए दतिया उपचुनाव सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि संगठन की जमीनी सक्रियता को परखने का मौका भी रहा। इसलिए पार्टी बूथवार रिपोर्ट के जरिए यह देखना चाहती है कि कौन-से क्षेत्र में संगठन ने बेहतर काम किया और कहां कमजोरी रह गई।

इसी रिपोर्ट के आधार पर आगामी चुनावों के लिए संभाग से बूथ तक जिम्मेदारी तय करने की कवायद आगे बढ़ेगी। पार्टी की कोशिश है कि चुनाव आने का इंतजार करने के बजाय संगठन को अभी से सक्रिय कर दिया जाए।

इंदौर में पटवारी के मुद्दे पर शक्ति प्रदर्शन की तैयारी

कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को घेरने के लिए पुलिस-प्रशासन के इस्तेमाल और उनके स्वजन को निशाना बनाए जाने के आरोपों को भी पार्टी बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाएगी। इसके विरोध में इंदौर में बड़ा प्रदर्शन प्रस्तावित है।

इसके जरिए कांग्रेस दो संदेश देना चाहती है—पहला, सरकार के खिलाफ आक्रामक तेवर और दूसरा, पटवारी के पीछे पूरी पार्टी खड़ी है।

बैठक में कौन-कौन रहेगा मौजूद?

प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, विवेक तन्खा, अशोक सिंह, अरुण यादव, कांतिलाल भूरिया, अजय सिंह, मीनाक्षी नटराजन और कमलेश्वर पटेल सहित वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।

पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ व्यक्तिगत कारणों से बैठक में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने इसकी सूचना पार्टी को दे दी है। उनके पुत्र और पूर्व सांसद नकुल नाथ बैठक में मौजूद रहेंगे।

अंदर की बात : आंदोलन के बहाने संगठन की परीक्षा

कांग्रेस के लिए संभागवार आंदोलन सिर्फ सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की कवायद नहीं है। इसके जरिए पार्टी यह भी परखना चाहती है कि कौन-सा नेता कितने कार्यकर्ताओं को सड़क पर उतार सकता है और कौन-सा संगठन जमीन पर कितना सक्रिय है।

यही वजह है कि आंदोलन की जिम्मेदारी, बूथवार रिपोर्ट और वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी—तीनों को एक ही रणनीति से जोड़ा जा रहा है। आने वाले चुनावों से पहले कांग्रेस के लिए यह अपने संगठन की ताकत और नेताओं की सक्रियता नापने का भी मौका होगा।

5 पॉइंट में कांग्रेस का पूरा प्लान

  • संभागवार आंदोलन — स्थानीय मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी।
  • बड़े नेताओं की एंट्री — वरिष्ठ नेताओं को आंदोलनों में उतारा जाएगा।
  • अलग चुनाव टीम — चुनाव प्रबंधन को अलग सिस्टम से चलाने की तैयारी।
  • बूथ पर फोकस — दतिया की रिपोर्ट के आधार पर बूथ स्तर की कमजोरियां चिन्हित होंगी।
  • चार महीने में संगठन — विभागों और प्रकोष्ठों का नए सिरे से गठन होगा।

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