Category: मध्य प्रदेश

  • अब कांग्रेस की नज़र भाजपा के असंतुष्टों पर ?

    अब कांग्रेस की नज़र भाजपा के असंतुष्टों पर ?

    पार्टी में शामिल कराने का होगा प्रयास

    भोपाल//इन दिनों प्रदेशमें भाजपा के आंतरिक सर्वे और फीडबैक की काफी चर्चा है बताया जाता है कि इस पूरी कवायद में भाजपा के कार्यकर्ताओं के असंतुष्ट होने की बात सबसे मुखर होकर सामने आई है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता अपनी उपेक्षा से काफी नाराज हैं। एक और भाजपा इन असंतुष्ट नेताओं कार्यकर्ताओं से बात कर और उनकी मान मनौव्वल कर डैमेज कंट्रोल में जुटी हुई है। वरिष्ठ नेता अलग-अलग जिलों में ऐसे कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ बैठकें और अलग-अलग चर्चा भी कर रहे हैं। वही कांग्रेस की नजर इन असंतुष्ट नेताओं पर है । कांग्रेस इसे  एक अवसर के रूप में देख रही है ।क्योंकि कांग्रेस इस चुनाव के लिए हर वो प्रयास करती नज़र आ रही है जो उसकी जीत की संभावनाओं को मजबूत करता हो।

    खबर है कि कांग्रेस ने पार्टी के 16 वरिष्ठ नेताओं को भाजपा के इसी तरह के असंतुष्ट नेताओं से संपर्क करने की क्षेत्रवार जिम्मेदारी सौंपी है।  कांग्रेस ने यह भी तय किया है कि भाजपा के जिन नेताओं और कार्यकर्ताओं का जनाधार मजबूत है उन्हें बडे़ आयोजन कर कांग्रेस में शामिल करने का प्रयास किया जाए।

    कांग्रेस ने चुनाव अभियान की जो कार्ययोजना बनाई है उसमें भाजपा के असंतुष्ट नेताओं से संपर्क करना भी शामिल है । प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ सहित अन्य नेता लगातार दावा कर रहे हैं कि भाजपा के कई नेता उनके संपर्क में है और जिन्हें समय आने पर पार्टी में शामिल किया जाएगा।

    पिछले माह निमाड़ क्षेत्र में असर रखने वाले भाजपा के पूर्व सांसद माखन सिंह सोलंकी को पूर्व मंत्री दिग्विजय सिंह और मुंगावली के पूर्व विधायक राव देशराज सिंह यादव के पुत्र यादवेंद्र यादव को कमलनाथ की उपस्थिति में कांग्रेस की सदस्यता दिलाई गई थी विंध्य क्षेत्र में प्रभाव रखने वाली बसा पार्क से पूर्व विधायक शीला त्यागी भी कांग्रेस में शामिल हो चुकी हैं। वही नर्मदापुरम ( होशंगाबाद) जिले  में भाजपा के एक पूर्व विधायक के कांग्रेस में शामिल होने की भी जोर शोर से चर्चा है।

    लाल पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी कांतिलाल भूरिया अरुण यादव, अजय सिंह  , नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर गोविंद सिंह, नटराजन मीनाक्षी नटराजन बाला बच्चन सज्जन सिंह वर्मा जीतू पटवारी तरुण भनोट कमलेश्वर पटेल जयवर्धन सिंह लाखन सिंह यादव रामनिवास रावत फूल सिंह बरैया और केपी सिंह को जिम्मेदारी दी गई है कि वह आवंटित जिलों में भाजपा के असंतुष्ट नेताओं से संपर्क करें।

  • अब बिजली बिल का भुगतान व्हाट्सएप से भी किया जा सकेगा !

    अब बिजली बिल का भुगतान व्हाट्सएप से भी किया जा सकेगा !

    भोपाल// अब मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के बिजली उपभोक्ता व्हाट्सएप के जरिए भी बिजली बिलों का भुगतान कर सकते हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी का दावा है कि यह व्यवस्था लागू करने वाली देश की पहली बिजली कंपनी है जिसने यह व्यवस्था लागू की है। कंपनी का दावा है कि इस व्यवस्था से बिजली उपभोक्ताओं को बिजली बिलों का भुगतान करना अधिक आसान हो जाएगा। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक गणेश शंकर मिश्रा ने बताया कि बिजली बिलों के भुगतान के डिजिटल नवाचार को आगे बढ़ाते हुए सुविधाजनक और सुरक्षित भुगतान की दिशा में कंपनी ने हमेशा आगे कदम बढ़ाए हैं और उपभोक्ताओं को 1 दर्जन से अधिक बिल भुगतान के विकल्प उपलब्ध कराएं हैं। इसी कड़ी में व्हाट्सएप पे के माध्यम से एक नया विकल्प उपभोक्ताओं को उपलब्धहो जाएगा
    मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बताया कि ” व्हाट्सएप पे ” एक डिजिटल पेमेंट फीचर है जो यूजर्स की मैसेजिंग ऐप के जरिए पैसे भेजने की सुविधा देता है। यह सुरक्षित और उपयोग में आसान है ।लेनदेन को पूरा करने के लिए बस कुछ सरल चरणों की आवश्यकता होती है। उपभोक्ता बिना किसी परेशानी के भुगतान करने के लिए अपने मौजूदा व्हाट्सएप खाते का उपयोग कर सकते हैं और उसे अपने बैंक के खाते से जोड़ सकते हैं जिस उपभोक्ता के पास व्हाट्सएप पर सुविधा नहीं है वह व्हाट्सएप से गूगल पे,फोन पे या पेटीएम जैसे अन्य यूपीआई मोड के माध्यम से भी भुगतान कर सकते हैं।
    ऐसे होगा बिल भुगतान
    इस सुविधा का उपयोग करने के लिए उपभोक्ता मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के टोल फ्री नंबर 0755 2551222 2 को सेव कर सकते हैं और चैट शुरू कर सकते हैं  व्यू एंड पेविकल्प का उपयोग करने करते हुए भुगतान किया जा सकता है।उन्हें भुगतान पूरा करने के निर्देशों के साथ एक संकेत प्राप्त होगा। भुगतान पूरा करने के बाद, उपभोक्ता को एक पुष्टिकरण संदेश प्राप्त होगा।

  • अब कांग्रेस चलाएगी पूरे प्रदेश में परिवर्तन संकल्प अभियान

    अब कांग्रेस चलाएगी पूरे प्रदेश में परिवर्तन संकल्प अभियान

    वरिष्ठ नेता करेंगें सभी विधान सभा सीटों का भ्रमण, कार्यकर्ताओं और आमजन को दिलाएंगे भाजपा के कुशासन और भ्रष्टाचार से मुक्ति का संकल्प।

    भोपाल//  छह महीने बाद होने वाले  विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में परिवर्तन संकल्प अभियान चलाएगी। इसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता भ्रमण कर कार्यकर्ताओं के साथ आमजन को भाजपा के 18 साल के कथित कुशासन और भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाने के लिए संकल्प दिलाएंगे।

    हर विधानसभा में होगी जनसभा

    मंडल, सेक्टर और बूथ कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की जाएंगी। तत्कालीन कांग्रेस सरकार की उपलब्धि और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ द्वारा सरकार बनने पर किए जाने वाले कार्यों को लेकर जो घोषणाएं की गई हैं, उन्हें प्रचारित किया जाएगा। पार्टी के निष्क्रिय कार्यकर्ताओं से संपर्क कर उन्हें सक्रिय करने और सरकार द्वारा प्रताड़ित कार्यकर्ताओं की जानकारी भी जुटाई जाएगी। प्रत्येक विधानसभा में एक जनसभा होगी।

    आभियान खाका है तैयार,
    बूथ प्रबंधन पर होगा पूरा जोर

    प्रदेश कांग्रेस ने चुनाव अभियान को लेकर कार्ययोजना तैयार की है। इसमें सर्वाधिक जोर बूथ प्रबंधन पर रहेगा। वरिष्ठ नेता बूथ, मंडलम और सेक्टर समितियों के साथ ही सभी सहयोगी संगठनों द्वारा मतदान केंद्र स्तर पर की जा रही तैयारियों की समीक्षा करेंगे। विधानसभा क्षेत्र के जातीय और सामाजिक समीकरणों को देखते हुए प्रभावशाली लोगों से संपर्क करके उनकी अपेक्षाएं जानी जाएंगी। कार्यकर्ताओं के साथ सरकार के इशारे पर दर्ज हो रहे झूठे प्रकरणों की सूची तैयार की जाएगी।

    नेता करेंगें विधानसभा क्षेत्रों में रात्रि विश्राम

    परिवर्तन संकल्प अभियान के दौरान वरिष्ठ नेताओं का रात्रि विश्राम भी विधानसभा क्षेत्रों में होगा। इस दौरान वे पार्टी के नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक करके बूथ प्रबंधंन पर चर्चा करेंगे। सामूहिक भोज होगा, जिसमें सभी सहयोगी संगठनों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा।

    किसान कर्जमाफी और बिजली की दरों में कमी की दिलाई जाएगी याद

    पार्टी ने तय किया है कि मतदाताओं को तत्कालीन कमल नाथ सरकार के समय हुई किसान कर्जमाफी और बिजली की दरों में कमी याद दिलाई जाएगी। आदिवासी क्षेत्र में साहूकारी ऋण से मुक्ति, धार्मिक स्थलों के विकास के साथ अन्य योजनाओं के बारे में बताया जाएगा। साथ ही सरकार में आने पर महिलाओं को डेढ़ हजार रुपये महीना सम्मान निधि, पांच सौ रुपये में रसोई गैस सिलेंडर, पुरानी पेंशन की बहाली करने सहित जो अन्य वचन दिए गए हैं, उनका प्रचार-प्रसार किया जाएगा।

    16 स्थानों पर होंगी बड़ी सभाएं

    विधानसभा क्षेत्रों में होने वाली सभाओं में प्रमुख स्थानों पर पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। प्रदेश के बुंदेलखंड, विंध्य, महाकोशल, मालवा-निमाड़ क्षेत्र के 16 स्थानों पर बड़ी सभाएं होंगी।

  • दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस संगठन  को लेकर दिया बड़ा बयान ?

    दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस संगठन को लेकर दिया बड़ा बयान ?

    भोपाल// प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रीऔर वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने चुनाव से पहले  कांग्रेस संगठन की स्थिति को लेकर एक बड़ा बयान दिया है । दिग्विजय सिंह ने कहा कि लोग कांग्रेस को वोट देना चाहते हैं लेकिन हमें स्वीकारने में जरा भी एतराज नहीं है कि हमारा संगठन ही कमजोर है। चुनाव वाले दिन बूथ मैनेजमेंट पर हम असफल रहते हैं, उस प्रकार की तैयारी हमारी नहीं रहती जैसी होना चाहिए। हम संगठन की कमी की वजह से इसे पूरा नहीं कर पाते हैं। हमारा संगठन संगठन जैसा होना चाहिए वैसा नहीं है। लेकिन अब कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ ने बूथ मैनेजमेंट को लेकर रणनीति बनाई है। पूरे प्रदेश की विधानसभा सीटों को सही तरीके से सेक्टर मंडलम में बांटा है।  प्रदेश में हारी हुई विधानसभा सीटों पर दौरा कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी और यह रिपोर्ट कमलनाथ को सौंपी जाएगी।

    पिछ्ले दिनों सीहोर में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा की कमलनाथ ने उन्हें प्रदेश की 66 सीटों की जिम्मेदारी दी है ।जहां से कांग्रेसी हारती आई है  उनमें से अब तक वह 23 विधानसभा सीटों पर जाकर पार्टी पदाधिकारी संगठन के साथ बैठकर कर चुके हैं।

    श्री सिंह ने कहा कि कांग्रेसी कार्यकर्ता पूरी तरह से एकजुट है और चुनाव के लिए जमीनी स्तर पर कार्य कर रहा है। इस बार कांग्रेस की सरकार मध्यप्रदेश में बनेगी।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में 2018 में हुए चुनाव में कांग्रेस की सरकार बन गई थी लेकिन कुछ लोग गए जो गरीब विधायक थे वे नहीं बिके लेकिन जो राजा महाराजा टाइप के लोग थे में बिक गए इसलिए सरकार चली गई।

  • लगातार हार रही सीटों पर पहले ही प्रत्याशी घोषित करेगी कांग्रेस ?

    लगातार हार रही सीटों पर पहले ही प्रत्याशी घोषित करेगी कांग्रेस ?

    भोपाल// सूबे में इस बार  कांग्रेस विधानसभा चुनाव की तैयारी में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है,  कांग्रेस भाजपा के गढ़ माने जाने वाली सीटों पर ज्यादा ध्यान देने के मूड है, विशेष रूप से तीन बार से ज्यादा हारी सीटों को वापस लेने की रणनीति  बनाने में जुटी हुई है ।

    बताया जाता है कि जिन सीटों पर कांग्रेस लगातार हार रही है वहां पुराने चेहरों के बजाय नए चेहरों को टिकट देने की रणनीति अपनाई जा सकती है । खबरों के मुताबिक लगातार हार रही सीटों के लिए स्थानीय संगठन से जीत की रणनीति और योजना बनाने को कहा गया है। पार्टी सर्वे पर ज्यादा जोर दे रही है। इसके अलावा एआईसीसी के सचिवों को स्थानीय संगठनों से चर्चा करने कीऔर फीडबैक लेने जिम्मेदारी दी गई है।साथ ही टिकिट देने में स्थानीय संगठन की भूमिका बढ़ाने की ओर से सुनाई दे रही है। स्थानीय संगठन  जिसके साथ होगा टिकट में उसे प्राथमिकता मिलेगी। कहा जा रहा है कि चुनाव लड़ने के लिए बाहरी नेता नहीं होगा । 

    इस बात को लेकर भी पार्टी के भीतर विचार विमर्श चल रहा है कि कांग्रेस कमजोर सीटों यानी जहां पिछले 5-6 बार से लगातार रही है उन सीटों पर पहले से ही प्रत्याशियों की घोषणा कर दी जाए।

  • लगातार हार रही सीटों के लिए कांग्रेस अपना रही है यह रणनीति ?

    लगातार हार रही सीटों के लिए कांग्रेस अपना रही है यह रणनीति ?

    भोपाल //सूबे में जहां विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा पिछली बार हारी हुई सीटों को जीतने की रणनीति पर काम कर रही है, वही कांग्रेस प्रदेश की ऐसी सीटों पर फोकस कर रही है, जहां पार्टी लगातार चुनाव हार रही है। प्रदेश में ऐसी 70 सीटें हैं।  कांग्रेस इन सीटों पर प्रत्याशियों के चयन के लिए तीन तीन सर्वे कराने की कवायत कर रही है, वहीं कार्यकर्ताओं को तैयार करने और बूथ मैनेजमेंट के लिए शिविरों का आयोजन करेगी।

    तीन तीन सर्वे से चुने जायेंगे उम्मीदवार ?

      खबर यह है कि कांग्रेस 3 बार या उससे ज्यादा बार चुनाव हारने वाली सीटों पर इस बार उम्मीदवार चयन के लिए तीन अलग-अलग सर्वे करवाएगी । एक सर्वे एआईसीसी ,एक प्रदेश कांग्रेस और एक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ खुद करवा रहे हैं।  इन तीनों सर्वे के निचोड़ के बाद ही प्रत्याशी का चयन किया जाएगा। बताया जाता है कि यह फैसला पिछले दिनों कांग्रेस की पॉलिटिकल अफेयर कमेटी की बैठक में लिया गया है। इन तीनों सर्वे के बाद जो उम्मीदवार सबसे बेहतर होगा दिग्गज नेताओं (? ) के साथ ही स्थानीय और संगठन कि पसंद होगा उसे उम्मीदवार बनाया जाएगा।  पहले चरण में इन हारी सीटों पर  सर्वे होगा के बाद दूसरे चरण में बाकी लगभग 90 सीटों पर इसी तर्ज पर सर्वे होगा।  वैसे यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस अधिकतर सीटों पर वर्तमान विधायकों को दोहराने के मूड में इसीलिए उन्हें अभी से अपने क्षेत्र में सक्रिय होने के लिए आलाकमान ने निर्देश दे दिए हैं।

    शिविरों का होगा आयोजन !

    दूसरी खबर है कि कांग्रेस लगातार हार वाले विधानसभा क्षेत्रों में शिविर लगाकर कार्यकर्ताओं को तैयार करेगी और इन शिविरों को आयोजित करने की जिम्मेदारी सेवादल को दी गई है।  यह शिविर मई और जून में लगाए जाएंगे । 3 से 5 दिनों के इन शिविरों में क्षेत्र में हार के कारणों के अलावा कार्यकर्ताओं को  बूथ प्रबंधन की बारीकियों की जानकारी, मतदाता से संपर्क करने के और प्रमुख बिंदु पर बात करने को के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।  इस दौरान वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहेंगे।

     सेवा दल के प्रमुख संगठन योगेश यादव का कहना है कि शिविर क्षेत्र में कांग्रेस की कमजोरियों और समस्याओं की जानकारी का एक प्रतिवेदन भी तैयार करेंगे ताकि संगठन को चुनावी तैयारी में सहयोग मिल सके । बताया जा रहा है कि विधानसभा क्षेत्रों से सेवा दल के शिविर आयोजित करने से पहले 27 से 29 अप्रैल तक इंदौर में जिला अध्यक्ष व प्रभारियों का एक शिविर भी आयोजित होगा।

    इन सीटों पर लगातार हार रही है कांग्रेस

     रहली ,सागर, बीना ,नरयावली ,गुना, शिवपुरी ,दतिया डॉक्टर अंबेडकर नगर( महू) इंदौर दो इंदौर चार इंदौर पांच,बिजावर ,चांदला, पथरिया, हटा, सिरमौर, सिमरिया, त्योथर, रामपुर बघेलान, रीवा, सीधी सिंगरौली, देवसर , धौहनी, जैतपुर ,बांधवगढ़, मानपुर , मुड़वारा ,जयसिंह नगर ,जबलपुर कैंट, पनागर ,सिहोरा परसवाड़ा ,बालाघाट ,सिवनी ,आमला, टिमरनी, सिवनी मालवा, होशंगाबाद ,सोहागपुर, पिपरिया, भोजपुर, कुरवाई ,शमशाबाद ,बैरसिया ,नरेला, हुजूर, गोविंदपुरा बुधनी ,आष्टा ,सीहोर, सारंगपुर ,सुसनेर ,सुजालपुर देवास ,खातेगांव, बागली ,हरसूद, खंडवा, पंधाना, बुरहानपुर, धार, उज्जैन उत्तर, उज्जैन दक्षिण, रतलाम सिटी ,मंदसौर, मल्हारगढ़, जावद और नीमच।

  • धर्म रक्षा यात्राएं निकलेगी कांग्रेस? सॉफ्ट हिंदुत्व से हार्ड हिंदुत्व की ओर कांग्रेस ?

    धर्म रक्षा यात्राएं निकलेगी कांग्रेस? सॉफ्ट हिंदुत्व से हार्ड हिंदुत्व की ओर कांग्रेस ?

    भोपाल//  यह निश्चित है कि सूबे में आगामी चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस हिंदुत्व की पिच पर  खुलकर खेलने के मूड में मूड में आ गई है। कांग्रेस ने हाल ही में प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में धर्म संवाद और मंदिर स्वायत्त संकल्प दिन का आयोजन कर पूरे प्रदेश के पुजारियों साधु-संतों को बुलाया था इस आयोजन में यह मांग भी रखी गई कि मंदिरों को लेकर 1974 की व्यवस्था लागू की जाए और मंदिरों की जमीन का अधिकार मंदिर समिति को दिया जाए कांग्रेश ने आरोप लगाया कि मंदिरों पर सरकार कब्जा कर रही है पुजारियों धर्म आचार्यों पर अत्याचार हो रहे हैं शिकायत के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है।
    और अब बताया जा रहा है कि  इसी महीने से कांग्रेस धर्म रक्षा यात्राओं की शुरुआत कर सकती है इसके लिए पूरा खाका तैयार हो चुका है ।
    इन यात्राओं की जिम्मेदारी मध्य प्रदेश कांग्रेस मंदिर पुजारी प्रकोष्ठ की युवा इकाई को दी गई है । यह यात्राएं जिला स्तर से शुरू होकर ब्लॉक स्तर तक होंगी। यात्रा के दौरान भगवा ध्वज पताकाएं साथ रहेंगी। मशाल और बाइक रैली का आयोजन भी होगा। प्रदेश कांग्रेश पुजारी युवा इकाई के प्रदेश अध्यक्ष सुधीर भारती का कहना है कि इन यात्राओं पर इसके सैद्धांतिक सहमति बन गई है, सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ की हरी झंडी मिलने के बाद यात्राएं शुरू हो जाएंगी। कांग्रेस का कहना है कि इन यात्राओं का उद्देश्य धर्म संस्कृति की रक्षा और मंदिरों को सुरक्षा प्रदान करना है। साथ ही कांग्रेस से आमजन को जोड़ना है।
    भाजपा तो  पहले से ही हिंदुत्व के मुद्दे पर चुनावी मैदान में उतरती रही है , उसकी काट के लिए और एंटी हिन्दुत्व की छवि से छुटकारा पाने की कोशिश में कांग्रेस  ने भी अपना रंग रूप बदलना शुरू कर दिया है । जब से कमलनाथ ने कांग्रेस की कमान संभाली है, उन्होंने साफ्ट हिंदुत्व की ओर रुझान दिखाना शुरू कर दिया था और 2018  के चुनाव में इसे आजमाया भी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ अपने को हनुमान भक्त बताते हैं और वह कहते हैं कि राम किसी एक के नहीं है अब तो कांग्रेस के लोग खुलकर भगवान श्री राम के साथ सीता का नाम यानी जय सियाराम भी कहने लगे हैं कांग्रेश किसी भी तरह से धार्मिक आयोजन से पीछे नहीं हट रही है।

    भाजपा हमलावर

    वैसे कांग्रेस के इस बदले रूप पर भाजपा काफी हमलावर भी नजर आ रही है।
    प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि जिन लोगों ने भगवा आतंकवाद का शब्द गढ़े थे, वो लोग आज अपने कार्यालय को भगवा में रंग रहे हैं तो समझ लेना चाहिए कि अब अच्छे दिन जरूर आ गए हैं. कांग्रेस अपने कार्यालय में सुंदरकांड का पाठ करा रही है. ये वो लोग हैं जिन्होंने राम को काल्पनिक कहा था.
    वहीं इंदौर में बीजेपी के दिग्गज नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि कांग्रेस के नेता पहले सिर्फ रोजा इफ्तार में जाते थे लेकिन अब वे सुंदरकांड का पाठ कर रहे हैं, मंदिराें में जा रहे हैं और उनके नेता जनेऊ तक पहनने लगे हैं तो यह सीधे तौर मोदी इफेक्ट की वजह से कांग्रेस का ट्रांसफॉर्मेशन हो रहा है.
    पत्रकारों ने कमलनाथ से पूछा कि क्या झंडे इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के “भगवाकरण” का संकेत देते हैं। जवाब में, पूर्व सीएम ने पूछा कि क्या भाजपा के पास भगवा का ट्रेडमार्क है? क्या उन्होंने भगवा का ठेका लिया है? बीजेपी का दावा है कि उसने हिंदू धर्म का ठेका लिया है। अंतर यह है कि हम सभी की धार्मिक भावनाएं हैं, लेकिन हम इसे राजनीतिक मंच पर नहीं लाते हैं।

    कितना फायदा ,कितना नुकसान ?
    राजनीतिक समीक्षक मान रहे हैं कि दोनों ही दल आगामी चुनाव में हिंदुत्व को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करेंगे ,पर मतदाता किस पर भरोसा करता है यह देखने वाली बात होगी ।
    वैसे प्रदेश में कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधा मुकाबला है परंपरागत रूप से अल्पसंख्यक मतदाता का झुकाव कांग्रेसियों रहता आया है पर अब कांग्रेश अपना जो रूप बदल रही है वह हिंदुत्व समर्थकों को कितना लुभा पाती है यह तो फिलहाल नहीं कहा जा सकता पर अल्पसंख्यक मतदाता कांग्रेस के बदले रुख रवैये से निराश और नाराज जरूर हो सकता है और इसका फायदा आप, बसपा और सपा जैसे दलों को मिल सकता है । भाजपा के हिंदुत्व के मुकाबले कांग्रेस का हिंदुत्व मतदाता को कितना पसंद आता है यह तो 6 महीने बाद होने वाले चुनाव परिणाम ही बताएंगे।

  • सूबे में कई नए राजनैतिक खिलाड़ी मैदान में ! भाजपा- कांग्रेस की नींद उड़ी..?

    सूबे में कई नए राजनैतिक खिलाड़ी मैदान में ! भाजपा- कांग्रेस की नींद उड़ी..?

    भोपाल//  सूबे में साल के अंत तक होने वाले चुनावों में भाजपा या कांग्रेस ही नहीं अन्य राजनीतिक दल भी चुनावी मैदान में ताल ठोकने की तैयारी में है इनमें से कुछ नए हैं तो कुछ पुराने हैं ।
    यह नए खिलाड़ी दोनों ही पार्टी की नींद उड़ा सकते हैं मध्य प्रदेश कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी वरद मूर्ति मिश्रा की वास्तविक भारत पार्टी इस बार पहली बार मैदान में उतरेगी ।
    पिछले रविवार को राजधानी में इसका एक सम्मेलन हुआ जिसमें इस पार्टी ने विधानसभा चुनाव के लिए 2 प्रत्याशियों की घोषणा तक कर दी। वरदमूर्ति ने जबलपुर जिले के बरगी और नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव विधानसभा सीट से उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया। गोटेगांव से नरसिंहपुर में सपा के जिलाध्यक्ष रहे हरिगोविंद झरिया , तो बरगी से भाजपा के अंत्योदय प्रकोष्ठ के जिला सह संयोजक रहे आशीष पटेल को उम्मीदवार बनाया गया है। श्री मिश्रा का कहना है कि उनकी पार्टी के 28 उम्मीदवार तय हो चुके हैं और अगले महीने तक आधिकारिक तौर पर सूची जारी कर दी जाएगी ।
    वहीं कथावाचक संत देव मुरारी बापू मध्य प्रदेश से राजनीति में किस्मत आजमाने की तैयारी में है । उन्होंने राष्ट्रव्यापी जनता पार्टी नाम से राजनीतिक दल का गठन किया है । वे प्रदेश की 230 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं।  वैसे 2022 में यूपी चुनाव में उन्होंने कुछ उम्मीदवारों को उतारा था पर बाद में भाजपा से समझौता होने से पार्टी ने भाजपा को समर्थन दे दिया था।
    सोमवार को विंध्य के चर्चित भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी ने नई पार्टी का ऐलान किया है। उसका नाम विंध्य पार्टी होगा। उन्होंने बताया कि विंध्य पार्टी के पंजीयन की प्रक्रिया लगभग पूरी हो गई है ,15 तारीख तक पार्टी का पंजीयन भी हो जाएगा। उन्होंने विंध्य के लोगों से आवाहन करते हुए कहा कि वे विधानसभा चुनाव के लिए तैयार हो जाएं। विंध्य के लोग ही इस पार्टी से चुनाव लड़ेंगे। त्रिपाठी ने क्षेत्र की30 सीटों पर अपनी दावेदारी जताई है।
    राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल कर चुकी आम आदमी पार्टी इस बार बड़ी चुनौती है। कुछ दिन पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल  भोपाल में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ एक रैली कर चुनावी बिगुल फूंक चुके हैं और  प्रदेश की सभी 230 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान भी कर चुके हैं। फिलहाल प्रदेश के कई इलाकों में स्थानीय  निकाय चुनावो में वे अपने प्रदर्शन से उत्साहित हैं।
    इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी भी सक्रिय हो गई है। ओवैसी की पार्टी धीरे-धीरे सक्रियता बढ़ा रही है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के अलावा फरवरी में भीम आर्मी ने आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर रावण के नेतृत्व में शक्ति प्रदर्शन कर प्रदेश की राजनीति में अपनी दस्तक देने का प्रयास किया है। पिछले चार-पांच महीनों में प्रदेश की राजधानी भोपाल में तीन बड़े राजनीतिक आयोजन हुए हैं। 
    कौन कितना असरदार?
    इन नए चुनावी दावेदारों में कौन कितना असरदार रहेगा कौन किसको कितना फायदा पहुंचाएगा या कौन किसका कितना नुकसान कराएगा यह भी कहना मुश्किल है।

    जहां तक चुनावी आंकड़ों और गणित का सवाल है यह तय है कि  साल 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के बीच जीत हार में सीटों का अंतर 5 था, ऐसे आज  छोटे और नए राजनीतिक दल प्रदेश की सियासी समीकरण को काफी हद तक प्रभावित करेंगे, और चाहे खुद न जीत सकें पर जीत हार का गणित बना या बिगाड़ देंगे। राजनीतिक पंडितों मुताबिक, इस साल प्रदेश की सरकार में बनाने में छोटे-छोटे राजनीतिक दलों की अहम भूमिका रहेगी।
    नए सियासी समीकरण का आगाज
    14 अप्रैल को डॉक्टर बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर उनके जन्म स्थान महू (इंदौर) में आजाद समाज पार्टी, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और समाजवादी पार्टी एक बड़ा आयोजन करने वाली हैं। इस कार्यक्रम के दौरान मंच पर समाजवादी पार्टी नेता और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर रावण एक मंच पर दिखाई देंगे।
    क्या कहते हैं आंकड़े?
    230 विधानसभा सीटों वाली मध्य प्रदेश में सामान्य वर्ग के लिए 148, अनुसूचित जनजाति के लिए 47 और अनुसूचित जाति के लिए 35 सीटें आरक्षित हैं। राज्य में करीब ओबीसी यानी अन्य पिछड़ा वर्ग मतदाता 48 फीसदी, अनुसूचित जनजाति वोटर 17 फीसदी और अनुसूचित जाति राज्य की आबादी का 21 फीसदी है। ऐसे में यदि इन जातियों  का गठजोड़ छोटे दल निकाल लेते तो भाजपा, कांग्रेस का खेल बिगड़ने की संभावनाएं हैं। 
    ,राज्य में पिछले कुछ महीनों से ओबीसी आरक्षण का मुद्दा गर्म है। इससे जुड़े कुछ मामले अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। आरक्षण के मुद्दों को लेकर ओबीसी वर्ग के मतदाता नाराज दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में यदि इन छोटे राजनीतिक दलों को ओबीसी का सहयोग मिल जाता है तो देश की राजनीतिक में नया भूचाल देखने को मिल सकता है।  छोटे दलों की शुरूआती रैली के मुताबिक ये दल चुनाव मैदान में दलित आदिवासी और ओबीसी गठजोड़ बना कर उतर सकते हैं। ऐसे में यदि ये गठबंधन हुआ तो दलित आदिवासी सीटों के मामले में बुंदेलखंड की 25, ग्वालियर, चंबल 16 और विंध्य की 12 सीट समेत महाकौशल के करीब 35 सीटों पर नए राजनीतिक आंकड़े नजर आएंगे। साल 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 114 सीटें जीतकर 40.09 फीसदी वोट हासिल किए थे और भाजपा ने 109 सीटों पर जीतकर 41 फीसदी वोट हासिल किए थे। वहीं राज्य में निर्दलीय दलों ने 4 सीटें जीतीं थी। इनका वोट प्रतिशत 5.8 था। इसमें बहुजन समाज पार्टी ने 2 सीट जीतकर 5 फीसदी वोट हासिल किए थे। हालांकि गोंडवाना गणतंत्र पार्टी एक भी सीट हासिल नहीं कर पाई थी लेकिन उस दौरान पार्टी का वोट प्रतिशत 1.3 था। इस चुनाव में नोटा को 1.4 फीसदी मत हासिल हुए थे। लेकिन, इन छोटे दलों ने 7 सीटों को जीतकर कुल 13.9 फीसदी वोट हासिल किए थे। 2018 के चुनाव में अनुसूचित जनजाति की रिजर्व 47 सीटों पर कांग्रेस ने 30 पर अपना कब्जा जमाया। जबकि बीजेपी महज 16 सीटों पर जीत हासिल कर सकी। वहीं अनुसूचित जाति की सीटों की बात करें तो 35 रिजर्व सीटों में से भाजपा ने 18 और कांग्रेस 17 पर विजयी हुई।
    मध्य प्रदेश में एससी और एसटी सीटों का प्रभाव बहुत ज्यादा है। उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे 14 जिलों में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी का जनाधार दिखाई देता है। सूबे के सतना, छतरपुर, टीकमगढ़, रायसेन, रीवा, दमोह, पन्ना, बालाघाट, सीधी, अशोकनगर, निवाड़ी में समाजवादी पार्टी का अच्छा खासा दबदबा है। वहीं बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशियों ने भिंड, ग्वालियर पूर्व, रामपुर बघेलान में 50 हजार से अधिक वोट हासिल किए थे। इसके अलावा देवताल, पौहारी, जोरा और सबलगढ़ में पार्टी को 40 हजार से अधिक वोट मिले थे। वहीं सतना, लहार, चंदेरी, गुन्नौर, अमरपाटन, सिमरिया और पथरिया में बसपा प्रत्याशी ने 30 हजार से अधिक वोट मिले थे। साफ है यदि छोटे दल इस साल विधानसभा चुनाव में एक साथ मिलकर चुनाव लड़ते है तो राज्य की दो प्रमुख पार्टी को इसका नुकसान हो सकता है।  

  • 5 एकड़ से कम भूमि वाले किसानों का फसल बीमा प्रीमियम सरकार भरेगी, कृषि मंत्री कमल पटेल ने की घोषणा

    5 एकड़ से कम भूमि वाले किसानों का फसल बीमा प्रीमियम सरकार भरेगी, कृषि मंत्री कमल पटेल ने की घोषणा

    हरदा// चुनावी तैयारियों के इस दौर में भाजपा कांग्रेस हर वर्ग व तबके के मतदाता को लुभाने के लिए तरह तरह की नई नई घोषणाएं कर रही हैं, पिछ्ले दो दिनों में   किसानों को लुभाने के लिए दोनों ही दलों ने एक एक लुभावनी घोषणा की है।

    पहले बात कांग्रेस की शुक्रवार को को कांग्रेस के किसान सम्मेलन में पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस सरकार आई तो किसानों का गेहूं ₹3000 प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा।

    वहीं शनिवार को प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल ने हरदा के सर्किट हाउस में पत्रकारों से चर्चा के दौरान यह घोषणा की कि प्रदेश में 5 एकड़ से कम भूमि वाले लघु एवं सीमांत किसानों की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसल बीमा की प्रीमियम राशि अब प्रदेश सरकार भरेगी।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक करोड़ तीन लाख किसान है लेकिन सिर्फ 25 फ़ीसदी किसान ही फसल बीमा करवा पाते हैं 24 लाख 23 हजार किसानों ने फसल बीमा करवाया है फसल बीमा का प्रीमियम भरने का काम सरकार द्वारा विधानसभा चुनाव से पहले किया जाएगा अभी फसल बीमा के तहत किसानों के लिए रबी सीजन में 1.35 फ़ीसदी प्रीमियम किसानों से ही ली जाती है खरीफ की फसल का बीमा कराने के लिए किसानों को 2 फ़ीसदी प्रीमियम देना पड़ता है बाकी का केंद्र एवं राज्य सरकार चुकाती है।

  • इस साल नहीं होगी खाद की कमी? चुनावी साल में सरकार तैयार !

    भोपाल//  हर साल बुवाई के मौसम में खाद की किल्लत के चलते सरकार को किसानों का गुस्सा झेलना पढ़ता है, चूंकि इस साल नवंबर में चुनाव है सरकार किसानों की नाराजगी का जोखिम नहीं उठाना चाहती । इसलिए पहले से व्यवस्था में जुट गई है। कहा जा रहा है कि इस साल किसानों को पर्याप्त खाद मिल सकेगी ,यहां तक की इस बार किसान अपनी सुविधा के अनुसार पहले भी खाद ले सकेंगे।

    खबरों के मुताबिक सूबे में 11 लाख टन खाद का अग्रिम भंडारण किया जा रहा है। सरकार ने यूरिया, डीएपी, एनपीके दिए जाने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा था, केंद्र सरकार ने प्रस्ताव को सहमति दे दी है और भंडारण के लिए खाद मिलना भी शुरू हो गया है । प्रदेश सरकार मई तक भंडारण पूरा लेगी।

    विपक्ष को नहीं देना चाहते राजनीति का मौका !

    दरअसल, हर साल बुवाई सीजन में प्रदेश में खाद की कमी को लेकर किसानों के बीच मारामारी मचती है। खाद के लिए गोदामों पर लंबी लाइन लगती हैं। परेशान किसान आंदोलनों और प्रदर्शन पर उतर आते हैं। इससे विपक्ष को सरकार को घेरने का मौका मिल जाता है। यह स्थिति रबी सीजन में अक्टूबर और दिसंबर के बीच ज्यादा बनती है। पिछले स बुवाई सीजन में ग्वालियर चंबल क्षेत्र में कानून व्यवस्था की स्थिति निर्मित हो गई थी। प्रदेश में कई जगह गोदाम लूटने जैसी घटनाएं भी हुई। इस चुनावी साल में सरकार विपक्ष को कोई मौका नहीं देना चाहती इसलिए उसने अपनी तैयारी दुरुस्त करने का फैसला किया है।