Category: विशेष खबर

  • अब कांग्रेस चलाएगी पूरे प्रदेश में परिवर्तन संकल्प अभियान

    अब कांग्रेस चलाएगी पूरे प्रदेश में परिवर्तन संकल्प अभियान

    वरिष्ठ नेता करेंगें सभी विधान सभा सीटों का भ्रमण, कार्यकर्ताओं और आमजन को दिलाएंगे भाजपा के कुशासन और भ्रष्टाचार से मुक्ति का संकल्प।

    भोपाल//  छह महीने बाद होने वाले  विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में परिवर्तन संकल्प अभियान चलाएगी। इसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता भ्रमण कर कार्यकर्ताओं के साथ आमजन को भाजपा के 18 साल के कथित कुशासन और भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाने के लिए संकल्प दिलाएंगे।

    हर विधानसभा में होगी जनसभा

    मंडल, सेक्टर और बूथ कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की जाएंगी। तत्कालीन कांग्रेस सरकार की उपलब्धि और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ द्वारा सरकार बनने पर किए जाने वाले कार्यों को लेकर जो घोषणाएं की गई हैं, उन्हें प्रचारित किया जाएगा। पार्टी के निष्क्रिय कार्यकर्ताओं से संपर्क कर उन्हें सक्रिय करने और सरकार द्वारा प्रताड़ित कार्यकर्ताओं की जानकारी भी जुटाई जाएगी। प्रत्येक विधानसभा में एक जनसभा होगी।

    आभियान खाका है तैयार,
    बूथ प्रबंधन पर होगा पूरा जोर

    प्रदेश कांग्रेस ने चुनाव अभियान को लेकर कार्ययोजना तैयार की है। इसमें सर्वाधिक जोर बूथ प्रबंधन पर रहेगा। वरिष्ठ नेता बूथ, मंडलम और सेक्टर समितियों के साथ ही सभी सहयोगी संगठनों द्वारा मतदान केंद्र स्तर पर की जा रही तैयारियों की समीक्षा करेंगे। विधानसभा क्षेत्र के जातीय और सामाजिक समीकरणों को देखते हुए प्रभावशाली लोगों से संपर्क करके उनकी अपेक्षाएं जानी जाएंगी। कार्यकर्ताओं के साथ सरकार के इशारे पर दर्ज हो रहे झूठे प्रकरणों की सूची तैयार की जाएगी।

    नेता करेंगें विधानसभा क्षेत्रों में रात्रि विश्राम

    परिवर्तन संकल्प अभियान के दौरान वरिष्ठ नेताओं का रात्रि विश्राम भी विधानसभा क्षेत्रों में होगा। इस दौरान वे पार्टी के नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक करके बूथ प्रबंधंन पर चर्चा करेंगे। सामूहिक भोज होगा, जिसमें सभी सहयोगी संगठनों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा।

    किसान कर्जमाफी और बिजली की दरों में कमी की दिलाई जाएगी याद

    पार्टी ने तय किया है कि मतदाताओं को तत्कालीन कमल नाथ सरकार के समय हुई किसान कर्जमाफी और बिजली की दरों में कमी याद दिलाई जाएगी। आदिवासी क्षेत्र में साहूकारी ऋण से मुक्ति, धार्मिक स्थलों के विकास के साथ अन्य योजनाओं के बारे में बताया जाएगा। साथ ही सरकार में आने पर महिलाओं को डेढ़ हजार रुपये महीना सम्मान निधि, पांच सौ रुपये में रसोई गैस सिलेंडर, पुरानी पेंशन की बहाली करने सहित जो अन्य वचन दिए गए हैं, उनका प्रचार-प्रसार किया जाएगा।

    16 स्थानों पर होंगी बड़ी सभाएं

    विधानसभा क्षेत्रों में होने वाली सभाओं में प्रमुख स्थानों पर पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। प्रदेश के बुंदेलखंड, विंध्य, महाकोशल, मालवा-निमाड़ क्षेत्र के 16 स्थानों पर बड़ी सभाएं होंगी।

  • दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस संगठन  को लेकर दिया बड़ा बयान ?

    दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस संगठन को लेकर दिया बड़ा बयान ?

    भोपाल// प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रीऔर वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने चुनाव से पहले  कांग्रेस संगठन की स्थिति को लेकर एक बड़ा बयान दिया है । दिग्विजय सिंह ने कहा कि लोग कांग्रेस को वोट देना चाहते हैं लेकिन हमें स्वीकारने में जरा भी एतराज नहीं है कि हमारा संगठन ही कमजोर है। चुनाव वाले दिन बूथ मैनेजमेंट पर हम असफल रहते हैं, उस प्रकार की तैयारी हमारी नहीं रहती जैसी होना चाहिए। हम संगठन की कमी की वजह से इसे पूरा नहीं कर पाते हैं। हमारा संगठन संगठन जैसा होना चाहिए वैसा नहीं है। लेकिन अब कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ ने बूथ मैनेजमेंट को लेकर रणनीति बनाई है। पूरे प्रदेश की विधानसभा सीटों को सही तरीके से सेक्टर मंडलम में बांटा है।  प्रदेश में हारी हुई विधानसभा सीटों पर दौरा कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी और यह रिपोर्ट कमलनाथ को सौंपी जाएगी।

    पिछ्ले दिनों सीहोर में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा की कमलनाथ ने उन्हें प्रदेश की 66 सीटों की जिम्मेदारी दी है ।जहां से कांग्रेसी हारती आई है  उनमें से अब तक वह 23 विधानसभा सीटों पर जाकर पार्टी पदाधिकारी संगठन के साथ बैठकर कर चुके हैं।

    श्री सिंह ने कहा कि कांग्रेसी कार्यकर्ता पूरी तरह से एकजुट है और चुनाव के लिए जमीनी स्तर पर कार्य कर रहा है। इस बार कांग्रेस की सरकार मध्यप्रदेश में बनेगी।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में 2018 में हुए चुनाव में कांग्रेस की सरकार बन गई थी लेकिन कुछ लोग गए जो गरीब विधायक थे वे नहीं बिके लेकिन जो राजा महाराजा टाइप के लोग थे में बिक गए इसलिए सरकार चली गई।

  • लगातार हार रही सीटों पर पहले ही प्रत्याशी घोषित करेगी कांग्रेस ?

    लगातार हार रही सीटों पर पहले ही प्रत्याशी घोषित करेगी कांग्रेस ?

    भोपाल// सूबे में इस बार  कांग्रेस विधानसभा चुनाव की तैयारी में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है,  कांग्रेस भाजपा के गढ़ माने जाने वाली सीटों पर ज्यादा ध्यान देने के मूड है, विशेष रूप से तीन बार से ज्यादा हारी सीटों को वापस लेने की रणनीति  बनाने में जुटी हुई है ।

    बताया जाता है कि जिन सीटों पर कांग्रेस लगातार हार रही है वहां पुराने चेहरों के बजाय नए चेहरों को टिकट देने की रणनीति अपनाई जा सकती है । खबरों के मुताबिक लगातार हार रही सीटों के लिए स्थानीय संगठन से जीत की रणनीति और योजना बनाने को कहा गया है। पार्टी सर्वे पर ज्यादा जोर दे रही है। इसके अलावा एआईसीसी के सचिवों को स्थानीय संगठनों से चर्चा करने कीऔर फीडबैक लेने जिम्मेदारी दी गई है।साथ ही टिकिट देने में स्थानीय संगठन की भूमिका बढ़ाने की ओर से सुनाई दे रही है। स्थानीय संगठन  जिसके साथ होगा टिकट में उसे प्राथमिकता मिलेगी। कहा जा रहा है कि चुनाव लड़ने के लिए बाहरी नेता नहीं होगा । 

    इस बात को लेकर भी पार्टी के भीतर विचार विमर्श चल रहा है कि कांग्रेस कमजोर सीटों यानी जहां पिछले 5-6 बार से लगातार रही है उन सीटों पर पहले से ही प्रत्याशियों की घोषणा कर दी जाए।

  • इमा कैथल  यानी  500 साल पुराना अनोखा बाज़ार

    इमा कैथल यानी 500 साल पुराना अनोखा बाज़ार

    सिर्फ बाज़ार ही नहीं संघर्ष,शौर्य और महिला सशक्तिकरण की पूरी कहानी है

     इम्फाल // भारत विविधताओं से भरा देश है. इसका इतिहास,भूगोल,धर्म और संस्कृति का मिल जुल कर कई बार इसे ऐसा रूप दे देती है कि हैरानी होती है . ऐसी ही एक हैरान करने वाली जगह है इमा कैथल

    क्या है इमा कैथल

    इमा कैथल मणिपुर की राजधानी इम्फाल का एक ऐसा बाजार है जो हमारे देश की अनमोल और अनूठी सांस्कृतिक विरासत का सच्चा प्रतिनिधित्व करता है. इस अनोखे  बाजार की खास बात यह थी कि यहां दुकानदार केवल और केवल महिलाएं हैं । इस बाजार में  पारंपरिक वेशभूषा में हजारों महिलाएं अपनी दुकानें सजाकर बैठती हैं। इस बाजार में करीब 5000 महिलाएं दुकानदारी करती हैं। इसे एशिया का सबसे बड़ा महिला बाजार माना जाता है।

    मैतेई (मणिपुरी) शब्द ‘इमा’ का अर्थ है माँ और ‘कैथल’ का अर्थ है ‘बाज़ार’. इसे नुपी कैथल (महिलाओं का बाज़ार) भी कहते हैं . इस बाज़ार में केवल विवाहित महिलाओं को व्यापार करने की अनुमति है. परम्परा को जीवित रखने के लिए यहाँ पुरुषों को किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि करने की इजाजत नहीं है . 

    संघर्ष,शौर्य और महिला सशक्तिकरण की कहानी

    इस बाजार का इतिहास 500 साल पुराना है, जो संघर्ष,शौर्य और महिला सशक्तिकरण की पूरी कहानी है ।  माना जाता है कि मणिपुर में 16 वीं शताब्दी में लुलुप-काबा यानी बंधुवा मजदूरी की प्रथा थी, जिसमें 17 से 60 वर्ष के पुरुषों को खेती करने और युद्ध लड़ने के लिए दूर भेज दिया जाता है। ऐसे में महिलाएं ही घर चलाती थी। खेतों में काम करती थी और बोए गए अनाज को बेचती थी। इससे एक ऐसे बाजार की जरूरत महसूस हुई जहां केवल महिलाएं ही सामान बेचती हों। प्रारंभ में यह महिलाओं के लिए घरेलू सामान , करघे उपकरण, खाने की चीजें ,कपड़े आदि उत्पाद बेचने का मुख्य केंद्र बना

     1904 और 1939 में अंग्रेजी शासन के दौर में जब मणिपुर में जबरन आर्थिक सुधार लागू करने की कोशिश की तो इमा कैथल की इन साहसी महिलाओं ने इसका खुलकर विरोध किया। इन महिलाओं ने एक आंदोलन शुरू किया जिसे नुपी लेन (औरतों की जंग) कहा गया। नुपी लेन के दौरान महिलाओं ने अंग्रेजों की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन, चक्काजाम और जुलूस आयोजित किए। यह आंदोलन दूसरे विश्र्वयुद्ध तक चलता रहा। इमा कैथल केवल एक बाजार न रहकर मणिपुर की मातृशक्ति का पर्याय बन गया  । आजादी के बाद भी यह सामाजिक विषयों पर चर्चा की एक जगह के रूप में स्थापित हुआ। यह भी कहा जाता है कि प्रिंट मीडिया की अनुपस्थिति में लोग यहां इसलिए भी आते थे ताकि उन्हें आस-पास की खबरें पता चल सकें। इस बाजार में केवल विवाहित महिलाएं ही दुकान चला सकती हैं। इन महिलाओं का अपना एक संगठन भी है जो जरूरत पड़ने पर इन्हें लोन भी देता है।अगर आप यहां रात में आएंगे तो बिजली की रोशनी में महिलाओं के उजले जगमगाते चेहरे आपका मन मोह लेंगे। गजब का आत्मविश्र्वास होता है इन महिलाओं में। आस-पास के चहल-पहल को देखना भी एक अनूठा अनुभव होता है। यहां महिलाओं को पारंपरिक फेनेक (एक तरह की लुंगी जिसे शरीर के निचले हिस्से में पहना जाता है) और ऊपर इनेफिस (एक तरह का शॉल) पहने हुए नजर आती हैं।

    आज ऐसा है बाज़ार

    वर्तमान मैं इमा कैथल परिसर में तीन बड़ी इमारतें हैं। हर इमारत के भूतल इमाओं के लिए निर्धारित किए गए हैं । प्रत्येक मंजिल को बाजार में बेची जाने वाली वस्तुओं के आधार पर अलग-अलग बांटा गया है।  लैमरेल सिदवी इमाया (पुराना बाजार) इस परिसर की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी संरचना है । यहां की दुकानों पर बांस से बनी वस्तुएं ,शुद्ध रुई के धागों और गहनों से लेकर अलग-अलग प्रकार के फल ,फूल मछलियां, मसाले आदि बेचे जाते हैं। 

    पुराना बाजार में मैतेइयो यानी मणिपुरी लोगों की देवी कैथल लैरेंबी और उनके पति लैरेंबा का एक छोटा सा तीर्थ स्थान भी है। मैतेई  लोगों की पौराणिक कथाओं में देवी कैथल लैरेंबी का एक महत्वपूर्ण स्थान है और माना जाता है कि वह कैथल लैरेंबी बाज़ार और महिला वर्ग की रक्षक हैं।

    इमोएनू इमा कैथल या लक्ष्मी बाजार इस परिसर की सबसे छोटी संरचना है। यहां की दुकानों पर पलंग पोश, मच्छरदानी जैसी घरेलू चीजें शाल तथा पारंपरिक पोशाकों जैसे वस्त्र उत्पाद बेचे जाते हैं। इन दुकानों को मणिपुर के अलग-अलग देशज समुदाय से संबद्ध रंग बिरंगी शालों से सजाया जाता है। फूईबी इमा कैथल या नया बाजार में मुख्य रूप से करघे पर बनी वस्तुएं उसमें भी खासतौर पर मैतई लोगों की पारंपरिक पोशाके  बेची जाती हैं, जिसमें विभिन्न तरह के समय साड़ियां और इनाफी शामिल हैं।

    आज इमा कैथल व्यापार और व्यवसाय का एक समृद्ध केंद्र होने के साथ साथ मणिपुर की महिलाओं को सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों में सहभागी होने में सक्षम बनाता है

  • चले गये बुन्देलखण्ड के दशरथ मांझी कृष्णा कोल

    चले गये बुन्देलखण्ड के दशरथ मांझी कृष्णा कोल

    गाँव में पानी की किल्लत देखकर अकेले खोद डाला था कुआं ,साधारण व्यक्ति का असाधारण कारनामा

    चित्रकूट// उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जनपद के मानिकपुर ब्लाक की ग्राम पंचायत गढ़चपा में एक गांव है बडेहार उसके पुरवा (मोहल्ला)  मजरा में रहने वाला एक साधारण सा इंसान था कृष्णा कोल ।  इस अनपढ़ साधारण से ग्रामीण ने एक असाधारण काम किया था जो आज एक मिसाल बन चुका है । आज से लगभग 70 साल पहले इस गांव के 20 साल के युवक कृष्णा ने गांव की विकराल पानी की समस्या और पानी की आस और तलाश में भटकते गांव की महिलाओं को देखकर गांव में ही कुआं खोदने का विचार किया और जुट गया अकेले अपने सपने को पूरा करने के लिए । इस पठारी क्षेत्र में जमीन से पानी निकलना आसान नहीं था । और जैसा कि होता है लोग कृष्णा के इस असंभव से सपने पर हंसे , कुछ ने मना भी किया पर धुन के पक्के कृष्णा ने 5 साल रात दिन एक करके 19 58 में 60 फीट गहरा कुआं खोद डाला । कृष्णा कोल की इस मेहनत का पानी तीन दशकों से ज्यादा तक गांव और इलाके की प्यास बुझाने का एकमात्र सहारा बना रहा।  आज तो गांव में पानी की कई सुविधाएं हैं।

     अपने अथक प्रयासों से कुआं खोदकर बुंदेलखंड के दशरथ मांझी के नाम से प्रसिद्ध हो जाने वाले कृष्णा कोल का सोमवार 17 अप्रैल को 95 साल की उम्र में निधन हो गया।

    कृष्णा कोल ने बताया था कि वे बारह साल की उम्र में एक बार गांधीजी से भी मिले थे और उन से प्रेरित होकर ही उसके मन में अपने गांव की बेहतरी के लिए काम करने का विचार आया था ।कोल पढ़े लिखे तो नहीं थे परंतु हमेशा कहा करते थे कि व्यक्ति के सामने कैसी भी परिस्थिति हो लेकिन उसे हार नहीं माननी चाहिए । बताया जाता है कि कृष्णा कोल  की अंतिम इच्छा यह थी कि उसके गांव तक संपर्क सड़क बन जाए, जिससे गांव में शिक्षा और स्वास्थ्य की व्यवस्था दुरुस्त हो जाए, हालांकि कई बार प्रशासन द्वारा उनके कार्यों के लिए उन्हें सम्मानित भी किया जा चुका था।  गांव में स्कूल ना होने के कारण उनकी चौथी पीढ़ी भी स्कूल नहीं जा सकी है और संपर्क मार्ग ना होने के कारण स्वास्थ्य सेवाएं भी अब तक इस गांव में नहीं पहुंच पाई हैं।

     चारों तरफ पहाड़ से गिरी इस गांव में अधिकांश आदिवासी परिवार रहते हैं। समाज सेवा में लगे तमाम सारे संगठन संगठनों का कहना है कि कृष्णा कोल चित्रकूट जनपद के लिए एक रियल हीरो है और ऐसे व्यक्तित्व के लिए हम जितना भी करें वह कम होगा सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि बडेहार  तक संपर्क मार्ग का जल्द से जल्द निर्माण किया जाए जिसका नाम कृष्णा कोल संपर्क मार्ग रखा जाए और उनकी अंतिम इच्छा जल्द से जल्द पूरी की जाए।

  • लगातार हार रही सीटों के लिए कांग्रेस अपना रही है यह रणनीति ?

    लगातार हार रही सीटों के लिए कांग्रेस अपना रही है यह रणनीति ?

    भोपाल //सूबे में जहां विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा पिछली बार हारी हुई सीटों को जीतने की रणनीति पर काम कर रही है, वही कांग्रेस प्रदेश की ऐसी सीटों पर फोकस कर रही है, जहां पार्टी लगातार चुनाव हार रही है। प्रदेश में ऐसी 70 सीटें हैं।  कांग्रेस इन सीटों पर प्रत्याशियों के चयन के लिए तीन तीन सर्वे कराने की कवायत कर रही है, वहीं कार्यकर्ताओं को तैयार करने और बूथ मैनेजमेंट के लिए शिविरों का आयोजन करेगी।

    तीन तीन सर्वे से चुने जायेंगे उम्मीदवार ?

      खबर यह है कि कांग्रेस 3 बार या उससे ज्यादा बार चुनाव हारने वाली सीटों पर इस बार उम्मीदवार चयन के लिए तीन अलग-अलग सर्वे करवाएगी । एक सर्वे एआईसीसी ,एक प्रदेश कांग्रेस और एक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ खुद करवा रहे हैं।  इन तीनों सर्वे के निचोड़ के बाद ही प्रत्याशी का चयन किया जाएगा। बताया जाता है कि यह फैसला पिछले दिनों कांग्रेस की पॉलिटिकल अफेयर कमेटी की बैठक में लिया गया है। इन तीनों सर्वे के बाद जो उम्मीदवार सबसे बेहतर होगा दिग्गज नेताओं (? ) के साथ ही स्थानीय और संगठन कि पसंद होगा उसे उम्मीदवार बनाया जाएगा।  पहले चरण में इन हारी सीटों पर  सर्वे होगा के बाद दूसरे चरण में बाकी लगभग 90 सीटों पर इसी तर्ज पर सर्वे होगा।  वैसे यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस अधिकतर सीटों पर वर्तमान विधायकों को दोहराने के मूड में इसीलिए उन्हें अभी से अपने क्षेत्र में सक्रिय होने के लिए आलाकमान ने निर्देश दे दिए हैं।

    शिविरों का होगा आयोजन !

    दूसरी खबर है कि कांग्रेस लगातार हार वाले विधानसभा क्षेत्रों में शिविर लगाकर कार्यकर्ताओं को तैयार करेगी और इन शिविरों को आयोजित करने की जिम्मेदारी सेवादल को दी गई है।  यह शिविर मई और जून में लगाए जाएंगे । 3 से 5 दिनों के इन शिविरों में क्षेत्र में हार के कारणों के अलावा कार्यकर्ताओं को  बूथ प्रबंधन की बारीकियों की जानकारी, मतदाता से संपर्क करने के और प्रमुख बिंदु पर बात करने को के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।  इस दौरान वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहेंगे।

     सेवा दल के प्रमुख संगठन योगेश यादव का कहना है कि शिविर क्षेत्र में कांग्रेस की कमजोरियों और समस्याओं की जानकारी का एक प्रतिवेदन भी तैयार करेंगे ताकि संगठन को चुनावी तैयारी में सहयोग मिल सके । बताया जा रहा है कि विधानसभा क्षेत्रों से सेवा दल के शिविर आयोजित करने से पहले 27 से 29 अप्रैल तक इंदौर में जिला अध्यक्ष व प्रभारियों का एक शिविर भी आयोजित होगा।

    इन सीटों पर लगातार हार रही है कांग्रेस

     रहली ,सागर, बीना ,नरयावली ,गुना, शिवपुरी ,दतिया डॉक्टर अंबेडकर नगर( महू) इंदौर दो इंदौर चार इंदौर पांच,बिजावर ,चांदला, पथरिया, हटा, सिरमौर, सिमरिया, त्योथर, रामपुर बघेलान, रीवा, सीधी सिंगरौली, देवसर , धौहनी, जैतपुर ,बांधवगढ़, मानपुर , मुड़वारा ,जयसिंह नगर ,जबलपुर कैंट, पनागर ,सिहोरा परसवाड़ा ,बालाघाट ,सिवनी ,आमला, टिमरनी, सिवनी मालवा, होशंगाबाद ,सोहागपुर, पिपरिया, भोजपुर, कुरवाई ,शमशाबाद ,बैरसिया ,नरेला, हुजूर, गोविंदपुरा बुधनी ,आष्टा ,सीहोर, सारंगपुर ,सुसनेर ,सुजालपुर देवास ,खातेगांव, बागली ,हरसूद, खंडवा, पंधाना, बुरहानपुर, धार, उज्जैन उत्तर, उज्जैन दक्षिण, रतलाम सिटी ,मंदसौर, मल्हारगढ़, जावद और नीमच।

  • धर्म रक्षा यात्राएं निकलेगी कांग्रेस? सॉफ्ट हिंदुत्व से हार्ड हिंदुत्व की ओर कांग्रेस ?

    धर्म रक्षा यात्राएं निकलेगी कांग्रेस? सॉफ्ट हिंदुत्व से हार्ड हिंदुत्व की ओर कांग्रेस ?

    भोपाल//  यह निश्चित है कि सूबे में आगामी चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस हिंदुत्व की पिच पर  खुलकर खेलने के मूड में मूड में आ गई है। कांग्रेस ने हाल ही में प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में धर्म संवाद और मंदिर स्वायत्त संकल्प दिन का आयोजन कर पूरे प्रदेश के पुजारियों साधु-संतों को बुलाया था इस आयोजन में यह मांग भी रखी गई कि मंदिरों को लेकर 1974 की व्यवस्था लागू की जाए और मंदिरों की जमीन का अधिकार मंदिर समिति को दिया जाए कांग्रेश ने आरोप लगाया कि मंदिरों पर सरकार कब्जा कर रही है पुजारियों धर्म आचार्यों पर अत्याचार हो रहे हैं शिकायत के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है।
    और अब बताया जा रहा है कि  इसी महीने से कांग्रेस धर्म रक्षा यात्राओं की शुरुआत कर सकती है इसके लिए पूरा खाका तैयार हो चुका है ।
    इन यात्राओं की जिम्मेदारी मध्य प्रदेश कांग्रेस मंदिर पुजारी प्रकोष्ठ की युवा इकाई को दी गई है । यह यात्राएं जिला स्तर से शुरू होकर ब्लॉक स्तर तक होंगी। यात्रा के दौरान भगवा ध्वज पताकाएं साथ रहेंगी। मशाल और बाइक रैली का आयोजन भी होगा। प्रदेश कांग्रेश पुजारी युवा इकाई के प्रदेश अध्यक्ष सुधीर भारती का कहना है कि इन यात्राओं पर इसके सैद्धांतिक सहमति बन गई है, सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ की हरी झंडी मिलने के बाद यात्राएं शुरू हो जाएंगी। कांग्रेस का कहना है कि इन यात्राओं का उद्देश्य धर्म संस्कृति की रक्षा और मंदिरों को सुरक्षा प्रदान करना है। साथ ही कांग्रेस से आमजन को जोड़ना है।
    भाजपा तो  पहले से ही हिंदुत्व के मुद्दे पर चुनावी मैदान में उतरती रही है , उसकी काट के लिए और एंटी हिन्दुत्व की छवि से छुटकारा पाने की कोशिश में कांग्रेस  ने भी अपना रंग रूप बदलना शुरू कर दिया है । जब से कमलनाथ ने कांग्रेस की कमान संभाली है, उन्होंने साफ्ट हिंदुत्व की ओर रुझान दिखाना शुरू कर दिया था और 2018  के चुनाव में इसे आजमाया भी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ अपने को हनुमान भक्त बताते हैं और वह कहते हैं कि राम किसी एक के नहीं है अब तो कांग्रेस के लोग खुलकर भगवान श्री राम के साथ सीता का नाम यानी जय सियाराम भी कहने लगे हैं कांग्रेश किसी भी तरह से धार्मिक आयोजन से पीछे नहीं हट रही है।

    भाजपा हमलावर

    वैसे कांग्रेस के इस बदले रूप पर भाजपा काफी हमलावर भी नजर आ रही है।
    प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि जिन लोगों ने भगवा आतंकवाद का शब्द गढ़े थे, वो लोग आज अपने कार्यालय को भगवा में रंग रहे हैं तो समझ लेना चाहिए कि अब अच्छे दिन जरूर आ गए हैं. कांग्रेस अपने कार्यालय में सुंदरकांड का पाठ करा रही है. ये वो लोग हैं जिन्होंने राम को काल्पनिक कहा था.
    वहीं इंदौर में बीजेपी के दिग्गज नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि कांग्रेस के नेता पहले सिर्फ रोजा इफ्तार में जाते थे लेकिन अब वे सुंदरकांड का पाठ कर रहे हैं, मंदिराें में जा रहे हैं और उनके नेता जनेऊ तक पहनने लगे हैं तो यह सीधे तौर मोदी इफेक्ट की वजह से कांग्रेस का ट्रांसफॉर्मेशन हो रहा है.
    पत्रकारों ने कमलनाथ से पूछा कि क्या झंडे इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के “भगवाकरण” का संकेत देते हैं। जवाब में, पूर्व सीएम ने पूछा कि क्या भाजपा के पास भगवा का ट्रेडमार्क है? क्या उन्होंने भगवा का ठेका लिया है? बीजेपी का दावा है कि उसने हिंदू धर्म का ठेका लिया है। अंतर यह है कि हम सभी की धार्मिक भावनाएं हैं, लेकिन हम इसे राजनीतिक मंच पर नहीं लाते हैं।

    कितना फायदा ,कितना नुकसान ?
    राजनीतिक समीक्षक मान रहे हैं कि दोनों ही दल आगामी चुनाव में हिंदुत्व को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करेंगे ,पर मतदाता किस पर भरोसा करता है यह देखने वाली बात होगी ।
    वैसे प्रदेश में कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधा मुकाबला है परंपरागत रूप से अल्पसंख्यक मतदाता का झुकाव कांग्रेसियों रहता आया है पर अब कांग्रेश अपना जो रूप बदल रही है वह हिंदुत्व समर्थकों को कितना लुभा पाती है यह तो फिलहाल नहीं कहा जा सकता पर अल्पसंख्यक मतदाता कांग्रेस के बदले रुख रवैये से निराश और नाराज जरूर हो सकता है और इसका फायदा आप, बसपा और सपा जैसे दलों को मिल सकता है । भाजपा के हिंदुत्व के मुकाबले कांग्रेस का हिंदुत्व मतदाता को कितना पसंद आता है यह तो 6 महीने बाद होने वाले चुनाव परिणाम ही बताएंगे।

  • पूरा फैसला तैयार किये बिना जज नहीं सुना सकते अंतिम निर्णय, सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

    पूरा फैसला तैयार किये बिना जज नहीं सुना सकते अंतिम निर्णय, सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

    नयी दिल्ली, // उच्चतम न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि एक न्यायिक अधिकारी फैसले के पूरे पाठ को तैयार किए बिना या लिखे बिना, उसके निष्कर्ष वाले हिस्से को खुली अदालत में सुना नहीं सकता।

    साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक में निचली अदालत के उस न्यायाधीश को बर्खास्त करने का भी निर्देश दिया, जिन्हें एक मामले में फैसला तैयार किए बिना, उसका निष्कर्ष वाला हिस्सा सुना देने का दोषी पाया गया था।

    उच्चतम न्यायालय की यह व्यवस्था कर्नाटक उच्च न्यायालय के महापंजीयक (रजिस्ट्रार जनरल) की एक अपील पर आई है । इस अपील में पूर्ण अदालत द्वारा न्यायाधीश को बर्खास्त करने संबंधी दिए गए आदेश को रद्द कर उनकी बहाली के लिए दिए गए उच्च न्यायालय की खंडपीठ के आदेश को चुनौती दी गई थी।

    न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमण्यम और न्यायमूर्ति पंकज मित्तल  की पीठ ने गंभीर आरोपों को ‘‘छिपाने’’ के लिए कर्नाटक उच्च न्यायालय पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि न्यायाधीश का आचरण अस्वीकार्य है।

    पीठ ने कहा ‘‘यह सच है कि कुछ आरोपों का न्यायिक घोषणाओं और न्यायिक निर्णय लेने की प्रक्रियाओं से संबंध होता है लेकिन वे विभागीय कार्यवाही का आधार नहीं बन सकते हैं।’’

    आगे पीठ ने कहा ‘‘इसलिए, हम उन आरोपों को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं। ’’ पीठ के अनुसार, लेकिन जो आरोप प्रतिवादी की ओर से निर्णय तैयार करने/लिखने में घोर लापरवाही और उदासीनता से संबद्ध तथा अपरिवर्तनीय हैं, वे पूरी तरह से अस्वीकार्य और एक न्यायिक अधिकारी के लिए अशोभनीय हैं।

    शीर्ष अदालत ने कहा कि जज का अपने बचाव में यह कहना भी पूर्णत: अस्वीकार्य है कि अनुभव की कमी और स्टेनोग्राफर की अक्षमता इसके लिए जिम्मेदार है।

    पीठ के अनुसार, ‘‘लेकिन दुर्भाग्य से, उच्च न्यायालय ने न केवल पंचतंत्र की इस कहानी को स्वीकार किया, बल्कि गवाह के रूप में स्टेनोग्राफर से जिरह नहीं करने के लिए प्रशासन तक को दोषी ठहरा दिया। इस तरह का दृष्टिकोण पूरी तरह से अस्थिर है।’’

    पीठ ने कहा, ‘‘अगर प्रतिवादी का यह मानना था कि सारा दोष स्टेनोग्राफर का है, तो स्टेनोग्राफर को गवाह के रूप में बुलाना उसका जिम्मा था। उच्च न्यायालय ने दुर्भाग्य से सबूत की जिम्मेदारी ही बदल दी।’’

    साथ ही पीठ ने कहा कि उसके सामने ऐसा कोई मामला नहीं आया जिसमें उच्च न्यायालय ने जुर्माने का आदेश खारिज करते हुए यह कहा हो कि कसूरवार के खिलाफ आगे जांच नहीं होगी । ‘‘लेकिन इस मामले में, एक नया उदाहरण तैयार करते हुए उच्च न्यायालय ने वैसा ही किया।’’

  • इस साल नहीं होगी खाद की कमी? चुनावी साल में सरकार तैयार !

    भोपाल//  हर साल बुवाई के मौसम में खाद की किल्लत के चलते सरकार को किसानों का गुस्सा झेलना पढ़ता है, चूंकि इस साल नवंबर में चुनाव है सरकार किसानों की नाराजगी का जोखिम नहीं उठाना चाहती । इसलिए पहले से व्यवस्था में जुट गई है। कहा जा रहा है कि इस साल किसानों को पर्याप्त खाद मिल सकेगी ,यहां तक की इस बार किसान अपनी सुविधा के अनुसार पहले भी खाद ले सकेंगे।

    खबरों के मुताबिक सूबे में 11 लाख टन खाद का अग्रिम भंडारण किया जा रहा है। सरकार ने यूरिया, डीएपी, एनपीके दिए जाने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा था, केंद्र सरकार ने प्रस्ताव को सहमति दे दी है और भंडारण के लिए खाद मिलना भी शुरू हो गया है । प्रदेश सरकार मई तक भंडारण पूरा लेगी।

    विपक्ष को नहीं देना चाहते राजनीति का मौका !

    दरअसल, हर साल बुवाई सीजन में प्रदेश में खाद की कमी को लेकर किसानों के बीच मारामारी मचती है। खाद के लिए गोदामों पर लंबी लाइन लगती हैं। परेशान किसान आंदोलनों और प्रदर्शन पर उतर आते हैं। इससे विपक्ष को सरकार को घेरने का मौका मिल जाता है। यह स्थिति रबी सीजन में अक्टूबर और दिसंबर के बीच ज्यादा बनती है। पिछले स बुवाई सीजन में ग्वालियर चंबल क्षेत्र में कानून व्यवस्था की स्थिति निर्मित हो गई थी। प्रदेश में कई जगह गोदाम लूटने जैसी घटनाएं भी हुई। इस चुनावी साल में सरकार विपक्ष को कोई मौका नहीं देना चाहती इसलिए उसने अपनी तैयारी दुरुस्त करने का फैसला किया है।

  • इंसाफ देने के मामले में कर्नाटक सबसे चुस्त, यूपी सबसे सुस्त… मध्य प्रदेश आठवें स्थान पर …!

    इंसाफ देने के मामले में कर्नाटक सबसे चुस्त, यूपी सबसे सुस्त… मध्य प्रदेश आठवें स्थान पर …!

    नई दिल्ली // भारत में जल्दी इंसाफ देने के मामले में दक्षिणी राज्य कर्नाटक देश के विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे आगे हैं. दूसरा स्थान पर तमिलनाडु है .यह दावा मंगलवार को जारी इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 2022 में किया गया है . इस रिपोर्ट के मुताबिक अदालतों में  इंसाफ देने के मामले में मध्य प्रदेश देश में आठवें स्थान पर है . वर्ष 2020 के सोलहवें स्थान की तुलना में मध्यप्रदेश  ने इस बार आठ पायदान की लम्बी छलांग लगायी है . इंडिया जस्टिस रिपोर्ट में देश के एक करोड़ से ज्यादा आबादी वाले 18 राज्यों में मध्यप्रदेश का स्कोर 10 में से 5.25 है

    न्याय देने के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे नीचे यानी 18 वें स्थान पर है वहीं राजस्थान 15 वें, बिहार 16 वें, पश्चिम बंगाल 17वें स्थान पर है

    ‘इंडिया जस्टिस रिपोर्ट’ (आईजेआर)-2022  पुलिस, न्यायपालिका, जेल और विधिक सहायता के लिए बजट, संसाधन की उपलब्धता आदि के आधार पर तैयार की गई है।

     रिपोर्ट के अनुसार, न्याय तक सुगम पहुंच प्रदान करने वाले पांच शीर्ष राज्यों में चार दक्षिणी भारत से हैं। एक करोड़ से अधिक आबादी वाले बड़े राज्यों की इस सूची में तीसरा स्थान तेलंगाना ने हासिल किया है, जबकि गुजरात और आंध्र प्रदेश क्रमश: चौथे और पांचवें स्थान पर हैं।

    इंडिया जस्टिस रिपोर्ट की शुरुआत टाटा ट्रस्ट ने 2019 में की थी। यह तीसरी रिपोर्ट है . बता दें कि टाटा ट्रस्ट की अगुवाई में जारी यह रिपोर्ट दक्ष (DAKSH), कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव, कॉमन कॉज, सेंटर फॉर सोशल जस्टिस, विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी और टीआईएसएस-प्रयास के सहयोग से तैयार की गई है।

    यह तीसरा आईजेआर रिपोर्ट देश के 25 राज्य मानवाधिकार आयोगों की क्षमता का भी अलग से आकलन करती  है।

    रिपोर्ट के अनुसार भारत की जेलों में बंद केवल 22 प्रतिशत लोग ही सजायाफ्ता मुजरिम हैं, 77.10 प्रतिशत बंदी विचाराधीन हैं। इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 2022 ने यह दावा कर बताया कि साल 2010 के मुकाबले 2021 तक विचाराधीन बंदियों की संख्या 2.4 लाख से बढ़कर 4.3 लाख पहुंच चुकी है, यानी करीब दोगुनी हुई है।



    रिपोर्ट ने जेलों में क्षमता से अधिक लोगों को रखने पर चिंता जताई। इसके अनुसार 2021 में जेलों में आबादी कुल 5.54 लाख पहुंच चुकी है, जबकि 2020 व 2019 में यह क्रमश: 4.89 लाख व 4.81 लाख थी। केवल 2021 में देश की 1,319 जेलों में 18.1 लाख लोग भेजे गए, जो 2020 के 16.3 लाख से करीब 10.8% अधिक है। मध्यप्रदेश, मिजोरम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश और अंडमान निकोबार द्वीप समूह की जेलों में विचाराधीन बंदियों की संख्या 60% से कम है। अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मेघालय और पुडुचेरी को छोड़ हर राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में विचाराधीन कैदी बढ़े हैं