Category: विशेष खबर

  • भारत में धनी कहलाने के लिए कितने रूपये चाहिए ?

    भारत में धनी कहलाने के लिए कितने रूपये चाहिए ?

    देश सबसे अमीर 1% में शामिल होने के लिए शामिल होने का आंकड़ा बताती है वेल्थ रिपोर्ट -2023

    नई दिल्ली // हिंदी की प्रसिद्ध फिल्म दीवार में अमिताभ बच्चन का एक बड़ा ही मशहूर डायलाग  है ‘मेरे पास बंगला है, गाड़ी है, बैंक बैलेंस है।’  जो फिल्म के दृश्य में वे अपनी हैसियत या अपने को अमीर बताने के लिए बोलते हैं, लेकिन वह सिर्फ अमीर होना है । हर अमीर देश के रिची रिच क्लब (एक फीसदी अमीर लोग ) में शामिल नहीं है . देश के सबसे आमिर एक प्रतिशत लोगों में शामिल होने पर ही आप रिची रिच कहला सकेंगें  और उसका हिस्सा बनने के लिए आपके पास कितना पैसा होना चाहिए?   

    ग्लोबल रियल एस्टेट कंसल्टेंसी नाइट फ्रैंक की वेल्थ रिपोर्ट इसका जबाब देती है । फर्म ‘वेल्थ रिपोर्ट 2023’ सिर्फ हिंदुस्तान ही नहीं दुनिया भर और भी कई देशों में किसी व्यक्ति को ‘रिची रिच’ क्लब का हिस्सा बनने के लिए कितनी रकम जरूरत है यह बताती है.

    बुधवार को जारी वेल्थ रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के 1% सबसे अमीर लोगों में शामिल होने के लिए सिर्फ 175,000 डॉलर (1.44 करोड़ रुपये) नेटवर्थ की जरूरत है। यह राशि अन्य देशों के 1% क्लब में प्रवेश बिंदु से बहुत कम है, भले ही भारत में अमीर लोगों की आबादी में तेजी से बढ़ रही है।

     मोनाको में,  एक ऐसा देश जो भारत के किसी महानगर के एक हिस्से से भी छोटा होगा और जहां दुनिया के सबसे धनी व्यक्तियों की आबादी सबसे अधिक है, 1% क्लब के प्रवेश में प्रवेश के लिए कम से कम 12.4 मिलियन डॉलर (102 करोड़) की सम्पत्ति  की जरूरत है. जो भारत के मुकाबले 160 गुना ज्यादा है . नाइट फ्रैंक की सूची में अगले दो देश स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रेलिया हैं। इन दो देशों के सबसे अमीर एक प्रतिशत लोगों में शामिल  होने के लिए  स्विट्ज़रलैंड में 6.6 मिलियन डॉलर (54 करोड़ रुपये) की आवश्यकता होती है, जबकि ऑस्ट्रेलिया में यह रकम 5.5 मिलियन डॉलर (45 करोड़ रुपये) है।

    एशिया महाद्वीप  की बात करें तो सिंगापुर में 3.5 मिलियन डॉलर  (28 करोड़ रु.) की आवश्यकता है। इसके बाद हांगकांग में 3.4 मिलियन डॉलर है। चीनी में, जिसकी जनसंख्या की तुलना भारत से की जा सकती है, 1% क्लब का आंकड़ा 960,000 डालर आंका गया है। लगभग 25 देशों की इस सूची में भारत का 22 वां स्थान है ,उसे दक्षिण अफ्रीका, फिलीपींस और केन्या से पहले रखा गया था।

    संयोग से, मोनाको में अमीर कहलाने का आंकड़ा (प्रवेश बिंदु) केन्या के 200 गुना से अधिक है – जो स्पष्ट रूप से देशों के बीच बढ़ती आय असमानता की खाई को उजागर करता है।

    लैटिन अमेरिका में, ब्राजील में 430,000 डॉलर (लगभग 3.5 करोड़ रुपये) की उच्चतम सीमा है, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए सीमा 5.1 मिलियन डॉलर (लगभग 42 करोड़ रुपये) है । मध्य पूर्व में, सबसे अधिक 1.6 मिलियन डॉलर (13 करोड़ रुपये) की सीमा के साथ संयुक्त अरब अमीरात है । संयोग से, मोनाको में रिच क्लब का प्रवेश बिंदु केन्या के 200 गुना से अधिक है – जो स्पष्ट रूप से देशों के बीच बढ़ती आय असमानता की खाई को उजागर करता है। हाल के दिनों में कोविड महामारी के साथ-साथ वैश्विक मुद्रास्फीति में वृद्धि के कारण अमीर और गरीब देशों के बीच की खाई चौड़ी हो गई है। ।

    भारत में अरबपतियों की संख्या बढ़ी

    भारत के अमीर बढ़ रहे हैं . नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNI) की संख्या – जिनकी संपत्ति का मूल्य 1 मिलियन डॉलर या उससे अधिक है – अगले पांच वर्षों में 108 प्रतिशत की भारी वृद्धि के साथ 1.7 मिलियन डॉलर हो जाएगी। 2022 में देश में एचएनआई की संख्या 797,714 थी।

    रिपोर्ट में यह भी दिखाया गया है कि भारत के अल्ट्रा-हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल (UHNWIs) – जिनकी कुल संपत्ति 30 मिलियन डॉलर से अधिक है – 58.4 प्रतिशत की दर से बढ़ने वाली है । रिपोर्ट में कहा गया है कि अल्ट्रा-हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल की संख्या 2022 में 12,069 से बढ़कर 19,119 और 2027 तक होनी थी। भारत के अरबपतियों की संख्या भी मौजूदा 161 अरबपतियों से बढ़कर 195 होने की उम्मीद है। यह प्रवृत्ति दुनिया भर के परिदृश्य के ठीक विपरीत है। नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक यूएचएनआई आबादी में पिछले साल 3.8 फीसदी की गिरावट आई है। इसके अतिरिक्त, वैश्विक स्तर पर अरबपतियों की संख्या भी 5 प्रतिशत घटकर 2,629 रह गई।

    दुनिया में अमीर गरीब की खाई बढती जा रही है ,श्रम ,बुद्धि या विवेक से ज्यादा नई व्यवस्था में पैसा काम पर लग रहा है .

  • नर्मदापुरम में भाजपा से आने वाले किसी नेता को टिकट नहीं देगी कांग्रेस-दिग्विजय

    नर्मदापुरम में भाजपा से आने वाले किसी नेता को टिकट नहीं देगी कांग्रेस-दिग्विजय

    दिग्विजय सिंह ने किया दावा-कांग्रेस प्रदेश में 135 सीटें जीतेगी और सरकार बनाएगी

    इटारसी// कांग्रेस नर्मदापुरम (होंशगाबाद)क्षेत्र में भाजपा से आने वाले किसी व्यक्ति को टिकट नहीं देगी। टिकट कांग्रेस के व्यक्ति को ही मिलेगा। पिछली बार सरताज सिंह की टिकट को छोड़ दें ,तो हमेशा कांग्रेस के व्यक्ति को ही टिकट मिला है। यह बात पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने गुरुवार को पत्रकारों से चर्चा करते हुए कही।

     दिग्विजय सिंह यहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं और मंडल सेक्टर अध्यक्षों की बैठक में भाग लेने पहुंचे थे । इटारसी की एक्सप्रेसइलेवन में आयोजित इस बैठक के पूर्व श्री सिंह ने पत्रकार वार्ता को संबोधित किया।

     यह पूछे जाने पर कि क्षेत्र में चर्चा है कि भाजपा का कोई नेता कांग्रेस में शामिल होने वाला है और उसे टिकट दिया जा सकता है? दिग्विजय सिंह ने कहा कि इस बात में कोई दम नहीं है। उन्होंने कांग्रेस की टिकट प्रक्रिया तो बताते हुए कहा कि जिला एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी नाम प्रस्तावित करेगी ,एआईसीसी की स्क्रीनिंग कमेटी और सेंट्रल स्क्रीनिंग कमेटी नाम तय करेगी। यह पूछे जाने पर भी यह पूछे जाने पर कि क्या पार्टी किसी नए चेहरे को मैदान में उतार सकती है? तो दिग्विजय ने कहा कि यह पार्टी तय करेगी चेहरा नया हो या पुराना इतना जरूर है कि इस बार चुनाव हम मिलकर लड़ेंगे और गुटबाजी समाप्त होगी।

    दिग्विजय सिंह ने किया दावा-

    कांग्रेस प्रदेश में 135 सीटें जीतेगी और सरकार बनाएगी

    पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने दावा किया है कि इस बार कांग्रेस मध्यप्रदेश में 135 सीटें जीतेगी और सरकार बनाएगी,  कांग्रेस एकजुट होकर चुनाव लड़ेगी। हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि प्रदेश की जनता शिवराज सिंह सरकार से नाराज है भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार बढ़ा है पूरे प्रदेश को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह चलाया जा रहा है जिसमें शिवराज और कांग्रेस से गए महाराज हिस्सेदार हैं। हर काम में हिस्सेदारी मांगी जा रही है।

  • लगातार हार रही सीटों पर कांग्रेस तीन महीने पहले ही तय कर सकती है उम्मदीवारों के नाम !

    लगातार हार रही सीटों पर कांग्रेस तीन महीने पहले ही तय कर सकती है उम्मदीवारों के नाम !

    भोपाल// साल के अंत में होने वाले चुनाव में कांग्रेस लगातार हार रही सीटों पर फोकस कर रही है अब कांग्रेसमें इस तरह की सीटों पर पहले से उम्मीदवार घोषित करने की समय सीमा तय कर दिया बताया जाता है कि पार्टी लगातर हार रही या कम अंतर से हारी सीटों पर 3 महीने पहले ही उम्मीदवारों के नाम घोषित कर सकती है।

     इसकी वजह यह बताई जा रही है कि इससे उम्मीदवारों को जमीनी स्तर पर काम करने और प्रचार-प्रसार का भरपूर समय मिलेगा। साथ ही पार्टी को यह भी लग रहा है कि इस बार टिकट न मिलने पर कुछ नेता बगावत कर सकते हैं, उन्हें बैठाने, दावेदारी वापस लेने व मनाने के लिए भी पार्टी को वक्त मिलेगा।

    कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ पहले ही सर्वे रिपोर्ट के आधार पर टिकट देने की बात करते रहे हैं। बताया जाता है कि दो सर्वे कराए भी जा चुके हैं और कमलनाथ और दिग्विजय सिंह लगातार विधानसभा क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं और हारी हुई सीटों की जमीनी हकीकत जानने और कार्यकर्ताओं का फीडबैक लेने में लगे हुए हैं।वही आईसीसी द्वारा नियुक्त ऑब्जर्वर भी रिपोर्ट के आधार पर सभी पहलुओं को देखकर पार्टी टिकट का निर्णय करेगी।

    आधार पर तैयार होगी ऑब्जर्वर की रिपोर्ट

    बताया जा रहा है कि पीसीसी अध्यक्ष कमलनाथ के द्वारा दो सर्वे कराए गए हैं। यह सर्वे रिपोर्ट ऑब्जर्वर को सौंप दी गई है। ऑब्जर्वर ऐसे 70 विधानसभा क्षेत्रों की मैदानी स्थिति को देखेंगे । साथ ही सर्वे में जिनके नाम आए हैं उनकी स्थिति जमीनी तौर पर कैसी है? जीत सकते हैं कि नहीं ? जिनके नाम आए हैं उनसे भी चर्चा की जाएगी । इसके अलावा पार्टी के कार्यकर्ता वरिष्ठ नेता और मतदाताओं का रुझान भी लिया जाएगा। ऑब्जर्वर एक विधानसभा में 1 दिन बिताएंगे।

  • लव मैरिज से हो रहे हैं हैं सबसे ज्यादा तलाक, सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कही ये बात ?

    लव मैरिज से हो रहे हैं हैं सबसे ज्यादा तलाक, सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कही ये बात ?

     सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि ज्यादातर तलाक लव मैरिज से ही हो रहे हैं। जस्टिस बीआर गवई और संजय करोल की पीठ ने एक वैवाहिक विवाद से जुड़ी ट्रांसफर याचिका पर सुनवाई करते वक्त यह बात कही।
    नई दिल्ली// लव मैरिज (Love Marriage) से तलाक की नौबत आ रही है। यह हम नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा। दरअसल, कोर्ट की जस्टिस बीआर गवई और संजय करोल की पीठ वैवाहिक विवाद से जुडी ट्रांसफर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। मामले के एक वकील ने कोर्ट को सूचित किया कि यह विवाह एक प्रेम विवाह था।
    न्यायमूर्ति गवई ने जवाब देते हुए कहा कि ज्यादातर तलाक लव मैरिज से ही हो रहे हैं। कोर्ट ने कपल को मेडिटेशन की सलाह दी थी, जिसका पति ने विरोध किया। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि हाल के एक फैसले के मद्देनजर वह उसकी सहमति के बिना तलाक दे सकती है।
    तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

    आपको बता दें कि 2 मई को सुप्रीम कोर्ट ने अपने दिए फैसले में कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 142(1) के तहत तुरंत तलाक देकर विवाह समाप्त कर सकती है। लेकिन, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट रूप से कहा कि ऐसा तभी हो सकता है, जब विवाह को बचाने का और कोई तरीका न बचा हो।

  • दिग्विजय सिंह का दौरा बदलेगा तस्वीर ?

    दिग्विजय सिंह का दौरा बदलेगा तस्वीर ?

    इटारसी / नर्मदापुरम//आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस खासी सक्रिय है। इस बार वह लगातार उन सीटों पर फोकस कर रही है जिन पर कांग्रेस पिछले चार-पांच चुनाव से हार झेलती आ रही है। वरिष्ठ नेताओं के दौरे इस तरह के क्षेत्र में लगातार जारी हैं। कहा जा रहा है कि इसी तारतम्य में पूर्व मुख्यमंत्री और राज्य सभा सदस्य दिग्विजय सिंह गुरुवार को नर्मदा पुरम और इटारसी आ रहे हैं, वे कार्यकर्ताओं से चर्चा करेंगे और पार्टी की स्थिति को समझने और जानने का प्रयास करेंगे।

     जहां तक नर्मदापुरम( होशंगाबाद) जिले का सवाल है यहां संगठन कमजोर नहीं बल्कि ध्वस्त है और इसके लिए भोपाल मैं बैठकर जिले को अपनी जागीर मानने वाले नेता जिम्मेदार हैं । पिछले कई दशकों से उन्हीं नेताओं की पसंद के लोगों को यहां उम्मीदवार बनाया जाता रहा और यह बात खुलकर कही जाती रही है कि इन नेताओं का भाजपा के सबसे रसूखदार परिवार से गहन संबंध होने के कारण यहां कांग्रेस उनके सामने कोई मजबूत प्रत्याशी देने से बचती रही है। 

     बात कड़वी है पर सच है 

    यह बात इस क्षेत्र के राजनीतिक गलियारों में ही नहीं आम लोगों में भी खुलकर कही जाती है कि भाजपा के बगीचे से ही  कांग्रेस की टिकट तय होती है। इस बार भी ऐसा ही होने की संभावना है, क्योंकि जो फार्मूला बताया जा रहा है जिसमें उम्मीदवार के चयन में स्थानीय संगठन और प्रभावशाली नेता की महत्वपूर्ण भूमिका होगी तो ऐसे में कोई बदलाव होगा ऐसा नहीं लगता। क्योंकि हाल ही में स्थानीय संगठनों में जो लोग पदाधिकारी बनाए गए हैं वह पार्टी के बजाय उन्हीं नेताओं की पसंद और निष्ठा वाले हैं। इसीलिए मंडलम की ओर से वही नाम जाएंगे जिन्हें यह नेता चाहेंगे।

    राष्ट्रवादियों की रहती है बल्ले-बल्ले

    पिछले कई बार से कांग्रेसी इलाके में चुनाव हार रही है इसके लिए कांग्रेसियों की भूमिका ही महत्वपूर्ण होती है। भीतरघात( यहां तक कि पैसे लेकर रातों-रात निष्ठा बदलने के किस्से चुनाव के बाद तक चर्चाओं में रहते हैं पिछले चुनाव में लिफाफे की चर्चा तो आज तक याद की जाती है) एक स्थायी रोग है, पर चुनाव के बाद भी इस तरह के तत्वों पर कभी कोई एक्शन पार्टी की ओर से कभी नहीं लिया गया, उल्टे उन्हें किसी ना किसी तरह से पुरस्कृत किया गया ,

     हाल ही के नपा चुनाव में कांग्रेस के भोपाल में बैठे वरिष्ठ नेताओं की जो भूमिका रही, माना जा रहा है कि उसके कारण इटारसी नगर पालिका पर कांग्रेस काबिज होते होते रह गई।  इन नेताओं ने जिन अपने चहेतों को पार्षद के टिकट दिलवाए उनमें से कुछ तो जीते ही नहीं जो जीते तो  उन्होंने कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ खुलकर मतदान किया था और उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं इटारसी के एक मैदान का नाम सावरकर के नाम पर रखे जाने के मामले में भी पार्टी की लाइन से हटकर भाजपा का समर्थन करने वाले आज भी कांग्रेस के नेता बने हुए हैं और तो और भाजपा उन्हें राष्ट्रवादी बता रही है।

    अब  सवाल यह है कि दिग्विजय सिंह जी जब स्थानीय नेताओ और कार्यकर्त्ताओं से  से चर्चा करेंगें तो यह बातें उनके सामने आ सकेंगी ? और ऐसा होगा तभी दिग्विजय सिंह जैसे नेताओं का दौरा और मेहनत इस तस्वीर को बदल सकेगा ।… और तस्वीर बदलेगी तभी कांग्रेस यहां जीत सकेगी।

  • पूर्व क्रिकेटर  ने क्यों किया पंजाब केसरी पर मुकदमा ?

    पूर्व क्रिकेटर  ने क्यों किया पंजाब केसरी पर मुकदमा ?

    नई दिल्ली// पूर्व क्रिकेटर और भाजपा सांसद गौतम गंभीर ने पंजाब केसरी अखबार के खिलाफ ₹2 करोड़ हर्जाने की मांग को लेकर दिल्ली एचसी के समक्ष मानहानि का मुकदमा दायर किया है

    गंभीर ने अखबार द्वारा प्रकाशित कहानियों के एक समूह के लिए पंजाब केसरी, इसके प्रधान संपादक और दो पत्रकारों पर मुकदमा दायर किया है।
    पूर्व क्रिकेटर और बीजेपी सांसद (सांसद) गौतम गंभीर ने हिंदी अखबार पंजाब केसरी के खिलाफ ₹2 करोड़ का हर्जाना मांगने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया है।

    गंभीर ने अखबार, उसके संपादक आदित्य चोपड़ा के साथ-साथ संवाददाताओं अमित कुमार और इमरान खान पर यह कहते हुए मुकदमा दायर किया है कि उन्होंने व्यवस्थित रूप से उन्हें निशाना बनाते हुए कई दुर्भावनापूर्ण और अपमानजनक लेख प्रकाशित करके अपनी पत्रकारिता की स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया है।

    अधिवक्ता जय अनंत देहदराई के माध्यम से दायर अपने मुकदमे में, गंभीर ने दावा करने के लिए रिपोर्टों के एक समूह का हवाला दिया कि कागज ने अपनी कहानियों को एक भ्रामक स्पिन दिया। एक रिपोर्ट में उनकी तुलना पौराणिक राक्षस भस्मासुर से भी की गई थी, इसका विरोध किया गया था।

    सूट में उल्लिखित कुछ रिपोर्ट हैं:

    सांसद गौतम गंभीर लापता गली-गली में लगे पोस्टर;

    दिल्ली के लापता सांसद लखनऊ सुपर जाइंट्स के लिए बने भस्मासुर (लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए दिल्ली का लापता सांसद बना भस्मासुर);

    आदेश गुप्ता बोलते रह गए, गौतम गंभीर उठ चले (आदेश गुप्ता बोलते रहे, गौतम गंभीर चले गए);

    ये नए मिजाज के सांसद है जरा फासलो से मिला करो।

    गंभीर ने तर्क दिया कि ये रिपोर्ट उनके काम के बारे में एक झूठी और गहरी अपमानजनक कहानी बनाती हैं और पाठकों के मन में एक सांसद के रूप में रहती हैं।

    रिपोर्ट में उन्हें एक जातिवादी व्यक्ति और एक उच्च नाक वाले राजनेता के रूप में चित्रित किया गया था, यह इंगित किया गया था।

    गंभीर ने धर्मार्थ संगठनों को 2 करोड़ रुपये का हर्जाना देने की मांग की है। उन्होंने यह भी प्रार्थना की कि प्रतिवादियों को बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए और इसे पंजाब केसरी द्वारा प्रसारित सभी समाचार पत्रों (डिजिटल संस्करणों सहित) में प्रकाशित किया जाना चाहिए।

    उन्होंने यह भी प्रस्तुत किया कि उनके खिलाफ किए गए प्रत्येक अपमानजनक प्रकाशन को वापस लेने के लिए कागज को निर्देश जारी किए जाने चाहिए।

    वाद को न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

  • सूबे के मंत्रियों को उनके ही क्षेत्रों में घेरेगी कांग्रेस !

    सूबे के मंत्रियों को उनके ही क्षेत्रों में घेरेगी कांग्रेस !

    भोपाल//नवंबर में होने वाले चुनाव के लिए कांग्रेस लगातार रणनीति बना रही है । नई रणनीति के तहत पार्टी की अब भाजपा सरकार के मंत्रियों को उनके निर्वाचन क्षेत्र में ही घेरने की योजना है और इस पूरी कवायद की कमान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के हाथ में होगी। इसमें वरिष्ठ नेता लगातार भाजपा के वरिष्ठ मंत्रियों के क्षेत्रों में जाएंगे और कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे । इसके साथ ही अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक भी इन क्षेत्रों में दौरा करेंगे मंत्रियों के क्षेत्र में एक एक जनसभा भी जल्द आयोजित की जाएगी।

    इस कार्ययोजना की शुरुआत 18 मई से हो सकती है जब कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव के विधानसभा क्षेत्र बदनावर पहुंचेंगे। वहीं दिग्विजय सिंह गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के क्षेत्र दतिया में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के लगातार प्रदेश में जो दौरे हो रहे हैं इन्हें गति दी जाएगी।

    इन पर होगी खास नजर

    प्रदेश कांग्रेस ने चुनाव अभियान कीइस घेराबंदी की अभी जो कार्ययोजना बनाई है उसमें जिन मंत्रियों की घेराबंदी को प्राथमिकता से राहत रखा गया है उसमें गोविंद सिंह राजपूत ,तुलसीराम सिलावट, प्रद्युम्न सिंह तोमर सहित वह मंत्री भी शामिल है जो कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए थे । इसके अलावा डॉ नरोत्तम मिश्रा, भूपेंद्र सिंह, कमल पटेल ,अरविंद भदौरिया, विश्वास सारंग के निर्वाचन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान रखा जाएगा।

    दतिया खुरई क्षेत्र में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को झूठे मामलों में फंसाकर प्रताड़ित करने के सर्वाधिक मामले हैं। कमल पटेल और अरविंद भदौरिया किसान कर्ज माफी को लेकर कांग्रेस पर लगातार हमले करते रहे हैं। तो विश्वास सारंग पार्टी के नेताओं के निशाने पर हैं। पार्टी के सभी सहयोगी संगठनों से कहा गया है कि वह मंत्रियों के क्षेत्र में मतदान केंद्र स्तर पर मतदाताओं से संपर्क कर इस कार्यक्रम को गति दे। मतदाता सूची का सत्यापन कराएं ।

    प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष केके मिश्रा ने बताया कि प्रमाणित जानकारियों के साथ भ्रष्टाचार ,कुशासन और कुप्रबंधन को लेकर अपनी बात जनता के सामने रखेंगे मंत्रियों को लेकर उनके क्षेत्र में नाराजगी है हम इसके आधार पर उन्हें वही घेरेंगे .

  • कर्नाटक के समान कनुगोलू की टीम लगा पाएगी एमपी में भी कांग्रेस की नैया पार ?

    कर्नाटक के समान कनुगोलू की टीम लगा पाएगी एमपी में भी कांग्रेस की नैया पार ?

    कहा जा रहा है कि कर्नाटक में कांग्रेस को जीत दिलाने में आक्रामक चुनावी कैंपेन का बड़ा हाथ रहा है और जिस व्यक्ति और टीम ने यह कैंपेन संभाला था अब वही टीम मध्यप्रदेश में भी कांग्रेस की नैया पार लगाने आ रही है?

    भोपाल//  कर्नाटक में कांग्रेस की प्रचंड जीत के कई कारणों में से एक कारण आक्रामक चुनाव कैंपेन की रणनीति और मेनिफेस्टो को माना जा रहा है और इस चुनावी कैंपेन की बागडोर थी सुनील कनूगोलू नाम के व्यक्ति के हाथों में । अब खबर है कि यही सुनील कनुगोलू अपनी टीम के साथ जल्द ही मध्यप्रदेश में कांग्रेस के लिए काम शुरू करेंगें। 

    पार्टी सूत्रों के अनुसार सुनील तनु गोलू के नेतृत्व में 130 सदस्य टीम जल्द ही मध्यप्रदेश में डेरा डालेगी और चुनाव की व्यू रचना तैयार करेगी । प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व सीएम कमलनाथ की टीम से बातचीत हो चुकी है कमलनाथ ने टीम को मध्य प्रदेश के बारे में फीडबैक दे दिया है उसी के आधार पर यह टीम प्रदेश में अपना काम शुरू करेगी।

    कभी प्रशांत किशोर के साथ मिलकर भाजपा के लिए चुनाव की योजना बनाने सुनील को कांग्रेस ने कर्नाटक में चुनावी कैंपेन का काम सौंपा था। सुनील कनुगोलू ने यहां 4 महीने से अधिक समय रहकर चुनावी कैंपेन की प्लानिंग की और उनकी प्लानिंग के हिसाब से ही वहां कांग्रेस ने अपने चुनाव प्रचार को अंजाम दिया ।

    इस टीम ने नारों से लेकर वरिष्ठ नेताओं के भाषण भी तैयार किए थे, जिसमें भाजपा द्वारा कांग्रेस पर किए गए हमलों का जवाब भी होता था। कांग्रेस के बलिदानी इतिहास का इसी टीम ने पूरा खाका तैयार कर बताया था कि किस तरह गांधी परिवार ने देश के लिए कुर्बानी दी। सुनील कनुगोलू 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रशांत किशोर की टीम के सदस्य थे । जिन्होंने भा ज पा और मोदी की पूरी रणनीति तैयार की थी। जिससे पहली बार देश में पूर्ण बहुमत के साथ भाजपा की सरकार बनी थी। 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ के चुनाव प्रचार को इसी टीम ने संभाला था और वहां दूसरी बार भाजपा ने लगातार सरकार बनाई थी । 2022 में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के रणनीतिकार भी यही टीम थी और अब खबर है कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बाद जल्दी यह टीम मध्यप्रदेश आ रही है।

    हर सीट पर होगा फोकस

    कांग्रेस सूत्रों की माने तो मध्यप्रदेश में आने से पहले यह टीम प्रदेश की एक-एक सीट की जानकारी जुटा चुकी है। हर सीट पर सामाजिक और राजनीतिक संतुलन के लिए अलग से रणनीति बनाई जा रही है। बताया जाता है कि 130 सदस्यों वाली सुनील की टीम हर विधानसभा क्षेत्र का दौरा कर सबसे पहले लोगों का मन जानेगी और क्षेत्रीय समस्याओं के बारे में जानकारी जुटाएगी उसके बाद प्रदेश के चुनावी कैंपेन के मुद्दे और नेताओं के भाषण के प्रमुख बिंदु तय किए जायेंगे। इसके अलावा जिलों की रणनीति अलग से तय की जाएगी।

  • अब उधार में मिल सकेगा रेल्वे का टिकट ? जाने क्या है रेलवे की स्कीम .

    अब उधार में मिल सकेगा रेल्वे का टिकट ? जाने क्या है रेलवे की स्कीम .

    भोपाल// ट्रेन मैं यात्रा करने वाले देश के लाखों लोगों के लिए एक अच्छी खबर है ,अब तत्काल पैसे दिए बिना भी यात्रा की जा सकेगी। इसके लिए इंडियन रेलवे कैटरिंग एवं टूरिज्म कॉरपोरेशन  एक नई स्कीम लेकर आया है। रेलवे से मिली जानकारी के अनुसार आईआरसीटीसी ने एक नई स्कीम जारी की है जिसका नाम “बाय नाउ, पे लेटर “है मतलब अभी खरीदिए है और पैसा बाद में दीजिए। इस स्कीम के तहत यात्री ट्रेन में कंफर्म टिकट बुक करा सकते हैं और उसका भुगतान कुछ दिन बाद कर सकते हैं। जानकारी के अनुसार आईआरसीटीसी ने देश की मोबाइल पर पेमेंट कंपनी पेटीएम से एक करार किया है, जिसमें पेटीएम यूजर ट्रेन की टिकट बुक करा सकते हैं । आईआरसीटी की ओर से यह बताया गया है कि रेलवे की ऐप में अब पेटीएम की पोस्टपेड सर्विस को ईनेबल कर दिया गया है। यानी टिकट पहले खरीदो और भुगतान बाद में करो। पेटीएम की पोस्ट पैड सर्विस में यात्री बिना पैसे दिए टिकट बुक करा पाएंगे।

     इस तरीके से करा सकते हैं टिकट बुक

    -टिकट बुक करने के लिए सबसे पहले मोबाइल में आईआरसीटीसी ऐप डाउनलोड कर उसे लॉगिन करें।

     -अब अपना नाम, तारीख, बोर्डिंग स्टेशन सहित अपनी यात्रा की जानकारी को भरें ।

    -अब आपको जिस ट्रेन से यात्रा करना है उसे चुने और बुकिंग के लिए आगे बढ़े ।

    -जब आप पेमेंट सेक्शन में पहुंचेंगे तो यहां पर आपको buy now,pe later का ऑप्शन मिल जाएगा।

    – अब अगली स्टेप में आपको peytm post सेलेक्ट करना होगा ।यहां आपको अपना पेटीएम को लॉगइन  करना होगा।

    – पेटीएम लॉगिन करने के बाद आपको एक वेरिफिकेशन कोड भेजा जाएगा ।

    -आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर जो कोड पहुंचा है उसे भरने के बाद आपके आपका टिकट बुक हो जाएगा।

    30 दिन का समय 60 हजार  की लिमिट

    आईआरसीटीसी ने जो नया प्लान पेश किया है उसमें यात्रियों को टिकट का पैसा लौटाने के लिए 30 दिन का समय दिया जा रहा है, यानी यात्री अपनी सहूलियत के हिसाब से 1 माह के अंदर भुगतान कर सकता है। इतना ही नहीं आईआरसीटीसी की इस स्कीम  से यात्री  ₹60000 तक की टिकट बुक कर सकता है यानी एक यात्री को 60 हजार रूपए की लिमिट पेटीएम के माध्यम से दी जा रही है।

     अन्य यूपीआई एप को भी जोड़ने की तैयारी

    आईआरसीटीसी के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार फिलहाल इस स्कीम में सिर्फ पेटीएम को जगह दी गई है लेकिन बहुत ही जल्दी अन्य यूपीआई ऐप जैसे भीम ऐप,गूगल पे, फोन पे आदि को भी जोड़ा जाएगा, जिससे अधिक से अधिक यात्री इस स्कीम का फायदा उठा सकें।

  • खरीद कर पानी पीने को मजबूर हैं विस्थापित गावों के आदिवासी ! अधिकारियों , ठेकेदार की मिलीभगत से करोड़ों का गोलमाल ?

    खरीद कर पानी पीने को मजबूर हैं विस्थापित गावों के आदिवासी ! अधिकारियों , ठेकेदार की मिलीभगत से करोड़ों का गोलमाल ?

    पुनीत दुबे

    इटारसी।  सतपुड़ा टाइगर रिर्जव क्षेत्र से विस्थापित  किए गए आदिवासी परिवार अपने आप को ठगा से महसूस कर रहे है, विस्थापित किए जाते वक्त इन आदिवासी परिवारों को जो लुभावने सपने दिखाए गए थे आज वे काफूर हो चुके हैं । हालत यह है कि विकास के नाम पर शासन से करोड़ों रूपए मिलने के बाद भी यहां रहने वाले लोगों को पीने के पानी तक की कीमत चुकानी पड़ रही है। ग्राम में पेयजल के लिए नलकूप खनन तो कराए गए लेकिन उनकी गुणवत्ता इतनी खराब थी की कुछ ही दिनों में नलकूपों ने दम तोड़ दिया। 

    अधिकारियों और ठेकेदार ने आदिवासियों से किया छलावा ?

    सतपुड़ा टाइगर रिर्जव क्षेत्र के विस्तारीकरण के तहत विभाग द्वारा रिजर्व क्षेत्र में बसे 4 ग्राम साकई, झालई, नया माना, खामदा को जमानी के पास तिलक सिंदूर मार्ग पर विस्थापित किया गया है । शासन की नीति के अनुसार विस्थापित किए गए ग्रामों में होने वाले सभी निर्माण और विकास कार्यो के साथ ही यहां रहने वाले परिवारों की सुविधाओं से जुड़े सभी कार्य विभाग को करवाना था।

    बताया जाता है कि गांव में रहने वाले लगभग 94 परिवारों की पेयजल व्यवस्था के लिए विभाग ने  सत्ताधारी दल से जुड़े एक प्रभावशाली व्यक्ति को नलकूप खनन का ठेका दिया था। लेकिन इस ठेकेदार दवारा अधिकारियों की मिली भगत के चलते नलकूप इतनी घटिया के खनन कराए गए कि उन्होने कुछ ही दिन में दम तोड़ दिया तथा कुछ नलकूप तो जमीन के अंदर ही समा गए। बताया जाता है कि गांव में लगभग 94 नलकूप का खनन किया गया था, जिसमें से लगभग डेढ़ दर्जन ही चल रहे है, शेष में कुछ बंद है और कुछ जमीन में समा गए।

     बताया जाता है कि नलकूप में घटिया स्तर की केसिंग डाली गई थी, जिसमें कारण अधिकांश नलकूप बंद हो गए। नलकूपो के बैठने के बाद यहां के लोग अब सिर्फ बरसाती फसल के भरोसे ही रह गए है। ग्रामीणों के अनुसार यदि नलकूप चलते तो वह और भी फसल का लाभ ले सकते थे। गांव के अमन, मुकेश, शिवन ने बताया कि इस समस्या को लेकर हमने अनेको बार शिकायत की है, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा।

    निजी नलकूप के भरोसे लोग

    गांव के इस  पेयजल संकट की स्थिति को देखते हुए कुछ लोगों ने  अपने निजी व्यय पर नलकूप का खनन कराया गया है, जिससे लोगों को पीने के लिए पानी उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन इसके लिए ग्रामीणों को राशि का भुगतान करना पड रहा है। जिसमें हर घर से बिजली के बिल भुगतान के लिए यूनिट के हिसाब से राशि का विभाजन किया जाता है।

     कारगुजारी छिपाने में लगे हैं जिम्मेदार

    नया माना गांव के लोगों बताया  कि  गांव में व्याप्त इस समस्या को लेकर उन्होने अनेकों बार वन विभाग के अधिकारियों के सामने अपनी समस्या रखी, लेकिन अधिकारियों ने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया। बताया जाता है कि नलकूप खनन के नाम पर हुई अनियमित्ता को छिपाने के लिए अब वन विभाग के अधिकारियों द्वारा ग्राम में नलजल योजना के तहत काम कराने पर विचार किया जा रहा है।

    रेंजर द्वारा नहीं ली गई सुध

    विस्थापित ग्रामों की देखरेख का जिम्मा वन परिक्षेत्र अधिकारी निशांत डोसी को सौंपा गया है। लेकिन अपने रूतबे के लिए मशहूर साहब यदाकदा ही विस्थापित ग्रामों का हाल जानने ग्रामों में जाते है, शेष समय तो साहब अपने भौंरा वाले घर पर ही आराम फरमाते रहते है। ग्रामीणों का कहना है कि रेंजर भी उनकी बातों को अनुसनुा कर देते है।

    क्या कह रहे हैं अधिकारी              

     बोर के अंदर कई  मोटर  फस गई है,   इस कारण उनके बोर बंद हो गए हैं प्रयास कर उन्हें ठीक  करवायेंगें. 

    संदीप फेलोस ,प्रभारी अधिकारी  सतपुड़ा नेशनल पार्क पचमढ़ी

    ग्रामीणों की व्यथा

    सन दो हजार अट्ठारह से हम इस गांव में आए हैं तभी से मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही जिसमें पीने के पानी की समस्या बड़ी कठिन है यह हमें खरीदना पड़ता है और दूसरे मोहल्ले से पीने का पानी लाना पड़ता है।                   

     चतुर सिंह, नया माना तिलक सिंदूर रोड जमानी