Category: नर्मदापुरम

  • अब पंगत में संगत के जरिए कार्यकर्ताओं को एक जुट करेंगी कांग्रेस ?

    अब पंगत में संगत के जरिए कार्यकर्ताओं को एक जुट करेंगी कांग्रेस ?

    भोपाल//आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी में सूबे के दोनों ही राजनीतिक दलों ने अपने को झोंक दिया है, कोई भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहता। रोज-रोज नई-नई रणनीतियां और दांवपेच सामने आ रहे हैं। सत्ताधारी भाजपा सत्ता हमेशा की तरह इसमें आगे ही दिखाई देती है, इन दिनों सरकारी अमले की मदद से निकाली जा रही विकास यात्राओं के जरिए अपने कार्यकर्ताओं को वह सक्रिय बनाए हुए है । वहींभारत जोड़ो यात्रा के बाद घोषित किया गया हाथ से हाथ जोड़ो अभियान  घोषणा और खबर बन के रह गया।

    कांग्रेस की सबसे बड़ी समस्या संगठन की कमजोरी है। पार्टी की सारी ताकत एकजुटता दिखाने की कोशिश में जाया होती नजर आ रही है राजधानी से लेकर गांव गांव तक पार्टी खेतों में बटी है।

    अब खबर है कि अपने विक्रय कार्यकर्ता को एकजुट करने के लिए पार्टी हर विधानसभा क्षेत्र में कार्यकर्ताओं को एक जगह बैठा कर भोजन कराने की रणनीति अपनाने जा रही है पंगत में संगत वाला यह फार्मूला कांग्रेस 2018 में भी आजमा चुकी है जब इसी तरह के आयोजनों में भोजन से पहले नेता और कार्यकर्ताओं को एकजुटता की कसमें दिलाई गई थी।

    फिलहाल कांग्रेस मान रही है कि आगामी चुनाव में उसे सत्ता मिल सकती है और इसके लिए उसके बिखरे कार्यकर्ताओं और नेताओं का एकजुट होना बहुत जरूरी है। इसलिए वह प्राथमिकता से एक जुटता की बात कर कार्यकर्ताओं में जोश भरने का प्रयास करना चाहती है। उसका मकसद अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं को यह समझना है कि चुनावी मैदान में जन समर्थन को हम तभी अपनी ओर मोड़ सकेंगे जब हम अपने गिले शिकवे भुलाकर एक जुट होंगे। हमें भाजपा को दिखाना होगा कि हमारी एकता को कम न समझा जाए।

    हर छोटे बड़े कार्यकर्ता नेता से होगी बात

    पार्टी सूत्रों के अनुसार अपने पुराने और आजमाए फार्मूले पर लौटी कांग्रेस हर विधानसभा क्षेत्र में मंडल और सेक्टर से लेकर बूथ स्तर तक के नेताओं और कार्यकर्ताओं से बात कर रही है। जहां आपस में विरोधऔर मनमुटाव की स्थिति है वहां कार्यकर्ताओं को एक जगह बैठा कर यही संकल्प दिलाने की तैयारी हो रही है। कांग्रेस की वचन पत्र समिति के सदस्य वीरेंद्र खोंगल ने कहा बताया कि पिछली बार कार्यकर्ताओं की एकजुटता और मेहनत से पार्टी ने सफलता पाई थी और इस बार भी कांग्रेस को मतदाता का आशीर्वाद प्राप्त होगा और वह सरकार बनाएगी। खोंगल कहा कि प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ हर वर्ग को साथ लेकर चलने वाले नेता है उन पर प्रत्येक प्रदेश की जनता को अटूट विश्वास है।

    अब कमलनाथ भी हर विधान का दौरा करेंगे

    इस बार कांग्रेस सरकार बनाने के लिए कोशिश में कोई भी कमी नहीं रखना चाहती है । वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह प्रतिदिन एक विधानसभा क्षेत्र में पहुंचने  का अभियान शुरू कर चुके हैं और अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ भी हर दिन 1 विधानसभा का दौरा करेंगे जहां वे सभा के बाद  मंडल सेक्टर और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ बैठ कर बात करेंगे। पार्टी में काम करने के दौरान उन्हें कहां क्या समस्या आ रही है इस तरह की बातें व कार्यकर्ताओं उसे करेंगे और उनका पक्ष भी सुनेंगे और उनको हल करने का प्रयास करेंगे ।

  • यदि म. प्र.में रहते हैं, तो आप 38,000 रू के कर्जे में हैं ?

    यदि म. प्र.में रहते हैं, तो आप 38,000 रू के कर्जे में हैं ?

    भोपाल // मध्य प्रदेश का हर नागरिक  साल के अंत तक राज्य में चुनाव होने तक 38,000 रुपये से अधिक के ऋण के अधीन होगा। देश के प्रमुख दैनिक टाइम्स ऑफ़ इन्डिया में छपी एक खबर के अनुसार राज्य में औसत प्रति व्यक्ति कर्ज पिछले छह वर्षों में तेजी से बढ़ा है। मार्च 2016 के अंत तक यह 13,853 रुपये होने का अनुमान लगाया गया था, जबकि वित्त वर्ष 2013-14 में यह 10,896 रुपये दर्ज किया गया था। पिछले 20 सालों में सरकार ने करीब तीन लाख करोड़ रूपये का कर्ज लिया हैं .

    वित्त विभाग के अनुसार, 31 मार्च, 2022 तक मप्र का कुल ऋण 295532.9 करोड़ रुपये से अधिक था। प्रमुख हिस्सा बाजार ऋण से है, जो 174373.2 करोड़ रुपये से अधिक है। मुआवजा और अन्य बांड लगभग 7,360.4 करोड़ रुपये, वित्तीय संस्थानों से ऋण 12,158 करोड़ रुपये से अधिक, केंद्र सरकार से ऋण और अग्रिम 44,675.5 करोड़ रुपये थे। अन्य देनदारियों का हिसाब 22,208.9 करोड़ रुपये और केंद्र सरकार के राष्ट्रीय लघु बचत कोषों को जारी की गई विशेष प्रतिभूतियां लगभग 34,756.7 करोड़ रुपये थीं।

    सरकार कुछ दिनों में 4,000 करोड़ रुपए और कर्ज लेने की औपचारिकताएं पूरी कर लेगी। सूत्रों का कहना है कि पिछले साल इसने अलग-अलग अंतराल पर कर्ज लिया और यह प्रक्रिया इस साल चुनाव तक जारी रहेगी।

    राजपत्र में वर्णित मप्र सरकार की वित्तीय एवं बजटीय स्थिति के अनुसार वर्ष 2020-21 में राजस्व प्राप्तियां 146376.78 करोड़ रुपये थी जबकि वर्ष के लिए राजस्व व्यय 164733.01 करोड़ था, जिससे 18356.23 करोड़ का घाटा हुआ।

    वर्ष 2021-22 के संशोधित अनुमान में, राजस्व प्राप्तियां 171,697.2 करोड़ रुपये रही, जबकि राजस्व व्यय लगभग 177,398.4 करोड़ रुपये था, जिससे 5,701.1 करोड़ रुपये से अधिक का घाटा हुआ। दो साल के खर्च में ज्यादा अंतर नहीं आया, लेकिन प्राप्तियां काफी बढ़ गईं।

    सरकार द्वारा लिए गए ऋण का उपयोग राज्य में लागू होने वाले उत्पादक विकास कार्यक्रमों और परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए किया जाता है। यह मुख्य रूप से विकास योजनाओं की लागत वहन करती है। केंद्र से और अन्य स्रोतों से लिए गए ऋणों का उपयोग मुख्य रूप से राज्य के विकास और लाभकारी संपत्तियों के निर्माण जैसे बांधों के निर्माण, परिवहन सेवाओं में सुधार, किसानों, स्थानीय निकायों जैसे तीसरे पक्षों को ऋण प्रदान करने के लिए किया गया था और  बिजली उत्पादन के लिए ऋण देंने में होता है .

  • एक बार फिर क्यों चर्चा में है पारसनाथ पहाड़ी ?

    एक बार फिर क्यों चर्चा में है पारसनाथ पहाड़ी ?

    पारस नाथ पहाड़ी को मुक्त कराने के लिएआदिवासियों ने शुरू की मारंग बुरु बचाओ यात्रा

    जमशेदपुर// झारखंड राज्य के गिरिडीह जिले में स्थित पारसनाथ पहाड़ी जिस पर जैन समाज का पवित्र तीर्थ स्थल समवेत शिखर स्थित है, एक बार फिर चर्चा और विवादों में है ।अब आदिवासी इस पहाड़ी पर अपना दावा कर रहे हैं उनका कहना है कि यह स्थल संथाल आदिवासियों का सर्वाधिक बड़ा पूजा स्थल है जिससे मरांग बुरु यानी ईश्वर का दर्जा प्राप्त है। पर सरकार ने इसे जैन समुदाय को सौंप दिया है।

    जैन समाज पारसनाथ को पर्यटन स्थल बनाए जाने का विरोध कर रहा है उनकी मांग है कि सम्मेद शिखर जी के 50 किलोमीटर के दायरे में मांस और मदिरा का सेवन और बिक्री प्रतिबंधित की जाए वही आदिवासियों का कहना है कि पारसनाथ पहाड़ी की तलहटी में उनके ईश्वर की पूजा होती है जहां जाहेरथान और माझीथान के रूप में 2 पूजा स्थल हैं और सेहराब तथा वंदना पर्व से पहले वहां मुर्गे और बकरियों की बलि दी जाती है ।आदिवासियों का आरोप है की सरकार ने पूरी पारसनाथ पहाड़ी को जैन समाज को सौंप दिया है जो कि उनका मरांग बुरु है। आदिवासियों के नेता सालखान मुर्मू कहना है कि मरांग बुरु आदिवासियों के लिए अयोध्या के राम मंदिर से कम महत्वपूर्ण नहीं है।

     पिछ्ले 17 फरवरी को आदिवासी से निकाल अभियान संगठन ने पारसनाथ पहाड़ी को मुक्त कराने के लिए देशभर में “मरांग बुरु बचाओ यात्रा” की शुरुआत की है । यह यात्रा 1 माह तक चलेगी एएसए के अध्यक्ष सलखान मुरमू कहना है कि संगठन के सदस्य असम बिहार उड़ीसा पश्चिम बंगाल और झारखंड के आदिवासी बहुल वाले 50 जिलों में कलेक्टर कार्यालय के बाहर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करेंगे और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दिए जाएंगे। इन यात्राओं का उद्देश्य पूरे देश का समर्थन प्राप्त करना है।

    10 जनवरी को ‘मरांग बुरु बचाओ’ अभियान के लिए पारसनाथ पहाड़ी पर ‘महाजुटान’ करने का ऐलान किया गया था अपने पुरखों की पारंपरिक धरोहर और आस्था के स्थल से हटाये जाने तथा यहां आकर मांस-मदिरा खाने के विरोध के नाम पर सबके आने पर ही प्रतिबंध लगाने की बात ने आदिवासियों को आक्रोशित कर दिया। उनका कहना था कि यहां कल तक हम इसके घोषित मालिक थे और आज यहां हमारे ही आने जाने पर रोक लगाई जा रही है। इस महाजुटान को संबोधित करते हुए सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा, कल तक हमें विकास के नाम पर विस्थापित किया गया और अब तथाकथित धार्मिक आस्था के नाम पर विस्थापित किया जा रहा है। ऐसा नहीं होने दिया जाएगा।

  • ज़िले की सियासत: चुनावी साल में भाजपा में बढ़ी खेमेबाजी?  

    ज़िले की सियासत: चुनावी साल में भाजपा में बढ़ी खेमेबाजी?  

    इटारसी -नर्मदापुरम // पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम से साफ जाहिर हो रहा है कि जो पार्टी” पार्टी विद डिफरेंस”होने का दावा करती थी, जिसे उसे अपने अनुशासित और संस्कारित पार्टी और कार्यकर्ताओं पर गर्व था ,वह पार्टी अब भीतर से दरकने लगी है। उसमें गुटबाजी और खेमेबाजी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगी है। वैसे पार्टी के नेता इसे नहीं स्वीकार रहे हैं , घटनाओं को सामान्य मतभेद बताकर सवालों से कन्नी काट रहे हैं। पर घटनाएं असलियत बयां कर रही हैं।

     भाजपा जिलाध्यक्ष के विरोध में पदाधिकारियों का इस्तीफा ?

    लगभग 10 दिन पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष माधव दास अग्रवाल के विरोध में उनके ही गृह क्षेत्र पिपरिया- खापाखेड़ा के पदाधिकारियों के इस्तीफे का एक वायरल पत्र चर्चा में रहा। यह कथित पत्र पिपरिया मंडल अध्यक्ष के लेटर पैड पर लिखा गया था। इस पत्र में करीब 25 पदाधिकारियों ने मय नाम हस्ताक्षर किए गए थे ।यह पत्र 18 दिसंबर 2022 का बताया गया। वायरल पत्र में यह आरोप लगाया गया था कि जिला अध्यक्ष की कार्यप्रणाली ठीक नहीं है, इसी वजह से नर्मदापुरम में कांग्रेस का जिला पंचायत अध्यक्ष बना था, जबकि जिला पंचायत में भाजपा के 12 सदस्य और कांग्रेस के मात्र 3 सदस्य ही थे ।इस मामले में प्रदेश संगठन ने जो जांच समिति बनाई थी उसमें भी जिलाध्यक्ष को जिम्मेदार माना गया था। बताया जा रहा है कि जिले के चारों विधायक व सांसद ने भी प्रदेश संगठन से जिलाध्यक्ष की शिकायत की थी, पर जब मामला चर्चा में आया तो पदाधिकारियों ने इस्तीफे से इंकार कर दिया संगठन के लोगों ने इस तरह के किसी भी पत्र के अस्तित्व से इंकार कर दिया। पार्टी की ओर से पत्र को फर्जी बताया है और सच्चाई का पता लगाने थाने में रिपोर्ट करने की बात की पर अभी तक क्या सच्चाई है? और यदि पत्र फर्जी है तो क्या खाने में इसकी शिकायत की गई है इसका पता नहीं चल सका है।

    किसान संघ और भाजपा नेता पीयूष शर्मा का विवाद ?

    कुछ दिन पूर्व भारतीय जनता पार्टी के किसान संगठन भारतीय किसान संघ और भाजपा नेता पीयूष शर्मा के बीच खटपट की खबरें मीडिया की सुर्खियों में रहीं। बताया जाता है कि पीयूष शर्मा ने माखन नगर के ताल केसरी में एक श्रद्धांजलि सभा के दौरान यह कहा था कि “आज किसानों की जो दुर्दशा है, खाद की किल्लत है, आदि के लिए भारतीय किसान संघ जिम्मेदार है” इस बयान से किसान संघ के पदाधिकारी नाराज हो गए .संघ के अध्यक्ष सर्वज्ञ दीवान ने यहां तक कह दिया कि भाजपा नेता ने पूरे किसान समाज का अपमान किया है और उन्होंने नर्मदा पुरम के साथ रास्ते पर भाजपा नेता पीयूष शर्मा के पुतला दहन की घोषणा कर दी।

     इस मामले में पीयूष शर्मा का कहना था कि बात अनौपचारिक थी मेरी बात का गलत मतलब निकाला गया, मेरी मंशा भारतीय किसान संघ भारतीय किसान संघ की भावनाओं को आहत करने की नहीं थी ,यह कहते हुए उन्होंने माफी मांग ली ।शर्मा के माफी मांगने पर किसान संघ ने भी अपना पुतला दहन का कार्यक्रम निरस्त कर दिया

     भाजपा नेताओं में हाथापाई ,पिस्टल तक निकलने की खबरें !!

    पिछले शुक्रवार को जब भाजपा के प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव सर्किट हाउस में कार्यकर्ताओं को चुनाव जीतने का गणित समझा रहे थे, उसी दौरान पार्टी के दो नेता आपस में भिड़ गए नौबत यहां तक आ गई कि एक पक्ष ने पिस्तौल तक निकाल ली। बताया जा रहा है कि भाजपा नेता रेवेंद्र चौहान सर्किट हाउस के एक कमरे में अपने कुछ साथियों के साथ खाना खा रहे थे, उसी दौरान भाजपा के नेता पीयूष शर्मा ने उनसे भोजन स्थल पर जाकर भोजन करने को कहा।इस बात को लेकर दोनों में विवाद हो गया और बात  गाली गलौज हाथापाई और पिस्टल निकलने तक पहुंच गई। दोनों के समर्थक सर्किट हाउस में जमा हो गए। विवाद बढ़ता देख कुछ वरिष्ठ नेताओं ने बीच-बचाव कर मामले को शांत कराया खबर यह भी है कि स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि दोनों गुटों के कार्यकर्ताओं को अलग-अलग वहां वाहनों से वहां से ले जाया गया ।घटना के वक्त प्रभारी मुरलीधर राव भी सर्किट हाउस में थे उन्हें भी घटना की जानकारी लगी । वैसे घटना को लेकर संगठन और नेताओं ने चुप्पी साध रखी है।

    प्रदेश प्रभारी के दौरे में शक्ति प्रर्दशन जैसा माहौल?

    भाजपा के प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव का दौरा भी यह संकेत दे गया कि भाजपा में खेमेबाजी और आपसी प्रतिद्वंद्विता चरम पर है। चुनाव से पहले जमीनी हकीकत का पता लगाने आए प्रदेश प्रभारी के सामने जिलेभर से आए विधायक की टिकट के दावेदारों ने अपनी दावेदारी कुछ-कुछ शक्ति प्रदर्शन जैसी ही की।  प्रदेश प्रभारी श्री राव के आने के पहले ही और आने के दिन अखबारों में एक  गुट विशेष द्वारा बड़े-बड़े स्वागत विज्ञापन प्रकाशित किए गए। उन विज्ञापनों में छपी फोटो की आकार प्रकार को देखकर भी गुटबाजी की चर्चा रही। भाजपा के नए नए नेता डा राजेश शर्मा जो कि नर्मदापुरम से टिकट के दावेदार माने जा रहे हैं ने एक समाचार पत्र में प्रभारी राव पर एक आलेख भी लिखा जिसकी खासी चर्चा रही।

     बताया जाता है कि प्रदेश प्रभारी को जिले में भारी गुटबाजी और खेमे बाजी का एहसास हो गया है, उन्होंने चर्चा के दौरान मिलजुल कर काम करने की सीख नेता और कार्यकर्ताओं को दी हैं, वहीं कई नेताओं ने व्यक्तिगत तौर पर प्रभारी को पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी की जानकारी भी दी।

    सब्ज़ी मंडी दुकानों की जांच और गुटबाजी !

    इटारसी सब्जी मंडी की दुकानों के आवंटन में हुई गड़बड़ियों की फाइल एक बार फिर खुल गई है। कमिश्नर द्वारा जांच के बाद आवंटन रद्द करने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश के बाद लंबे समय तक ठंडे बस्ते में पड़ी रही फाइल के फिर से खुलने के पीछे लोग स्थानीय राजनीति और भाजपा की गुटबाजी देख रहे हैं ।  नगर पालिका चुनाव के दौरान की खींचतान अब रंग लाती दिख रही है । बताया जाता है कि इस आवंटन में भाजपा नेता के सबसे ज्यादा जिम्मेदार होने की बात की जा रही है वह भी विधानसभा की टिकट के दावेदार हैं, और वर्तमान के लोग इस तरह की कोई चुनौती नहीं चाहते ,जबकि उस नेता की सत्ता और संगठन में अच्छी पकड़ बताई जा रही है । उसे भाजपा के सांसद खेमे का भी समर्थन है। लोगों का कहना है कि दूकानों के निर्माण और आवंटन के समय से ही इसमें गड़बड़ी की चर्चा थी, तब जन प्रतिनिधियों ने जांच की मांग क्यों नहीं की?

    कुल मिलाकर भाजपा की अंदरूनी कलह और गुटबाजी  से प्रदेश आलाकमान वाकिफ और परेशान है, पर इसमें कमी आने की संभावना नजर नहीं आ रही है, जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे और टिकट के लिए दावेदारियां बढ़ेंगी । नए पुराने दावेदारों के बीच कड़वाहट बढ़ेगी। देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इस समस्या से कैसे निपटती है और यह भाजपा के चुनाव कितना नुकसान पहुंचाती है?

  • सूबे में एक पुलिस वाले के जिम्मे है 748 लोगों की सुरक्षा

    सूबे में एक पुलिस वाले के जिम्मे है 748 लोगों की सुरक्षा

    भोपाल// मध्य प्रदेश में जिस तरह से आबादी बढ़ी और अपराधों की संख्या बढ़ती जा रही है,पुलिस सुरक्षा पर प्रश्न चिन्ह खड़े हो रहे हैं . नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की वर्ष 2021 की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में कुल चार लाख 75 हजार 918 प्रकरण दर्ज हुए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 42 हजार अधिक हैं। बच्चों नाबालिग से दुष्कर्म और अनुसूचित जनजाति वर्ग पर सर्वाधिक अत्याचार के मामलो में मध्य प्रदेश कई राज्यों से बहुत आगे है लेकिन पुलिस बल उस अनुपात में नहीं बढ़ाया गया। इस कारण प्रदेश में पुलिस बल की बहुत ज्यादा कमी हो गई है।
    प्रदेश पुलिस की डाटा रिपोर्ट में सामने आया है कि प्रदेश में 1956 में एक पुलिसकर्मी पर औसतन 520 लोगों की सुरक्षा का दायित्व था, जो 2022 में बढ़कर 748 हो गया है। मध्य प्रदेश पुलिस के विभिन्न विभागों में स्वीकृत पदों के सापेक्ष 25 से लेकर 40 प्रतिशत तक कम पुलिस बल है। पुलिसकर्मी कम होने के कारण अपराध बढ़ रहे हैं। साथ ही पुलिस बल पर कामकाज का बोझ ज्यादा होने की वजह से फरियादियों को न्याय मिलने में भी देरी होती है।
    रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में प्रति लाख आबादी पर 117 पुलिसकर्मी हैं, जबकि दिल्ली में 480, उत्तर प्रदेश में 123, पंजाब में 236, महाराष्ट्र में 165, हरियाणा में 209 हैं। हालांकि, बिहार और गुजरात से मध्य प्रदेश की स्थिति इस मामले में ठीक है। पूरे देश के औसत की बात करें तो यह आंकड़ा 124 है।
    प्रदेश में पुलिस बल की यह स्थिति तब है जब अनुसूचित जनजाति के लोगों पर देश में सबसे ज्यादा अपराध होने का कलंक प्रदेश के माथे पर लगा है। अनुसूचित जाति के लोगों पर अपराध के सर्वाधिक मामले में भी मध्य प्रदेश देश में तीसरे नंबर पर है। यह जानकारी नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की 2021 की रिपोर्ट के अनुसार है।

    इनका कहना है

    पुलिस की भर्ती लगातार चल रही है। अभी आरक्षक के छह हजार पदों को भरा गया है। इन्हें मुख्यमंत्री जल्द प्रमाण पत्र देने वाले हैं। सात हजार पदों पर और भर्ती की जाएगी। यह प्रक्रिया लगातार चलती रहेगी।

    डा. नरोत्तम मिश्रा गृह मंत्री, मध्य प्रदेश

  • चुनाव तैयारियां – भाजपा -कांग्रेस में बूथ तक पहुँचने की कवायद तेज

    चुनाव तैयारियां – भाजपा -कांग्रेस में बूथ तक पहुँचने की कवायद तेज

    भोपाल//दस माह बाद मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और भाजपा दोनों ही अपनी जीत को पक्का करने के लिए चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है .तैयारियों में दोनों ही दल एक दूसरे का अनुसरण और रणनीति की काट ढूंढते नजर आ रहे हैं. विशेष बात यह है कि दोनों ही दल इस बार बूथ स्तर तक एप्रोच कर रहे हैं और इसके लिए कोई कसर छोड़ते भी नजर नहीं आ रहे हैं .भाजपा डिजिटल बूथ की बात कर रही है तो कांग्रेसी उसका मुकाबला इंटरनेट मीडिया टीम और बूथ वार जानकारी जुटाने की तैयारी में है

    भाजपा ने शुरु किया स्मार्ट बूथ योजना पर काम

    भाजपा ने स्मार्ट बूथ पर योजना पर काम शुरू किया है। इसके अनुसार अब बूथ स्तर के कार्यकर्ता को भी नहीं पहचान मिल सकेगी पार्टी प्रदेश के 65 हजार बूथ अध्यक्ष, महामंत्री और बूथ एजेंट को पार्टी संगठन में विशेष तवज्जो देने जा रही है।

      बीजेपी चुनाव आभियान को पूरी तरह से तकनीकी बनाती एलजी रही है। पार्टी हर बूथ को डिजिटल बनाकर नेतृत्व करने वाले अध्यक्ष महामंत्री और एजेंट सहित पन्ना प्रमुखों को अलग विशेष कोड यानी पहचान दी जाएगी, इससे विशेष लाभ यह होगा कि कोड के जरिए ये पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से भी सीधा संपर्क कर सकेंगे। पार्टी मानती है कि इससे संगठन में नए नेतृत्व को उभरने का अवसर मिल सकेगा, वहीं चुनावों में बूथ स्तर पर मजबूती से जीत आसान होगी। मध्यप्रदेश में संगठन ने बूथ स्तर पर पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का डिजिटल डेटा तैयार कर लिया है ।

    पन्ना की जगह होंगे डिजिटल पेज

     पिछ्ले कुछ चुनावों से मतदाता तक पहुंच बनाने के लिए बी जे पी पन्ना प्रमुख की रणनीति पर चल रही है अब यह पन्ना डिजिटल पेज में बदल जाएगा। बूथ समिति के सदस्यों से डिजिटल बूथ की भौगोलिक एवं सामाजिक परिस्थितियों की जानकारी भी ली जा रही है। केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं के हितग्राहियों से संवाद का प्रशिक्षण भी उन्हें दिया गया है।

     बूथ कार्यकर्ताओं को अहमियत बढ़ेगी।

    भाजपा पिछले कुछ वर्षों से वृहद स्तर पर सदस्यता अभियान के बाद खुद को विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक दल बताती है इसका श्रेय किसी बड़े चेहरे या पदाधिकारी के बजाय लाखों कार्यकर्ताओं को दिया जाता है ,लेकिन उन्हें अलग से पहचान की कमी महसूस होती रही है।

     स्मार्ट कार्ड दिए जाएंगे

     बूथ के तीन बीएलए जिन्हें संगठन में त्रिदेव की संज्ञा दी गई है उन्हें स्मार्ट कार्ड दिए जाएंगे ।इस पर यूनिक नंबर के साथ पूरा परिचय होगा। पन्ना प्रमुख को भी विशिष्ट पहचान पत्र मिलेगा पार्टी ने बूथ विस्तारक योजना के तहत बूत समिति का अंकन रजिस्टर और संगठन एप में किया है। इसमें बूथ समिति बूथ अध्यक्ष बूथ महामंत्री और सहित पूरी समिति और पन्ना प्रमुख समिति के साथ मतदाताओं के नाम भी दर्ज है।

    यह योजना सिर्फ प्रदेश में ही नहीं बल्कि पूरे देश में लागू करने जा रही है।

    कांग्रेस इंटरनेट मीडिया टीम तैयार करेगी

    भाजपा की इस रणनीति  को टक्कर देने के लिए कांग्रेसी भी इंटरनेट मीडिया इंटरनेट मीडिया की टीम तैयार कर रही है, इसमें कांग्रेस का सबसे ज्यादा जोर भाजपा के दावों का जवाब देने को लेकर रहेगा। राहुल गांधी की मध्य प्रदेश में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी कांग्रेस ने यही रणनीति अपनाई थी ।यात्रा के दौरान भाजपा नेताओं की तरफ से जो भी बयान आए थे कांग्रेस ने उसका तुरंत प्रत्युत्तर दिया था यही रणनीति विधानसभा चुनाव में रहेगी। चुनाव के दौरान दोनों ही बड़े दलों के राष्ट्रीय पदाधिकारियों के भी दौरे होंगे , इस दौरान भाजपा नेताओं द्वारा कोई भी आरोप लगाया जाता है तो इंटरनेट मीडिया टीम पूरे तथ्यों के साथ अपना पक्ष इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित करेगी इस टीम पर पार्टी के बड़े-बड़े नेताओं के भाषण को भी इंटरनेट मीडिया पर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी रहेगी प्रदेशभर के लिए यह दायित्व प्रदेश कांग्रेस कमेटी की तरफ से अभय तिवारी को दिया गया है मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष केके मिश्रा ने कहा कि हम इंटरनेट मीडिया की टीम तैयार कर रहे हैं वार्ड और बूथ स्तर तक टीम बनाने का काम चल रहा है

    95% मतदाता इंटरनेट पर 

    पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ ने पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से कहा है कि पिछले विधानसभा चुनाव में मात्र 25% लोग ही इंटरनेट मीडिया पर थे पर अब 95% लोग इसका उपयोग कर रहे हैं ऐसे में 2023 के चुनाव में इंटरनेट मीडिया को ज्यादा से ज्यादा उपयोग करने की जरूरत है उनके कहने पर पार्टी के नेता इंटरनेट मीडिया में अपने फॉलोअर्स बढ़ाने में भी लगे हैं।

    जातीय समीकरण साधने बूथवार जानकारी जुटाएगी कांग्रेस

    प्रदेश कांग्रेस ने सभी वर्गों में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए नए प्रकोष्ठ बनाने के साथ ही मतदान केंद्र पर जातीय समीकरण साधने की कार्य योजना बनाई है  कई बड़े नेताओ और प्रकोष्ठों को इसकी जिम्मेदारी दी गई है ।  मतदान केंद्र वार जानकारी जुटाई जा रही है इसमें केंद्र पर कुल मतदाता, जातिगत समीकरण ,प्रभावशाली व्यक्ति, पिछले चुनाव परिणाम आदि की जानकारी रहेगी। इसके आधार पर पार्टी मत का मतदान केंद्र स्तर पर संचालित की जाने वाली गतिविधियां निर्धारित करेगी। प्रभावशाली व्यक्तियों से प्रदेश स्तर के पदाधिकारी सम्पर्क स्थापित करेंगें। विभिन्न समाजों के अलग-अलग सम्मेलन किए जाएंगे पार्टी के महामंत्री जेपी धनोपिया का कहना है कि नए प्रकोष्ठ का गठन करके विभिन्न समाजों को महत्व देने का काम किया जा रहा है चुनाव के दृष्टिगत सभी स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं पूरे प्रदेश संभाग और जिला स्तर पर बैठक और सम्मेलन भी आयोजित किए जाएंगे इसका दायित्व अनुसूचित जाति और जनजाति विभाग को दिया गया है ।पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव को सामाजिक संगठनों से तालमेल बनाने की जिम्मेदारी भी दी गई है।

  • प्रमोद तिवारी हाथ से हाथ जोड़ो अभियान के पर्यवेक्षक बनाए गए।

    प्रमोद तिवारी हाथ से हाथ जोड़ो अभियान के पर्यवेक्षक बनाए गए।

    भोपाल // कांग्रेस के हाथ से हाथ जोड़ो अभियान के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने प्रमोद तिवारी को मध्यप्रदेश कांग्रेसका पर्यवेक्षक बनाया है साथ ही प्रदेश के नेता अरुण यादव को छत्तीसगढ़ का पर्यवेक्षक ने किया है अभियान 26 जनवरी से प्रारंभ होगा। प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारियों ने बताया कि हाथ से हाथ जोड़ो अभियान के अंतर्गत पार्टी एक माह तक मतदान केंद्र स्तर पर पर यात्रा निकाली गई इसमें गांव गांव में घर-घर संपर्क किया जाएगा और भारत जोड़ो यात्रा के उद्देश्य के बारे में बताने के साथ ही केंद्र व राज्य सरकारों की असफलताएं बताई जाएंगी मतदान केंद्र पर संपर्क अभियान चलेगा जिला स्तर पर सभाएं होंगी और अंत में राज्य स्तर पर महारैली का आयोजन किया जाएगा इस दौरान युवा कांग्रेसी भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के द्वारा विकासखंड स्तर पर बाइक रैली निकाली जाएगी पार्टी महिलाओं से जुड़ा घोषणा पत्र भी जारी करेगी और राज की राजधानी में महिला मार चुका इसमें पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा शामिल होंगी।

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  • नए साल में कांग्रेस संगठन में नया बड़ा बदलाव प्रस्तावित?

    नए साल में कांग्रेस संगठन में नया बड़ा बदलाव प्रस्तावित?

    भोपाल // मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए 1 वर्ष से भी कम समय बचा है चुनाव के लिए संगठन को तैयार करने नए साल में मध्यप्रदेश कांग्रेस में व्यापक स्तर पर परिवर्तन होने की संभावना है। प्रदेश से लेकर जिला और ब्लॉक स्तर तक पदाधिकारी बदले जाएंगे । प्रदेश कांग्रेस ने इसकी प्रारंभिक तैयारी कर ली है ,उसमें उन पदाधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर संगठन की जिम्मेदारियों से मुक्त किया जाएगा जिन्हें चुनाव लड़ाया जाना है ,वही निष्क्रिय पदाधिकारियों की छुट्टी की जाएगी इसको लेकर प्रदेश कांग्रेश अध्यक्ष कमल नाथ केंद्रीय संगठन से भी चर्चा कर चुके हैं।

    कांग्रेस में राष्ट्रीय स्तर पर संगठन चुनाव के बाद से ही ब्लॉक स्तर तक पदाधिकारियों की जिम्मेदारी में बदलाव प्रस्तावित है इस को लेकर संगठन ने जिला प्रभारी और सह प्रभारियों के माध्यम से जिला व ब्लॉक इकाइयों के प्रदर्शन पर आधारित रिपोर्ट भी तैयार करवा ली है। कमलनाथ प्रभारियों के साथ बैठक करके जानकारी ले चुके हैं केंद्रीय संगठन ने परिवर्तन के लिए हरी झंडी दे दी है ।अब प्रदेश संगठन की ओर से अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी को प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा उनमें उन पदाधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर संगठन के दायित्व से मुक्त किया जाएगा जो चुनाव लड़ने की इच्छा जता चुके हैं उनके स्थान पर ऐसे नेताओं को मौका दिया जाएगा जो संगठन का काम करना चाहते हैं। जिला प्रभारी और संगठन मंत्री की नियुक्ति में इनका ध्यान रखा गया है।

     प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष व संगठन प्रभारी चंद्र प्रभाष शेखर का कहना है कि नए साल में संगठन स्तर पर परिवर्तन प्रस्तावित है उसको लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष संगठन पदाधिकारियों को तैयारी करने के निर्देश भी दे चुके हैं। जनवरी में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ बैठक करके इसे अंतिम रूप देंगे वहीं कुछ अन्य जिला एवं ब्लाक इकाइयों के अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारियों को प्रदर्शन के आधार पर बदला जाना है ग्वालियर चंबल महाकौशल संभाग में परिवर्तन होने की संभावना जताई जा रही है सभी सहयोगी संगठन से कहा गया है कि ऐसे पदाधिकारी जो चुनाव लड़ना चाहते हैं उन्हें काम करने के लिए मुक्त किया जाए ताकि संगठन की गतिविधियां प्रभावित ना हो।

  • क्यों संकट में हैं वनराज ? सूबे में एक साल में 32 बाघों की मौत

    क्यों संकट में हैं वनराज ? सूबे में एक साल में 32 बाघों की मौत

    भोपाल // पिछले दिनों पन्ना टाइगर रिजर्व में विक्रमपुर गाँव के पास  एक युवा बाघ के शव के फंदे में लटके मिलने की हैरान करने वाली घटना सामने आने से एक बार फिर टाइगर स्टेट में बाघों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गये हैं . मध्य प्रदेश बाघों की मौत के मामले में भी देश में पहले स्थान पर है । राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ( नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथारिटी ) के आंकड़ों के अनुसार पिछले पिछले एक साल के दौरान पूरे भारत में 99 टाइगरों की मौत हुई हैं, जिनमें सबसे ज्यादा 32 मौतें मध्य प्रदेश में दर्ज की गई हैं, मध्य प्रदेश में नवंबर के महीने तक 31 बाघों की मौत हुई थी, जबकि आज पन्ना टाइगर रिजर्व में मिले बाघ के शव के बाद यह आंकड़ा 32 पहुंच गया। पहली मौत मादा टाइगर की 8 जनवरी 2022 को बांधगढ़ में हुई थी। सबसे ज्यादा 66 टाइगरों की मौत बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में दर्ज की गई हैं। ऐसे में बाघों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बता दें कि पिछले साल ही दोबारा से मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा मिला था, लेकिन टाइगरों की मौत के मामले में भी मध्य प्रदेश सबसे आगे है।

    जबकि बाघों की मौत  के मामले में देश में दूसरे नंबर के राज्य कर्नाटक में 14 और तीसरे नंबर पर रहे उत्तराखंड में इस वर्ष अब तक छह बाघों की मौत हुई है। यदि बाघों की मौत के आंकड़े देखें, तो पिछले चार साल में प्रदेश में 134 बाघों की मौत हुई है। इनमें से 35 मामले शिकार के हैं। जबकि आपसी लड़ाई, कुएं में गिरने या सड़क दुर्घटना में 80 बाघ मरे हैं।

    सुरक्षा नाकाफी ?

    मध्य प्रदेश में बाघों की सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। संरक्षित क्षेत्रों में बाघों की संख्या बढ़ी है पर सुरक्षाकर्मी नहीं बढ़ाए गए। बल्कि स्वीकृत पदों से कम कर्मचारी पदस्थ हैं। इस कारण पार्क और उससे सटे क्षेत्र में प्रभावी गश्त नहीं हो पा रही है। यही कारण है कि हर साल बाघों-तेंदुओं का शिकार होता है।

    इस साल अब तक छह बाघों के शिकार की जानकारी सामने आई है। वहीं बाघों की बढ़ती संख्या भी सुरक्षा इंतजामों पर भारी पड़ रही है। बाघ, संरक्षित क्षेत्रों से बाहर निकल रहे हैं। जिससे उनकी सुरक्षा करना मुश्किल हो रहा है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 के बाघ आकलन के अनुसार मध्य प्रदेश में 526, कर्नाटक में 524 और उत्तराखंड में 442 बाघ हैं।

    मवेशियों के शिकार के कारण निशाने पर आते हैं बाघ

    बस्ती से सटे जंगलों में सक्रिय बाघों का सबसे अधिक शिकार होता है। दरअसल, वे मवेशियों का शिकार करने के आदी हो जाते हैं। इसमें ज्यादा मेहनत भी नहीं लगती है। ऐसे में मवेशी मालिक बाघ को जहर देकर, करंट लगाकर या फंदे में फंसाकर मार देते हैं। हालांकि ज्यादातर मामलों में शिकारी शाकाहारी वन्यप्राणियों के लिए करंट और फंदे लगाते हैं, जिनमें कई बार बाघ या तेंदुआ भी फंस जाते हैं।

    अब ड्रोन से भी निगरानी

    शिकार की घटनाओं को रोकने और संरक्षित क्षेत्र में अनाधिकृत प्रवेश रोकने के लिए प्रदेश के सभी छह टाइगर रिजर्व में ड्रोन से निगरानी शुरू कर दी गई है। पन्ना, बांधवगढ़, कान्हा, पेंच, सतपुड़ा और संजय दुबरी टाइगर रिजर्व में इससे शिकार की घटनाएं कम हुई हैं पर पूरी तरह से रोक नहीं लगी है।

     बाघों के संरक्षण के लिए केंद्र सरकार ने बाघ अभयारण्य बनाए हैं और भारत में कुल 53 बाघ संरक्षित क्षेत्र हैं। हालांकि मरने वाले बाघों का कुल आंकड़ा अभी बीते साल अक्तूबर तक दर्ज 104 तक पहुंच गया था। बाघों का शिकार की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों तक आना भी उनकी मौत की वजह बना है, बीते दिनों ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जहां बाघ आबादी वाले क्षेत्रों में आया है और उससे लोगों को नुकसान हुआ है।