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  • सूबे में कई नए राजनैतिक खिलाड़ी मैदान में ! भाजपा- कांग्रेस की नींद उड़ी..?

    सूबे में कई नए राजनैतिक खिलाड़ी मैदान में ! भाजपा- कांग्रेस की नींद उड़ी..?

    भोपाल//  सूबे में साल के अंत तक होने वाले चुनावों में भाजपा या कांग्रेस ही नहीं अन्य राजनीतिक दल भी चुनावी मैदान में ताल ठोकने की तैयारी में है इनमें से कुछ नए हैं तो कुछ पुराने हैं ।
    यह नए खिलाड़ी दोनों ही पार्टी की नींद उड़ा सकते हैं मध्य प्रदेश कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी वरद मूर्ति मिश्रा की वास्तविक भारत पार्टी इस बार पहली बार मैदान में उतरेगी ।
    पिछले रविवार को राजधानी में इसका एक सम्मेलन हुआ जिसमें इस पार्टी ने विधानसभा चुनाव के लिए 2 प्रत्याशियों की घोषणा तक कर दी। वरदमूर्ति ने जबलपुर जिले के बरगी और नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव विधानसभा सीट से उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया। गोटेगांव से नरसिंहपुर में सपा के जिलाध्यक्ष रहे हरिगोविंद झरिया , तो बरगी से भाजपा के अंत्योदय प्रकोष्ठ के जिला सह संयोजक रहे आशीष पटेल को उम्मीदवार बनाया गया है। श्री मिश्रा का कहना है कि उनकी पार्टी के 28 उम्मीदवार तय हो चुके हैं और अगले महीने तक आधिकारिक तौर पर सूची जारी कर दी जाएगी ।
    वहीं कथावाचक संत देव मुरारी बापू मध्य प्रदेश से राजनीति में किस्मत आजमाने की तैयारी में है । उन्होंने राष्ट्रव्यापी जनता पार्टी नाम से राजनीतिक दल का गठन किया है । वे प्रदेश की 230 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं।  वैसे 2022 में यूपी चुनाव में उन्होंने कुछ उम्मीदवारों को उतारा था पर बाद में भाजपा से समझौता होने से पार्टी ने भाजपा को समर्थन दे दिया था।
    सोमवार को विंध्य के चर्चित भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी ने नई पार्टी का ऐलान किया है। उसका नाम विंध्य पार्टी होगा। उन्होंने बताया कि विंध्य पार्टी के पंजीयन की प्रक्रिया लगभग पूरी हो गई है ,15 तारीख तक पार्टी का पंजीयन भी हो जाएगा। उन्होंने विंध्य के लोगों से आवाहन करते हुए कहा कि वे विधानसभा चुनाव के लिए तैयार हो जाएं। विंध्य के लोग ही इस पार्टी से चुनाव लड़ेंगे। त्रिपाठी ने क्षेत्र की30 सीटों पर अपनी दावेदारी जताई है।
    राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल कर चुकी आम आदमी पार्टी इस बार बड़ी चुनौती है। कुछ दिन पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल  भोपाल में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ एक रैली कर चुनावी बिगुल फूंक चुके हैं और  प्रदेश की सभी 230 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान भी कर चुके हैं। फिलहाल प्रदेश के कई इलाकों में स्थानीय  निकाय चुनावो में वे अपने प्रदर्शन से उत्साहित हैं।
    इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी भी सक्रिय हो गई है। ओवैसी की पार्टी धीरे-धीरे सक्रियता बढ़ा रही है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के अलावा फरवरी में भीम आर्मी ने आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर रावण के नेतृत्व में शक्ति प्रदर्शन कर प्रदेश की राजनीति में अपनी दस्तक देने का प्रयास किया है। पिछले चार-पांच महीनों में प्रदेश की राजधानी भोपाल में तीन बड़े राजनीतिक आयोजन हुए हैं। 
    कौन कितना असरदार?
    इन नए चुनावी दावेदारों में कौन कितना असरदार रहेगा कौन किसको कितना फायदा पहुंचाएगा या कौन किसका कितना नुकसान कराएगा यह भी कहना मुश्किल है।

    जहां तक चुनावी आंकड़ों और गणित का सवाल है यह तय है कि  साल 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के बीच जीत हार में सीटों का अंतर 5 था, ऐसे आज  छोटे और नए राजनीतिक दल प्रदेश की सियासी समीकरण को काफी हद तक प्रभावित करेंगे, और चाहे खुद न जीत सकें पर जीत हार का गणित बना या बिगाड़ देंगे। राजनीतिक पंडितों मुताबिक, इस साल प्रदेश की सरकार में बनाने में छोटे-छोटे राजनीतिक दलों की अहम भूमिका रहेगी।
    नए सियासी समीकरण का आगाज
    14 अप्रैल को डॉक्टर बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर उनके जन्म स्थान महू (इंदौर) में आजाद समाज पार्टी, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और समाजवादी पार्टी एक बड़ा आयोजन करने वाली हैं। इस कार्यक्रम के दौरान मंच पर समाजवादी पार्टी नेता और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर रावण एक मंच पर दिखाई देंगे।
    क्या कहते हैं आंकड़े?
    230 विधानसभा सीटों वाली मध्य प्रदेश में सामान्य वर्ग के लिए 148, अनुसूचित जनजाति के लिए 47 और अनुसूचित जाति के लिए 35 सीटें आरक्षित हैं। राज्य में करीब ओबीसी यानी अन्य पिछड़ा वर्ग मतदाता 48 फीसदी, अनुसूचित जनजाति वोटर 17 फीसदी और अनुसूचित जाति राज्य की आबादी का 21 फीसदी है। ऐसे में यदि इन जातियों  का गठजोड़ छोटे दल निकाल लेते तो भाजपा, कांग्रेस का खेल बिगड़ने की संभावनाएं हैं। 
    ,राज्य में पिछले कुछ महीनों से ओबीसी आरक्षण का मुद्दा गर्म है। इससे जुड़े कुछ मामले अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। आरक्षण के मुद्दों को लेकर ओबीसी वर्ग के मतदाता नाराज दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में यदि इन छोटे राजनीतिक दलों को ओबीसी का सहयोग मिल जाता है तो देश की राजनीतिक में नया भूचाल देखने को मिल सकता है।  छोटे दलों की शुरूआती रैली के मुताबिक ये दल चुनाव मैदान में दलित आदिवासी और ओबीसी गठजोड़ बना कर उतर सकते हैं। ऐसे में यदि ये गठबंधन हुआ तो दलित आदिवासी सीटों के मामले में बुंदेलखंड की 25, ग्वालियर, चंबल 16 और विंध्य की 12 सीट समेत महाकौशल के करीब 35 सीटों पर नए राजनीतिक आंकड़े नजर आएंगे। साल 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 114 सीटें जीतकर 40.09 फीसदी वोट हासिल किए थे और भाजपा ने 109 सीटों पर जीतकर 41 फीसदी वोट हासिल किए थे। वहीं राज्य में निर्दलीय दलों ने 4 सीटें जीतीं थी। इनका वोट प्रतिशत 5.8 था। इसमें बहुजन समाज पार्टी ने 2 सीट जीतकर 5 फीसदी वोट हासिल किए थे। हालांकि गोंडवाना गणतंत्र पार्टी एक भी सीट हासिल नहीं कर पाई थी लेकिन उस दौरान पार्टी का वोट प्रतिशत 1.3 था। इस चुनाव में नोटा को 1.4 फीसदी मत हासिल हुए थे। लेकिन, इन छोटे दलों ने 7 सीटों को जीतकर कुल 13.9 फीसदी वोट हासिल किए थे। 2018 के चुनाव में अनुसूचित जनजाति की रिजर्व 47 सीटों पर कांग्रेस ने 30 पर अपना कब्जा जमाया। जबकि बीजेपी महज 16 सीटों पर जीत हासिल कर सकी। वहीं अनुसूचित जाति की सीटों की बात करें तो 35 रिजर्व सीटों में से भाजपा ने 18 और कांग्रेस 17 पर विजयी हुई।
    मध्य प्रदेश में एससी और एसटी सीटों का प्रभाव बहुत ज्यादा है। उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे 14 जिलों में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी का जनाधार दिखाई देता है। सूबे के सतना, छतरपुर, टीकमगढ़, रायसेन, रीवा, दमोह, पन्ना, बालाघाट, सीधी, अशोकनगर, निवाड़ी में समाजवादी पार्टी का अच्छा खासा दबदबा है। वहीं बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशियों ने भिंड, ग्वालियर पूर्व, रामपुर बघेलान में 50 हजार से अधिक वोट हासिल किए थे। इसके अलावा देवताल, पौहारी, जोरा और सबलगढ़ में पार्टी को 40 हजार से अधिक वोट मिले थे। वहीं सतना, लहार, चंदेरी, गुन्नौर, अमरपाटन, सिमरिया और पथरिया में बसपा प्रत्याशी ने 30 हजार से अधिक वोट मिले थे। साफ है यदि छोटे दल इस साल विधानसभा चुनाव में एक साथ मिलकर चुनाव लड़ते है तो राज्य की दो प्रमुख पार्टी को इसका नुकसान हो सकता है।  

  • 5 एकड़ से कम भूमि वाले किसानों का फसल बीमा प्रीमियम सरकार भरेगी, कृषि मंत्री कमल पटेल ने की घोषणा

    5 एकड़ से कम भूमि वाले किसानों का फसल बीमा प्रीमियम सरकार भरेगी, कृषि मंत्री कमल पटेल ने की घोषणा

    हरदा// चुनावी तैयारियों के इस दौर में भाजपा कांग्रेस हर वर्ग व तबके के मतदाता को लुभाने के लिए तरह तरह की नई नई घोषणाएं कर रही हैं, पिछ्ले दो दिनों में   किसानों को लुभाने के लिए दोनों ही दलों ने एक एक लुभावनी घोषणा की है।

    पहले बात कांग्रेस की शुक्रवार को को कांग्रेस के किसान सम्मेलन में पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस सरकार आई तो किसानों का गेहूं ₹3000 प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा।

    वहीं शनिवार को प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल ने हरदा के सर्किट हाउस में पत्रकारों से चर्चा के दौरान यह घोषणा की कि प्रदेश में 5 एकड़ से कम भूमि वाले लघु एवं सीमांत किसानों की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसल बीमा की प्रीमियम राशि अब प्रदेश सरकार भरेगी।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक करोड़ तीन लाख किसान है लेकिन सिर्फ 25 फ़ीसदी किसान ही फसल बीमा करवा पाते हैं 24 लाख 23 हजार किसानों ने फसल बीमा करवाया है फसल बीमा का प्रीमियम भरने का काम सरकार द्वारा विधानसभा चुनाव से पहले किया जाएगा अभी फसल बीमा के तहत किसानों के लिए रबी सीजन में 1.35 फ़ीसदी प्रीमियम किसानों से ही ली जाती है खरीफ की फसल का बीमा कराने के लिए किसानों को 2 फ़ीसदी प्रीमियम देना पड़ता है बाकी का केंद्र एवं राज्य सरकार चुकाती है।

  • इस साल नहीं होगी खाद की कमी? चुनावी साल में सरकार तैयार !

    भोपाल//  हर साल बुवाई के मौसम में खाद की किल्लत के चलते सरकार को किसानों का गुस्सा झेलना पढ़ता है, चूंकि इस साल नवंबर में चुनाव है सरकार किसानों की नाराजगी का जोखिम नहीं उठाना चाहती । इसलिए पहले से व्यवस्था में जुट गई है। कहा जा रहा है कि इस साल किसानों को पर्याप्त खाद मिल सकेगी ,यहां तक की इस बार किसान अपनी सुविधा के अनुसार पहले भी खाद ले सकेंगे।

    खबरों के मुताबिक सूबे में 11 लाख टन खाद का अग्रिम भंडारण किया जा रहा है। सरकार ने यूरिया, डीएपी, एनपीके दिए जाने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा था, केंद्र सरकार ने प्रस्ताव को सहमति दे दी है और भंडारण के लिए खाद मिलना भी शुरू हो गया है । प्रदेश सरकार मई तक भंडारण पूरा लेगी।

    विपक्ष को नहीं देना चाहते राजनीति का मौका !

    दरअसल, हर साल बुवाई सीजन में प्रदेश में खाद की कमी को लेकर किसानों के बीच मारामारी मचती है। खाद के लिए गोदामों पर लंबी लाइन लगती हैं। परेशान किसान आंदोलनों और प्रदर्शन पर उतर आते हैं। इससे विपक्ष को सरकार को घेरने का मौका मिल जाता है। यह स्थिति रबी सीजन में अक्टूबर और दिसंबर के बीच ज्यादा बनती है। पिछले स बुवाई सीजन में ग्वालियर चंबल क्षेत्र में कानून व्यवस्था की स्थिति निर्मित हो गई थी। प्रदेश में कई जगह गोदाम लूटने जैसी घटनाएं भी हुई। इस चुनावी साल में सरकार विपक्ष को कोई मौका नहीं देना चाहती इसलिए उसने अपनी तैयारी दुरुस्त करने का फैसला किया है।

  • सूबे में टूटने लगी जुबां की मर्यादा ! कोई किसी को कह रहा पागल तो कोई कह रहा गुंडा !

    सूबे में टूटने लगी जुबां की मर्यादा ! कोई किसी को कह रहा पागल तो कोई कह रहा गुंडा !

     भोपाल//सूबे विधानसभा चुनाव निकट आते जा रहे हैं, और राजनीतिक दलों के नेताओं की जुबानी जंग तेज हो गई है , कई बार तो बयान बाजी सामान्य मर्यादाओं को लांघती दिखाई देने लगी है ,और जैसे-जैसे चुनाव की सरगर्मियां और बढ़ेगी, इसके बढ़ने का अनुमान है। 2 दिन पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राहुल गांधी को स्वार्थी बताते हुए कांग्रेस की विचारधारा को गद्दार कह दिया था, वहीं उस पर पलटवार करते हुए दिग्विजय सिंह ने एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि क्यों ना हमें इन्हे गद्दार कहें।

    फिलहाल नया मामला मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का है। शुक्रवार को शिवराज सिंह ने कमलनाथ को पागल कह दिया तो कमलनाथ ने सीएम को सड़क छाप गुंडा और कुंठित व्यक्ति कह डाला।

    कुछ यह कहा मुख्यमंत्री ने सीएम शिवराज सिंह ने

     शुक्रवार को स्मार्ट पार्क के पौधरोपण के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘कमलनाथ चुनाव के पहले कह रहे थे कि मुसलमानों के पोलिंग बूथ पर 90 परसेंट वोट क्यों नहीं डालते ? यह वीडियो सारी दुनिया ने देख। वे मुसलमानों को वोट बैंक मानते हैं। क्या वोट के लिए अब धर्म और जातियों में बांट कर लोगों को भड़काया जाएगा ? वो फिर( कमलनाथ ) एक समुदाय से कह रहे हैं कि प्रदेश में दंगे भड़क रहे हैं। मैं पूछता हूं कहां दंगे भड़क रहे हैं?लेकिन वोट की भूख ने आप( कमलनाथ) इतने पागल हो गए हैं कि मध्यप्रदेश को वैमनस्यता की खाई में झोंकना चाहते हैं।’

    कमलनाथ ने भी उसी शैली में दिया जवाब !

    सीएम शिवराज के बयान पर कमलनाथ ने जवाब देते हुए कहा कि  ‘शिवराज जी कुछ दिन पहले आप मेरा अंत करना चाहते थे और आज आपने मुझे पागल कहा है। पूरी दुनिया देख रही है कि मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री कैसी सड़क छाप गुंडों की भाषा बोल रहा है। उसके भीतर की सारी सभ्यता और संस्कार समाप्त हो चुके हैं। मुझे अपने अपमान की फिक्र नहीं है, लेकिन, दुख इसका है कि मध्य प्रदेश जैसे महान राज्य के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर ऐसे कुंठित विचारों वाला व्यक्ति बैठा है। ये प्रदेश की आठ करोड़ जनता का अपमान है। आप का षड्यंत्र कामयाब नहीं होगा।’

    नाथ का वीडियो सामने आने के बाद शुरू हुई बयान बाजी!

     दरअसल बुधवार को छिंदवाड़ा में रोजा इफ्तार के कार्यक्रम में शामिल हुए कमलनाथ का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि यह लोग (भाजपा वाले) पूरे देश में दंगे फसाद कराना चाहते हैं. आप लोग छिंदवाड़ा संभालिए, मुझे प्रदेश संभालने दीजिए। आप चाहते हैं मैं यहां बंध कर रह जाऊं, तो मैं बंध कर रह जाता हूं । कमलनाथ का यह वीडियो सामने आने के बाद से बीजेपी उन पर हमलावर है।

  • जिला स्तर पर वचन पत्र तैयार करेगी कांग्रेस

    जिला स्तर पर वचन पत्र तैयार करेगी कांग्रेस

    भोपाल// प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रदेश के साथ ही जिला स्तर पर भी वचन पत्र जारी करेगी। इसके लिए हर जिले की समस्याओं का अध्ययन करने उसका समाधान सुलझाने के निर्देश दिए हैं ताकि जिले के लोगों की आकांक्षाओं और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए वजन पत्र तैयार किया जा सके। वचन पत्र में समाज के सभी वर्गों विशेषकर पिछड़े,आदिवासी  महिला और युवाओं को लुभाने वाले वादे और कार्यक्रमों पर विशेष जोर देने की बात की है।

    जिला शहर कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्षों ,जिला प्रभारी सह प्रभारियों की बैठक को संबोधित करते हुए पिछ्ले दिनों कमलनाथ ने कहा है कि हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता बूथ प्रबंधन की होगी। बूथ प्रबंधन मजबूत होगा तो हम मजबूत होंगे। मंडलम सेक्टर पर मजबूती ही कांग्रेस को मजबूती प्रदान करेगी। उन्होंने सभी पदाधिकारियों से कहा कि आप सभी की जिम्मेदारी है कि जिला स्तर पर संगठन को मजबूती प्रदान करें। जिलों सामंजस बनाकर जिला अध्यक्ष जिला प्रभारियों सह प्रभारी साथ मिलकर काम करें प्रकोष्ठ दो और मोर्चा संगठनों को साथ लेकर चलें जिले में अधिक से अधिक बैठ के करें। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से कहा कि भाजपा चुनाव में धांधली करने के सभी षड्यंत्र करेगी उस पर पैनी निगाह रखनी होगी।

  • कमलनाथ सरकार के दौर में सूबे में भी तैयार हुआ था ‘राइट टू हेल्थ बिल’,आज स्वास्थ्य विभाग में खा रहा है धूल ?

    कमलनाथ सरकार के दौर में सूबे में भी तैयार हुआ था ‘राइट टू हेल्थ बिल’,आज स्वास्थ्य विभाग में खा रहा है धूल ?

    भोपाल // अभी हाल ही में राजस्थान सरकार ने स्वास्थ्य का अधिकार (राइट टू हेल्थ) बिल विधानसभा में पारित किया है, जिसका वहां विरोध हो रहा है। इसी तर्ज पर 2019 में मध्य प्रदेश की तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने भी राइट टू हेल्थ बिल को लेकर तैयारी की थी ।इसके लिए बाकायदा हेल्थ कांक्लेव आयोजित कर देश के तमाम विशेषज्ञों से चर्चा कर एक मसौदा तैयार किया था । अब यह मसौदा स्वास्थ्य विभाग में धूल खा रहा है यदि उस समय यह बिल पास हो जाता तो मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य होता जो अपनी जनता को स्वास्थ्य का अधिकार प्रदान करता जिसका प्रदेश की साढ़े साथ करोड़ जनता को फायदा पहुंचता।

    आयुष्मान योजना से लिंक किया गया था

     जानकारी के अनुसार 2019 में जो राइट टू हेल्थ बिल तैयार किया गया था, उसे केंद्र की आयुष्मान भारत निरामय योजना से लिंक किया गया था, इसके तहत आम लोगों को पांच लाख रूपए तक फ्री इलाज की सुविधा केंद्र देता है, वह तो रहती ही, इसके आगे इलाज में होने वाले खर्च को राज्य शासन वहन करती । इतना ही नहीं प्रदेश के बाहर भी इलाज कराया जा सकता था।

     निजी अस्पतालों की मनमानी पर रोक लगाने की थी कोशिश

     मध्यप्रदेश के इस राइट टू हेल्थ बिल में जो सबसे खास बात थी वह यह कि इमरजेंसी इलाज के दौरान यदि कोई मरीज निजी अस्पताल पहुंच जाता है तो अस्पताल उससे बिना पैसे की मांग किए इलाज शुरू करना था,अभी तक ऐसा नहीं होता है। इसलिए कई मामलों में मरीज की जान तक चली जाती है। वहीं दूसरी ओर निजी अस्पतालों में हर बीमारी के इलाज का खर्च भी फिक्स किया गया था ।

    97 बीमारियों को किया गया था कवर

     2019 में तैयार किया गया राइट टू  हेल्थ बिल में 97 बीमारियों के इलाज की गारंटी सरकार दे रही थी । उस समय के प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री रहे तुलसी सिलावट ने बताया था कि 97 प्रकार की बीमारियों में मुख्य रूप से कैंसर, हार्ट डिसीज, ब्रेन ट्यूमर और पैरालिसिस भी शामिल थे

    संसाधन पर था जोर

     हेल्थ बिल को सफल बनाने के लिए पूरी योजना तैयार की गई थी। उसमें सबसे ज्यादा जोर हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर और चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने पर दिया गया था। इसमें जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेज से जोड़ने के साथ ही बड़े बड़े जिलों में कुछ नए अस्पताल खोलने की योजना थी। वही दस हजार सब हेल्थ सेंटर खोलकर उसमें सबसे बड़े स्तर तक चिकित्सकों की भर्ती करने की योजना थी।

     डॉक्टर्स की जिम्मेदारी होती तय

    राइट टू हेल्थ बिल को तैयार करने में वरिष्ठ विशेषज्ञों ने अपनी सलाह दी थी।  सलाह का एक बिंदु यह भी था कि सरकारी से लेकर निजी अस्पताल तक के चिकित्सक की जिम्मेदारी तय की जाए, एक तरफ जहां सरकारी अस्पताल में डाक्टर नदारद रहते हैं वहीं दूसरी और निजी अस्पताल में डॉक्टर से पैसे की लूट में लगे रहते हैं । इस राइट टू हेल्थ बिल  में चिकित्सकों की जिम्मेदारी तय की गई थी।

  • चुनावों की तैयारी – कांग्रेस किसान ,महिला और कर्मचारी पर कर रही है फोकस

    चुनावों की तैयारी – कांग्रेस किसान ,महिला और कर्मचारी पर कर रही है फोकस

    भोपाल // प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर लगभग 6 महीने का वक्त बचा है दोनों ही प्रमुख दल पूरी ताकत से तैयारियों में जुटे हुए हैं। राजनीतिक हालातों के चलते मुक़ाबला कांटे का माना जा रहा है  । दोनो ही हर तरह और तबके  के मतदाता को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं । जहां भाजपा द्वारा लाडली बहना योजना और प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि और प्रदेश सरकार की ओर से दी जाने वाले चार हजार रूपए को मास्टर स्ट्रोक बताया जा रहा है , वहीं कांग्रेस अपनी पूरी रणनीति महिला ,किसान और कर्मचारियों पर फोकस कर रही है । यह तीनों तबके मिलाकर लगभग 50% से अधिक मतदाता है। 

    लाड़ली बहना की काट में 15सौ रूपये और पांच सौ में गैस सिलेंडर

    कांग्रेस  भाजपा सरकार  की लाड़ली बहना योजना की काट में एक हजार की जगह 15 सौ रुपए देने की बात कर रही है साथ ही रसोई गैस का सिलेंडर ₹500 में देने की भी घोषणा की है । लाड़ली बहना योजना के तहत महिलाओ के खाते में एक हजार रुपया हजार जून माह तक आने की संभावना है फिलहाल तो महिलाएं इस योजना के लिए आवेदन करने में आ रही दिक्कतों से परेशान नजर आ रहीं हैं। प्रदेश में लगभग 2 करोड़ 60 लाख मतदाता है महिलाएं हैं। पूरी खींचतान इन्हीं के लिए है।

    फिर से कर्ज माफी का वादा

    जहां तक किसानों का सवाल है भा जा पा को अपनी सम्मान निधि और प्रदेश सरकार द्वारा दिए जा रहे पैसे पर भरोसा है। भाजपा आरोप लगाती रही है कि पंद्रह महीने की कांग्रेश सरकार ने किसानों की कर्ज माफी का वादा तोड़ा है। अब वह किसानों का ऋण माफ किए जाने का दावा करते हुए किसानों को राहत की बात कर किसानों को लुभा रही है । वहीं कांग्रेस इसे झूट बताते हुए फिर से कर्ज माफी का वादा कर रही है। हाल ही में हुई बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के लिए उसने तत्परता से सर्वे का काम शुरू करवा दिया है। 

    पुरानी पेंशन की मांगसे परेशान भाजपा

    कर्मचारी वर्ग की सबसे बड़ी मांग पुरानी पेंशन की बहाली जरूर भाजपा के लिए सिरदर्द है। कर्मचारी इसको लेकर लामबंद हो रहे है और आंदोलन की चेतावनी भी दे चुके है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को लपक लिया है और वह इसे भुनाने के मूड में है। जहां भाजपा के पास कर्मचारियों के लिए कोई योजना नहीं है वही कांग्रेसमें कर्मचारियों को पुरानी पेंशन और नियमितीकरण का वादा कर एक बड़ा दांव चला है।

    सस्ती बिजली की बात

    इसके अलावा सस्ती बिजली एक बड़ा मुद्दा है है 15 महीने की अपनी सरकार के दौरान कमल कमलनाथ ने सस्ती बिजली की एक ऐसी योजना शुरू की थी जिसे आज भी गरीब एवं मध्यम वर्ग बड़ी राहत के रूप में याद करते हैं उस दौरान ₹100 में 100 यूनिट बिजली से मध्यमवर्ग को बड़ी राहत मिली थी कांग्रेश इसे फिर से भुनाने की कोशिश में है बताया जाता है कि कांग्रे सब 100 यूनिट का दायरा बढ़ाकर इसे 200 यूनिट तक ले जा सकती है।

  • कर्ज उतारने बेची जा रही हैं सरकारी सम्पत्ति? दो साल में छह सौ करोड़  की संपत्ति बेची, करीब सवा अरब रुपए की  बेंची जाने की तैयारी ..!

    कर्ज उतारने बेची जा रही हैं सरकारी सम्पत्ति? दो साल में छह सौ करोड़  की संपत्ति बेची, करीब सवा अरब रुपए की बेंची जाने की तैयारी ..!

    भोपाल//  सरकार पर तीन हजार करोड रुपए से अधिक का कर्ज है और बताया जाता है कि इस कर्ज से उबरने के लिए सरकार सरकारी संपत्तियां बेच रही है. सरकारी संपत्तियों की बिक्री जमीन प्रबंधन के नाम पर की जा रही है।आरोप यह भी है कि सरकार ने माफियाओं को फायदा पहुंचाने के लिए सरकार ने इसे नियमों का जामा पहना दिया है।
    पिछले 2 सालों में प्रदेश की 600 करोड़ रुपए की सरकारी संपत्ति बेंच दी है और आने वाले दिनों में 131 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति को बेचने की तैयारी की जा रही है, जिसमें नर्मदापुरम जिले की पिपरिया का वेयरहाउस( 2.14 करोड) और इटारसी की ट्रैक्टर स्कीम की जमीन (11.87 करोड) की संपत्ति शामिल है इसके अलावा कटनी का ब्लॉक तीन (8.19 करोड़) छतरपुर के नौगांव की (5.51 करोड़ )और धार का बस डिपो (25.58 करोड रुपए )की संपत्ति को नीलाम किया जाएगा।
    इसी तरह ग्वालियर की 47.92 करोड रुपए की कीमत की 3 संपत्तियां भी बेंची जाएंगी। उत्तर प्रदेश के झांसी में मध्य प्रदेश परिवहन विभाग का बस डिपो भी भेजने की तैयारी है हालांकि इसका मूल्य तय नहीं किया गया है इस साल 65 से अधिक संपत्ति या बैठे जाने के लिए चिन्हित की गई हैं। वैसे वैसे राजधानी भोपाल की प्राइम लोकेशन पर स्थित आरटीओ और मध्य प्रदेश सड़क परिवहन निगम की संपत्ति भी इसी तरह बेच दिए जाने की तैयारी थी लेकिन बाद में आरटीओ कार्यालय भाजपा को किराए पर दिए जाने से फिलहाल इस संपत्ति की नीलामी प्रक्रिया को रोक दिया गया है।
    सूत्रों का कहना है कि प्रदेश में वर्तमान सरकार ने सरकारी संपत्तियां बेचने की इस बड़ी योजना के तहत बस डिपो, रेस्ट हाउस, मकान, खाली भूखंड, कारखाने, ऑफिस, बिल्डिंग, रेशम केंद्र, सिल्क केंद्र आदि बेचे जा रहे हैं। इन संपत्तियों को लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग की वेबसाइट पर प्रदर्शित किया गया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इनमें से कई संपत्तियों की बिक्री के लिए टेंडर जारी किए जा चुके हैं। कुछ संपत्तियों की बोली भी शुरू हो गई है।
    सरकारी जमीन को खुर्दबुर्द करने का खेल?
    लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग के पेम पोर्टल पर बाकायदा जमीनों की गाइडलाइन या कच्ची जमीन के आधार पर रिजर्व प्राइस पर बोली लगवा कर जमीन बेची जा रही है कहने को तीन गुना तक बोली आने पर जमीन बेची जा रही है लेकिन वास्तविकता में यह सरकार के लिए नुकसान का सौदा है क्योंकि इन जमीनों का वास्तविक मूल्य बाजार मूल्य से कई गुना ज्यादा है चौंकाने वाली बात यह है कि विभाग को सरकारी अनुपयोगी जमीन बेचना है पर देखने में यह आया है कि सरकार द्वारा ऐसी जमीनों को बेचा जा रहा है जिनका उपयोग भविष्य में नागरिक सुविधाओं को विकसित करने के लिए किया जा सकता है।
    इस पूरे मामले को इटारसी के रेस्ट हाउस  की जमीन को बेचें जाने के उदाहरण से समझा जा सकता है। सरकार की परिसंपत्ति विभाग द्वारा इस 16338 वर्ग मीटर भूमि का मूल्य 24 करोड़ रुपया का गया और इसे मात्र 31 करोड़ 60 लाख की बोली पर बेच दिया गया जबकि इटारसी में इस क्षेत्र में जमीन का बाजार मूल्य इस कीमत से बहुत ज्यादा है इटारसी में 10 * 10 फीट की दुकान की कीमत ₹1 करोड़ है। उसी तरह इंदौर के तलावली चांदा की जमीन को गाइडलाइन के आधार पर कीमत ₹250 वर्गफुट आंकी गई  बोली आई 12 सो रुपए, जबकि इस  क्षेत्र में जमीन का बाजार मूल्य ₹2000 से ज्यादा है। यही स्थिति परिसंपत्ति विभाग के पेम पोर्टल पर बिक्री के लिए डाली गई सभी जमीनों की है। हैरानी की बात यह है कि कैबिनेट ने फैसला होकर प्रशासन के पास रजिस्ट्री करवाने की जानकारी आती है सरकार का लोकसंपत्ति  प्रबंधन विभाग यह कार्य कर रहा है।
    सरकार करे विचार
    सरकार को अपने इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए और दूरगामी सोच के साथ देखना चाहिए कि जिन जमीनों को अनुपयोगी घोषित किया जा रहा है वह वास्तव में अनुपयोगी है भी या नहीं, क्योंकि उन्हें बेचने के बाद भविष्य में नागरिक सुविधाओं को विकसित करने के लिए उनके पास कोई जमीन उपलब्ध नहीं होगी इस दृष्टिकोण से पुख्ता होने के बाद ही उन्हें बेचा जाए जिसके लिए मौजूदा बाजार मूल्य के बराबर इनकी की माता की जाए ओने पौने दामों पर बेचकर भारी नुकसान ना उठाया जाए।

  • अब कांग्रेस का जोर भी बूथ मैनेजमेंट पर.! हर बूथ पर होंगे पांच कार्यकर्ता

    अब कांग्रेस का जोर भी बूथ मैनेजमेंट पर.! हर बूथ पर होंगे पांच कार्यकर्ता

    भोपाल// चुनावों में बूथ मैनेजमेंट हमेशा भाजपा की ताकत मानी जाती रही है, इस बार भी पार्टी का पूरा फोकस इसी बात पर है। इस बार कांग्रेस भी इसका मुकाबला  इसी रणनीति से करना चाहती है और इसके लिए उसने तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। मंगलवार को भाजपा के बूथ सशक्तिकरण के प्रदेश व्यापी अभियान का दूसरा चरण शुरू हुआ है, जिसके तहत मतदाताओं से सीधा संपर्क किया जा रहा है ,वही बूथ प्रबंधन की अलग से तैयारियां की जा रही हैं।

     बूथ पर 5 कार्यकर्ता तैनात करेगी कांग्रेस

     ख़बर है कि इस बार कांग्रेस हर मतदान केंद्र पर पांच कार्यकर्ताओं को तैनात करने की रणनीति अपनाएगी। इसमें बूथ कमेटी, मंडलम और सेक्टर अध्यक्ष के अलावा 2 कार्यकर्ता रहेंगे। उन्हें बूथ प्रबंधन प्रकोष्ठ द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि मतदान के समय किसी भी तरह की गड़बड़ी होने की स्थिति में तत्काल कदम उठाया जा सके। भाजपा के समान मतदान केंद्रों पर मतदाताओं से संपर्क का कार्यक्रम सहयोगी संगठनों द्वारा चलाए जाने की योजना है।

     चुनाव से जुड़े कार्यों के प्रभारी जेपी धनोपिया बताते हैं कि मतदाताओं से संपर्क के लिए सहयोगी संगठन अलग-अलग कार्यक्रम चला रहे हैं, उसके साथ ही बूथ मैनेजमेंट के लिए अलग टीम तैयार कर उसे प्रशिक्षित किया जा रहा है। उन्हें मतदान केंद्र पर बरती जाने वाली सभी महत्वपूर्ण गतिविधियों के बारे में जानकारी दी जा रही है, इसमें मतदाता की पहचान सुनिश्चित करने के साथ अपात्र व्यक्तियों द्वारा मतदान किए जाने की शंका पर शिकायत करने की प्रक्रिया आदि के बारे में बताया जा रहा है।

    कांग्रेस सेवा दल भी सक्रिय 

    आगामी चुनाव जिसमें विधानसभा और लोकसभा दोनों शामिल हैं के लिए कांग्रेस सेवादल भी सक्रिय हो गई है। पिछले दिनों संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालजी भाई देसाई ने वर्चुअली मीटिंग की। जिसमें बताया गया कि सेवादल प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में प्रभारी नियुक्त करेगा। विशेष बात यह है कि संगठन विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने की क्षमता रखने वाले सेवादल कार्यकर्ताओं का नाम संगठन की ओर से टिकट के लिए प्रस्तावित करेगा। संगठन भाजपा सरकार की जन विरोधी नीतियों को लेकर यात्राएं भी निकालेगी।

  • लाड़ली बहना के दम पर चुनाव का खेल बदलने के मूड में भाजपा ?

    लाड़ली बहना के दम पर चुनाव का खेल बदलने के मूड में भाजपा ?

     कांग्रेस रणनीति को लेकर असमंजस की स्थिति में

    भोपाल// प्रदेश में दोनों ही राजनैतिक दल पूरी तरह से चुनावी मोड में है। हर वर्ग के मतदाता को साधने और लुभाने के लिए जी जान से कोशिश शुरू हो गई है।  दोनों ही दलों की नजर प्रदेश की 2 करोड़ 60 लाख से ज्यादा महिला मतदाताओं पर है, यानी उनकी हर रणनीति का फोकस किसी भी तरह से इस आधी आबादी की वोट पाने पर है।

    लाड़ली बहना योजना साबित होगी गेम चेंजर?

    जहां तक भारतीय जनता पार्टी का सवाल है , वह  इसमें आगे नजर आ रही है। शिवराज सरकार ने हाल ही में महिलाओं के लिए लाड़ली बहना योजना शुरू की है, इसके तहत प्रत्येक पात्र महिला को हर महीने एक हजार रुपए दिए जाएंगे। बताया जा रहा है कि जून से  पात्र महिलाओं के खाते में पैसे आना शुरू हो जाएंगे। शिवराज सरकार की कोशिश है कि चुनाव से पहले तक महिलाओं के खाते में 6000 रुपए तक पहुंचा दे।

     महिलाओं के लिए अब तक की सबसे बड़ी बताई जा रही इस  योजना का भाजपा पूरी तरह से चुनावी हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने के पूरे मूड में है, इसलिए इस योजना पर वह युद्ध गति से काम करने में जुटी है और भोपाल में के जंबूरी मैदान में बकायदा राज्य स्तरीय कार्यक्रम का योजना की शुरुआत की जानी है।  पार्टी इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक नया अध्याय के रूप में प्रचारित कर रही है। 

    भाजपा अपनी इस योजना को गेमचेंजर मान रही है। भाजपा के नेताओं को भरोसा है कि इसके दम पर वह एंटी इंकम्बेंसी  का मुकाबला कर लेंगे । कुछ राजनीतिक समीक्षक इसे भाजपा का मास्टर स्ट्रोक भी मान रहे हैं। 

     फिलहाल कांग्रेस के पास लाडली बहना योजना का की कोई काट नहीं है । यहां तक कि वह कर्ज में डूबी प्रदेश सरकार द्वारा इस तरह पैसे के बांटने का विरोध तक नहीं कर पा रही है।

     वहीं सरकार ने नई शराब नीति के तहत प्रदेश के सभी शराब आहातों को बंद करने का निर्णय लिया है। भाजपा का मानना है कि इससे भी  महिलाओं का वोट बैंक पक्का होगा, क्योंकि महिलाएं ही आहातों से ज्यादा परेशान थी, इससे उन्हें राहत मिलेगी। वह इस बात का अधिक से अधिक प्रचार कर फायदा उठाना चाहती है।

    भाजपा महिला प्रत्याशियों की संख्या भी बढ़ा कर भी महिला मतदाताओं को लुभाना चाहती है

    कांग्रेस रणनीति को लेकर असमंजस की स्थिति में

     ऐसा नहीं कि कांग्रेस महिला मतदाताओं की ताकत को कम आंक रही है, उसे भाजपा की महिलाओं को लेकर किए जा रहे लुभावने कामों की चिंता है पर फिलहाल उसे इसके मुकाबले की कारगर रणनीति नहीं सूझ रही है । 

    कांग्रेस महिलाओं के लिए अलग से घोषणा पत्र लाने का ऐलान कर चुकी है यानी पार्टी चुनाव में दो घोषणापत्र पेश करेगी एक सभी के लिए होगा दूसरा वचन पत्र महिलाओं के लिए। महिलाओं के वचन पत्र में महिलाओं से जुड़ी योजनाएं व वादे होंगे। इसके अलावा कांग्रेस 8 से 10 विधानसभा क्षेत्रों के बीच एक महिला प्रत्याशियों को उतारने की रणनीति बना रही है ।

    कांग्रेस सूत्रों के अनुसार पार्टी उन महिलाओं को टिकट वितरण में प्राथमिकता देने पर विचार कर रही है, जो सामाजिक व राजनीतिक क्षेत्रों में सक्रिय हैं, लेकिन नेताओं की पत्नियों या बहू बेटियों को टिकट नहीं दिया जाएगा।

     पार्टी महिला उम्मीदवारों की संख्या बढ़ाने के लिए नगरी निकाय और पंचायत चुनाव में विजयी महिलाओं को भी परख रही है। सर्वे में ऐसी महिलाओं महिला प्रतिनिधियों के बारे में राय जुटाई जा रही है कि यदि उन्हें टिकट दिया जाए तो वह कितनी टक्कर दे सकती हैं ।

    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के दौरान प्रियंका गांधी ने “लड़की हूं ,लड़ सकती हूं” का नारा देकर कई महिला प्रत्याशियों को मैदान में उतारा था। कांग्रेस प्रदेश में कुछ ऐसी ही रणनीति अपना सकती है।

    कांग्रेस प्रदेश में महिलाओं की स्थिति औरमहिलाओं को लेकर बढ़ते अपराध को भी मुद्दा बनाकर आंदोलन करने की तैयारी कर रही है।

    चुनाव तक पन्द्रह सौ करोड़ का खर्च ?

    राज्य सरकार ने चुनावी वर्ष में महिला मतदाताओं को साधने के लिए खजाने का दरवाजा खोल दिया है . यदि कम से कम पच्चीस लाख भ्मों को इस योजना के दायरे में शामिल किया गया तो हर महीने खजाने पर 250 करोड़ रूपये का भर आएगा .यानि चुनाव तक सरकार छह माह तक भी एकेक हजार रूपये बहनों को देती है तो बहनों को छह हजार रूपये मिलेंगें वहीं छह माह में बहनों के खातों में कुल पन्द्रह सौ करोड़ रूपये जायेंगें ,इस तरह सरकार एक साल में इस योजना पर कम से कम तीन हजार करोड़ रूपये खर्च कर सकती है ,