Category: नर्मदापुरम

  • लगातार हार रही सीटों पर कांग्रेस तीन महीने पहले ही तय कर सकती है उम्मदीवारों के नाम !

    लगातार हार रही सीटों पर कांग्रेस तीन महीने पहले ही तय कर सकती है उम्मदीवारों के नाम !

    भोपाल// साल के अंत में होने वाले चुनाव में कांग्रेस लगातार हार रही सीटों पर फोकस कर रही है अब कांग्रेसमें इस तरह की सीटों पर पहले से उम्मीदवार घोषित करने की समय सीमा तय कर दिया बताया जाता है कि पार्टी लगातर हार रही या कम अंतर से हारी सीटों पर 3 महीने पहले ही उम्मीदवारों के नाम घोषित कर सकती है।

     इसकी वजह यह बताई जा रही है कि इससे उम्मीदवारों को जमीनी स्तर पर काम करने और प्रचार-प्रसार का भरपूर समय मिलेगा। साथ ही पार्टी को यह भी लग रहा है कि इस बार टिकट न मिलने पर कुछ नेता बगावत कर सकते हैं, उन्हें बैठाने, दावेदारी वापस लेने व मनाने के लिए भी पार्टी को वक्त मिलेगा।

    कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ पहले ही सर्वे रिपोर्ट के आधार पर टिकट देने की बात करते रहे हैं। बताया जाता है कि दो सर्वे कराए भी जा चुके हैं और कमलनाथ और दिग्विजय सिंह लगातार विधानसभा क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं और हारी हुई सीटों की जमीनी हकीकत जानने और कार्यकर्ताओं का फीडबैक लेने में लगे हुए हैं।वही आईसीसी द्वारा नियुक्त ऑब्जर्वर भी रिपोर्ट के आधार पर सभी पहलुओं को देखकर पार्टी टिकट का निर्णय करेगी।

    आधार पर तैयार होगी ऑब्जर्वर की रिपोर्ट

    बताया जा रहा है कि पीसीसी अध्यक्ष कमलनाथ के द्वारा दो सर्वे कराए गए हैं। यह सर्वे रिपोर्ट ऑब्जर्वर को सौंप दी गई है। ऑब्जर्वर ऐसे 70 विधानसभा क्षेत्रों की मैदानी स्थिति को देखेंगे । साथ ही सर्वे में जिनके नाम आए हैं उनकी स्थिति जमीनी तौर पर कैसी है? जीत सकते हैं कि नहीं ? जिनके नाम आए हैं उनसे भी चर्चा की जाएगी । इसके अलावा पार्टी के कार्यकर्ता वरिष्ठ नेता और मतदाताओं का रुझान भी लिया जाएगा। ऑब्जर्वर एक विधानसभा में 1 दिन बिताएंगे।

  • कर्नाटक के समान कनुगोलू की टीम लगा पाएगी एमपी में भी कांग्रेस की नैया पार ?

    कर्नाटक के समान कनुगोलू की टीम लगा पाएगी एमपी में भी कांग्रेस की नैया पार ?

    कहा जा रहा है कि कर्नाटक में कांग्रेस को जीत दिलाने में आक्रामक चुनावी कैंपेन का बड़ा हाथ रहा है और जिस व्यक्ति और टीम ने यह कैंपेन संभाला था अब वही टीम मध्यप्रदेश में भी कांग्रेस की नैया पार लगाने आ रही है?

    भोपाल//  कर्नाटक में कांग्रेस की प्रचंड जीत के कई कारणों में से एक कारण आक्रामक चुनाव कैंपेन की रणनीति और मेनिफेस्टो को माना जा रहा है और इस चुनावी कैंपेन की बागडोर थी सुनील कनूगोलू नाम के व्यक्ति के हाथों में । अब खबर है कि यही सुनील कनुगोलू अपनी टीम के साथ जल्द ही मध्यप्रदेश में कांग्रेस के लिए काम शुरू करेंगें। 

    पार्टी सूत्रों के अनुसार सुनील तनु गोलू के नेतृत्व में 130 सदस्य टीम जल्द ही मध्यप्रदेश में डेरा डालेगी और चुनाव की व्यू रचना तैयार करेगी । प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व सीएम कमलनाथ की टीम से बातचीत हो चुकी है कमलनाथ ने टीम को मध्य प्रदेश के बारे में फीडबैक दे दिया है उसी के आधार पर यह टीम प्रदेश में अपना काम शुरू करेगी।

    कभी प्रशांत किशोर के साथ मिलकर भाजपा के लिए चुनाव की योजना बनाने सुनील को कांग्रेस ने कर्नाटक में चुनावी कैंपेन का काम सौंपा था। सुनील कनुगोलू ने यहां 4 महीने से अधिक समय रहकर चुनावी कैंपेन की प्लानिंग की और उनकी प्लानिंग के हिसाब से ही वहां कांग्रेस ने अपने चुनाव प्रचार को अंजाम दिया ।

    इस टीम ने नारों से लेकर वरिष्ठ नेताओं के भाषण भी तैयार किए थे, जिसमें भाजपा द्वारा कांग्रेस पर किए गए हमलों का जवाब भी होता था। कांग्रेस के बलिदानी इतिहास का इसी टीम ने पूरा खाका तैयार कर बताया था कि किस तरह गांधी परिवार ने देश के लिए कुर्बानी दी। सुनील कनुगोलू 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रशांत किशोर की टीम के सदस्य थे । जिन्होंने भा ज पा और मोदी की पूरी रणनीति तैयार की थी। जिससे पहली बार देश में पूर्ण बहुमत के साथ भाजपा की सरकार बनी थी। 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ के चुनाव प्रचार को इसी टीम ने संभाला था और वहां दूसरी बार भाजपा ने लगातार सरकार बनाई थी । 2022 में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के रणनीतिकार भी यही टीम थी और अब खबर है कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बाद जल्दी यह टीम मध्यप्रदेश आ रही है।

    हर सीट पर होगा फोकस

    कांग्रेस सूत्रों की माने तो मध्यप्रदेश में आने से पहले यह टीम प्रदेश की एक-एक सीट की जानकारी जुटा चुकी है। हर सीट पर सामाजिक और राजनीतिक संतुलन के लिए अलग से रणनीति बनाई जा रही है। बताया जाता है कि 130 सदस्यों वाली सुनील की टीम हर विधानसभा क्षेत्र का दौरा कर सबसे पहले लोगों का मन जानेगी और क्षेत्रीय समस्याओं के बारे में जानकारी जुटाएगी उसके बाद प्रदेश के चुनावी कैंपेन के मुद्दे और नेताओं के भाषण के प्रमुख बिंदु तय किए जायेंगे। इसके अलावा जिलों की रणनीति अलग से तय की जाएगी।

  • भाजपा पहली बार जिलों में नियुक्त करेगी प्रवक्ता

    भाजपा पहली बार जिलों में नियुक्त करेगी प्रवक्ता

    भोपाल// भारतीय जनता पार्टी आगामी चुनाव को लेकर अपनी बात जनता तक पहुंचाने के लिए अब प्रत्येक जिले में प्रवक्ता नियुक्त करेगी। यह पहली बार होगा अभी सभी जिलों में मीडिया प्रभारी और सह मीडिया प्रभारी है लेकिन जिला प्रवक्ता नहीं है। गुरुवार को प्रदेश कार्यालय में आयोजित मीडिया विभाग की प्रदेश स्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया है। बैठक को पार्टी के प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव प्रदेश । अध्यक्ष एवं सांसद विष्णु दत्त शर्मा एवं प्रदेश संगठन मंत्री हितानंद ने संबोधित किया।

     बैठक में जिला प्रवक्ता ना होने की बात कही गई जिसमें सभी ने एक सुर से कहा कि विधानसभा चुनाव नजदीक होने के नाते पार्टी को प्रत्येक जिले में प्रवक्ता नियुक्त करने चाहिए जिससे कि पार्टी और संगठन के कार्यों की जानकारी मीडिया तक पहुंचा जा सके । इसको लेकर वरिष्ठ नेताओं ने सहमति जताई और जल्दी ही इनकी नियुक्ति करने की बात कहते हुए इसकी जवाबदारी प्रदेश मीडिया विभाग को सौंपी गई है।

     मुरलीधर राव ने कहा कि पार्टी अब चुनाव मोड में आ गई है इन चुनाव के लिए पार्टी ने अपने लक्ष्य किए हैं इनमें से एक 200 से ज्यादा सीटें हासिल करना दूसरा 51% वोट शेयर हासिल करना है। यह मीडिया विभाग की जिम्मेदारी है कि वह अपने स्तर पर पार्टी को इन लक्ष्य तक पहुंचाने के काम में सहभागी बने।

     प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने कहा कि मीडिया विभाग की छवि उसके चेहरे को उभारता है।  जनता में पार्टी के प्रति धारणा बनाता है। उन्होंने कहा कि विरोधियों द्वारा फैलाए जा रहे झूठ को बेनकाब करना उनके, दुष्प्रचार और हथकंडे को पहचानना तथा डर्टी पॉलिटिक्स को पूरी ताकत से जवाब देना भी मीडिया विभाग की जिम्मेदारी है।

     नवनियुक्त प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने नई जिम्मेदारी के लिए संगठन का धन्यवाद करते हुए कहा कि  नवाचार पार्टी मीडिया टीम की प्राथमिकता रहेगी।

  • आदिवासी सीटों पर गैर राजनीतिक चेहरों की तलाश में है कांग्रेस ?

    आदिवासी सीटों पर गैर राजनीतिक चेहरों की तलाश में है कांग्रेस ?

    भोपाल// नए राजनीतिक समीकरणों और नगरीय निकायों के अनुभव को देखते हुए नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस आदिवासी क्षेत्रों में नए चेहरे की तलाश कर रही है। पार्टी ने वरिष्ठ नेताओं को आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में ऐसे नए चेहरों को खोजने को कहा है जो राजनीतिक पृष्ठभूमि से ना आते हो पर सामाजिक तौर पर सक्रिय हों । कांग्रेस पिछली बार की तरह इस बार भी आदिवासी वर्ग की ज्यादा से ज्यादा सीट जीतने पर फोकस कर रही है।

    2018 में जब डेढ़ दशक बाद कांग्रेस ने सत्ता में वापसी की थी तो उसका एक बड़ा कारण आदिवासी वर्ग का कांग्रेस को समर्थन मिलना था। कांग्रेस ने 47 आदिवासी सीटों में से 30 पर जीत हासिल की थी। पार्टी इस प्रदर्शन को फिर दोहराना चाहती है । दरअसल नगरीय निकाय चुनाव में पार्टी ने महापौर पद के लिए कई नए चेहरों को आजमाया था और उसके परिणाम भी सुखद रहे थे । पहली बार था कि कांग्रेस के 5 महापौर चुने गए । इस बार कांग्रेस द्वारा चुनावों में  जीत सुनिश्चित करने के लिए हर संभावनाओं पर काम किया जा रहा है । यही कारण है कि कांग्रेस ने 50 फ़ीसदीसीटों पर  प्रत्याशी के रूप में युवा ,अनुसूचित जाति जनजाति, पिछड़ा वर्ग और महिलाओं को मैदान में उतारने की योजना बनाई है। वरिष्ठ नेताओं के अलावा सभी सहयोगी संगठनों, हर क्षेत्र के विशेषज्ञ गणमान्य और प्रभावशाली लोगों से सुझाव लिए जा रहे हैं । इतना ही नहीं सेवानिवृत्त अधिकारियों और आदिवासी क्षेत्रों में काम करने वाले एनजीओ की मदद से उन व्यक्तियों की जानकारी जुटाई जा रही है जो चाहे राजनीतिक पृष्ठभूमि से ना हो सामाजिक रूप से सक्रिय और प्रतिष्ठित हो । इसमें सेवानिवृत्त अधिकारी ही नहीं वर्तमान अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं।

    विगत चुनाव में जय युवा आदिवासी शक्ति संगठन (जयस) के संरक्षक डॉ हीरालाल अलावा को चुनाव लड़या था वह जीते थे । कांग्रेस ने 114 सीटें जीती थी जिनमें से 49 विधायक आरक्षित सीटों पर जीते थे। इसके बाद निकाय चुनाव में छिंदवाड़ा से विक्रम अहाके को महापौर पद के लिए मैदान में  उतारा था वह भी जीते। इसी को  कांग्रेस फिर दोहराना चाहती है।

    जयस की गतिविधियों पर दोनों पार्टी की नजर

    इधर दोनों ही राजनीतिक दल जय युवा आदिवासी शक्ति संगठन (जयस ) की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं । जयस ने 80 विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्याशी उतारने की घोषणा की है। जाहिर है कि आदिवासी वोटों के बंटवारे का नुकसान दोनों दलों को होगा, क्योंकि 47 में से 30 सीटें अभी कांग्रेस के पास हैं, कांग्रेस इसमें कमी आने नहीं देना चाहती है। वहीं भाजपा ने भी आदिवासी क्षेत्रों में अपनी गतिविधि बढ़ाई है । शिवराज सरकार ने पेसा कानून लागू करके यह संदेश देने का काम किया है कि वह आदिवासी वर्ग की सबसे बड़ी हितेषी है।

  • एक ट्रेनिंग स्कूल जहाँ 15 मिनट में एटीएम तोड़ना सिखाया जाता है ?

    एक ट्रेनिंग स्कूल जहाँ 15 मिनट में एटीएम तोड़ना सिखाया जाता है ?

    लखनऊ  //  बिहार के छपरा जिले में एक “स्टार्टअप” है जो बेरोजगार युवाओं को 15 मिनट में एटीएम तोड़ने का प्रशिक्षण दे रहा है.. यह स्टार्टअप सुधीर मिश्रा नाम का एक  एक युवक चला रहा है .

    यह खुलासा किया लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाना क्षेत्र में एक एटीएम से कथित रूप से 39.58 लाख रुपये चोरी करने के आरोप में चार युवकों को गिरफ्तार किए जाने के बाद हुआ है ।

    हालांकि पुलिस ने उनके कब्जे से 9.13 लाख रुपये बरामद किए हैं,  और अब पुलिस इस अखिल भारतीय गिरोह के सरगना मिश्रा को गिरफ्तार करने में जुट गई है

    तीन महीने का क्रेश कोर्स ?

    पुलिस सूत्रों के मुताबिक़ मिश्रा विभिन्न राज्यों से बेरोजगार युवाओं को छपरा लता है और उन्हें एटीएम तोड़ने का तीन महीने का क्रैश कोर्स दिया जाता है. इस दौरान उन्हें सिखाया जाता है कि कैसे तेजी से एटीएम में प्रवेश किया जाए, एटीएम बूथ की कांच की दीवारों पर और कैमरे पर अपनी पहचान छिपाने के लिए मिस्टी लिक्विड स्प्रे किया जाए और एटीएम के कैश बॉक्स को काटकर 15 मिनट के अंदर कैसे फरार हुआ जाय ।

    प्रशिक्षण के बाद 15 दिन का लाइव डेमोस्ट्रेशन भी कराया जाता है। अधिकारी ने बताया कि “15 मिनट या उससे कम समय में कार्य पूरा करने वाले सदस्यों को ही फील्ड पर भेजा जाता है।”

    ऐसे हत्थे चढ़े आरोपी

    एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एटीएम चोरी के आरोपियों का पता लगाने के लिए यूपी पुलिस ने 1,000 सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल डेटा और लखनऊ के आसपास के 20 से अधिक टोलों की जांच की। “जांच के दौरान एटीएम के पास घर से एक सीसीटीवी फुटेज मिला। नीले रंग की एक कार का पता चला, जिससे बदमाश शहर में घुसे थे और भाग गए थे।” इसके बाद टीम बिहार के सीतामढ़ी में उसके मालिक के पास पहुंची। इस बीच, यूपी पुलिस की एक और टीम ने उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर रोड पर उसी कार को रोका और चारों को गिरफ्तार कर लिया।

    गोल्फ सिटी के एसएचओ शैलेंद्र गिरी ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों में से एक नीरज नाम का व्यक्ति भी था जो इसगिरोह का स्थायी सदस्य है और उसके खिलाफ पांच मामले दर्ज थे। पूछताछ में नीरज ने इस मामले की तकनीक को सीखने को स्वीकार किया है  गिरी ने कहा, “नीरज ने खुलासा किया कि उसने मिश्रा से व्यापार के गुर सीखे।” सूत्रों ने कहा कि मिश्रा एक अच्छी तरह से संगठित  गिरोह का संचालन करता है और विभिन्न राज्यों के बेरोजगार युवाओं को काम पर रखता है।

    पुलिस ने कहा कि देश भर में पिछले एक साल में गिरोह द्वारा ऐसे 30 से अधिक मामले किए गए हैं।

    (बिज़नेस इनसाइडर इंडिया से)

  • अब कांग्रेस की नज़र भाजपा के असंतुष्टों पर ?

    अब कांग्रेस की नज़र भाजपा के असंतुष्टों पर ?

    पार्टी में शामिल कराने का होगा प्रयास

    भोपाल//इन दिनों प्रदेशमें भाजपा के आंतरिक सर्वे और फीडबैक की काफी चर्चा है बताया जाता है कि इस पूरी कवायद में भाजपा के कार्यकर्ताओं के असंतुष्ट होने की बात सबसे मुखर होकर सामने आई है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता अपनी उपेक्षा से काफी नाराज हैं। एक और भाजपा इन असंतुष्ट नेताओं कार्यकर्ताओं से बात कर और उनकी मान मनौव्वल कर डैमेज कंट्रोल में जुटी हुई है। वरिष्ठ नेता अलग-अलग जिलों में ऐसे कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ बैठकें और अलग-अलग चर्चा भी कर रहे हैं। वही कांग्रेस की नजर इन असंतुष्ट नेताओं पर है । कांग्रेस इसे  एक अवसर के रूप में देख रही है ।क्योंकि कांग्रेस इस चुनाव के लिए हर वो प्रयास करती नज़र आ रही है जो उसकी जीत की संभावनाओं को मजबूत करता हो।

    खबर है कि कांग्रेस ने पार्टी के 16 वरिष्ठ नेताओं को भाजपा के इसी तरह के असंतुष्ट नेताओं से संपर्क करने की क्षेत्रवार जिम्मेदारी सौंपी है।  कांग्रेस ने यह भी तय किया है कि भाजपा के जिन नेताओं और कार्यकर्ताओं का जनाधार मजबूत है उन्हें बडे़ आयोजन कर कांग्रेस में शामिल करने का प्रयास किया जाए।

    कांग्रेस ने चुनाव अभियान की जो कार्ययोजना बनाई है उसमें भाजपा के असंतुष्ट नेताओं से संपर्क करना भी शामिल है । प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ सहित अन्य नेता लगातार दावा कर रहे हैं कि भाजपा के कई नेता उनके संपर्क में है और जिन्हें समय आने पर पार्टी में शामिल किया जाएगा।

    पिछले माह निमाड़ क्षेत्र में असर रखने वाले भाजपा के पूर्व सांसद माखन सिंह सोलंकी को पूर्व मंत्री दिग्विजय सिंह और मुंगावली के पूर्व विधायक राव देशराज सिंह यादव के पुत्र यादवेंद्र यादव को कमलनाथ की उपस्थिति में कांग्रेस की सदस्यता दिलाई गई थी विंध्य क्षेत्र में प्रभाव रखने वाली बसा पार्क से पूर्व विधायक शीला त्यागी भी कांग्रेस में शामिल हो चुकी हैं। वही नर्मदापुरम ( होशंगाबाद) जिले  में भाजपा के एक पूर्व विधायक के कांग्रेस में शामिल होने की भी जोर शोर से चर्चा है।

    लाल पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी कांतिलाल भूरिया अरुण यादव, अजय सिंह  , नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर गोविंद सिंह, नटराजन मीनाक्षी नटराजन बाला बच्चन सज्जन सिंह वर्मा जीतू पटवारी तरुण भनोट कमलेश्वर पटेल जयवर्धन सिंह लाखन सिंह यादव रामनिवास रावत फूल सिंह बरैया और केपी सिंह को जिम्मेदारी दी गई है कि वह आवंटित जिलों में भाजपा के असंतुष्ट नेताओं से संपर्क करें।

  • अब कांग्रेस चलाएगी पूरे प्रदेश में परिवर्तन संकल्प अभियान

    अब कांग्रेस चलाएगी पूरे प्रदेश में परिवर्तन संकल्प अभियान

    वरिष्ठ नेता करेंगें सभी विधान सभा सीटों का भ्रमण, कार्यकर्ताओं और आमजन को दिलाएंगे भाजपा के कुशासन और भ्रष्टाचार से मुक्ति का संकल्प।

    भोपाल//  छह महीने बाद होने वाले  विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में परिवर्तन संकल्प अभियान चलाएगी। इसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता भ्रमण कर कार्यकर्ताओं के साथ आमजन को भाजपा के 18 साल के कथित कुशासन और भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाने के लिए संकल्प दिलाएंगे।

    हर विधानसभा में होगी जनसभा

    मंडल, सेक्टर और बूथ कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की जाएंगी। तत्कालीन कांग्रेस सरकार की उपलब्धि और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ द्वारा सरकार बनने पर किए जाने वाले कार्यों को लेकर जो घोषणाएं की गई हैं, उन्हें प्रचारित किया जाएगा। पार्टी के निष्क्रिय कार्यकर्ताओं से संपर्क कर उन्हें सक्रिय करने और सरकार द्वारा प्रताड़ित कार्यकर्ताओं की जानकारी भी जुटाई जाएगी। प्रत्येक विधानसभा में एक जनसभा होगी।

    आभियान खाका है तैयार,
    बूथ प्रबंधन पर होगा पूरा जोर

    प्रदेश कांग्रेस ने चुनाव अभियान को लेकर कार्ययोजना तैयार की है। इसमें सर्वाधिक जोर बूथ प्रबंधन पर रहेगा। वरिष्ठ नेता बूथ, मंडलम और सेक्टर समितियों के साथ ही सभी सहयोगी संगठनों द्वारा मतदान केंद्र स्तर पर की जा रही तैयारियों की समीक्षा करेंगे। विधानसभा क्षेत्र के जातीय और सामाजिक समीकरणों को देखते हुए प्रभावशाली लोगों से संपर्क करके उनकी अपेक्षाएं जानी जाएंगी। कार्यकर्ताओं के साथ सरकार के इशारे पर दर्ज हो रहे झूठे प्रकरणों की सूची तैयार की जाएगी।

    नेता करेंगें विधानसभा क्षेत्रों में रात्रि विश्राम

    परिवर्तन संकल्प अभियान के दौरान वरिष्ठ नेताओं का रात्रि विश्राम भी विधानसभा क्षेत्रों में होगा। इस दौरान वे पार्टी के नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक करके बूथ प्रबंधंन पर चर्चा करेंगे। सामूहिक भोज होगा, जिसमें सभी सहयोगी संगठनों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा।

    किसान कर्जमाफी और बिजली की दरों में कमी की दिलाई जाएगी याद

    पार्टी ने तय किया है कि मतदाताओं को तत्कालीन कमल नाथ सरकार के समय हुई किसान कर्जमाफी और बिजली की दरों में कमी याद दिलाई जाएगी। आदिवासी क्षेत्र में साहूकारी ऋण से मुक्ति, धार्मिक स्थलों के विकास के साथ अन्य योजनाओं के बारे में बताया जाएगा। साथ ही सरकार में आने पर महिलाओं को डेढ़ हजार रुपये महीना सम्मान निधि, पांच सौ रुपये में रसोई गैस सिलेंडर, पुरानी पेंशन की बहाली करने सहित जो अन्य वचन दिए गए हैं, उनका प्रचार-प्रसार किया जाएगा।

    16 स्थानों पर होंगी बड़ी सभाएं

    विधानसभा क्षेत्रों में होने वाली सभाओं में प्रमुख स्थानों पर पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। प्रदेश के बुंदेलखंड, विंध्य, महाकोशल, मालवा-निमाड़ क्षेत्र के 16 स्थानों पर बड़ी सभाएं होंगी।

  • लगातार हार रही सीटों पर पहले ही प्रत्याशी घोषित करेगी कांग्रेस ?

    लगातार हार रही सीटों पर पहले ही प्रत्याशी घोषित करेगी कांग्रेस ?

    भोपाल// सूबे में इस बार  कांग्रेस विधानसभा चुनाव की तैयारी में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है,  कांग्रेस भाजपा के गढ़ माने जाने वाली सीटों पर ज्यादा ध्यान देने के मूड है, विशेष रूप से तीन बार से ज्यादा हारी सीटों को वापस लेने की रणनीति  बनाने में जुटी हुई है ।

    बताया जाता है कि जिन सीटों पर कांग्रेस लगातार हार रही है वहां पुराने चेहरों के बजाय नए चेहरों को टिकट देने की रणनीति अपनाई जा सकती है । खबरों के मुताबिक लगातार हार रही सीटों के लिए स्थानीय संगठन से जीत की रणनीति और योजना बनाने को कहा गया है। पार्टी सर्वे पर ज्यादा जोर दे रही है। इसके अलावा एआईसीसी के सचिवों को स्थानीय संगठनों से चर्चा करने कीऔर फीडबैक लेने जिम्मेदारी दी गई है।साथ ही टिकिट देने में स्थानीय संगठन की भूमिका बढ़ाने की ओर से सुनाई दे रही है। स्थानीय संगठन  जिसके साथ होगा टिकट में उसे प्राथमिकता मिलेगी। कहा जा रहा है कि चुनाव लड़ने के लिए बाहरी नेता नहीं होगा । 

    इस बात को लेकर भी पार्टी के भीतर विचार विमर्श चल रहा है कि कांग्रेस कमजोर सीटों यानी जहां पिछले 5-6 बार से लगातार रही है उन सीटों पर पहले से ही प्रत्याशियों की घोषणा कर दी जाए।

  • लगातार हार रही सीटों के लिए कांग्रेस अपना रही है यह रणनीति ?

    लगातार हार रही सीटों के लिए कांग्रेस अपना रही है यह रणनीति ?

    भोपाल //सूबे में जहां विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा पिछली बार हारी हुई सीटों को जीतने की रणनीति पर काम कर रही है, वही कांग्रेस प्रदेश की ऐसी सीटों पर फोकस कर रही है, जहां पार्टी लगातार चुनाव हार रही है। प्रदेश में ऐसी 70 सीटें हैं।  कांग्रेस इन सीटों पर प्रत्याशियों के चयन के लिए तीन तीन सर्वे कराने की कवायत कर रही है, वहीं कार्यकर्ताओं को तैयार करने और बूथ मैनेजमेंट के लिए शिविरों का आयोजन करेगी।

    तीन तीन सर्वे से चुने जायेंगे उम्मीदवार ?

      खबर यह है कि कांग्रेस 3 बार या उससे ज्यादा बार चुनाव हारने वाली सीटों पर इस बार उम्मीदवार चयन के लिए तीन अलग-अलग सर्वे करवाएगी । एक सर्वे एआईसीसी ,एक प्रदेश कांग्रेस और एक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ खुद करवा रहे हैं।  इन तीनों सर्वे के निचोड़ के बाद ही प्रत्याशी का चयन किया जाएगा। बताया जाता है कि यह फैसला पिछले दिनों कांग्रेस की पॉलिटिकल अफेयर कमेटी की बैठक में लिया गया है। इन तीनों सर्वे के बाद जो उम्मीदवार सबसे बेहतर होगा दिग्गज नेताओं (? ) के साथ ही स्थानीय और संगठन कि पसंद होगा उसे उम्मीदवार बनाया जाएगा।  पहले चरण में इन हारी सीटों पर  सर्वे होगा के बाद दूसरे चरण में बाकी लगभग 90 सीटों पर इसी तर्ज पर सर्वे होगा।  वैसे यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस अधिकतर सीटों पर वर्तमान विधायकों को दोहराने के मूड में इसीलिए उन्हें अभी से अपने क्षेत्र में सक्रिय होने के लिए आलाकमान ने निर्देश दे दिए हैं।

    शिविरों का होगा आयोजन !

    दूसरी खबर है कि कांग्रेस लगातार हार वाले विधानसभा क्षेत्रों में शिविर लगाकर कार्यकर्ताओं को तैयार करेगी और इन शिविरों को आयोजित करने की जिम्मेदारी सेवादल को दी गई है।  यह शिविर मई और जून में लगाए जाएंगे । 3 से 5 दिनों के इन शिविरों में क्षेत्र में हार के कारणों के अलावा कार्यकर्ताओं को  बूथ प्रबंधन की बारीकियों की जानकारी, मतदाता से संपर्क करने के और प्रमुख बिंदु पर बात करने को के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।  इस दौरान वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहेंगे।

     सेवा दल के प्रमुख संगठन योगेश यादव का कहना है कि शिविर क्षेत्र में कांग्रेस की कमजोरियों और समस्याओं की जानकारी का एक प्रतिवेदन भी तैयार करेंगे ताकि संगठन को चुनावी तैयारी में सहयोग मिल सके । बताया जा रहा है कि विधानसभा क्षेत्रों से सेवा दल के शिविर आयोजित करने से पहले 27 से 29 अप्रैल तक इंदौर में जिला अध्यक्ष व प्रभारियों का एक शिविर भी आयोजित होगा।

    इन सीटों पर लगातार हार रही है कांग्रेस

     रहली ,सागर, बीना ,नरयावली ,गुना, शिवपुरी ,दतिया डॉक्टर अंबेडकर नगर( महू) इंदौर दो इंदौर चार इंदौर पांच,बिजावर ,चांदला, पथरिया, हटा, सिरमौर, सिमरिया, त्योथर, रामपुर बघेलान, रीवा, सीधी सिंगरौली, देवसर , धौहनी, जैतपुर ,बांधवगढ़, मानपुर , मुड़वारा ,जयसिंह नगर ,जबलपुर कैंट, पनागर ,सिहोरा परसवाड़ा ,बालाघाट ,सिवनी ,आमला, टिमरनी, सिवनी मालवा, होशंगाबाद ,सोहागपुर, पिपरिया, भोजपुर, कुरवाई ,शमशाबाद ,बैरसिया ,नरेला, हुजूर, गोविंदपुरा बुधनी ,आष्टा ,सीहोर, सारंगपुर ,सुसनेर ,सुजालपुर देवास ,खातेगांव, बागली ,हरसूद, खंडवा, पंधाना, बुरहानपुर, धार, उज्जैन उत्तर, उज्जैन दक्षिण, रतलाम सिटी ,मंदसौर, मल्हारगढ़, जावद और नीमच।

  • धर्म रक्षा यात्राएं निकलेगी कांग्रेस? सॉफ्ट हिंदुत्व से हार्ड हिंदुत्व की ओर कांग्रेस ?

    धर्म रक्षा यात्राएं निकलेगी कांग्रेस? सॉफ्ट हिंदुत्व से हार्ड हिंदुत्व की ओर कांग्रेस ?

    भोपाल//  यह निश्चित है कि सूबे में आगामी चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस हिंदुत्व की पिच पर  खुलकर खेलने के मूड में मूड में आ गई है। कांग्रेस ने हाल ही में प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में धर्म संवाद और मंदिर स्वायत्त संकल्प दिन का आयोजन कर पूरे प्रदेश के पुजारियों साधु-संतों को बुलाया था इस आयोजन में यह मांग भी रखी गई कि मंदिरों को लेकर 1974 की व्यवस्था लागू की जाए और मंदिरों की जमीन का अधिकार मंदिर समिति को दिया जाए कांग्रेश ने आरोप लगाया कि मंदिरों पर सरकार कब्जा कर रही है पुजारियों धर्म आचार्यों पर अत्याचार हो रहे हैं शिकायत के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है।
    और अब बताया जा रहा है कि  इसी महीने से कांग्रेस धर्म रक्षा यात्राओं की शुरुआत कर सकती है इसके लिए पूरा खाका तैयार हो चुका है ।
    इन यात्राओं की जिम्मेदारी मध्य प्रदेश कांग्रेस मंदिर पुजारी प्रकोष्ठ की युवा इकाई को दी गई है । यह यात्राएं जिला स्तर से शुरू होकर ब्लॉक स्तर तक होंगी। यात्रा के दौरान भगवा ध्वज पताकाएं साथ रहेंगी। मशाल और बाइक रैली का आयोजन भी होगा। प्रदेश कांग्रेश पुजारी युवा इकाई के प्रदेश अध्यक्ष सुधीर भारती का कहना है कि इन यात्राओं पर इसके सैद्धांतिक सहमति बन गई है, सिर्फ प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ की हरी झंडी मिलने के बाद यात्राएं शुरू हो जाएंगी। कांग्रेस का कहना है कि इन यात्राओं का उद्देश्य धर्म संस्कृति की रक्षा और मंदिरों को सुरक्षा प्रदान करना है। साथ ही कांग्रेस से आमजन को जोड़ना है।
    भाजपा तो  पहले से ही हिंदुत्व के मुद्दे पर चुनावी मैदान में उतरती रही है , उसकी काट के लिए और एंटी हिन्दुत्व की छवि से छुटकारा पाने की कोशिश में कांग्रेस  ने भी अपना रंग रूप बदलना शुरू कर दिया है । जब से कमलनाथ ने कांग्रेस की कमान संभाली है, उन्होंने साफ्ट हिंदुत्व की ओर रुझान दिखाना शुरू कर दिया था और 2018  के चुनाव में इसे आजमाया भी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ अपने को हनुमान भक्त बताते हैं और वह कहते हैं कि राम किसी एक के नहीं है अब तो कांग्रेस के लोग खुलकर भगवान श्री राम के साथ सीता का नाम यानी जय सियाराम भी कहने लगे हैं कांग्रेश किसी भी तरह से धार्मिक आयोजन से पीछे नहीं हट रही है।

    भाजपा हमलावर

    वैसे कांग्रेस के इस बदले रूप पर भाजपा काफी हमलावर भी नजर आ रही है।
    प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि जिन लोगों ने भगवा आतंकवाद का शब्द गढ़े थे, वो लोग आज अपने कार्यालय को भगवा में रंग रहे हैं तो समझ लेना चाहिए कि अब अच्छे दिन जरूर आ गए हैं. कांग्रेस अपने कार्यालय में सुंदरकांड का पाठ करा रही है. ये वो लोग हैं जिन्होंने राम को काल्पनिक कहा था.
    वहीं इंदौर में बीजेपी के दिग्गज नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि कांग्रेस के नेता पहले सिर्फ रोजा इफ्तार में जाते थे लेकिन अब वे सुंदरकांड का पाठ कर रहे हैं, मंदिराें में जा रहे हैं और उनके नेता जनेऊ तक पहनने लगे हैं तो यह सीधे तौर मोदी इफेक्ट की वजह से कांग्रेस का ट्रांसफॉर्मेशन हो रहा है.
    पत्रकारों ने कमलनाथ से पूछा कि क्या झंडे इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के “भगवाकरण” का संकेत देते हैं। जवाब में, पूर्व सीएम ने पूछा कि क्या भाजपा के पास भगवा का ट्रेडमार्क है? क्या उन्होंने भगवा का ठेका लिया है? बीजेपी का दावा है कि उसने हिंदू धर्म का ठेका लिया है। अंतर यह है कि हम सभी की धार्मिक भावनाएं हैं, लेकिन हम इसे राजनीतिक मंच पर नहीं लाते हैं।

    कितना फायदा ,कितना नुकसान ?
    राजनीतिक समीक्षक मान रहे हैं कि दोनों ही दल आगामी चुनाव में हिंदुत्व को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करेंगे ,पर मतदाता किस पर भरोसा करता है यह देखने वाली बात होगी ।
    वैसे प्रदेश में कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधा मुकाबला है परंपरागत रूप से अल्पसंख्यक मतदाता का झुकाव कांग्रेसियों रहता आया है पर अब कांग्रेश अपना जो रूप बदल रही है वह हिंदुत्व समर्थकों को कितना लुभा पाती है यह तो फिलहाल नहीं कहा जा सकता पर अल्पसंख्यक मतदाता कांग्रेस के बदले रुख रवैये से निराश और नाराज जरूर हो सकता है और इसका फायदा आप, बसपा और सपा जैसे दलों को मिल सकता है । भाजपा के हिंदुत्व के मुकाबले कांग्रेस का हिंदुत्व मतदाता को कितना पसंद आता है यह तो 6 महीने बाद होने वाले चुनाव परिणाम ही बताएंगे।