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  • इस सरकार ने  आउटसोर्स ,संविदा कर्मचारियों की स्थिति बंधुआ मजदूरी से भी ज्यादा बदतर की -वासुदेव शर्मा 

    इस सरकार ने आउटसोर्स ,संविदा कर्मचारियों की स्थिति बंधुआ मजदूरी से भी ज्यादा बदतर की -वासुदेव शर्मा 

    मध्यप्रदेश कांग्रेस आउटसोर्स,अस्थाई व संविदा कर्मचारी प्रकोष्ठ का संभागीय सम्मेलन संपन्न

    इटारसी,// मध्यप्रदेश संविदा कांग्रेस आउटसोर्स,अस्थाई व संविदा कर्मचारी प्रकोष्ठ संभागीय सम्मेलन रविवार को गुजराती भवन में संपन्न हुआ जिसमे नर्मदापुरम,बैतूल,हरदा जिले के संविदा,आउटसोर्स कर्मचारी उपस्थित हुए।

    सम्मेलन को मुख्य अतिथि प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने संबोधित करते हुए कहा कि आज लाखो की संख्या में आउटसोर्स ,संविदा कर्मचारियों की स्थिति सरकार  ने बंधुआ मजदूरी से भी ज्यादा बदतर कर दी,आज उन्हे सुविधा,जोखिम से सुरक्षा तो छोड़ो मेहनत का प्रतिफल भी नही मिलता,सरकार की नियत ठीक नही है ।मनरेगा का बजट कम करके सरकार अत्याचार कर रही है,उन्होंने कांग्रेस के सभी नेताओ से अपील की आप इन कर्मचारियों की आवाज उठाए कर्मचारी आपके साथ है।

    पूर्व नगर कांग्रेस अध्यक्ष पंकज राठौर ने कहा कि कांग्रेस ने सार्वजनिक उपक्रमों की स्थापना कर रोजगार की व्यवस्था की आज सरकार इन उपक्रमों को बंद कर देश में बेरोजगारी की समस्या उत्पन्न कर रही है सरकार अपने उद्योगपति मित्रो को सरकारी मदद से लाखो करोड़ों का फायदा पहुंचा रहे,करोड़ों रुपए कर्ज ले रहे है पर संविदा,आउटसोर्स कर्मचारियों को वेतन विसंगति व अन्य सुविधाओं से वंचित किया जा रहा ये बहुत कष्टप्रद है।

    जिला किसान कांग्रेस अध्यक्ष विजय बाबू चौधरी ने कहा आज संविदा कर्मचारियों की स्थिति खेतिहर मजदूरों से भी बदतर है आज योग्यता के हिसाब से काम नही मिल रहा कार्यसेवा के दौरान मृत्यु की स्थिति में आज उनका परिवार समस्याओं से लड़ता रहता है उन्हे कुछ मिलता नहीं

    प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता राजकुमार उपाध्याय केलु ने कहा कि भाजपा के शासन में संविदा,अस्थाई कर्मचारियों के हालात यह है कि वो अपने हक की लड़ाई के लिए सड़को पर है कमलनाथ जी ने कांग्रेस के वचन पत्र में इनकी समस्याओं को गंभीरता से हल करने की बात कही।

    प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष कार्यक्रम आयोजक चंद्रकांत बहारे ने कहा कि यह लड़ाई बड़ी है इसमें सभी कांग्रेस नेताओ का सहयोग होगा तो निश्चित समस्याओं का हल निकलेगा।

    सम्मेलन को पूर्व जिला पंचायत सदस्य सुधीर गौर,चंद्रगोपाल मलैया,कांग्रेस पिछड़ा वर्ग प्रदेश उपाध्यक्ष मोहन झालिया,वरिष्ठ कांग्रेस नेता समीर शर्मा,प्रकोष्ठ उपाध्यक्ष रामकिशन यादव, प्रदेश महामंत्री अल्पसंख्यक विभाग परमजीतसिंह सलूजा लाली,नगर कांग्रेस अध्यक्ष मयूर जायसवाल, कांग्रेस पिछड़ा वर्ग नेता,गांधी चौपाल समन्वयक अभिषेक पटेल,गायत्री गिरि, ने संबोधित किया।

    इस अवसर पर हरदा,बैतूल,नर्मदापुरम जिले में प्रकोष्ठ पदाधिकारियों की नियुक्ति की गई 

    कार्यक्रम का संचालन चंद्रकांत बहारे व आभार प्रदर्शन अभिषेक पटेल ने किया।

    इस अवसर पर जिला अध्यक्ष दीपक यादव,केशव शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष पिछड़ा वर्ग कांग्रेस मुकेश यादव, उपभोक्ता संरक्षण प्रकोष्ठ कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष डा. नरेंद्र वर्मा,सरपंच नवल पटेल,जनपद सदस्य पप्पू आठनेरे,भवानी कहार, ट्रक ऑनर्स एसोसियेशन अध्यक्ष अंटू भाटिया, युवा कांग्रेस अध्यक्ष गोल्डी बेस,नगर अध्यक्ष सौम्य दुबे,गौरव चौधरी,पप्पी ठाकुर,नर्मदा रैकवार सहित अनेक कांग्रेस संविदा आउटसोर्स,अस्थाई संविदा कर्मचारी प्रकोष्ठ के पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित थे।

  • 5 एकड़ से कम भूमि वाले किसानों का फसल बीमा प्रीमियम सरकार भरेगी, कृषि मंत्री कमल पटेल ने की घोषणा

    5 एकड़ से कम भूमि वाले किसानों का फसल बीमा प्रीमियम सरकार भरेगी, कृषि मंत्री कमल पटेल ने की घोषणा

    हरदा// चुनावी तैयारियों के इस दौर में भाजपा कांग्रेस हर वर्ग व तबके के मतदाता को लुभाने के लिए तरह तरह की नई नई घोषणाएं कर रही हैं, पिछ्ले दो दिनों में   किसानों को लुभाने के लिए दोनों ही दलों ने एक एक लुभावनी घोषणा की है।

    पहले बात कांग्रेस की शुक्रवार को को कांग्रेस के किसान सम्मेलन में पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस सरकार आई तो किसानों का गेहूं ₹3000 प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा।

    वहीं शनिवार को प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल ने हरदा के सर्किट हाउस में पत्रकारों से चर्चा के दौरान यह घोषणा की कि प्रदेश में 5 एकड़ से कम भूमि वाले लघु एवं सीमांत किसानों की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसल बीमा की प्रीमियम राशि अब प्रदेश सरकार भरेगी।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक करोड़ तीन लाख किसान है लेकिन सिर्फ 25 फ़ीसदी किसान ही फसल बीमा करवा पाते हैं 24 लाख 23 हजार किसानों ने फसल बीमा करवाया है फसल बीमा का प्रीमियम भरने का काम सरकार द्वारा विधानसभा चुनाव से पहले किया जाएगा अभी फसल बीमा के तहत किसानों के लिए रबी सीजन में 1.35 फ़ीसदी प्रीमियम किसानों से ही ली जाती है खरीफ की फसल का बीमा कराने के लिए किसानों को 2 फ़ीसदी प्रीमियम देना पड़ता है बाकी का केंद्र एवं राज्य सरकार चुकाती है।

  • इस साल नहीं होगी खाद की कमी? चुनावी साल में सरकार तैयार !

    भोपाल//  हर साल बुवाई के मौसम में खाद की किल्लत के चलते सरकार को किसानों का गुस्सा झेलना पढ़ता है, चूंकि इस साल नवंबर में चुनाव है सरकार किसानों की नाराजगी का जोखिम नहीं उठाना चाहती । इसलिए पहले से व्यवस्था में जुट गई है। कहा जा रहा है कि इस साल किसानों को पर्याप्त खाद मिल सकेगी ,यहां तक की इस बार किसान अपनी सुविधा के अनुसार पहले भी खाद ले सकेंगे।

    खबरों के मुताबिक सूबे में 11 लाख टन खाद का अग्रिम भंडारण किया जा रहा है। सरकार ने यूरिया, डीएपी, एनपीके दिए जाने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा था, केंद्र सरकार ने प्रस्ताव को सहमति दे दी है और भंडारण के लिए खाद मिलना भी शुरू हो गया है । प्रदेश सरकार मई तक भंडारण पूरा लेगी।

    विपक्ष को नहीं देना चाहते राजनीति का मौका !

    दरअसल, हर साल बुवाई सीजन में प्रदेश में खाद की कमी को लेकर किसानों के बीच मारामारी मचती है। खाद के लिए गोदामों पर लंबी लाइन लगती हैं। परेशान किसान आंदोलनों और प्रदर्शन पर उतर आते हैं। इससे विपक्ष को सरकार को घेरने का मौका मिल जाता है। यह स्थिति रबी सीजन में अक्टूबर और दिसंबर के बीच ज्यादा बनती है। पिछले स बुवाई सीजन में ग्वालियर चंबल क्षेत्र में कानून व्यवस्था की स्थिति निर्मित हो गई थी। प्रदेश में कई जगह गोदाम लूटने जैसी घटनाएं भी हुई। इस चुनावी साल में सरकार विपक्ष को कोई मौका नहीं देना चाहती इसलिए उसने अपनी तैयारी दुरुस्त करने का फैसला किया है।

  • राशन माफियाओं के कारण  नहीं की जा रही है राशन दुकानों की गड़बड़ियों की जॉच- केलू उपाध्याय

    राशन माफियाओं के कारण  नहीं की जा रही है राशन दुकानों की गड़बड़ियों की जॉच- केलू उपाध्याय

    इटारसी/ नर्मदापुरम//  कांग्रेस कमेटी के  प्रदेश प्रवक्ता व  नर्मदापुरम जिला के मीडिया प्रभारी  राजकुमार केलू उपाध्याय ने आरोप लगाया है कि इटारसी अनुविभाग की समस्त शासकीय उचित मूल्य प्राथमिक राशन उपभोक्ता भंडारों में वितरण अनाज की जांच राजनैतिक संरक्षण प्राप्त राशन माफियाओं के कारण  नहीं की जा रही है, और न ही जॉच की जानकारी दी जा रही है।

     श्री उपाध्याय ने  एक बयान जारी कर कहा कि उनके द्वारा अनुविभागीय अधिकारी को तीन पत्र 8 जून 2020, 4 मार्च 2022 व 4 अप्रैल 2023 को इटारसी अनुविभाग की समस्त शासकीय उचित मूल्य प्राथमिक राशन उपभोक्ता भंडारों में वितरण अनाज की जांच के लिए दिए गए है लेकिन प्रशासन की जांच गति 34 माह में भी राजनैतिक संरक्षण प्राप्त राशन माफियाओं के कारण शून्यता की स्थिति में है ।

     केलू उपाध्याय ने कहा कि प्रदेश भाजपा सरकार , जिला प्रशासन,स्थानीय प्रशासन की उदासीनता का  नर्मदापुरम जिले से बड़ा उदाहरण नहीं हो सकता।

     उन्होंने कहा कि मेरे द्वारा 32 माह में तीन पत्र दिए गए इन पत्रों में इटारसी अनुविभाग के अंतर्गत समस्त शासकीय उचित मूल्य राशन दुकानों द्वारा वितरण खाद्यान्न की सूक्ष्मता के साथ भौतिक सत्यापन के माध्यम से जांच कर साथ ही लगभग 50 प्रतिशत राशन उपभोक्ताओ से कथन व खाद्यान्न वितरण की जानकारी लिए जाने की मांग की गई है तथा इसमें होने वाली अनियमितता पर कार्यवाही की भी मांग की थी।पत्र के माध्यम से कोविड-19 (कोरोना महामारी) के संकटकाल में केंद्र व राज्य सरकार द्वारा वितरण किए गए खाद्यान्न की जांच 4 अप्रैल 2023 के दिए पत्र के पूर्व कितनी शासकीय राशन दुकानों की जांच इन बिंदुओं पर की गई इसकी जानकारी दिए जाने की मांग प्रमुखता से की है. लेकिन विगत 34 माह बाद भी इन पत्रों की जानकारी अभी तक नहीं मिली है ।

    उनका कहना है कि इन मामलों में कई पात्र गरीब परिवार अपात्रों व पात्रता पर्चीयो की बंदरबांट में राशन पाने से वंचित रहे वहीं कई अपात्रों को पात्रता पर्ची वितरण में राशन मिल गया । अपात्र परिवार राशन ले रहे हैं वास्तविक गरीब पात्र परिवार भटक रहे हैं वही राशन दुकानों के वितरण व खुलने के दिन समय भी अधिकारियों की रहम,लापरवाही के कारण नियमित नहीं है ।प्रशासन इसकी  महीनों जांच नहीं करता है इससे राशन माफिया हावी है गरीब जनता परेशान है। उन्होंने बताया कि  पत्र की प्रति प्रदेश के खाद्य मंत्री,प्रमुख सचिव खाद्य विभाग व नर्मदापुरम जिलाधीश(कलेक्टर) को ट्विटर के माध्यम से भेजी गई है।

  • सूबे में टूटने लगी जुबां की मर्यादा ! कोई किसी को कह रहा पागल तो कोई कह रहा गुंडा !

    सूबे में टूटने लगी जुबां की मर्यादा ! कोई किसी को कह रहा पागल तो कोई कह रहा गुंडा !

     भोपाल//सूबे विधानसभा चुनाव निकट आते जा रहे हैं, और राजनीतिक दलों के नेताओं की जुबानी जंग तेज हो गई है , कई बार तो बयान बाजी सामान्य मर्यादाओं को लांघती दिखाई देने लगी है ,और जैसे-जैसे चुनाव की सरगर्मियां और बढ़ेगी, इसके बढ़ने का अनुमान है। 2 दिन पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राहुल गांधी को स्वार्थी बताते हुए कांग्रेस की विचारधारा को गद्दार कह दिया था, वहीं उस पर पलटवार करते हुए दिग्विजय सिंह ने एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि क्यों ना हमें इन्हे गद्दार कहें।

    फिलहाल नया मामला मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का है। शुक्रवार को शिवराज सिंह ने कमलनाथ को पागल कह दिया तो कमलनाथ ने सीएम को सड़क छाप गुंडा और कुंठित व्यक्ति कह डाला।

    कुछ यह कहा मुख्यमंत्री ने सीएम शिवराज सिंह ने

     शुक्रवार को स्मार्ट पार्क के पौधरोपण के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘कमलनाथ चुनाव के पहले कह रहे थे कि मुसलमानों के पोलिंग बूथ पर 90 परसेंट वोट क्यों नहीं डालते ? यह वीडियो सारी दुनिया ने देख। वे मुसलमानों को वोट बैंक मानते हैं। क्या वोट के लिए अब धर्म और जातियों में बांट कर लोगों को भड़काया जाएगा ? वो फिर( कमलनाथ ) एक समुदाय से कह रहे हैं कि प्रदेश में दंगे भड़क रहे हैं। मैं पूछता हूं कहां दंगे भड़क रहे हैं?लेकिन वोट की भूख ने आप( कमलनाथ) इतने पागल हो गए हैं कि मध्यप्रदेश को वैमनस्यता की खाई में झोंकना चाहते हैं।’

    कमलनाथ ने भी उसी शैली में दिया जवाब !

    सीएम शिवराज के बयान पर कमलनाथ ने जवाब देते हुए कहा कि  ‘शिवराज जी कुछ दिन पहले आप मेरा अंत करना चाहते थे और आज आपने मुझे पागल कहा है। पूरी दुनिया देख रही है कि मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री कैसी सड़क छाप गुंडों की भाषा बोल रहा है। उसके भीतर की सारी सभ्यता और संस्कार समाप्त हो चुके हैं। मुझे अपने अपमान की फिक्र नहीं है, लेकिन, दुख इसका है कि मध्य प्रदेश जैसे महान राज्य के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर ऐसे कुंठित विचारों वाला व्यक्ति बैठा है। ये प्रदेश की आठ करोड़ जनता का अपमान है। आप का षड्यंत्र कामयाब नहीं होगा।’

    नाथ का वीडियो सामने आने के बाद शुरू हुई बयान बाजी!

     दरअसल बुधवार को छिंदवाड़ा में रोजा इफ्तार के कार्यक्रम में शामिल हुए कमलनाथ का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि यह लोग (भाजपा वाले) पूरे देश में दंगे फसाद कराना चाहते हैं. आप लोग छिंदवाड़ा संभालिए, मुझे प्रदेश संभालने दीजिए। आप चाहते हैं मैं यहां बंध कर रह जाऊं, तो मैं बंध कर रह जाता हूं । कमलनाथ का यह वीडियो सामने आने के बाद से बीजेपी उन पर हमलावर है।

  • इंसाफ देने के मामले में कर्नाटक सबसे चुस्त, यूपी सबसे सुस्त… मध्य प्रदेश आठवें स्थान पर …!

    इंसाफ देने के मामले में कर्नाटक सबसे चुस्त, यूपी सबसे सुस्त… मध्य प्रदेश आठवें स्थान पर …!

    नई दिल्ली // भारत में जल्दी इंसाफ देने के मामले में दक्षिणी राज्य कर्नाटक देश के विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे आगे हैं. दूसरा स्थान पर तमिलनाडु है .यह दावा मंगलवार को जारी इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 2022 में किया गया है . इस रिपोर्ट के मुताबिक अदालतों में  इंसाफ देने के मामले में मध्य प्रदेश देश में आठवें स्थान पर है . वर्ष 2020 के सोलहवें स्थान की तुलना में मध्यप्रदेश  ने इस बार आठ पायदान की लम्बी छलांग लगायी है . इंडिया जस्टिस रिपोर्ट में देश के एक करोड़ से ज्यादा आबादी वाले 18 राज्यों में मध्यप्रदेश का स्कोर 10 में से 5.25 है

    न्याय देने के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे नीचे यानी 18 वें स्थान पर है वहीं राजस्थान 15 वें, बिहार 16 वें, पश्चिम बंगाल 17वें स्थान पर है

    ‘इंडिया जस्टिस रिपोर्ट’ (आईजेआर)-2022  पुलिस, न्यायपालिका, जेल और विधिक सहायता के लिए बजट, संसाधन की उपलब्धता आदि के आधार पर तैयार की गई है।

     रिपोर्ट के अनुसार, न्याय तक सुगम पहुंच प्रदान करने वाले पांच शीर्ष राज्यों में चार दक्षिणी भारत से हैं। एक करोड़ से अधिक आबादी वाले बड़े राज्यों की इस सूची में तीसरा स्थान तेलंगाना ने हासिल किया है, जबकि गुजरात और आंध्र प्रदेश क्रमश: चौथे और पांचवें स्थान पर हैं।

    इंडिया जस्टिस रिपोर्ट की शुरुआत टाटा ट्रस्ट ने 2019 में की थी। यह तीसरी रिपोर्ट है . बता दें कि टाटा ट्रस्ट की अगुवाई में जारी यह रिपोर्ट दक्ष (DAKSH), कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव, कॉमन कॉज, सेंटर फॉर सोशल जस्टिस, विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी और टीआईएसएस-प्रयास के सहयोग से तैयार की गई है।

    यह तीसरा आईजेआर रिपोर्ट देश के 25 राज्य मानवाधिकार आयोगों की क्षमता का भी अलग से आकलन करती  है।

    रिपोर्ट के अनुसार भारत की जेलों में बंद केवल 22 प्रतिशत लोग ही सजायाफ्ता मुजरिम हैं, 77.10 प्रतिशत बंदी विचाराधीन हैं। इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 2022 ने यह दावा कर बताया कि साल 2010 के मुकाबले 2021 तक विचाराधीन बंदियों की संख्या 2.4 लाख से बढ़कर 4.3 लाख पहुंच चुकी है, यानी करीब दोगुनी हुई है।



    रिपोर्ट ने जेलों में क्षमता से अधिक लोगों को रखने पर चिंता जताई। इसके अनुसार 2021 में जेलों में आबादी कुल 5.54 लाख पहुंच चुकी है, जबकि 2020 व 2019 में यह क्रमश: 4.89 लाख व 4.81 लाख थी। केवल 2021 में देश की 1,319 जेलों में 18.1 लाख लोग भेजे गए, जो 2020 के 16.3 लाख से करीब 10.8% अधिक है। मध्यप्रदेश, मिजोरम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश और अंडमान निकोबार द्वीप समूह की जेलों में विचाराधीन बंदियों की संख्या 60% से कम है। अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मेघालय और पुडुचेरी को छोड़ हर राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में विचाराधीन कैदी बढ़े हैं

  • जिला स्तर पर वचन पत्र तैयार करेगी कांग्रेस

    जिला स्तर पर वचन पत्र तैयार करेगी कांग्रेस

    भोपाल// प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रदेश के साथ ही जिला स्तर पर भी वचन पत्र जारी करेगी। इसके लिए हर जिले की समस्याओं का अध्ययन करने उसका समाधान सुलझाने के निर्देश दिए हैं ताकि जिले के लोगों की आकांक्षाओं और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए वजन पत्र तैयार किया जा सके। वचन पत्र में समाज के सभी वर्गों विशेषकर पिछड़े,आदिवासी  महिला और युवाओं को लुभाने वाले वादे और कार्यक्रमों पर विशेष जोर देने की बात की है।

    जिला शहर कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्षों ,जिला प्रभारी सह प्रभारियों की बैठक को संबोधित करते हुए पिछ्ले दिनों कमलनाथ ने कहा है कि हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता बूथ प्रबंधन की होगी। बूथ प्रबंधन मजबूत होगा तो हम मजबूत होंगे। मंडलम सेक्टर पर मजबूती ही कांग्रेस को मजबूती प्रदान करेगी। उन्होंने सभी पदाधिकारियों से कहा कि आप सभी की जिम्मेदारी है कि जिला स्तर पर संगठन को मजबूती प्रदान करें। जिलों सामंजस बनाकर जिला अध्यक्ष जिला प्रभारियों सह प्रभारी साथ मिलकर काम करें प्रकोष्ठ दो और मोर्चा संगठनों को साथ लेकर चलें जिले में अधिक से अधिक बैठ के करें। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से कहा कि भाजपा चुनाव में धांधली करने के सभी षड्यंत्र करेगी उस पर पैनी निगाह रखनी होगी।

  • कमलनाथ सरकार के दौर में सूबे में भी तैयार हुआ था ‘राइट टू हेल्थ बिल’,आज स्वास्थ्य विभाग में खा रहा है धूल ?

    कमलनाथ सरकार के दौर में सूबे में भी तैयार हुआ था ‘राइट टू हेल्थ बिल’,आज स्वास्थ्य विभाग में खा रहा है धूल ?

    भोपाल // अभी हाल ही में राजस्थान सरकार ने स्वास्थ्य का अधिकार (राइट टू हेल्थ) बिल विधानसभा में पारित किया है, जिसका वहां विरोध हो रहा है। इसी तर्ज पर 2019 में मध्य प्रदेश की तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने भी राइट टू हेल्थ बिल को लेकर तैयारी की थी ।इसके लिए बाकायदा हेल्थ कांक्लेव आयोजित कर देश के तमाम विशेषज्ञों से चर्चा कर एक मसौदा तैयार किया था । अब यह मसौदा स्वास्थ्य विभाग में धूल खा रहा है यदि उस समय यह बिल पास हो जाता तो मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य होता जो अपनी जनता को स्वास्थ्य का अधिकार प्रदान करता जिसका प्रदेश की साढ़े साथ करोड़ जनता को फायदा पहुंचता।

    आयुष्मान योजना से लिंक किया गया था

     जानकारी के अनुसार 2019 में जो राइट टू हेल्थ बिल तैयार किया गया था, उसे केंद्र की आयुष्मान भारत निरामय योजना से लिंक किया गया था, इसके तहत आम लोगों को पांच लाख रूपए तक फ्री इलाज की सुविधा केंद्र देता है, वह तो रहती ही, इसके आगे इलाज में होने वाले खर्च को राज्य शासन वहन करती । इतना ही नहीं प्रदेश के बाहर भी इलाज कराया जा सकता था।

     निजी अस्पतालों की मनमानी पर रोक लगाने की थी कोशिश

     मध्यप्रदेश के इस राइट टू हेल्थ बिल में जो सबसे खास बात थी वह यह कि इमरजेंसी इलाज के दौरान यदि कोई मरीज निजी अस्पताल पहुंच जाता है तो अस्पताल उससे बिना पैसे की मांग किए इलाज शुरू करना था,अभी तक ऐसा नहीं होता है। इसलिए कई मामलों में मरीज की जान तक चली जाती है। वहीं दूसरी ओर निजी अस्पतालों में हर बीमारी के इलाज का खर्च भी फिक्स किया गया था ।

    97 बीमारियों को किया गया था कवर

     2019 में तैयार किया गया राइट टू  हेल्थ बिल में 97 बीमारियों के इलाज की गारंटी सरकार दे रही थी । उस समय के प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री रहे तुलसी सिलावट ने बताया था कि 97 प्रकार की बीमारियों में मुख्य रूप से कैंसर, हार्ट डिसीज, ब्रेन ट्यूमर और पैरालिसिस भी शामिल थे

    संसाधन पर था जोर

     हेल्थ बिल को सफल बनाने के लिए पूरी योजना तैयार की गई थी। उसमें सबसे ज्यादा जोर हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर और चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने पर दिया गया था। इसमें जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेज से जोड़ने के साथ ही बड़े बड़े जिलों में कुछ नए अस्पताल खोलने की योजना थी। वही दस हजार सब हेल्थ सेंटर खोलकर उसमें सबसे बड़े स्तर तक चिकित्सकों की भर्ती करने की योजना थी।

     डॉक्टर्स की जिम्मेदारी होती तय

    राइट टू हेल्थ बिल को तैयार करने में वरिष्ठ विशेषज्ञों ने अपनी सलाह दी थी।  सलाह का एक बिंदु यह भी था कि सरकारी से लेकर निजी अस्पताल तक के चिकित्सक की जिम्मेदारी तय की जाए, एक तरफ जहां सरकारी अस्पताल में डाक्टर नदारद रहते हैं वहीं दूसरी और निजी अस्पताल में डॉक्टर से पैसे की लूट में लगे रहते हैं । इस राइट टू हेल्थ बिल  में चिकित्सकों की जिम्मेदारी तय की गई थी।

  • चुनावों की तैयारी – कांग्रेस किसान ,महिला और कर्मचारी पर कर रही है फोकस

    चुनावों की तैयारी – कांग्रेस किसान ,महिला और कर्मचारी पर कर रही है फोकस

    भोपाल // प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर लगभग 6 महीने का वक्त बचा है दोनों ही प्रमुख दल पूरी ताकत से तैयारियों में जुटे हुए हैं। राजनीतिक हालातों के चलते मुक़ाबला कांटे का माना जा रहा है  । दोनो ही हर तरह और तबके  के मतदाता को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं । जहां भाजपा द्वारा लाडली बहना योजना और प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि और प्रदेश सरकार की ओर से दी जाने वाले चार हजार रूपए को मास्टर स्ट्रोक बताया जा रहा है , वहीं कांग्रेस अपनी पूरी रणनीति महिला ,किसान और कर्मचारियों पर फोकस कर रही है । यह तीनों तबके मिलाकर लगभग 50% से अधिक मतदाता है। 

    लाड़ली बहना की काट में 15सौ रूपये और पांच सौ में गैस सिलेंडर

    कांग्रेस  भाजपा सरकार  की लाड़ली बहना योजना की काट में एक हजार की जगह 15 सौ रुपए देने की बात कर रही है साथ ही रसोई गैस का सिलेंडर ₹500 में देने की भी घोषणा की है । लाड़ली बहना योजना के तहत महिलाओ के खाते में एक हजार रुपया हजार जून माह तक आने की संभावना है फिलहाल तो महिलाएं इस योजना के लिए आवेदन करने में आ रही दिक्कतों से परेशान नजर आ रहीं हैं। प्रदेश में लगभग 2 करोड़ 60 लाख मतदाता है महिलाएं हैं। पूरी खींचतान इन्हीं के लिए है।

    फिर से कर्ज माफी का वादा

    जहां तक किसानों का सवाल है भा जा पा को अपनी सम्मान निधि और प्रदेश सरकार द्वारा दिए जा रहे पैसे पर भरोसा है। भाजपा आरोप लगाती रही है कि पंद्रह महीने की कांग्रेश सरकार ने किसानों की कर्ज माफी का वादा तोड़ा है। अब वह किसानों का ऋण माफ किए जाने का दावा करते हुए किसानों को राहत की बात कर किसानों को लुभा रही है । वहीं कांग्रेस इसे झूट बताते हुए फिर से कर्ज माफी का वादा कर रही है। हाल ही में हुई बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के लिए उसने तत्परता से सर्वे का काम शुरू करवा दिया है। 

    पुरानी पेंशन की मांगसे परेशान भाजपा

    कर्मचारी वर्ग की सबसे बड़ी मांग पुरानी पेंशन की बहाली जरूर भाजपा के लिए सिरदर्द है। कर्मचारी इसको लेकर लामबंद हो रहे है और आंदोलन की चेतावनी भी दे चुके है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को लपक लिया है और वह इसे भुनाने के मूड में है। जहां भाजपा के पास कर्मचारियों के लिए कोई योजना नहीं है वही कांग्रेसमें कर्मचारियों को पुरानी पेंशन और नियमितीकरण का वादा कर एक बड़ा दांव चला है।

    सस्ती बिजली की बात

    इसके अलावा सस्ती बिजली एक बड़ा मुद्दा है है 15 महीने की अपनी सरकार के दौरान कमल कमलनाथ ने सस्ती बिजली की एक ऐसी योजना शुरू की थी जिसे आज भी गरीब एवं मध्यम वर्ग बड़ी राहत के रूप में याद करते हैं उस दौरान ₹100 में 100 यूनिट बिजली से मध्यमवर्ग को बड़ी राहत मिली थी कांग्रेश इसे फिर से भुनाने की कोशिश में है बताया जाता है कि कांग्रे सब 100 यूनिट का दायरा बढ़ाकर इसे 200 यूनिट तक ले जा सकती है।

  • जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी..!

    जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी..!

    रामनवमी पर विशेष

    राम हमारी अनंत मर्यादाओं के प्रतीक पुरुष हैं इसलिए उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम के नाम से पुकारा जाता है। हमारी संस्कृति में ऐसा कोई दूसरा चरित्र नहीं है जो राम के समान मर्यादित , धीर-वीर और प्रशांत हो। इस  एक विराट चरित्र को गढ़ने में भारत के सहस्त्रों प्रतिभाओं ने कई शताब्दियों तक अपनी मेधा का योगदान दिया । आदि कवि वाल्मीकि ने अपनी लेखनी और प्रतिभा से इस चरित्र को संवारा। वाल्मीकि के राम लौकिक जीवन की मर्यादाओं का निर्वाह करने वाले वीर पुरुष हैं। उन्होंने लंका के अत्याचारी राजा रावण का वध किया और लोक धर्म की पुन: स्थापना की। लेकिन वे नील गगन में दैदीप्यमान  सूर्य के समान दाहक शक्ति से संपन्न ,महासमुद्र की तरह गंभीर तथा पृथ्वी की तरह क्षमाशील भी है।

     महाकवि भास कालिदास और भवभूति के राम कुल रक्षक ,आदर्श पुत्र, आदर्श पति, आदर्श पिता और आदर्श प्रजा पालक राजा का चरित्र सामने रखते हैं। कालिदास ने रघुवंश में इक्ष्वाकु वंश का वर्णन किया तो भवभूति ने उत्तर रामचरित्र में अनेक मार्मिक प्रसंग जोड़े।  लेकिन तुलसीदास ने राम के चरित्र का कोई प्रसंग नहीं छोड़ा है, इसलिए यह कहा जा सकता है कि रामकथा को संपूर्णता वास्तव में तुलसीदास ने ही प्रदान की है। रामचरितमानस एक कालजयी रचना है जो भारतीय मनीषा के समस्त लौकिक, पारलौकिक, आध्यात्मिक ,नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों को राम के चरित्र में इस तरह जोड़ देती है मानो किसी कुशल शिल्पी ने नगीने जड़ें हों। लेकिन तुलसी के राम विष्णु के अवतार हैं। वे दुराचारियों यज्ञ विध्वंसक राक्षसों का नाश कर लौकिक मर्यादाओं की स्थापना के लिए जन्म लेते हैं । वे सांसारिक प्राणियों को की तरह सुख-दुख का भोग जरूर करते हैं पर जीवन मरण के चक्र से होकर गुजरते हैं और अंततः अपनी पारलौकिक छवि की छाप छोड़ जाते हैं ।

    दरअसल,तुलसीदास ने राम के चरित्र के कई प्रसंगों की व्याख्या करते हुए उनके ईश्वरत्व की ओर इशारा किया है। इसका अर्थ यह है कि तुलसी ने राम के चरित्र में दो परस्पर विरोधी और विपरीत धाराओं में समन्वय का प्रयास करते हुए इसे और भव्यता प्रदान करने की कोशिश की है।  राम सुख दुख ,पाप पुण्य, धर्म अधर्म, शुभ अशुभ, कर्तव्य अकर्तव्य, ज्ञान विज्ञान, योग भोग, स्थूल सूक्ष्म, जड़ चेतन, माया ब्रह्म, लौकिक पारलौकिक आदि का सर्वत्र समन्वय करते हुए दिखाई देते हैं । इसीलिए वे मर्यादा पुरुषोत्तम तो है ही मानव चेतना के आदि पुरुष भी हैं।  भारत के विभिन्न धार्मिक संप्रदायों और मत मतांतरों के प्रवर्तक संतों ने राम की अलग-अलग कल्पना की है। इनमें हर एक के राम अलग-अलग हैं। तुलसीदास, नाभादास ,गुरु नानक, कबीर आदि के राम अलग हैं। किसी के लिए राम दशरथ पुत्र हैं, तो किसी के लिए सबसे न्यारे हैं। तुलसीदास ने यह भी कहा है कि ‘जाकी रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिन तैसी’

     लेकिन यहां एक बात रह रह कर मन में कौंधती है कि आखिर यह देश दो अक्षरों के एक राम नाम के पीछे पागलपन की हद तक क्यों पड़ा है ? सुबह बिस्तर से उठते राम! बाहर निकलते ही राम -राम, दिनभर राम नाम की अटूट श्रृंखला। फिर शाम को राम का नाम और जीवन की अंतिम यात्रा भी ‘राम नाम सत्य है’ के साथ। आखिर इसका रहस्य क्या है ? घर में राम, मंदिर में राम, सुख में राम, दुख में राम।  शायद यही देखकर अल्लामा इकबाल को भी लिखना पड़ा – है राम के वजूद पर हिंदुस्तान को नाज, अहले वतन समझते हैं, उनको इमाम ए हिंद ।

    यहां माता-पिता राम जैसे पुत्र की कामना करते हैं। इस मर्यादावादी देश में राम कहीं भी लौकिक मर्यादाओं का अतिक्रमण करते हुए दिखाई नहीं देते। वे लंका विजय के बाद भी वहां का राज विभीषण को सौंप देते हैं। सीता हरण के प्रसंग में भी वे उद्विग्न नहीं होते। वनवास मिलने पर भी उसी सहजता से स्वीकार करते हैं और पिता की आज्ञा मानकर वन को प्रस्थान करते हैं। उनके मन मैं विमाता कैकयी और भाई भरत के लिए स्नेह बना रहता है । उनका ह्रदय करुणा से ओतप्रोत है। वे जब रावण का वध करते हैं तो पश्चाताप करते हैं। लौकिक जीवन की मर्यादा एवं राज धर्म के निर्माण के लिए धोबी के ताने सुनकर सीता का परित्याग कर देते हैं । उन्हें अपने जीवन की खुशियों से बढ़कर लोकजीवन की चिंता है। राजा के इस आदर्श के कारण ही भारत में रामराज की आज तक कल्पना की जाती है। राम के बिना भारतीय समाज की कल्पना कैसे की जा सकती है?

    (संकलित )