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  • पूर्व क्रिकेटर  ने क्यों किया पंजाब केसरी पर मुकदमा ?

    पूर्व क्रिकेटर  ने क्यों किया पंजाब केसरी पर मुकदमा ?

    नई दिल्ली// पूर्व क्रिकेटर और भाजपा सांसद गौतम गंभीर ने पंजाब केसरी अखबार के खिलाफ ₹2 करोड़ हर्जाने की मांग को लेकर दिल्ली एचसी के समक्ष मानहानि का मुकदमा दायर किया है

    गंभीर ने अखबार द्वारा प्रकाशित कहानियों के एक समूह के लिए पंजाब केसरी, इसके प्रधान संपादक और दो पत्रकारों पर मुकदमा दायर किया है।
    पूर्व क्रिकेटर और बीजेपी सांसद (सांसद) गौतम गंभीर ने हिंदी अखबार पंजाब केसरी के खिलाफ ₹2 करोड़ का हर्जाना मांगने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया है।

    गंभीर ने अखबार, उसके संपादक आदित्य चोपड़ा के साथ-साथ संवाददाताओं अमित कुमार और इमरान खान पर यह कहते हुए मुकदमा दायर किया है कि उन्होंने व्यवस्थित रूप से उन्हें निशाना बनाते हुए कई दुर्भावनापूर्ण और अपमानजनक लेख प्रकाशित करके अपनी पत्रकारिता की स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया है।

    अधिवक्ता जय अनंत देहदराई के माध्यम से दायर अपने मुकदमे में, गंभीर ने दावा करने के लिए रिपोर्टों के एक समूह का हवाला दिया कि कागज ने अपनी कहानियों को एक भ्रामक स्पिन दिया। एक रिपोर्ट में उनकी तुलना पौराणिक राक्षस भस्मासुर से भी की गई थी, इसका विरोध किया गया था।

    सूट में उल्लिखित कुछ रिपोर्ट हैं:

    सांसद गौतम गंभीर लापता गली-गली में लगे पोस्टर;

    दिल्ली के लापता सांसद लखनऊ सुपर जाइंट्स के लिए बने भस्मासुर (लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए दिल्ली का लापता सांसद बना भस्मासुर);

    आदेश गुप्ता बोलते रह गए, गौतम गंभीर उठ चले (आदेश गुप्ता बोलते रहे, गौतम गंभीर चले गए);

    ये नए मिजाज के सांसद है जरा फासलो से मिला करो।

    गंभीर ने तर्क दिया कि ये रिपोर्ट उनके काम के बारे में एक झूठी और गहरी अपमानजनक कहानी बनाती हैं और पाठकों के मन में एक सांसद के रूप में रहती हैं।

    रिपोर्ट में उन्हें एक जातिवादी व्यक्ति और एक उच्च नाक वाले राजनेता के रूप में चित्रित किया गया था, यह इंगित किया गया था।

    गंभीर ने धर्मार्थ संगठनों को 2 करोड़ रुपये का हर्जाना देने की मांग की है। उन्होंने यह भी प्रार्थना की कि प्रतिवादियों को बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए और इसे पंजाब केसरी द्वारा प्रसारित सभी समाचार पत्रों (डिजिटल संस्करणों सहित) में प्रकाशित किया जाना चाहिए।

    उन्होंने यह भी प्रस्तुत किया कि उनके खिलाफ किए गए प्रत्येक अपमानजनक प्रकाशन को वापस लेने के लिए कागज को निर्देश जारी किए जाने चाहिए।

    वाद को न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

  • पूर्व क्रिकेटर  ने क्यों किया पंजाब केसरी पर मुकदमा ?

    नई दिल्ली// पूर्व क्रिकेटर और भाजपा सांसद गौतम गंभीर ने पंजाब केसरी अखबार के खिलाफ ₹2 करोड़ हर्जाने की मांग को लेकर दिल्ली एचसी के समक्ष मानहानि का मुकदमा दायर किया है

    गंभीर ने अखबार द्वारा प्रकाशित कहानियों के एक समूह के लिए पंजाब केसरी, इसके प्रधान संपादक और दो पत्रकारों पर मुकदमा दायर किया है।
    पूर्व क्रिकेटर और बीजेपी सांसद (सांसद) गौतम गंभीर ने हिंदी अखबार पंजाब केसरी के खिलाफ ₹2 करोड़ का हर्जाना मांगने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया है।

    गंभीर ने अखबार, उसके संपादक आदित्य चोपड़ा के साथ-साथ संवाददाताओं अमित कुमार और इमरान खान पर यह कहते हुए मुकदमा दायर किया है कि उन्होंने व्यवस्थित रूप से उन्हें निशाना बनाते हुए कई दुर्भावनापूर्ण और अपमानजनक लेख प्रकाशित करके अपनी पत्रकारिता की स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया है।

    अधिवक्ता जय अनंत देहदराई के माध्यम से दायर अपने मुकदमे में, गंभीर ने दावा करने के लिए रिपोर्टों के एक समूह का हवाला दिया कि कागज ने अपनी कहानियों को एक भ्रामक स्पिन दिया। एक रिपोर्ट में उनकी तुलना पौराणिक राक्षस भस्मासुर से भी की गई थी, इसका विरोध किया गया था।

    सूट में उल्लिखित कुछ रिपोर्ट हैं:

    सांसद गौतम गंभीर लापता गली-गली में लगे पोस्टर;

    दिल्ली के लापता सांसद लखनऊ सुपर जाइंट्स के लिए बने भस्मासुर (लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए दिल्ली का लापता सांसद बना भस्मासुर);

    आदेश गुप्ता बोलते रह गए, गौतम गंभीर उठ चले (आदेश गुप्ता बोलते रहे, गौतम गंभीर चले गए);

    ये नए मिजाज के सांसद है जरा फासलो से मिला करो।

    गंभीर ने तर्क दिया कि ये रिपोर्ट उनके काम के बारे में एक झूठी और गहरी अपमानजनक कहानी बनाती हैं और पाठकों के मन में एक सांसद के रूप में रहती हैं।

    रिपोर्ट में उन्हें एक जातिवादी व्यक्ति और एक उच्च नाक वाले राजनेता के रूप में चित्रित किया गया था, यह इंगित किया गया था।

    गंभीर ने धर्मार्थ संगठनों को 2 करोड़ रुपये का हर्जाना देने की मांग की है। उन्होंने यह भी प्रार्थना की कि प्रतिवादियों को बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए और इसे पंजाब केसरी द्वारा प्रसारित सभी समाचार पत्रों (डिजिटल संस्करणों सहित) में प्रकाशित किया जाना चाहिए।

    उन्होंने यह भी प्रस्तुत किया कि उनके खिलाफ किए गए प्रत्येक अपमानजनक प्रकाशन को वापस लेने के लिए कागज को निर्देश जारी किए जाने चाहिए।

    वाद को न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

  • सूबे के मंत्रियों को उनके ही क्षेत्रों में घेरेगी कांग्रेस !

    सूबे के मंत्रियों को उनके ही क्षेत्रों में घेरेगी कांग्रेस !

    भोपाल//नवंबर में होने वाले चुनाव के लिए कांग्रेस लगातार रणनीति बना रही है । नई रणनीति के तहत पार्टी की अब भाजपा सरकार के मंत्रियों को उनके निर्वाचन क्षेत्र में ही घेरने की योजना है और इस पूरी कवायद की कमान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के हाथ में होगी। इसमें वरिष्ठ नेता लगातार भाजपा के वरिष्ठ मंत्रियों के क्षेत्रों में जाएंगे और कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे । इसके साथ ही अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक भी इन क्षेत्रों में दौरा करेंगे मंत्रियों के क्षेत्र में एक एक जनसभा भी जल्द आयोजित की जाएगी।

    इस कार्ययोजना की शुरुआत 18 मई से हो सकती है जब कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव के विधानसभा क्षेत्र बदनावर पहुंचेंगे। वहीं दिग्विजय सिंह गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के क्षेत्र दतिया में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के लगातार प्रदेश में जो दौरे हो रहे हैं इन्हें गति दी जाएगी।

    इन पर होगी खास नजर

    प्रदेश कांग्रेस ने चुनाव अभियान कीइस घेराबंदी की अभी जो कार्ययोजना बनाई है उसमें जिन मंत्रियों की घेराबंदी को प्राथमिकता से राहत रखा गया है उसमें गोविंद सिंह राजपूत ,तुलसीराम सिलावट, प्रद्युम्न सिंह तोमर सहित वह मंत्री भी शामिल है जो कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए थे । इसके अलावा डॉ नरोत्तम मिश्रा, भूपेंद्र सिंह, कमल पटेल ,अरविंद भदौरिया, विश्वास सारंग के निर्वाचन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान रखा जाएगा।

    दतिया खुरई क्षेत्र में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को झूठे मामलों में फंसाकर प्रताड़ित करने के सर्वाधिक मामले हैं। कमल पटेल और अरविंद भदौरिया किसान कर्ज माफी को लेकर कांग्रेस पर लगातार हमले करते रहे हैं। तो विश्वास सारंग पार्टी के नेताओं के निशाने पर हैं। पार्टी के सभी सहयोगी संगठनों से कहा गया है कि वह मंत्रियों के क्षेत्र में मतदान केंद्र स्तर पर मतदाताओं से संपर्क कर इस कार्यक्रम को गति दे। मतदाता सूची का सत्यापन कराएं ।

    प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष केके मिश्रा ने बताया कि प्रमाणित जानकारियों के साथ भ्रष्टाचार ,कुशासन और कुप्रबंधन को लेकर अपनी बात जनता के सामने रखेंगे मंत्रियों को लेकर उनके क्षेत्र में नाराजगी है हम इसके आधार पर उन्हें वही घेरेंगे .

  • कर्नाटक के समान कनुगोलू की टीम लगा पाएगी एमपी में भी कांग्रेस की नैया पार ?

    कर्नाटक के समान कनुगोलू की टीम लगा पाएगी एमपी में भी कांग्रेस की नैया पार ?

    कहा जा रहा है कि कर्नाटक में कांग्रेस को जीत दिलाने में आक्रामक चुनावी कैंपेन का बड़ा हाथ रहा है और जिस व्यक्ति और टीम ने यह कैंपेन संभाला था अब वही टीम मध्यप्रदेश में भी कांग्रेस की नैया पार लगाने आ रही है?

    भोपाल//  कर्नाटक में कांग्रेस की प्रचंड जीत के कई कारणों में से एक कारण आक्रामक चुनाव कैंपेन की रणनीति और मेनिफेस्टो को माना जा रहा है और इस चुनावी कैंपेन की बागडोर थी सुनील कनूगोलू नाम के व्यक्ति के हाथों में । अब खबर है कि यही सुनील कनुगोलू अपनी टीम के साथ जल्द ही मध्यप्रदेश में कांग्रेस के लिए काम शुरू करेंगें। 

    पार्टी सूत्रों के अनुसार सुनील तनु गोलू के नेतृत्व में 130 सदस्य टीम जल्द ही मध्यप्रदेश में डेरा डालेगी और चुनाव की व्यू रचना तैयार करेगी । प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व सीएम कमलनाथ की टीम से बातचीत हो चुकी है कमलनाथ ने टीम को मध्य प्रदेश के बारे में फीडबैक दे दिया है उसी के आधार पर यह टीम प्रदेश में अपना काम शुरू करेगी।

    कभी प्रशांत किशोर के साथ मिलकर भाजपा के लिए चुनाव की योजना बनाने सुनील को कांग्रेस ने कर्नाटक में चुनावी कैंपेन का काम सौंपा था। सुनील कनुगोलू ने यहां 4 महीने से अधिक समय रहकर चुनावी कैंपेन की प्लानिंग की और उनकी प्लानिंग के हिसाब से ही वहां कांग्रेस ने अपने चुनाव प्रचार को अंजाम दिया ।

    इस टीम ने नारों से लेकर वरिष्ठ नेताओं के भाषण भी तैयार किए थे, जिसमें भाजपा द्वारा कांग्रेस पर किए गए हमलों का जवाब भी होता था। कांग्रेस के बलिदानी इतिहास का इसी टीम ने पूरा खाका तैयार कर बताया था कि किस तरह गांधी परिवार ने देश के लिए कुर्बानी दी। सुनील कनुगोलू 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रशांत किशोर की टीम के सदस्य थे । जिन्होंने भा ज पा और मोदी की पूरी रणनीति तैयार की थी। जिससे पहली बार देश में पूर्ण बहुमत के साथ भाजपा की सरकार बनी थी। 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ के चुनाव प्रचार को इसी टीम ने संभाला था और वहां दूसरी बार भाजपा ने लगातार सरकार बनाई थी । 2022 में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के रणनीतिकार भी यही टीम थी और अब खबर है कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बाद जल्दी यह टीम मध्यप्रदेश आ रही है।

    हर सीट पर होगा फोकस

    कांग्रेस सूत्रों की माने तो मध्यप्रदेश में आने से पहले यह टीम प्रदेश की एक-एक सीट की जानकारी जुटा चुकी है। हर सीट पर सामाजिक और राजनीतिक संतुलन के लिए अलग से रणनीति बनाई जा रही है। बताया जाता है कि 130 सदस्यों वाली सुनील की टीम हर विधानसभा क्षेत्र का दौरा कर सबसे पहले लोगों का मन जानेगी और क्षेत्रीय समस्याओं के बारे में जानकारी जुटाएगी उसके बाद प्रदेश के चुनावी कैंपेन के मुद्दे और नेताओं के भाषण के प्रमुख बिंदु तय किए जायेंगे। इसके अलावा जिलों की रणनीति अलग से तय की जाएगी।

  • अब उधार में मिल सकेगा रेल्वे का टिकट ? जाने क्या है रेलवे की स्कीम .

    अब उधार में मिल सकेगा रेल्वे का टिकट ? जाने क्या है रेलवे की स्कीम .

    भोपाल// ट्रेन मैं यात्रा करने वाले देश के लाखों लोगों के लिए एक अच्छी खबर है ,अब तत्काल पैसे दिए बिना भी यात्रा की जा सकेगी। इसके लिए इंडियन रेलवे कैटरिंग एवं टूरिज्म कॉरपोरेशन  एक नई स्कीम लेकर आया है। रेलवे से मिली जानकारी के अनुसार आईआरसीटीसी ने एक नई स्कीम जारी की है जिसका नाम “बाय नाउ, पे लेटर “है मतलब अभी खरीदिए है और पैसा बाद में दीजिए। इस स्कीम के तहत यात्री ट्रेन में कंफर्म टिकट बुक करा सकते हैं और उसका भुगतान कुछ दिन बाद कर सकते हैं। जानकारी के अनुसार आईआरसीटीसी ने देश की मोबाइल पर पेमेंट कंपनी पेटीएम से एक करार किया है, जिसमें पेटीएम यूजर ट्रेन की टिकट बुक करा सकते हैं । आईआरसीटी की ओर से यह बताया गया है कि रेलवे की ऐप में अब पेटीएम की पोस्टपेड सर्विस को ईनेबल कर दिया गया है। यानी टिकट पहले खरीदो और भुगतान बाद में करो। पेटीएम की पोस्ट पैड सर्विस में यात्री बिना पैसे दिए टिकट बुक करा पाएंगे।

     इस तरीके से करा सकते हैं टिकट बुक

    -टिकट बुक करने के लिए सबसे पहले मोबाइल में आईआरसीटीसी ऐप डाउनलोड कर उसे लॉगिन करें।

     -अब अपना नाम, तारीख, बोर्डिंग स्टेशन सहित अपनी यात्रा की जानकारी को भरें ।

    -अब आपको जिस ट्रेन से यात्रा करना है उसे चुने और बुकिंग के लिए आगे बढ़े ।

    -जब आप पेमेंट सेक्शन में पहुंचेंगे तो यहां पर आपको buy now,pe later का ऑप्शन मिल जाएगा।

    – अब अगली स्टेप में आपको peytm post सेलेक्ट करना होगा ।यहां आपको अपना पेटीएम को लॉगइन  करना होगा।

    – पेटीएम लॉगिन करने के बाद आपको एक वेरिफिकेशन कोड भेजा जाएगा ।

    -आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर जो कोड पहुंचा है उसे भरने के बाद आपके आपका टिकट बुक हो जाएगा।

    30 दिन का समय 60 हजार  की लिमिट

    आईआरसीटीसी ने जो नया प्लान पेश किया है उसमें यात्रियों को टिकट का पैसा लौटाने के लिए 30 दिन का समय दिया जा रहा है, यानी यात्री अपनी सहूलियत के हिसाब से 1 माह के अंदर भुगतान कर सकता है। इतना ही नहीं आईआरसीटीसी की इस स्कीम  से यात्री  ₹60000 तक की टिकट बुक कर सकता है यानी एक यात्री को 60 हजार रूपए की लिमिट पेटीएम के माध्यम से दी जा रही है।

     अन्य यूपीआई एप को भी जोड़ने की तैयारी

    आईआरसीटीसी के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार फिलहाल इस स्कीम में सिर्फ पेटीएम को जगह दी गई है लेकिन बहुत ही जल्दी अन्य यूपीआई ऐप जैसे भीम ऐप,गूगल पे, फोन पे आदि को भी जोड़ा जाएगा, जिससे अधिक से अधिक यात्री इस स्कीम का फायदा उठा सकें।

  • भाजपा पहली बार जिलों में नियुक्त करेगी प्रवक्ता

    भाजपा पहली बार जिलों में नियुक्त करेगी प्रवक्ता

    भोपाल// भारतीय जनता पार्टी आगामी चुनाव को लेकर अपनी बात जनता तक पहुंचाने के लिए अब प्रत्येक जिले में प्रवक्ता नियुक्त करेगी। यह पहली बार होगा अभी सभी जिलों में मीडिया प्रभारी और सह मीडिया प्रभारी है लेकिन जिला प्रवक्ता नहीं है। गुरुवार को प्रदेश कार्यालय में आयोजित मीडिया विभाग की प्रदेश स्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया है। बैठक को पार्टी के प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव प्रदेश । अध्यक्ष एवं सांसद विष्णु दत्त शर्मा एवं प्रदेश संगठन मंत्री हितानंद ने संबोधित किया।

     बैठक में जिला प्रवक्ता ना होने की बात कही गई जिसमें सभी ने एक सुर से कहा कि विधानसभा चुनाव नजदीक होने के नाते पार्टी को प्रत्येक जिले में प्रवक्ता नियुक्त करने चाहिए जिससे कि पार्टी और संगठन के कार्यों की जानकारी मीडिया तक पहुंचा जा सके । इसको लेकर वरिष्ठ नेताओं ने सहमति जताई और जल्दी ही इनकी नियुक्ति करने की बात कहते हुए इसकी जवाबदारी प्रदेश मीडिया विभाग को सौंपी गई है।

     मुरलीधर राव ने कहा कि पार्टी अब चुनाव मोड में आ गई है इन चुनाव के लिए पार्टी ने अपने लक्ष्य किए हैं इनमें से एक 200 से ज्यादा सीटें हासिल करना दूसरा 51% वोट शेयर हासिल करना है। यह मीडिया विभाग की जिम्मेदारी है कि वह अपने स्तर पर पार्टी को इन लक्ष्य तक पहुंचाने के काम में सहभागी बने।

     प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने कहा कि मीडिया विभाग की छवि उसके चेहरे को उभारता है।  जनता में पार्टी के प्रति धारणा बनाता है। उन्होंने कहा कि विरोधियों द्वारा फैलाए जा रहे झूठ को बेनकाब करना उनके, दुष्प्रचार और हथकंडे को पहचानना तथा डर्टी पॉलिटिक्स को पूरी ताकत से जवाब देना भी मीडिया विभाग की जिम्मेदारी है।

     नवनियुक्त प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने नई जिम्मेदारी के लिए संगठन का धन्यवाद करते हुए कहा कि  नवाचार पार्टी मीडिया टीम की प्राथमिकता रहेगी।

  • खरीद कर पानी पीने को मजबूर हैं विस्थापित गावों के आदिवासी ! अधिकारियों , ठेकेदार की मिलीभगत से करोड़ों का गोलमाल ?

    खरीद कर पानी पीने को मजबूर हैं विस्थापित गावों के आदिवासी ! अधिकारियों , ठेकेदार की मिलीभगत से करोड़ों का गोलमाल ?

    पुनीत दुबे

    इटारसी।  सतपुड़ा टाइगर रिर्जव क्षेत्र से विस्थापित  किए गए आदिवासी परिवार अपने आप को ठगा से महसूस कर रहे है, विस्थापित किए जाते वक्त इन आदिवासी परिवारों को जो लुभावने सपने दिखाए गए थे आज वे काफूर हो चुके हैं । हालत यह है कि विकास के नाम पर शासन से करोड़ों रूपए मिलने के बाद भी यहां रहने वाले लोगों को पीने के पानी तक की कीमत चुकानी पड़ रही है। ग्राम में पेयजल के लिए नलकूप खनन तो कराए गए लेकिन उनकी गुणवत्ता इतनी खराब थी की कुछ ही दिनों में नलकूपों ने दम तोड़ दिया। 

    अधिकारियों और ठेकेदार ने आदिवासियों से किया छलावा ?

    सतपुड़ा टाइगर रिर्जव क्षेत्र के विस्तारीकरण के तहत विभाग द्वारा रिजर्व क्षेत्र में बसे 4 ग्राम साकई, झालई, नया माना, खामदा को जमानी के पास तिलक सिंदूर मार्ग पर विस्थापित किया गया है । शासन की नीति के अनुसार विस्थापित किए गए ग्रामों में होने वाले सभी निर्माण और विकास कार्यो के साथ ही यहां रहने वाले परिवारों की सुविधाओं से जुड़े सभी कार्य विभाग को करवाना था।

    बताया जाता है कि गांव में रहने वाले लगभग 94 परिवारों की पेयजल व्यवस्था के लिए विभाग ने  सत्ताधारी दल से जुड़े एक प्रभावशाली व्यक्ति को नलकूप खनन का ठेका दिया था। लेकिन इस ठेकेदार दवारा अधिकारियों की मिली भगत के चलते नलकूप इतनी घटिया के खनन कराए गए कि उन्होने कुछ ही दिन में दम तोड़ दिया तथा कुछ नलकूप तो जमीन के अंदर ही समा गए। बताया जाता है कि गांव में लगभग 94 नलकूप का खनन किया गया था, जिसमें से लगभग डेढ़ दर्जन ही चल रहे है, शेष में कुछ बंद है और कुछ जमीन में समा गए।

     बताया जाता है कि नलकूप में घटिया स्तर की केसिंग डाली गई थी, जिसमें कारण अधिकांश नलकूप बंद हो गए। नलकूपो के बैठने के बाद यहां के लोग अब सिर्फ बरसाती फसल के भरोसे ही रह गए है। ग्रामीणों के अनुसार यदि नलकूप चलते तो वह और भी फसल का लाभ ले सकते थे। गांव के अमन, मुकेश, शिवन ने बताया कि इस समस्या को लेकर हमने अनेको बार शिकायत की है, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा।

    निजी नलकूप के भरोसे लोग

    गांव के इस  पेयजल संकट की स्थिति को देखते हुए कुछ लोगों ने  अपने निजी व्यय पर नलकूप का खनन कराया गया है, जिससे लोगों को पीने के लिए पानी उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन इसके लिए ग्रामीणों को राशि का भुगतान करना पड रहा है। जिसमें हर घर से बिजली के बिल भुगतान के लिए यूनिट के हिसाब से राशि का विभाजन किया जाता है।

     कारगुजारी छिपाने में लगे हैं जिम्मेदार

    नया माना गांव के लोगों बताया  कि  गांव में व्याप्त इस समस्या को लेकर उन्होने अनेकों बार वन विभाग के अधिकारियों के सामने अपनी समस्या रखी, लेकिन अधिकारियों ने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया। बताया जाता है कि नलकूप खनन के नाम पर हुई अनियमित्ता को छिपाने के लिए अब वन विभाग के अधिकारियों द्वारा ग्राम में नलजल योजना के तहत काम कराने पर विचार किया जा रहा है।

    रेंजर द्वारा नहीं ली गई सुध

    विस्थापित ग्रामों की देखरेख का जिम्मा वन परिक्षेत्र अधिकारी निशांत डोसी को सौंपा गया है। लेकिन अपने रूतबे के लिए मशहूर साहब यदाकदा ही विस्थापित ग्रामों का हाल जानने ग्रामों में जाते है, शेष समय तो साहब अपने भौंरा वाले घर पर ही आराम फरमाते रहते है। ग्रामीणों का कहना है कि रेंजर भी उनकी बातों को अनुसनुा कर देते है।

    क्या कह रहे हैं अधिकारी              

     बोर के अंदर कई  मोटर  फस गई है,   इस कारण उनके बोर बंद हो गए हैं प्रयास कर उन्हें ठीक  करवायेंगें. 

    संदीप फेलोस ,प्रभारी अधिकारी  सतपुड़ा नेशनल पार्क पचमढ़ी

    ग्रामीणों की व्यथा

    सन दो हजार अट्ठारह से हम इस गांव में आए हैं तभी से मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही जिसमें पीने के पानी की समस्या बड़ी कठिन है यह हमें खरीदना पड़ता है और दूसरे मोहल्ले से पीने का पानी लाना पड़ता है।                   

     चतुर सिंह, नया माना तिलक सिंदूर रोड जमानी

  • 67 फीसदी ग्रामीण घरों में लकड़ी और उपलों पर बन रहा है खाना,सरकारी रिपोर्ट ही बता रही है उज्ज्वला की सच्चाई!

    67 फीसदी ग्रामीण घरों में लकड़ी और उपलों पर बन रहा है खाना,सरकारी रिपोर्ट ही बता रही है उज्ज्वला की सच्चाई!

    नई दिल्ली// केन्द्र सरकार ने “स्वच्छ जीवन ,बेहतर जीवन” नारे के साथ देश के प्रत्येक रसोईघर को धुआं मुक्त करने के लिए 1 मई 2016 से उज्ज्वला योजना की शुरुआत की थी, पर यह योजना अब तक अपना लक्ष्य पूरी तरह से हासिल नहीं कर पाई है और और यह बात कोई और नहीं पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की तरफ से ऊर्जा उपभोग में बदलाव पर सलाहकार समिति की रिपोर्ट ही बताती है।

     रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्र के 80 प्रतिशत घरों में एलपीजी गैस कनेक्शन है लेकिन इसके बावजूद आज भी 67% घरों में लकड़ी, कंडो (उपलों) या दूसरे स्रोतों से खाना पकाया जा रहा है।

     रिपोर्ट ने इस बात की भी पड़ताल की है कि लोग क्यों एलपीजी कनेक्शन होने के बावजूद गैस पर खाना नहीं पकाते तो मोटे तौर पर इसके लिए गैस सिलेंडर की ज्यादा कीमत को जिम्मेदार ठहराया गया है ।

    उज्जवला के तहत गैस कनेक्शन लेते समय तो कोई राशि नहीं देनी पड़ती है लेकिन उस की लागत उन्हें मासिक किस्त के में नगद के तौर पर चुकानी होती है।

     देश में ग्रामीण सालाना 6.2 सिलेंडर इस्तेमाल करते हैं। रिपोर्ट में यह बताया गया है कि भारत में अमूमन हर गैस कनेक्शन धारक 6.7 सिलेंडर सालाना इस्तेमाल करता है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह संख्या कम है ।ग्रामीण क्षेत्र में यह संख्या ओसतन 6.2 है। हालांकि जिन घरों में अभी भी दूसरे ईंधन जैसे लकड़ी कंडे आदि का इस्तेमाल हो रहे हैं वहां सिर्फ सालाना 4.1 सिलेंडर की औसतन इस्तेमाल किया जा रहा है।सनद रहे कि उज्जवला योजना के तहत अभी तक कुल 9.5 करोड़ घरों को एलपीजी कनेक्शन दिया गया है।

  • यह छींक बहुत कुछ कहती है..खोल सकती है आपकी शख्सियत का राज !

    यह छींक बहुत कुछ कहती है..खोल सकती है आपकी शख्सियत का राज !

    आक छी…..यानी छींक। अगली बार जब आप छींक आए तो रुमाल निकालने  या टिशू पेपर उठाने के बाद एक बार सोचे कि आप शरीर की इस अजीब सी हरकत के बारे में कितना जानते हैं? आम तौर पर इस को लेकर लोगों को ना के बराबर जानकारी होती है सिवाय इस अंधविश्वास के कि अगर किसी काम से पहले कोई छींक दे तो वह काम नहीं करना चाहिए, थोड़ा रुक जाना चाहिए। कुछ लोग मानते हैं कि छींकते समय दिल की धड़कन रुक जाती है। पर लोग नहीं जानते की छींक अलग-अलग किस्म की होती है और छींकने का तरीका किसी व्यक्ति की शख्सियत के बारे में काफी कुछ बता देता है।

     छींक और शख्सियत के रिश्ते को जानने से पहले आइए छींक के बारे में और भी कुछ जान लें… छींक हमारे शरीर का अदृश्य से एलर्जी वायरस से छुटकारा पाने का सही का तरीका है। कभी-कभी नाक के अंदर धूल या अन्य कण चले जाते हैं जिसकी वजह से नाक की नर्व में असहजता या खुजली होती है। इन खुजली पैदा करने वाले कणों को बाहर नर्व से बाहर निकालने के लिए छींक आती है। सर्दी जुकाम के दौरान छींक आना आम बात है। छींक एलर्जी, फोटो सिजनिंग सहित कई कारण के कारण आ सकती है।

    ठीक से हृदय गति तो रुकती नहीं हां अलबत्ता सीने पर दबाव बढ़ जाता है और खून का दौरा भी बदल सकता है छींक की स्पीड के बारे में सही जानकारी नहीं है लेकिन यह अनुमान लगाया जाता है कि 100 से 630 किलोमीटर प्रति घंटे गिरफ्तार से छींक आती है और एक छींक के कारण लाखों वायरस हवा में आ जाते हैं।

    आइए अब बात करते हैं छींक और आपकी शख्सियत के रिश्ते के बारे में

    1 अगर आपकी छींक का अंदाज बड़ा और ताकतवर है तो–

    -आप करिश्माई नेता है जो दूसरों पर अपना प्रभाव छोड़ते हैं।

    -विचारक भी हो सकते हैं जो दुनिया से अलग हटकर सोचने की क्षमता रखते हैं ।

    -आप नए पन के लिए पहल करने वाले हैं और दूसरों को प्रेरित कर सकते हैं ।

    -आप संबंधों को महत्व देते हैं ।

    -आप नए लोगों और नए अवसरों का स्वागत करते हैं। आप आशावादी हैं ।

    आपको लगातार कई बड़ी बड़ी छींके आती हैं जिन्हें लोग नोटिस करते हैं।

    2 अगर आप बिना शोर के इस अंदाज में छींकते हैं कि दूसरों को परेशानी ना हो तो 

    -आप का स्वभाव नर्म और दोस्ताना है और गति आराम भरी।

    -आपके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है दूसरों से स्नेहिल संबंध आप टकराव से बचने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं ताकि संबंध बना रहे।

     -आप वफादार हैं ,शांत और भरोसेमंद भी हैं।

    3 अगर आप सही सभ्य तरीके से  ना ज्यादा तेज और ना ज्यादा कम रफ्तार से छींकते हैं, साथ ही छींकते समय रुमाल या टिशू का प्रयोग करते हैं तो

    -आप सावधानी बरतते हैं ।

    -तोलमोल कर बोलते हैं और गहराई से सोचते हैं 

    -आप उन गलतियों को भी पकड़ लेते हैं जिन्हें दूसरे नहीं पकड़ पाते।

     -आप बहुत सोच समझकर अच्छी राय देते हैं लेकिन उसे व्यक्त करने का अक्सर अवसर आपको नहीं मिलता।

    -आप हर चीज में समय लेते हैं और नियम के साथ चलते हैं और दूसरों से भी यही उम्मीद रखते हैं।

    4 अगर आपके छींकने का अंदाज बहुत तेज एकदम से और बिना लाग लपेट के है तो

     -आप तेज, निर्णायक और मुद्दे पर रहने वाले व्यक्ति हैं

     -आप आप चाहते हैं कि दूसरे भी ऐसा ही करें ।

    -आप मेहनती और स्पष्ट हैं ।

    -आप दूसरों पर आश्रित रहना पसंद नहीं करते ।

    -आप नेता हैं ।

    -आप  प्रभावी और चीजों को जल्द पूर्ण करने वाले हैं आप पसंद नहीं करते कि दूसरे आप का इस्तेमाल करें।

  • सुकून से जीवन जीने की नई सोच – मिनिमलिज्म

    सुकून से जीवन जीने की नई सोच – मिनिमलिज्म

    आज के दौर में व्यक्ति की जीवन शैलियां तेजी से बदल रही हैं। नए नए आयाम और अवधारणाएं आ रही हैं। लोग उसे अपना भी रहे हैं । ऐसी ही जीवन जीने की एक नई सोच और तरीके का नाम है मिनिमलिज्म। 

    हैरत इलाहाबादी का मशहूर शेर है –

    आगाह अपनी मौत से कोई बशर नहीं ,

    सामान सौ बरस का है पल की खबर नहीं।।

     इससे थोड़ा विपरीत है मिनिमलिज्म की सोच।आमतौर पर लोग जीवन में खुद से ज्यादा वस्तुओं को महत्व देते हैं । मिनिमलिज्म सामान से ज्यादा खुद को अहमियत देने की बात करती है।  जीवन को कम से कम चीजों के साथ जीना या बिताना या उतना ही लेना जितना जरूरी है।  फिलहाल हिंदी में इसके लिए कोई शब्द इजाद नहीं हुआ है। यदि सामान्य अर्थों में कहा जाए तो मिनिमलिज्म का मतलब है कम चीजों के साथ जीना या सादा जीवन। हिंदी में  कुछ लोग इसे न्यूनतावाद या न्यूनतावादी सोच भी कहते हैं। आमतौर पर इसे आज पश्चिमी विचारधारा या दृष्टिकोण कहा जा सकता है ,पर यह सिर्फ पश्चिम की सोच कतई नहीं मानी जा सकती क्योंकि हमारे देश में संयम के साथ जीने की बात की जाती रही है। जैन धर्म अपरिग्रह की बात करता रहा है। मिनिमलिज्म या न्यूनताबाद में इस बात की चिंता किए या दुख दुखी हुए बिना कि कोई वस्तु हमारे पास नहीं है जो है उसमें जीना भी कहा जा सकता है यह त्याग करना ही नहीं है बल्कि जो जरूरी है या महत्वपूर्ण है उसी को अपनाना है। कम चीजों के साथ बड़ा जीवन जीना है। आप अपनी जिंदगी में मिनिमलिज्म को किस सीमा तक अपनाते हैं यह आप पर निर्भर करेगा । अधिकतर लोग इसकी शुरुआत अपने घर से करते हैं और उन चीजों को हटाते हैं जिसकी जरूरत नहीं है। 

    “बिकमिंग मिनिमलिस्ट” के लेखक जोशुआ बेकर के मुताबिक जीवन में जो चीज ज्यादा अहमियत रखती है उस पर फोकस करना और जो चीज बाधा डालती है उन्हें दूर करना ही मिनिमलिस्म है।

    आइए जाने इस शैली के कुछ फायदे और पहलू –

    – गैर जरूरी सामान हटाना या डिक्लटरिंग को अपनाकर आप जीवन में सुकून हासिल कर सकते हैं। जब आप बेकार की चीजों को हटाना शुरू करते हैं तो घर में ज्यादा जगह बन जाती है ,चलने फिरने के लिए पर्याप्त स्थान होता है। सबसे अहम बात यह है कि जिन चीजों से आप बंधा हुआ महसूस करते हैं ,उनसे आजाद हो जाते हैं जो आपको ज्यादा सुकून और शांति दे सकता है।

    -जीवन में मिनिमलिज्म को अपनाकर आप अपने अन्य कामों पर ज्यादा फोकस कर पाते हैं। जब घर में ज्यादा चीजें मौजूद होती है तो ध्यान भी भटकता है और ज्यादा समय इसे संभालने में ही निकल जाता है। इन चीजों को दूर करके आप अनावश्यक तनाव और कुछ हद तक घर के बिल का बोझ भी कम किया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने हर खास काम और खास लोगों पर पूरी तरह से ध्यान दे पाते हैं।

    -चीजों और सुविधाओं से छुटकारा पाकर आप अपने अन्य काम के लिए अपने को तैयार कर लेते हैं । आज जो पैसा चीजें खरीदने ,चीजों को स्टोर करने या चीजों को जमा करने में जाया करते हैं ,वही पैसा बचा भी सकते हैं। कम चीजें होने का मतलब ज्यादा पैसा होना हो सकता है। मिनिमलिस्ट जीवनशैली अपनाकर पैसों पर निर्भरता भी कम की जा सकती है।

    -जब पैसों की जरूरत कब होगी तो काम का बोझ भी नहीं होगा इस तरह आपके पास समय भी बचेगा आप केवल जरूरी चीजों पर अपना ध्यान केंद्रित करेंगे और बचा हुआ समय अपने शौक पूरा करने पर बिता सकें सकेंगे

    -यह माना जाता है कि जिनके पास कम चीजें होती है, वे ज्यादा सेहतमंद और तनाव मुक्त जीवन जीते हैं। जब घर में सामान कम होता है तो शरीर में उर्जा भी ज्यादा रहेगी।

    -जब चीजें कम हो होंगी तो छोटे घर में रहना मुश्किल नहीं लगेगा इस तरह भीआप बहुत पैसा बचा सकते हैं।

     -जिनकी आय कम होती है अक्सर चीजों के प्रति गहरा लगाव रखते हैं। वे चीजों को हटाते नहीं बल्कि पकड़ कर रखते हैं । अगर बचपन अभाव में बीता है तो चीजों का स्वामित्व पाकर खुशी महसूस होती है।

    -मिनिमलिज्म एक चुनाव है। लोग चुन सकते हैं कि वह कैसा जीवन जीना चाहते हैं। वह खुद तय कर सकते हैं कि किस हद तक जाना चाहते।

    -मिनिमलिज्म का मतलब सही चीजें होना है ना की महंगी चीजें होना।  मिनिमलिज्म में ‘क्वालिटी ओवर क्वांटिटी’ बहुत मायने रखता है।

    – मिनिमलिस्ट जीवन बोरिंग या उबाऊ  का ठीक उलट है । जब हम अनावश्यक चीजों से छुटकारा पाते हैं तब यह तय करना आसान हो जाता है कि आगे क्या करना है । कुछ लोग फुल टाइम यात्रा करते हैं तो कुछ अपने परिवार के साथ भरपूर समय बिताते हैं । कम चीजों के साथ जीना आनंद के साथ बड़ा जीवन जीना है।

    तो क्या अब आप अपनाने को तैयार हैं मिनिमलिस्ट का जीवन।