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  • ज़िले की सियासत: चुनावी साल में भाजपा में बढ़ी खेमेबाजी?  

    ज़िले की सियासत: चुनावी साल में भाजपा में बढ़ी खेमेबाजी?  

    इटारसी -नर्मदापुरम // पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम से साफ जाहिर हो रहा है कि जो पार्टी” पार्टी विद डिफरेंस”होने का दावा करती थी, जिसे उसे अपने अनुशासित और संस्कारित पार्टी और कार्यकर्ताओं पर गर्व था ,वह पार्टी अब भीतर से दरकने लगी है। उसमें गुटबाजी और खेमेबाजी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगी है। वैसे पार्टी के नेता इसे नहीं स्वीकार रहे हैं , घटनाओं को सामान्य मतभेद बताकर सवालों से कन्नी काट रहे हैं। पर घटनाएं असलियत बयां कर रही हैं।

     भाजपा जिलाध्यक्ष के विरोध में पदाधिकारियों का इस्तीफा ?

    लगभग 10 दिन पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष माधव दास अग्रवाल के विरोध में उनके ही गृह क्षेत्र पिपरिया- खापाखेड़ा के पदाधिकारियों के इस्तीफे का एक वायरल पत्र चर्चा में रहा। यह कथित पत्र पिपरिया मंडल अध्यक्ष के लेटर पैड पर लिखा गया था। इस पत्र में करीब 25 पदाधिकारियों ने मय नाम हस्ताक्षर किए गए थे ।यह पत्र 18 दिसंबर 2022 का बताया गया। वायरल पत्र में यह आरोप लगाया गया था कि जिला अध्यक्ष की कार्यप्रणाली ठीक नहीं है, इसी वजह से नर्मदापुरम में कांग्रेस का जिला पंचायत अध्यक्ष बना था, जबकि जिला पंचायत में भाजपा के 12 सदस्य और कांग्रेस के मात्र 3 सदस्य ही थे ।इस मामले में प्रदेश संगठन ने जो जांच समिति बनाई थी उसमें भी जिलाध्यक्ष को जिम्मेदार माना गया था। बताया जा रहा है कि जिले के चारों विधायक व सांसद ने भी प्रदेश संगठन से जिलाध्यक्ष की शिकायत की थी, पर जब मामला चर्चा में आया तो पदाधिकारियों ने इस्तीफे से इंकार कर दिया संगठन के लोगों ने इस तरह के किसी भी पत्र के अस्तित्व से इंकार कर दिया। पार्टी की ओर से पत्र को फर्जी बताया है और सच्चाई का पता लगाने थाने में रिपोर्ट करने की बात की पर अभी तक क्या सच्चाई है? और यदि पत्र फर्जी है तो क्या खाने में इसकी शिकायत की गई है इसका पता नहीं चल सका है।

    किसान संघ और भाजपा नेता पीयूष शर्मा का विवाद ?

    कुछ दिन पूर्व भारतीय जनता पार्टी के किसान संगठन भारतीय किसान संघ और भाजपा नेता पीयूष शर्मा के बीच खटपट की खबरें मीडिया की सुर्खियों में रहीं। बताया जाता है कि पीयूष शर्मा ने माखन नगर के ताल केसरी में एक श्रद्धांजलि सभा के दौरान यह कहा था कि “आज किसानों की जो दुर्दशा है, खाद की किल्लत है, आदि के लिए भारतीय किसान संघ जिम्मेदार है” इस बयान से किसान संघ के पदाधिकारी नाराज हो गए .संघ के अध्यक्ष सर्वज्ञ दीवान ने यहां तक कह दिया कि भाजपा नेता ने पूरे किसान समाज का अपमान किया है और उन्होंने नर्मदा पुरम के साथ रास्ते पर भाजपा नेता पीयूष शर्मा के पुतला दहन की घोषणा कर दी।

     इस मामले में पीयूष शर्मा का कहना था कि बात अनौपचारिक थी मेरी बात का गलत मतलब निकाला गया, मेरी मंशा भारतीय किसान संघ भारतीय किसान संघ की भावनाओं को आहत करने की नहीं थी ,यह कहते हुए उन्होंने माफी मांग ली ।शर्मा के माफी मांगने पर किसान संघ ने भी अपना पुतला दहन का कार्यक्रम निरस्त कर दिया

     भाजपा नेताओं में हाथापाई ,पिस्टल तक निकलने की खबरें !!

    पिछले शुक्रवार को जब भाजपा के प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव सर्किट हाउस में कार्यकर्ताओं को चुनाव जीतने का गणित समझा रहे थे, उसी दौरान पार्टी के दो नेता आपस में भिड़ गए नौबत यहां तक आ गई कि एक पक्ष ने पिस्तौल तक निकाल ली। बताया जा रहा है कि भाजपा नेता रेवेंद्र चौहान सर्किट हाउस के एक कमरे में अपने कुछ साथियों के साथ खाना खा रहे थे, उसी दौरान भाजपा के नेता पीयूष शर्मा ने उनसे भोजन स्थल पर जाकर भोजन करने को कहा।इस बात को लेकर दोनों में विवाद हो गया और बात  गाली गलौज हाथापाई और पिस्टल निकलने तक पहुंच गई। दोनों के समर्थक सर्किट हाउस में जमा हो गए। विवाद बढ़ता देख कुछ वरिष्ठ नेताओं ने बीच-बचाव कर मामले को शांत कराया खबर यह भी है कि स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि दोनों गुटों के कार्यकर्ताओं को अलग-अलग वहां वाहनों से वहां से ले जाया गया ।घटना के वक्त प्रभारी मुरलीधर राव भी सर्किट हाउस में थे उन्हें भी घटना की जानकारी लगी । वैसे घटना को लेकर संगठन और नेताओं ने चुप्पी साध रखी है।

    प्रदेश प्रभारी के दौरे में शक्ति प्रर्दशन जैसा माहौल?

    भाजपा के प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव का दौरा भी यह संकेत दे गया कि भाजपा में खेमेबाजी और आपसी प्रतिद्वंद्विता चरम पर है। चुनाव से पहले जमीनी हकीकत का पता लगाने आए प्रदेश प्रभारी के सामने जिलेभर से आए विधायक की टिकट के दावेदारों ने अपनी दावेदारी कुछ-कुछ शक्ति प्रदर्शन जैसी ही की।  प्रदेश प्रभारी श्री राव के आने के पहले ही और आने के दिन अखबारों में एक  गुट विशेष द्वारा बड़े-बड़े स्वागत विज्ञापन प्रकाशित किए गए। उन विज्ञापनों में छपी फोटो की आकार प्रकार को देखकर भी गुटबाजी की चर्चा रही। भाजपा के नए नए नेता डा राजेश शर्मा जो कि नर्मदापुरम से टिकट के दावेदार माने जा रहे हैं ने एक समाचार पत्र में प्रभारी राव पर एक आलेख भी लिखा जिसकी खासी चर्चा रही।

     बताया जाता है कि प्रदेश प्रभारी को जिले में भारी गुटबाजी और खेमे बाजी का एहसास हो गया है, उन्होंने चर्चा के दौरान मिलजुल कर काम करने की सीख नेता और कार्यकर्ताओं को दी हैं, वहीं कई नेताओं ने व्यक्तिगत तौर पर प्रभारी को पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी की जानकारी भी दी।

    सब्ज़ी मंडी दुकानों की जांच और गुटबाजी !

    इटारसी सब्जी मंडी की दुकानों के आवंटन में हुई गड़बड़ियों की फाइल एक बार फिर खुल गई है। कमिश्नर द्वारा जांच के बाद आवंटन रद्द करने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश के बाद लंबे समय तक ठंडे बस्ते में पड़ी रही फाइल के फिर से खुलने के पीछे लोग स्थानीय राजनीति और भाजपा की गुटबाजी देख रहे हैं ।  नगर पालिका चुनाव के दौरान की खींचतान अब रंग लाती दिख रही है । बताया जाता है कि इस आवंटन में भाजपा नेता के सबसे ज्यादा जिम्मेदार होने की बात की जा रही है वह भी विधानसभा की टिकट के दावेदार हैं, और वर्तमान के लोग इस तरह की कोई चुनौती नहीं चाहते ,जबकि उस नेता की सत्ता और संगठन में अच्छी पकड़ बताई जा रही है । उसे भाजपा के सांसद खेमे का भी समर्थन है। लोगों का कहना है कि दूकानों के निर्माण और आवंटन के समय से ही इसमें गड़बड़ी की चर्चा थी, तब जन प्रतिनिधियों ने जांच की मांग क्यों नहीं की?

    कुल मिलाकर भाजपा की अंदरूनी कलह और गुटबाजी  से प्रदेश आलाकमान वाकिफ और परेशान है, पर इसमें कमी आने की संभावना नजर नहीं आ रही है, जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे और टिकट के लिए दावेदारियां बढ़ेंगी । नए पुराने दावेदारों के बीच कड़वाहट बढ़ेगी। देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इस समस्या से कैसे निपटती है और यह भाजपा के चुनाव कितना नुकसान पहुंचाती है?

  • क्यों  किया अमेरिका में स्कूलों ने सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर केस?

    क्यों किया अमेरिका में स्कूलों ने सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर केस?

    नई दिल्ली//अमेरिका के सिएटल शहर के पब्लिक स्कूलों ने टिक टॉक ,इंस्टाग्राम फेसबुक ,और स्नैपचैट और इसी जैसी कई सोशल मीडिया कंपनियों पर मुकदमा किया है ,स्कूलों का कहना है कि यह कंपनियां बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रही हैं । स्कूल का आरोप है कि यह अपने फायदे के लिए बच्चों के कमजोर मस्तिष्क का शोषण कर रहे हैं जिससे स्कूल में मानसिक और मनोवैज्ञानिक परेशानियों से बच्चे पीड़ित हो रहे हैं। इसके लिए उन्होंने अधिकतम नागरिक दंड (सिविल पेनल्टी) की मांग की है। इस जिले में लगभग 100 स्कूल हैं और उनमें 50,000 से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं 

    अमेरिका के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में पेश अपने मुकदमे में स्कूल ने कहा है बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, खराब होते व्यवहार जैसे बेचैनी निराशा और खाने की आदतों के लिए सोशल मीडिया जिम्मेदार है। 

    लगभग 91पेज की शिकायत में कहा गया है कि यह कंपनियां युवाओं के लिए हानिकारक सामग्रियों का प्रसार और सिफारिश करती हैं। प्रबंधन का यह भी कहना है कि बच्चों को शिक्षित करना मुश्किल हो रहा है स्कूलों को बच्चों की मदद के लिए ज्यादा मानसिक चिकित्सकों की मदद लेनी पड़ रही है। मुकदमे में यह भी कहा गया है कि बच्चों की ऐसी भावनात्मक रिपोर्टों में लगभग लगभग 30% की वृद्धि हुई है जहां वे दो या दो से अधिक हफ्तों तक निराशा महसूस करते हैं और फिर सामान्य गतिविधियां बंद कर देते हैं।

    गूगल ने कहा हमने सुरक्षा के कई फीचर दिए हैं 

    इसके बाद कुछ सोशल मीडिया प्लेटफार्म अपने बचाव में सामने आये हैं . गूगल के प्रवक्ता जोस कास्टानेड़ा ने कहा कि हमने अपने प्लेटफार्म को बच्चों के लिए सुरक्षित अनुभव बनाने में बड़ा निवेश किया है। और बच्चों की भलाई को प्राथमिकता देने के लिए मजबूर सुरक्षा और समर्पित फीचर पेश किए हैं उदाहरण के लिए फैमिली लिंक के माध्यम से हम माता-पिता को रिमाइंडर सेट करने , स्क्रीन समय सीमित करने और पर्यवेक्षक उपकरणों पर विशिष्ट प्रकार की सामग्री को ब्लॉक करने की क्षमता प्रदान करते हैं वहीं स्नेप चेट ने कहा है कि वह युवा लोगों की सुरक्षा के लिए कदम उठा रहा है ,वह मेंटल हेल्थ सपोर्ट के लिए फीचर शुरू कर रहा है ..

  • सफलता चाहिए …डर से छुटकारा पाइए …!!

    सफलता चाहिए …डर से छुटकारा पाइए …!!

    अचला मिश्र

    डर मनुष्य की बुनियादी भावनाओं में से एक है, डर हमें जिंदगी के किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने से रोकता है। न्यूयॉर्क टाइम्स की बेस्ट सेलर लेखक रूथ सूकअप ने अपनी पुस्तक ” डू इट स्केयर्ड “के लिए 4000 से अधिक लोगों का सर्वे कर यह पाया था कि किसी काम को करने में डर के सात रूप होते हैं जिसे उन्होंने फियर आर्किटाइप का नाम दिया । रूथ ने पाया था कि अधिकांश लोगों में सभी 7 प्रकार के डर कम या ज्यादा मौजूद रहते है ,लेकिन इनमें से कम से कम एक प्रकार का डर बहुत प्रभावशाली नज़र आता है, यह डर उसकी जिंदगी और और व्यक्तित्व पर डालता है। अगर आप  अपने डर का प्रकार जान या समझ लें तो उससे होने वाली नकारात्मक प्रभाव का  सामना करने की दिशा में कदम उठा सकते हैं।
    आइए जानते है रूथ सुकअप के मुताबिक सात प्रकार के डर और उस डर से मुकाबला करने की आदतों के बारे में –
    टाल मटोल या देरी करने वाले –
    इस तरह के लोग कोई भी गलती करने या नया काम शुरू करने से डरते हैं ।टालमटोल करने वाले लोग कई बार खुद कोई फैसला लेने मैं अपने को अक्षम पाते हैं और इसलिए कोई काम शुरू करने से पहले रिसर्च एवं प्लानिंग में काफी समय लगा देते हैं।
    नियम का पालन करने वाले
    कुछ लोग अधिकारियों से डरते हैं उनका यह डर नियमों से हटकर कुछ भी  करने से डर में बदल जाता है, सजा का डरउन्हें आगे बढ़ने के लिए जोखिम लेने और निर्णय लेने से रोकता है।
    सबको खुश रखने वाले/ किसी को नाराज न करने वाले
    इस तरह के लोगों को इस तरह के लोगों को यह डर होता है कि कहीं लोग उनके बारे में गलत धारणा ना बना ले दूसरों के विचारों को लेकर वह परेशान रहते हैं। इस तरह के लोग किसी को नाराज नहीं करना चाहते हैं।
    जिम्मेदारी से डरने वाले
    कुछ लोग कुछ लोग छोटी-छोटी जिम्मेदारी लेने से डरते हैं ,किसी काम के लिए इनको जिम्मेदार  ठहराया जाना या दूसरों के सामने इनकी गलतियां या कमी उजागर होना इनके लिए किसी बुरे सपने के  सच होने की तरह होता है।
    अविश्वास का डर
    कुछ लोग दूसरों को लेकर भयभीत होते है, वे किसी भी व्यक्ति पर भरोसा नहीं कर पाते। किसी दूसरे पर विश्वास न करने की स्थिति कभी कभी गंभीर आपराधिक व्यवहार तक में बदल जाती है।
    स्वयं के प्रति अविश्वासी
    बहुत से लोगों को खुद पर और अपनी क्षमताओं  पर भरोसा नहीं होता।  वे एक असुरक्षा की भावना से ग्रसित होते हैं। इसके कारण वे दूसरों से ईर्ष्या करते हैं, या उनकीआलोचना करते हैं।
    निराशावादी
    इस तरह के लोग अपने काबू से बाहर की परिस्थिति के शिकार होते हैं, और किसी भी बुरे समय का सामना करने से भयभीत रहते हैं। ऐसे व्यक्ति कभी पूर्व में असफल हो चुके हो सकते हैं, या जिन्दगी में किसी बुरे वक्त या परिस्थितिसे गुजर चुके होते हैं, इसलिए वे खुद को पीड़ित की भूमिका में देखते हैं।

    अपनाए ये आदतें और पाएं छुटकारा डर से
    केट खोबोडा ” द करेज हैबिट” पुस्तक की लेखिका हैं, वे लोगों को उनके डर को पहचान कर उन्हें साहस के साथ जिंदगी जीना सिखाती हैं, आइए डर को दूर करने में उनकी सलाह को जानें –
    समर्पित रहें –
    साहस के लिए समर्पण की बहुत बड़ी भूमिका होती है. जितना आप अपने उद्देश्य या काम के प्रति समर्पित रहेंगे उतना अपने व्यक्तिगत डर से दूर रहेंगे, समर्पण किसी भी फैसले के मूल में मौजूद वह जज्बा है जिसकी मदद से आप अपने सपनो का पीछा कर सकते है वह भी बिना किसी भय के।
    विचार करें
    अपने डर का सामना करते समय रुकें और ध्यान दें कि कौनसी बात आपको साहसी बनने से रोकती है, और विचार करें कि उसको लेकर आपकी प्रतिक्रिया क्या होनी चाहिए।
    अपने शरीर को तैयार करें
    अपने शरीर को डर का सामना करने के लिए तैयार करें, इसके लिए योग , ध्यान, टहलना, घूमना, जैसे व्यायाम की मदद ले सकते हैं।
    तथस्थ भाव से विचारों को देखें
    मन में उठने वाले नकारात्मक विचारों या डरावने ख्यालों को रोकने की कोशिश ना करें ,बल्कि उनसे बिना जुड़े उनको देखने का काम करें। यदि आप उन्हें सच नहीं मानेंगे तो उनसे आप कोई जुड़ाव महसूस नहीं करेंगे।

    लोगों की मदद लें
    डर और स्वयं पर अविश्वास अकेले पन से बढ़ते हैं, और लोगों के बीच कम होते हैं। डर  के क्षणों में छिपने और बचने की इच्छा होती है, पर यही वह क्षण होते हैं जब हमें लोगों की बहुत जरूरत होती है। अपने डर को अपनों से साझा करने से कभी संकोच न करें।
    कुल मिलाकर। बात यह है कि डर सबको लगता है.. पर जीतता वही है कि जो अपने डर को काबू करता है, उसे मैनेज कर सकता है यानी डर के आगे जीत है।

  • सूबे में एक पुलिस वाले के जिम्मे है 748 लोगों की सुरक्षा

    सूबे में एक पुलिस वाले के जिम्मे है 748 लोगों की सुरक्षा

    भोपाल// मध्य प्रदेश में जिस तरह से आबादी बढ़ी और अपराधों की संख्या बढ़ती जा रही है,पुलिस सुरक्षा पर प्रश्न चिन्ह खड़े हो रहे हैं . नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की वर्ष 2021 की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में कुल चार लाख 75 हजार 918 प्रकरण दर्ज हुए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 42 हजार अधिक हैं। बच्चों नाबालिग से दुष्कर्म और अनुसूचित जनजाति वर्ग पर सर्वाधिक अत्याचार के मामलो में मध्य प्रदेश कई राज्यों से बहुत आगे है लेकिन पुलिस बल उस अनुपात में नहीं बढ़ाया गया। इस कारण प्रदेश में पुलिस बल की बहुत ज्यादा कमी हो गई है।
    प्रदेश पुलिस की डाटा रिपोर्ट में सामने आया है कि प्रदेश में 1956 में एक पुलिसकर्मी पर औसतन 520 लोगों की सुरक्षा का दायित्व था, जो 2022 में बढ़कर 748 हो गया है। मध्य प्रदेश पुलिस के विभिन्न विभागों में स्वीकृत पदों के सापेक्ष 25 से लेकर 40 प्रतिशत तक कम पुलिस बल है। पुलिसकर्मी कम होने के कारण अपराध बढ़ रहे हैं। साथ ही पुलिस बल पर कामकाज का बोझ ज्यादा होने की वजह से फरियादियों को न्याय मिलने में भी देरी होती है।
    रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में प्रति लाख आबादी पर 117 पुलिसकर्मी हैं, जबकि दिल्ली में 480, उत्तर प्रदेश में 123, पंजाब में 236, महाराष्ट्र में 165, हरियाणा में 209 हैं। हालांकि, बिहार और गुजरात से मध्य प्रदेश की स्थिति इस मामले में ठीक है। पूरे देश के औसत की बात करें तो यह आंकड़ा 124 है।
    प्रदेश में पुलिस बल की यह स्थिति तब है जब अनुसूचित जनजाति के लोगों पर देश में सबसे ज्यादा अपराध होने का कलंक प्रदेश के माथे पर लगा है। अनुसूचित जाति के लोगों पर अपराध के सर्वाधिक मामले में भी मध्य प्रदेश देश में तीसरे नंबर पर है। यह जानकारी नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की 2021 की रिपोर्ट के अनुसार है।

    इनका कहना है

    पुलिस की भर्ती लगातार चल रही है। अभी आरक्षक के छह हजार पदों को भरा गया है। इन्हें मुख्यमंत्री जल्द प्रमाण पत्र देने वाले हैं। सात हजार पदों पर और भर्ती की जाएगी। यह प्रक्रिया लगातार चलती रहेगी।

    डा. नरोत्तम मिश्रा गृह मंत्री, मध्य प्रदेश

  • ऐसे निखारे समस्या सुलझाने की अपनी क्षमता

    ऐसे निखारे समस्या सुलझाने की अपनी क्षमता

    जिंदगी मैं समस्याएं आती ही रहती हैं ,कभी छोटी तो, कभी बड़ी । कभी कभी तो एक छोटी सी समस्या ध्यान न देने या नज़र अंदाज कर देने से बड़ी समस्या बन जाती है, इसीलिए किसी भी व्यक्ति के अंदर जिंदगी में समस्या को वक्त पर सुलझाने की क्षमता का होना बहुत जरूरी है। यह आपके व्यक्तित्व को मजबूत बनाती है . जीवन का कोई भी क्षेत्र हो ,यह काबिलियत होना बहुत जरूरी है और यदि यह काबिलियत आप में नहीं है तो आप हमेशा समस्याओं से घिरे रहेंगे और कभी भी  सफलता व तरक्की प्राप्त नहीं कर पाएंगे इसके लिए जरूरी है कि जिंदगी में जब भी किसी समस्या का सामना हो और आपको कोई रास्ता ना सुन रहा हो आप उस समस्या पर अटक चुके हो ऐसे में आप आसानी से उबर सकें …इसके लिए हम आपको कुछ विशेषज्ञों के अनुभव और सुझाव के आधार पर समस्या को सुलझाने के लिए कुछ सलाह दे रहे हैं… यह टिप्स आपकी समस्या समझाने की काबिलियत को भी निखारेगी-

    अपने सबसे बुरे समय से प्रेरणा लें

     समस्या का सामना हमें रोज करना होता है हालाकि समस्या से निपटने का सभी का अपना अपना तरीका और क्षमता हो होती हैं । समस्या को सुलझाने की क्षमता को मजबूत बनाने के लिए, आपको अपने सबसे बुरे समय को याद करना होगा याद करना होगा कि पिछ्ले बार कब आप इस तरह की परिस्थिति से घिरे थी और उस पूरी स्थिति और तरीके पर ध्यान देना होगा  जिससे आप पिछली बार बाहर निकले थे। जब भी आप कोई समस्या में अपने आपको पाते हैं तो धैर्य पूर्वक विकल्पों पर विचार करें ,उसके बारे में लिखें ,उसको हल करने  के लिए आपको जो कर रहे हैं उसे नोट करते चलें । यह आपको अन्य परिस्थिति और समस्या को हल करने में मदद देगी।

    अपना रूटीन बदले

    समस्या हल करने की चुनौतियों में सोचने की क्षमता को बड़ा कारगर माना जाता है और समस्या हल करने के लिए रचनात्मक तरीके से सोचने की जरूरत होती है, इसके लिए जरूरी है कि आप अपने रोजमर्रा के रूटिंग को बदले या उससे बाहर निकले जिससे आप समस्या को नए ढंग से देख सकते हैं। रूटीन को छोड़ना दिमाग को क्रिएटिव बनाने का सबसे अच्छा तरीका माना जाता है। मसलन आप अपने काम को छोड़कर थोड़ा घूम सकते हैं, दिमाग को उस समस्या से हटा सकते हैं ,टाइम टेबल को फिर से फिर से रीशेड्यूल कर सकते हैं, दिमाग या मस्तिष्क के शांत होने से  जल्दी आपको नए आइडिया आ सकते हैं।

    अपने जीवन के बड़े उद्देश्य को याद रखें

    समस्या हल करने के कौशल को निखारने के लिए एक बेहतर सलाह यह है कि आप अपने जीवन के बड़े उद्देश को याद रखें, यह सोचें कि आपको किस चीज से आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है ,और आप अपने काम में समय या मेहनत क्यों कर रहे हैं कौन सी बात आपके लिए महत्वपूर्ण है, इस तरह के सवालों को जानकर आप अपनी रचनात्मकता, आत्मविश्वास और मानसिक ताकत से समस्या को हल कर सकते हैं यह बातें आपके आसपास के लोगों में भी आपके प्रति आप के समर्पण को महसूस करवा सकती हैं।

    दूसरों से भी लें सलाह

    अपनी समस्या और अपने विचारों को दूसरों को बताना समस्या को हल करने का एक बहुत ही कारगर तरीका  है, क्योंकि इससे आपको अलग-अलग दृष्टिकोण और आइडिया या सुझाव मिलते हैं। ऐसी बातों की ओर आपका ध्यान जा सकता है जो आपसे अपनी समस्या के हल को सोचते समय छूट रही हैं छूट गईं हो, मसलन यदि आप अपने व्यापार के लिए किसी समस्या का सामना कर रहे हैं तो आपको व्यापार से जुड़े अपने दोस्त या शुभचिंतक से इसके बारे में चर्चा कर सकते हैं जो आपको मदद कर सके।

    प्रेरणादायक पुस्तकें व जीवनियां पढ़ें

    जब भी संभव हो अपने पसंदीदा लेखकों की किताबों को पढ़ें प्रेरणादायक जीवनियां पढ़ें इन के माध्यम से आप जान सकते हैं कि सफल व्यक्तियों ने मुश्किल परिस्थितियों को  किस प्रकार सामना किया।

    खुद को दोष ना दें, धैर्य रखें

    जब भी हम किसी समस्या का सामना ठीक से नहीं कर पाते हैं या जितनी हमें उम्मीद थी उतना नहीं कर पाते हैं तो हम अपने को दोषी मानने लगते हैं और एक तरह के नकारात्मक भावनाएं हमें घेर लेती हैं। हमें यह समझना होगा की इस तरह अपने आप को दोषी मानकर या कमजोर मानने से हमारी समस्या का सामना करने की क्षमता या उसे हल करने की क्षमता पर बुरा बुरा असर पड़ता है। इसके लिए जरूरी है हम थोड़ा रुके या थोड़ा पीछे हटे और पूरी समस्या को वस्तुनिष्ठ तरीके से देखें सोचे और उस पर विचार करें धीरे-धीरे हमें उनके हल नजर आने लगेंगे।

  • क्या भारत नशीली दवाओं और शराब के दुरूपयोग संकट के कगार पर है ?

    क्या भारत नशीली दवाओं और शराब के दुरूपयोग संकट के कगार पर है ?

    नई दिल्ली // एक ताजे सरकारी राष्ट्रीय सर्वेक्षण से यह खुलासा हुआ है है कि भारत के युवाओं की एक बड़ी संख्या शराब, भांग या ओपिओइड की लत से पीड़ित है और नशे के आदी चार में से तीन लोगों को इलाज नहीं मिल पाता है।

    देश में 15.8 मिलियन बच्चे जिनकी  उम्र 10 से 17 वर्ष की है मादक पदार्थों के आदी हैं, पिछले दिनों  भारत सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के सामने यह आंकड़े पेश किये हैं .

    यह सम्भवत:भारत में मादक द्रव्यों के सेवन की सीमा और पैटर्न पर पहले व्यापक सर्वेक्षण है जिसे , नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर ने किया है . सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, 10 चिकित्सा संस्थानों और 15 गैर सरकारी संगठनों के सहयोग से देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सर्वेक्षण किया गया था। डेटा संग्रह में 1,500 से अधिक कर्मचारी शामिल थे। यह सर्वे 2017 से 2018 के बीच किया गया था  2019 में जनता के लिए जारी किया गया और इसी महीने सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया.

    यह स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भारत में नशीली दवाओं के दुरुपयोग के आंकड़े वास्तव में बहुत अधिक हैं।

    अध्ययन में क्या पाया गया?

    सर्वेक्षण के अनुसार, शराब भारत में लोगों द्वारा सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला साइकोएक्टिव पदार्थ है, इसके बाद भांग और ओपिओइड का नंबर आता है। भांग के सर्वाधिक प्रचलन वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश, पंजाब, सिक्किम और छत्तीसगढ़ शामिल हैं।

    रिपोर्ट में कहा गया है, “30 मिलियन से अधिक व्यक्ति कैनबिस उत्पादों का उपयोग करते हैं और लगभग 2.5 मिलियन कैनबिस निर्भरता से पीड़ित हैं, ” 22.6 मिलियन लोग ओपिओइड का उपयोग करते हैं और लगभग 7.7 मिलियन व्यक्तियों को ओपिओइड उपयोग की समस्याओं के लिए मदद की आवश्यकता होती है।

    इसमें यह भी पाया गया कि देश की आबादी में 2.06% ओपिओइड उपयोगकर्ता शामिल हैं, और 1.7% बच्चे और किशोर और 0.58% वयस्क इनहेलेंट के उपयोगकर्ता हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अवैध दवाओं पर निर्भरता से पीड़ित लोगों में से चार में से तीन को इलाज नहीं मिल पाता है।

    देश में 14.6 फीसदी (लगभग 160 मिलियन ) लोग शराब का सेवन करते हैं

    2017 के एक अध्ययन के मुताबिक देश में अवैध ड्रग्स के कारण हर साल बाईस हजार से ज्यादा लोगोंकी मौत हो जाती है .अवैध ड्रग्स लेने के आदी चार में से तीन को इलाज नहीं मिल पाटा है .  .

    दवाओं की अन्य श्रेणियां – अर्थात् कोकीन, एम्फ़ैटेमिन प्रकार के उत्तेजक और मतिभ्रम – का उपयोग देश की आबादी के एक छोटे से हिस्से द्वारा किया जाता है।

    जहाँ तक राज्यवार आंकड़ों का सवाल है उत्तर प्रदेश ,पंजाब सिक्किम और छत्तीसगढ़ केनाबिस के प्रयोग में सूची में सबसे ऊपर हैं . पंजाब मे पचहतर फ़ीसदी  से ज्यादा युवा ड्रग्स के दुरुपयोग् का  शिकार है .

    स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारियों का ऑफ़ थे रिकार्ड कहना है कि, “परिणाम यह भी संकेत देते हैं कि साइकोएक्टिव पदार्थों की मांग पारंपरिक, कम क्षमता वाले, पौधे-आधारित उत्पादों जैसे अफीम से अधिक शक्तिशाली और हेरोइन जैसे प्रसंस्कृत उत्पादों की ओर बढ़ रही है।”

    क्यों बढ़ रहा है

    नशीली दवाओं के दुरुपयोग में वृद्धि के पीछे कमजोर नीतियों को दोषी माना जा रहा है ,

    निष्कर्ष बताते हैं कि सख्त दवा नियंत्रण कानूनों के अस्तित्व और पूरे भारत में दवा आपूर्ति नियंत्रण की दिशा में काम करने वाली एजेंसियों की एक बड़ी संख्या के बावजूद, नियंत्रित दवाओं की एक विस्तृत विविधता का अभी भी उपयोग किया जा रहा है।

    कई राज्यों में मादक द्रव्यों के सेवन को रोकने के लिए नीतियों का अभाव है। सरकार द्वारा संचालित स्कूल आमतौर पर नशीली दवाओं के दुरुपयोग के बारे में संवेदीकरण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित नहीं करते हैं।

    एच.एस. फूलका जो बचपन बचाओ आंदोलन के वकील हैं, जो भारत में बच्चों के अधिकारों के लिए एक आंदोलन है, जिसने बच्चों के बीच नशीली दवाओं के दुरुपयोग की चिंताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है। उनका मानना है  कि यह मुद्दा राष्ट्रीय सर्वेक्षण के निष्कर्षों से कहीं अधिक गंभीर है। “बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे हैं जो प्रभावित हैं और इस सर्वेक्षण में उनकी गिनती नहीं की गई है… वे नशे के आदी हैं। स्कूलों और इसके आसपास के इलाकों में ड्रग की उपलब्धता एक समस्या है और आखिरकार वे पेडलर बन जाते हैं।”

    ओपियोइड का दुरुपयोग प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन गया है. राज्यों के पास इस पदार्थों के दुरूपयोग को रोकने कोई कारगर नीति नहीं है. सरकारों द्वारा चलाये जा रहे जागरूकता अभियान की पहुँच बहुत कम लोगों तक है ,  स्थिति का अंदाज इस बात से लग जाता है कि 57.4 लाख ड्रग की आदि महिलाओं के इलाज के लिए देश भर में मात्र 4 केंद्र  हैं .

    ओपियाड और कैनाबिस क्या हैं ?

    ओपियाड जिस अकसर नशीले पदार्थ के रूप में जाना जाता है ,यह दवाओं का एक वर्ग है जो दर्द से छुटकारा पाने के लिए प्रयोग में लाया जाता है इसमें दर्द निवारक गुण होता है और आफीम के सत से बनता है , इसको लेने से अआनंद की अनुभूति होती है , ,वहीं कन्नाबिस श्रेणी में भांग ,गांजा और मेरिजुआना जैसे पदार्थ शामिल हैं

  • चुनाव तैयारियां – भाजपा -कांग्रेस में बूथ तक पहुँचने की कवायद तेज

    चुनाव तैयारियां – भाजपा -कांग्रेस में बूथ तक पहुँचने की कवायद तेज

    भोपाल//दस माह बाद मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और भाजपा दोनों ही अपनी जीत को पक्का करने के लिए चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है .तैयारियों में दोनों ही दल एक दूसरे का अनुसरण और रणनीति की काट ढूंढते नजर आ रहे हैं. विशेष बात यह है कि दोनों ही दल इस बार बूथ स्तर तक एप्रोच कर रहे हैं और इसके लिए कोई कसर छोड़ते भी नजर नहीं आ रहे हैं .भाजपा डिजिटल बूथ की बात कर रही है तो कांग्रेसी उसका मुकाबला इंटरनेट मीडिया टीम और बूथ वार जानकारी जुटाने की तैयारी में है

    भाजपा ने शुरु किया स्मार्ट बूथ योजना पर काम

    भाजपा ने स्मार्ट बूथ पर योजना पर काम शुरू किया है। इसके अनुसार अब बूथ स्तर के कार्यकर्ता को भी नहीं पहचान मिल सकेगी पार्टी प्रदेश के 65 हजार बूथ अध्यक्ष, महामंत्री और बूथ एजेंट को पार्टी संगठन में विशेष तवज्जो देने जा रही है।

      बीजेपी चुनाव आभियान को पूरी तरह से तकनीकी बनाती एलजी रही है। पार्टी हर बूथ को डिजिटल बनाकर नेतृत्व करने वाले अध्यक्ष महामंत्री और एजेंट सहित पन्ना प्रमुखों को अलग विशेष कोड यानी पहचान दी जाएगी, इससे विशेष लाभ यह होगा कि कोड के जरिए ये पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से भी सीधा संपर्क कर सकेंगे। पार्टी मानती है कि इससे संगठन में नए नेतृत्व को उभरने का अवसर मिल सकेगा, वहीं चुनावों में बूथ स्तर पर मजबूती से जीत आसान होगी। मध्यप्रदेश में संगठन ने बूथ स्तर पर पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का डिजिटल डेटा तैयार कर लिया है ।

    पन्ना की जगह होंगे डिजिटल पेज

     पिछ्ले कुछ चुनावों से मतदाता तक पहुंच बनाने के लिए बी जे पी पन्ना प्रमुख की रणनीति पर चल रही है अब यह पन्ना डिजिटल पेज में बदल जाएगा। बूथ समिति के सदस्यों से डिजिटल बूथ की भौगोलिक एवं सामाजिक परिस्थितियों की जानकारी भी ली जा रही है। केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं के हितग्राहियों से संवाद का प्रशिक्षण भी उन्हें दिया गया है।

     बूथ कार्यकर्ताओं को अहमियत बढ़ेगी।

    भाजपा पिछले कुछ वर्षों से वृहद स्तर पर सदस्यता अभियान के बाद खुद को विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक दल बताती है इसका श्रेय किसी बड़े चेहरे या पदाधिकारी के बजाय लाखों कार्यकर्ताओं को दिया जाता है ,लेकिन उन्हें अलग से पहचान की कमी महसूस होती रही है।

     स्मार्ट कार्ड दिए जाएंगे

     बूथ के तीन बीएलए जिन्हें संगठन में त्रिदेव की संज्ञा दी गई है उन्हें स्मार्ट कार्ड दिए जाएंगे ।इस पर यूनिक नंबर के साथ पूरा परिचय होगा। पन्ना प्रमुख को भी विशिष्ट पहचान पत्र मिलेगा पार्टी ने बूथ विस्तारक योजना के तहत बूत समिति का अंकन रजिस्टर और संगठन एप में किया है। इसमें बूथ समिति बूथ अध्यक्ष बूथ महामंत्री और सहित पूरी समिति और पन्ना प्रमुख समिति के साथ मतदाताओं के नाम भी दर्ज है।

    यह योजना सिर्फ प्रदेश में ही नहीं बल्कि पूरे देश में लागू करने जा रही है।

    कांग्रेस इंटरनेट मीडिया टीम तैयार करेगी

    भाजपा की इस रणनीति  को टक्कर देने के लिए कांग्रेसी भी इंटरनेट मीडिया इंटरनेट मीडिया की टीम तैयार कर रही है, इसमें कांग्रेस का सबसे ज्यादा जोर भाजपा के दावों का जवाब देने को लेकर रहेगा। राहुल गांधी की मध्य प्रदेश में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी कांग्रेस ने यही रणनीति अपनाई थी ।यात्रा के दौरान भाजपा नेताओं की तरफ से जो भी बयान आए थे कांग्रेस ने उसका तुरंत प्रत्युत्तर दिया था यही रणनीति विधानसभा चुनाव में रहेगी। चुनाव के दौरान दोनों ही बड़े दलों के राष्ट्रीय पदाधिकारियों के भी दौरे होंगे , इस दौरान भाजपा नेताओं द्वारा कोई भी आरोप लगाया जाता है तो इंटरनेट मीडिया टीम पूरे तथ्यों के साथ अपना पक्ष इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित करेगी इस टीम पर पार्टी के बड़े-बड़े नेताओं के भाषण को भी इंटरनेट मीडिया पर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी रहेगी प्रदेशभर के लिए यह दायित्व प्रदेश कांग्रेस कमेटी की तरफ से अभय तिवारी को दिया गया है मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष केके मिश्रा ने कहा कि हम इंटरनेट मीडिया की टीम तैयार कर रहे हैं वार्ड और बूथ स्तर तक टीम बनाने का काम चल रहा है

    95% मतदाता इंटरनेट पर 

    पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ ने पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से कहा है कि पिछले विधानसभा चुनाव में मात्र 25% लोग ही इंटरनेट मीडिया पर थे पर अब 95% लोग इसका उपयोग कर रहे हैं ऐसे में 2023 के चुनाव में इंटरनेट मीडिया को ज्यादा से ज्यादा उपयोग करने की जरूरत है उनके कहने पर पार्टी के नेता इंटरनेट मीडिया में अपने फॉलोअर्स बढ़ाने में भी लगे हैं।

    जातीय समीकरण साधने बूथवार जानकारी जुटाएगी कांग्रेस

    प्रदेश कांग्रेस ने सभी वर्गों में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए नए प्रकोष्ठ बनाने के साथ ही मतदान केंद्र पर जातीय समीकरण साधने की कार्य योजना बनाई है  कई बड़े नेताओ और प्रकोष्ठों को इसकी जिम्मेदारी दी गई है ।  मतदान केंद्र वार जानकारी जुटाई जा रही है इसमें केंद्र पर कुल मतदाता, जातिगत समीकरण ,प्रभावशाली व्यक्ति, पिछले चुनाव परिणाम आदि की जानकारी रहेगी। इसके आधार पर पार्टी मत का मतदान केंद्र स्तर पर संचालित की जाने वाली गतिविधियां निर्धारित करेगी। प्रभावशाली व्यक्तियों से प्रदेश स्तर के पदाधिकारी सम्पर्क स्थापित करेंगें। विभिन्न समाजों के अलग-अलग सम्मेलन किए जाएंगे पार्टी के महामंत्री जेपी धनोपिया का कहना है कि नए प्रकोष्ठ का गठन करके विभिन्न समाजों को महत्व देने का काम किया जा रहा है चुनाव के दृष्टिगत सभी स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं पूरे प्रदेश संभाग और जिला स्तर पर बैठक और सम्मेलन भी आयोजित किए जाएंगे इसका दायित्व अनुसूचित जाति और जनजाति विभाग को दिया गया है ।पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव को सामाजिक संगठनों से तालमेल बनाने की जिम्मेदारी भी दी गई है।

  • प्रमोद तिवारी हाथ से हाथ जोड़ो अभियान के पर्यवेक्षक बनाए गए।

    प्रमोद तिवारी हाथ से हाथ जोड़ो अभियान के पर्यवेक्षक बनाए गए।

    भोपाल // कांग्रेस के हाथ से हाथ जोड़ो अभियान के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने प्रमोद तिवारी को मध्यप्रदेश कांग्रेसका पर्यवेक्षक बनाया है साथ ही प्रदेश के नेता अरुण यादव को छत्तीसगढ़ का पर्यवेक्षक ने किया है अभियान 26 जनवरी से प्रारंभ होगा। प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारियों ने बताया कि हाथ से हाथ जोड़ो अभियान के अंतर्गत पार्टी एक माह तक मतदान केंद्र स्तर पर पर यात्रा निकाली गई इसमें गांव गांव में घर-घर संपर्क किया जाएगा और भारत जोड़ो यात्रा के उद्देश्य के बारे में बताने के साथ ही केंद्र व राज्य सरकारों की असफलताएं बताई जाएंगी मतदान केंद्र पर संपर्क अभियान चलेगा जिला स्तर पर सभाएं होंगी और अंत में राज्य स्तर पर महारैली का आयोजन किया जाएगा इस दौरान युवा कांग्रेसी भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के द्वारा विकासखंड स्तर पर बाइक रैली निकाली जाएगी पार्टी महिलाओं से जुड़ा घोषणा पत्र भी जारी करेगी और राज की राजधानी में महिला मार चुका इसमें पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा शामिल होंगी।

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  • नए साल में कांग्रेस संगठन में नया बड़ा बदलाव प्रस्तावित?

    नए साल में कांग्रेस संगठन में नया बड़ा बदलाव प्रस्तावित?

    भोपाल // मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए 1 वर्ष से भी कम समय बचा है चुनाव के लिए संगठन को तैयार करने नए साल में मध्यप्रदेश कांग्रेस में व्यापक स्तर पर परिवर्तन होने की संभावना है। प्रदेश से लेकर जिला और ब्लॉक स्तर तक पदाधिकारी बदले जाएंगे । प्रदेश कांग्रेस ने इसकी प्रारंभिक तैयारी कर ली है ,उसमें उन पदाधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर संगठन की जिम्मेदारियों से मुक्त किया जाएगा जिन्हें चुनाव लड़ाया जाना है ,वही निष्क्रिय पदाधिकारियों की छुट्टी की जाएगी इसको लेकर प्रदेश कांग्रेश अध्यक्ष कमल नाथ केंद्रीय संगठन से भी चर्चा कर चुके हैं।

    कांग्रेस में राष्ट्रीय स्तर पर संगठन चुनाव के बाद से ही ब्लॉक स्तर तक पदाधिकारियों की जिम्मेदारी में बदलाव प्रस्तावित है इस को लेकर संगठन ने जिला प्रभारी और सह प्रभारियों के माध्यम से जिला व ब्लॉक इकाइयों के प्रदर्शन पर आधारित रिपोर्ट भी तैयार करवा ली है। कमलनाथ प्रभारियों के साथ बैठक करके जानकारी ले चुके हैं केंद्रीय संगठन ने परिवर्तन के लिए हरी झंडी दे दी है ।अब प्रदेश संगठन की ओर से अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी को प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा उनमें उन पदाधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर संगठन के दायित्व से मुक्त किया जाएगा जो चुनाव लड़ने की इच्छा जता चुके हैं उनके स्थान पर ऐसे नेताओं को मौका दिया जाएगा जो संगठन का काम करना चाहते हैं। जिला प्रभारी और संगठन मंत्री की नियुक्ति में इनका ध्यान रखा गया है।

     प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष व संगठन प्रभारी चंद्र प्रभाष शेखर का कहना है कि नए साल में संगठन स्तर पर परिवर्तन प्रस्तावित है उसको लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष संगठन पदाधिकारियों को तैयारी करने के निर्देश भी दे चुके हैं। जनवरी में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ बैठक करके इसे अंतिम रूप देंगे वहीं कुछ अन्य जिला एवं ब्लाक इकाइयों के अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारियों को प्रदर्शन के आधार पर बदला जाना है ग्वालियर चंबल महाकौशल संभाग में परिवर्तन होने की संभावना जताई जा रही है सभी सहयोगी संगठन से कहा गया है कि ऐसे पदाधिकारी जो चुनाव लड़ना चाहते हैं उन्हें काम करने के लिए मुक्त किया जाए ताकि संगठन की गतिविधियां प्रभावित ना हो।

  • क्यों संकट में हैं वनराज ? सूबे में एक साल में 32 बाघों की मौत

    क्यों संकट में हैं वनराज ? सूबे में एक साल में 32 बाघों की मौत

    भोपाल // पिछले दिनों पन्ना टाइगर रिजर्व में विक्रमपुर गाँव के पास  एक युवा बाघ के शव के फंदे में लटके मिलने की हैरान करने वाली घटना सामने आने से एक बार फिर टाइगर स्टेट में बाघों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गये हैं . मध्य प्रदेश बाघों की मौत के मामले में भी देश में पहले स्थान पर है । राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ( नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथारिटी ) के आंकड़ों के अनुसार पिछले पिछले एक साल के दौरान पूरे भारत में 99 टाइगरों की मौत हुई हैं, जिनमें सबसे ज्यादा 32 मौतें मध्य प्रदेश में दर्ज की गई हैं, मध्य प्रदेश में नवंबर के महीने तक 31 बाघों की मौत हुई थी, जबकि आज पन्ना टाइगर रिजर्व में मिले बाघ के शव के बाद यह आंकड़ा 32 पहुंच गया। पहली मौत मादा टाइगर की 8 जनवरी 2022 को बांधगढ़ में हुई थी। सबसे ज्यादा 66 टाइगरों की मौत बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में दर्ज की गई हैं। ऐसे में बाघों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बता दें कि पिछले साल ही दोबारा से मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा मिला था, लेकिन टाइगरों की मौत के मामले में भी मध्य प्रदेश सबसे आगे है।

    जबकि बाघों की मौत  के मामले में देश में दूसरे नंबर के राज्य कर्नाटक में 14 और तीसरे नंबर पर रहे उत्तराखंड में इस वर्ष अब तक छह बाघों की मौत हुई है। यदि बाघों की मौत के आंकड़े देखें, तो पिछले चार साल में प्रदेश में 134 बाघों की मौत हुई है। इनमें से 35 मामले शिकार के हैं। जबकि आपसी लड़ाई, कुएं में गिरने या सड़क दुर्घटना में 80 बाघ मरे हैं।

    सुरक्षा नाकाफी ?

    मध्य प्रदेश में बाघों की सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। संरक्षित क्षेत्रों में बाघों की संख्या बढ़ी है पर सुरक्षाकर्मी नहीं बढ़ाए गए। बल्कि स्वीकृत पदों से कम कर्मचारी पदस्थ हैं। इस कारण पार्क और उससे सटे क्षेत्र में प्रभावी गश्त नहीं हो पा रही है। यही कारण है कि हर साल बाघों-तेंदुओं का शिकार होता है।

    इस साल अब तक छह बाघों के शिकार की जानकारी सामने आई है। वहीं बाघों की बढ़ती संख्या भी सुरक्षा इंतजामों पर भारी पड़ रही है। बाघ, संरक्षित क्षेत्रों से बाहर निकल रहे हैं। जिससे उनकी सुरक्षा करना मुश्किल हो रहा है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 के बाघ आकलन के अनुसार मध्य प्रदेश में 526, कर्नाटक में 524 और उत्तराखंड में 442 बाघ हैं।

    मवेशियों के शिकार के कारण निशाने पर आते हैं बाघ

    बस्ती से सटे जंगलों में सक्रिय बाघों का सबसे अधिक शिकार होता है। दरअसल, वे मवेशियों का शिकार करने के आदी हो जाते हैं। इसमें ज्यादा मेहनत भी नहीं लगती है। ऐसे में मवेशी मालिक बाघ को जहर देकर, करंट लगाकर या फंदे में फंसाकर मार देते हैं। हालांकि ज्यादातर मामलों में शिकारी शाकाहारी वन्यप्राणियों के लिए करंट और फंदे लगाते हैं, जिनमें कई बार बाघ या तेंदुआ भी फंस जाते हैं।

    अब ड्रोन से भी निगरानी

    शिकार की घटनाओं को रोकने और संरक्षित क्षेत्र में अनाधिकृत प्रवेश रोकने के लिए प्रदेश के सभी छह टाइगर रिजर्व में ड्रोन से निगरानी शुरू कर दी गई है। पन्ना, बांधवगढ़, कान्हा, पेंच, सतपुड़ा और संजय दुबरी टाइगर रिजर्व में इससे शिकार की घटनाएं कम हुई हैं पर पूरी तरह से रोक नहीं लगी है।

     बाघों के संरक्षण के लिए केंद्र सरकार ने बाघ अभयारण्य बनाए हैं और भारत में कुल 53 बाघ संरक्षित क्षेत्र हैं। हालांकि मरने वाले बाघों का कुल आंकड़ा अभी बीते साल अक्तूबर तक दर्ज 104 तक पहुंच गया था। बाघों का शिकार की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों तक आना भी उनकी मौत की वजह बना है, बीते दिनों ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जहां बाघ आबादी वाले क्षेत्रों में आया है और उससे लोगों को नुकसान हुआ है।