Category: मध्य प्रदेश

  • सूबे में टूटने लगी जुबां की मर्यादा ! कोई किसी को कह रहा पागल तो कोई कह रहा गुंडा !

    सूबे में टूटने लगी जुबां की मर्यादा ! कोई किसी को कह रहा पागल तो कोई कह रहा गुंडा !

     भोपाल//सूबे विधानसभा चुनाव निकट आते जा रहे हैं, और राजनीतिक दलों के नेताओं की जुबानी जंग तेज हो गई है , कई बार तो बयान बाजी सामान्य मर्यादाओं को लांघती दिखाई देने लगी है ,और जैसे-जैसे चुनाव की सरगर्मियां और बढ़ेगी, इसके बढ़ने का अनुमान है। 2 दिन पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राहुल गांधी को स्वार्थी बताते हुए कांग्रेस की विचारधारा को गद्दार कह दिया था, वहीं उस पर पलटवार करते हुए दिग्विजय सिंह ने एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि क्यों ना हमें इन्हे गद्दार कहें।

    फिलहाल नया मामला मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का है। शुक्रवार को शिवराज सिंह ने कमलनाथ को पागल कह दिया तो कमलनाथ ने सीएम को सड़क छाप गुंडा और कुंठित व्यक्ति कह डाला।

    कुछ यह कहा मुख्यमंत्री ने सीएम शिवराज सिंह ने

     शुक्रवार को स्मार्ट पार्क के पौधरोपण के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘कमलनाथ चुनाव के पहले कह रहे थे कि मुसलमानों के पोलिंग बूथ पर 90 परसेंट वोट क्यों नहीं डालते ? यह वीडियो सारी दुनिया ने देख। वे मुसलमानों को वोट बैंक मानते हैं। क्या वोट के लिए अब धर्म और जातियों में बांट कर लोगों को भड़काया जाएगा ? वो फिर( कमलनाथ ) एक समुदाय से कह रहे हैं कि प्रदेश में दंगे भड़क रहे हैं। मैं पूछता हूं कहां दंगे भड़क रहे हैं?लेकिन वोट की भूख ने आप( कमलनाथ) इतने पागल हो गए हैं कि मध्यप्रदेश को वैमनस्यता की खाई में झोंकना चाहते हैं।’

    कमलनाथ ने भी उसी शैली में दिया जवाब !

    सीएम शिवराज के बयान पर कमलनाथ ने जवाब देते हुए कहा कि  ‘शिवराज जी कुछ दिन पहले आप मेरा अंत करना चाहते थे और आज आपने मुझे पागल कहा है। पूरी दुनिया देख रही है कि मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री कैसी सड़क छाप गुंडों की भाषा बोल रहा है। उसके भीतर की सारी सभ्यता और संस्कार समाप्त हो चुके हैं। मुझे अपने अपमान की फिक्र नहीं है, लेकिन, दुख इसका है कि मध्य प्रदेश जैसे महान राज्य के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर ऐसे कुंठित विचारों वाला व्यक्ति बैठा है। ये प्रदेश की आठ करोड़ जनता का अपमान है। आप का षड्यंत्र कामयाब नहीं होगा।’

    नाथ का वीडियो सामने आने के बाद शुरू हुई बयान बाजी!

     दरअसल बुधवार को छिंदवाड़ा में रोजा इफ्तार के कार्यक्रम में शामिल हुए कमलनाथ का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि यह लोग (भाजपा वाले) पूरे देश में दंगे फसाद कराना चाहते हैं. आप लोग छिंदवाड़ा संभालिए, मुझे प्रदेश संभालने दीजिए। आप चाहते हैं मैं यहां बंध कर रह जाऊं, तो मैं बंध कर रह जाता हूं । कमलनाथ का यह वीडियो सामने आने के बाद से बीजेपी उन पर हमलावर है।

  • जिला स्तर पर वचन पत्र तैयार करेगी कांग्रेस

    जिला स्तर पर वचन पत्र तैयार करेगी कांग्रेस

    भोपाल// प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रदेश के साथ ही जिला स्तर पर भी वचन पत्र जारी करेगी। इसके लिए हर जिले की समस्याओं का अध्ययन करने उसका समाधान सुलझाने के निर्देश दिए हैं ताकि जिले के लोगों की आकांक्षाओं और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए वजन पत्र तैयार किया जा सके। वचन पत्र में समाज के सभी वर्गों विशेषकर पिछड़े,आदिवासी  महिला और युवाओं को लुभाने वाले वादे और कार्यक्रमों पर विशेष जोर देने की बात की है।

    जिला शहर कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्षों ,जिला प्रभारी सह प्रभारियों की बैठक को संबोधित करते हुए पिछ्ले दिनों कमलनाथ ने कहा है कि हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता बूथ प्रबंधन की होगी। बूथ प्रबंधन मजबूत होगा तो हम मजबूत होंगे। मंडलम सेक्टर पर मजबूती ही कांग्रेस को मजबूती प्रदान करेगी। उन्होंने सभी पदाधिकारियों से कहा कि आप सभी की जिम्मेदारी है कि जिला स्तर पर संगठन को मजबूती प्रदान करें। जिलों सामंजस बनाकर जिला अध्यक्ष जिला प्रभारियों सह प्रभारी साथ मिलकर काम करें प्रकोष्ठ दो और मोर्चा संगठनों को साथ लेकर चलें जिले में अधिक से अधिक बैठ के करें। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से कहा कि भाजपा चुनाव में धांधली करने के सभी षड्यंत्र करेगी उस पर पैनी निगाह रखनी होगी।

  • कमलनाथ सरकार के दौर में सूबे में भी तैयार हुआ था ‘राइट टू हेल्थ बिल’,आज स्वास्थ्य विभाग में खा रहा है धूल ?

    कमलनाथ सरकार के दौर में सूबे में भी तैयार हुआ था ‘राइट टू हेल्थ बिल’,आज स्वास्थ्य विभाग में खा रहा है धूल ?

    भोपाल // अभी हाल ही में राजस्थान सरकार ने स्वास्थ्य का अधिकार (राइट टू हेल्थ) बिल विधानसभा में पारित किया है, जिसका वहां विरोध हो रहा है। इसी तर्ज पर 2019 में मध्य प्रदेश की तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने भी राइट टू हेल्थ बिल को लेकर तैयारी की थी ।इसके लिए बाकायदा हेल्थ कांक्लेव आयोजित कर देश के तमाम विशेषज्ञों से चर्चा कर एक मसौदा तैयार किया था । अब यह मसौदा स्वास्थ्य विभाग में धूल खा रहा है यदि उस समय यह बिल पास हो जाता तो मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य होता जो अपनी जनता को स्वास्थ्य का अधिकार प्रदान करता जिसका प्रदेश की साढ़े साथ करोड़ जनता को फायदा पहुंचता।

    आयुष्मान योजना से लिंक किया गया था

     जानकारी के अनुसार 2019 में जो राइट टू हेल्थ बिल तैयार किया गया था, उसे केंद्र की आयुष्मान भारत निरामय योजना से लिंक किया गया था, इसके तहत आम लोगों को पांच लाख रूपए तक फ्री इलाज की सुविधा केंद्र देता है, वह तो रहती ही, इसके आगे इलाज में होने वाले खर्च को राज्य शासन वहन करती । इतना ही नहीं प्रदेश के बाहर भी इलाज कराया जा सकता था।

     निजी अस्पतालों की मनमानी पर रोक लगाने की थी कोशिश

     मध्यप्रदेश के इस राइट टू हेल्थ बिल में जो सबसे खास बात थी वह यह कि इमरजेंसी इलाज के दौरान यदि कोई मरीज निजी अस्पताल पहुंच जाता है तो अस्पताल उससे बिना पैसे की मांग किए इलाज शुरू करना था,अभी तक ऐसा नहीं होता है। इसलिए कई मामलों में मरीज की जान तक चली जाती है। वहीं दूसरी ओर निजी अस्पतालों में हर बीमारी के इलाज का खर्च भी फिक्स किया गया था ।

    97 बीमारियों को किया गया था कवर

     2019 में तैयार किया गया राइट टू  हेल्थ बिल में 97 बीमारियों के इलाज की गारंटी सरकार दे रही थी । उस समय के प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री रहे तुलसी सिलावट ने बताया था कि 97 प्रकार की बीमारियों में मुख्य रूप से कैंसर, हार्ट डिसीज, ब्रेन ट्यूमर और पैरालिसिस भी शामिल थे

    संसाधन पर था जोर

     हेल्थ बिल को सफल बनाने के लिए पूरी योजना तैयार की गई थी। उसमें सबसे ज्यादा जोर हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर और चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने पर दिया गया था। इसमें जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेज से जोड़ने के साथ ही बड़े बड़े जिलों में कुछ नए अस्पताल खोलने की योजना थी। वही दस हजार सब हेल्थ सेंटर खोलकर उसमें सबसे बड़े स्तर तक चिकित्सकों की भर्ती करने की योजना थी।

     डॉक्टर्स की जिम्मेदारी होती तय

    राइट टू हेल्थ बिल को तैयार करने में वरिष्ठ विशेषज्ञों ने अपनी सलाह दी थी।  सलाह का एक बिंदु यह भी था कि सरकारी से लेकर निजी अस्पताल तक के चिकित्सक की जिम्मेदारी तय की जाए, एक तरफ जहां सरकारी अस्पताल में डाक्टर नदारद रहते हैं वहीं दूसरी और निजी अस्पताल में डॉक्टर से पैसे की लूट में लगे रहते हैं । इस राइट टू हेल्थ बिल  में चिकित्सकों की जिम्मेदारी तय की गई थी।

  • चुनावों की तैयारी – कांग्रेस किसान ,महिला और कर्मचारी पर कर रही है फोकस

    चुनावों की तैयारी – कांग्रेस किसान ,महिला और कर्मचारी पर कर रही है फोकस

    भोपाल // प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर लगभग 6 महीने का वक्त बचा है दोनों ही प्रमुख दल पूरी ताकत से तैयारियों में जुटे हुए हैं। राजनीतिक हालातों के चलते मुक़ाबला कांटे का माना जा रहा है  । दोनो ही हर तरह और तबके  के मतदाता को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं । जहां भाजपा द्वारा लाडली बहना योजना और प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि और प्रदेश सरकार की ओर से दी जाने वाले चार हजार रूपए को मास्टर स्ट्रोक बताया जा रहा है , वहीं कांग्रेस अपनी पूरी रणनीति महिला ,किसान और कर्मचारियों पर फोकस कर रही है । यह तीनों तबके मिलाकर लगभग 50% से अधिक मतदाता है। 

    लाड़ली बहना की काट में 15सौ रूपये और पांच सौ में गैस सिलेंडर

    कांग्रेस  भाजपा सरकार  की लाड़ली बहना योजना की काट में एक हजार की जगह 15 सौ रुपए देने की बात कर रही है साथ ही रसोई गैस का सिलेंडर ₹500 में देने की भी घोषणा की है । लाड़ली बहना योजना के तहत महिलाओ के खाते में एक हजार रुपया हजार जून माह तक आने की संभावना है फिलहाल तो महिलाएं इस योजना के लिए आवेदन करने में आ रही दिक्कतों से परेशान नजर आ रहीं हैं। प्रदेश में लगभग 2 करोड़ 60 लाख मतदाता है महिलाएं हैं। पूरी खींचतान इन्हीं के लिए है।

    फिर से कर्ज माफी का वादा

    जहां तक किसानों का सवाल है भा जा पा को अपनी सम्मान निधि और प्रदेश सरकार द्वारा दिए जा रहे पैसे पर भरोसा है। भाजपा आरोप लगाती रही है कि पंद्रह महीने की कांग्रेश सरकार ने किसानों की कर्ज माफी का वादा तोड़ा है। अब वह किसानों का ऋण माफ किए जाने का दावा करते हुए किसानों को राहत की बात कर किसानों को लुभा रही है । वहीं कांग्रेस इसे झूट बताते हुए फिर से कर्ज माफी का वादा कर रही है। हाल ही में हुई बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के लिए उसने तत्परता से सर्वे का काम शुरू करवा दिया है। 

    पुरानी पेंशन की मांगसे परेशान भाजपा

    कर्मचारी वर्ग की सबसे बड़ी मांग पुरानी पेंशन की बहाली जरूर भाजपा के लिए सिरदर्द है। कर्मचारी इसको लेकर लामबंद हो रहे है और आंदोलन की चेतावनी भी दे चुके है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को लपक लिया है और वह इसे भुनाने के मूड में है। जहां भाजपा के पास कर्मचारियों के लिए कोई योजना नहीं है वही कांग्रेसमें कर्मचारियों को पुरानी पेंशन और नियमितीकरण का वादा कर एक बड़ा दांव चला है।

    सस्ती बिजली की बात

    इसके अलावा सस्ती बिजली एक बड़ा मुद्दा है है 15 महीने की अपनी सरकार के दौरान कमल कमलनाथ ने सस्ती बिजली की एक ऐसी योजना शुरू की थी जिसे आज भी गरीब एवं मध्यम वर्ग बड़ी राहत के रूप में याद करते हैं उस दौरान ₹100 में 100 यूनिट बिजली से मध्यमवर्ग को बड़ी राहत मिली थी कांग्रेश इसे फिर से भुनाने की कोशिश में है बताया जाता है कि कांग्रे सब 100 यूनिट का दायरा बढ़ाकर इसे 200 यूनिट तक ले जा सकती है।

  • कर्ज उतारने बेची जा रही हैं सरकारी सम्पत्ति? दो साल में छह सौ करोड़  की संपत्ति बेची, करीब सवा अरब रुपए की  बेंची जाने की तैयारी ..!

    कर्ज उतारने बेची जा रही हैं सरकारी सम्पत्ति? दो साल में छह सौ करोड़  की संपत्ति बेची, करीब सवा अरब रुपए की बेंची जाने की तैयारी ..!

    भोपाल//  सरकार पर तीन हजार करोड रुपए से अधिक का कर्ज है और बताया जाता है कि इस कर्ज से उबरने के लिए सरकार सरकारी संपत्तियां बेच रही है. सरकारी संपत्तियों की बिक्री जमीन प्रबंधन के नाम पर की जा रही है।आरोप यह भी है कि सरकार ने माफियाओं को फायदा पहुंचाने के लिए सरकार ने इसे नियमों का जामा पहना दिया है।
    पिछले 2 सालों में प्रदेश की 600 करोड़ रुपए की सरकारी संपत्ति बेंच दी है और आने वाले दिनों में 131 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति को बेचने की तैयारी की जा रही है, जिसमें नर्मदापुरम जिले की पिपरिया का वेयरहाउस( 2.14 करोड) और इटारसी की ट्रैक्टर स्कीम की जमीन (11.87 करोड) की संपत्ति शामिल है इसके अलावा कटनी का ब्लॉक तीन (8.19 करोड़) छतरपुर के नौगांव की (5.51 करोड़ )और धार का बस डिपो (25.58 करोड रुपए )की संपत्ति को नीलाम किया जाएगा।
    इसी तरह ग्वालियर की 47.92 करोड रुपए की कीमत की 3 संपत्तियां भी बेंची जाएंगी। उत्तर प्रदेश के झांसी में मध्य प्रदेश परिवहन विभाग का बस डिपो भी भेजने की तैयारी है हालांकि इसका मूल्य तय नहीं किया गया है इस साल 65 से अधिक संपत्ति या बैठे जाने के लिए चिन्हित की गई हैं। वैसे वैसे राजधानी भोपाल की प्राइम लोकेशन पर स्थित आरटीओ और मध्य प्रदेश सड़क परिवहन निगम की संपत्ति भी इसी तरह बेच दिए जाने की तैयारी थी लेकिन बाद में आरटीओ कार्यालय भाजपा को किराए पर दिए जाने से फिलहाल इस संपत्ति की नीलामी प्रक्रिया को रोक दिया गया है।
    सूत्रों का कहना है कि प्रदेश में वर्तमान सरकार ने सरकारी संपत्तियां बेचने की इस बड़ी योजना के तहत बस डिपो, रेस्ट हाउस, मकान, खाली भूखंड, कारखाने, ऑफिस, बिल्डिंग, रेशम केंद्र, सिल्क केंद्र आदि बेचे जा रहे हैं। इन संपत्तियों को लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग की वेबसाइट पर प्रदर्शित किया गया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इनमें से कई संपत्तियों की बिक्री के लिए टेंडर जारी किए जा चुके हैं। कुछ संपत्तियों की बोली भी शुरू हो गई है।
    सरकारी जमीन को खुर्दबुर्द करने का खेल?
    लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग के पेम पोर्टल पर बाकायदा जमीनों की गाइडलाइन या कच्ची जमीन के आधार पर रिजर्व प्राइस पर बोली लगवा कर जमीन बेची जा रही है कहने को तीन गुना तक बोली आने पर जमीन बेची जा रही है लेकिन वास्तविकता में यह सरकार के लिए नुकसान का सौदा है क्योंकि इन जमीनों का वास्तविक मूल्य बाजार मूल्य से कई गुना ज्यादा है चौंकाने वाली बात यह है कि विभाग को सरकारी अनुपयोगी जमीन बेचना है पर देखने में यह आया है कि सरकार द्वारा ऐसी जमीनों को बेचा जा रहा है जिनका उपयोग भविष्य में नागरिक सुविधाओं को विकसित करने के लिए किया जा सकता है।
    इस पूरे मामले को इटारसी के रेस्ट हाउस  की जमीन को बेचें जाने के उदाहरण से समझा जा सकता है। सरकार की परिसंपत्ति विभाग द्वारा इस 16338 वर्ग मीटर भूमि का मूल्य 24 करोड़ रुपया का गया और इसे मात्र 31 करोड़ 60 लाख की बोली पर बेच दिया गया जबकि इटारसी में इस क्षेत्र में जमीन का बाजार मूल्य इस कीमत से बहुत ज्यादा है इटारसी में 10 * 10 फीट की दुकान की कीमत ₹1 करोड़ है। उसी तरह इंदौर के तलावली चांदा की जमीन को गाइडलाइन के आधार पर कीमत ₹250 वर्गफुट आंकी गई  बोली आई 12 सो रुपए, जबकि इस  क्षेत्र में जमीन का बाजार मूल्य ₹2000 से ज्यादा है। यही स्थिति परिसंपत्ति विभाग के पेम पोर्टल पर बिक्री के लिए डाली गई सभी जमीनों की है। हैरानी की बात यह है कि कैबिनेट ने फैसला होकर प्रशासन के पास रजिस्ट्री करवाने की जानकारी आती है सरकार का लोकसंपत्ति  प्रबंधन विभाग यह कार्य कर रहा है।
    सरकार करे विचार
    सरकार को अपने इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए और दूरगामी सोच के साथ देखना चाहिए कि जिन जमीनों को अनुपयोगी घोषित किया जा रहा है वह वास्तव में अनुपयोगी है भी या नहीं, क्योंकि उन्हें बेचने के बाद भविष्य में नागरिक सुविधाओं को विकसित करने के लिए उनके पास कोई जमीन उपलब्ध नहीं होगी इस दृष्टिकोण से पुख्ता होने के बाद ही उन्हें बेचा जाए जिसके लिए मौजूदा बाजार मूल्य के बराबर इनकी की माता की जाए ओने पौने दामों पर बेचकर भारी नुकसान ना उठाया जाए।

  • अब कांग्रेस का जोर भी बूथ मैनेजमेंट पर.! हर बूथ पर होंगे पांच कार्यकर्ता

    अब कांग्रेस का जोर भी बूथ मैनेजमेंट पर.! हर बूथ पर होंगे पांच कार्यकर्ता

    भोपाल// चुनावों में बूथ मैनेजमेंट हमेशा भाजपा की ताकत मानी जाती रही है, इस बार भी पार्टी का पूरा फोकस इसी बात पर है। इस बार कांग्रेस भी इसका मुकाबला  इसी रणनीति से करना चाहती है और इसके लिए उसने तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। मंगलवार को भाजपा के बूथ सशक्तिकरण के प्रदेश व्यापी अभियान का दूसरा चरण शुरू हुआ है, जिसके तहत मतदाताओं से सीधा संपर्क किया जा रहा है ,वही बूथ प्रबंधन की अलग से तैयारियां की जा रही हैं।

     बूथ पर 5 कार्यकर्ता तैनात करेगी कांग्रेस

     ख़बर है कि इस बार कांग्रेस हर मतदान केंद्र पर पांच कार्यकर्ताओं को तैनात करने की रणनीति अपनाएगी। इसमें बूथ कमेटी, मंडलम और सेक्टर अध्यक्ष के अलावा 2 कार्यकर्ता रहेंगे। उन्हें बूथ प्रबंधन प्रकोष्ठ द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि मतदान के समय किसी भी तरह की गड़बड़ी होने की स्थिति में तत्काल कदम उठाया जा सके। भाजपा के समान मतदान केंद्रों पर मतदाताओं से संपर्क का कार्यक्रम सहयोगी संगठनों द्वारा चलाए जाने की योजना है।

     चुनाव से जुड़े कार्यों के प्रभारी जेपी धनोपिया बताते हैं कि मतदाताओं से संपर्क के लिए सहयोगी संगठन अलग-अलग कार्यक्रम चला रहे हैं, उसके साथ ही बूथ मैनेजमेंट के लिए अलग टीम तैयार कर उसे प्रशिक्षित किया जा रहा है। उन्हें मतदान केंद्र पर बरती जाने वाली सभी महत्वपूर्ण गतिविधियों के बारे में जानकारी दी जा रही है, इसमें मतदाता की पहचान सुनिश्चित करने के साथ अपात्र व्यक्तियों द्वारा मतदान किए जाने की शंका पर शिकायत करने की प्रक्रिया आदि के बारे में बताया जा रहा है।

    कांग्रेस सेवा दल भी सक्रिय 

    आगामी चुनाव जिसमें विधानसभा और लोकसभा दोनों शामिल हैं के लिए कांग्रेस सेवादल भी सक्रिय हो गई है। पिछले दिनों संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालजी भाई देसाई ने वर्चुअली मीटिंग की। जिसमें बताया गया कि सेवादल प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में प्रभारी नियुक्त करेगा। विशेष बात यह है कि संगठन विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने की क्षमता रखने वाले सेवादल कार्यकर्ताओं का नाम संगठन की ओर से टिकट के लिए प्रस्तावित करेगा। संगठन भाजपा सरकार की जन विरोधी नीतियों को लेकर यात्राएं भी निकालेगी।

  • लाड़ली बहना के दम पर चुनाव का खेल बदलने के मूड में भाजपा ?

    लाड़ली बहना के दम पर चुनाव का खेल बदलने के मूड में भाजपा ?

     कांग्रेस रणनीति को लेकर असमंजस की स्थिति में

    भोपाल// प्रदेश में दोनों ही राजनैतिक दल पूरी तरह से चुनावी मोड में है। हर वर्ग के मतदाता को साधने और लुभाने के लिए जी जान से कोशिश शुरू हो गई है।  दोनों ही दलों की नजर प्रदेश की 2 करोड़ 60 लाख से ज्यादा महिला मतदाताओं पर है, यानी उनकी हर रणनीति का फोकस किसी भी तरह से इस आधी आबादी की वोट पाने पर है।

    लाड़ली बहना योजना साबित होगी गेम चेंजर?

    जहां तक भारतीय जनता पार्टी का सवाल है , वह  इसमें आगे नजर आ रही है। शिवराज सरकार ने हाल ही में महिलाओं के लिए लाड़ली बहना योजना शुरू की है, इसके तहत प्रत्येक पात्र महिला को हर महीने एक हजार रुपए दिए जाएंगे। बताया जा रहा है कि जून से  पात्र महिलाओं के खाते में पैसे आना शुरू हो जाएंगे। शिवराज सरकार की कोशिश है कि चुनाव से पहले तक महिलाओं के खाते में 6000 रुपए तक पहुंचा दे।

     महिलाओं के लिए अब तक की सबसे बड़ी बताई जा रही इस  योजना का भाजपा पूरी तरह से चुनावी हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने के पूरे मूड में है, इसलिए इस योजना पर वह युद्ध गति से काम करने में जुटी है और भोपाल में के जंबूरी मैदान में बकायदा राज्य स्तरीय कार्यक्रम का योजना की शुरुआत की जानी है।  पार्टी इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक नया अध्याय के रूप में प्रचारित कर रही है। 

    भाजपा अपनी इस योजना को गेमचेंजर मान रही है। भाजपा के नेताओं को भरोसा है कि इसके दम पर वह एंटी इंकम्बेंसी  का मुकाबला कर लेंगे । कुछ राजनीतिक समीक्षक इसे भाजपा का मास्टर स्ट्रोक भी मान रहे हैं। 

     फिलहाल कांग्रेस के पास लाडली बहना योजना का की कोई काट नहीं है । यहां तक कि वह कर्ज में डूबी प्रदेश सरकार द्वारा इस तरह पैसे के बांटने का विरोध तक नहीं कर पा रही है।

     वहीं सरकार ने नई शराब नीति के तहत प्रदेश के सभी शराब आहातों को बंद करने का निर्णय लिया है। भाजपा का मानना है कि इससे भी  महिलाओं का वोट बैंक पक्का होगा, क्योंकि महिलाएं ही आहातों से ज्यादा परेशान थी, इससे उन्हें राहत मिलेगी। वह इस बात का अधिक से अधिक प्रचार कर फायदा उठाना चाहती है।

    भाजपा महिला प्रत्याशियों की संख्या भी बढ़ा कर भी महिला मतदाताओं को लुभाना चाहती है

    कांग्रेस रणनीति को लेकर असमंजस की स्थिति में

     ऐसा नहीं कि कांग्रेस महिला मतदाताओं की ताकत को कम आंक रही है, उसे भाजपा की महिलाओं को लेकर किए जा रहे लुभावने कामों की चिंता है पर फिलहाल उसे इसके मुकाबले की कारगर रणनीति नहीं सूझ रही है । 

    कांग्रेस महिलाओं के लिए अलग से घोषणा पत्र लाने का ऐलान कर चुकी है यानी पार्टी चुनाव में दो घोषणापत्र पेश करेगी एक सभी के लिए होगा दूसरा वचन पत्र महिलाओं के लिए। महिलाओं के वचन पत्र में महिलाओं से जुड़ी योजनाएं व वादे होंगे। इसके अलावा कांग्रेस 8 से 10 विधानसभा क्षेत्रों के बीच एक महिला प्रत्याशियों को उतारने की रणनीति बना रही है ।

    कांग्रेस सूत्रों के अनुसार पार्टी उन महिलाओं को टिकट वितरण में प्राथमिकता देने पर विचार कर रही है, जो सामाजिक व राजनीतिक क्षेत्रों में सक्रिय हैं, लेकिन नेताओं की पत्नियों या बहू बेटियों को टिकट नहीं दिया जाएगा।

     पार्टी महिला उम्मीदवारों की संख्या बढ़ाने के लिए नगरी निकाय और पंचायत चुनाव में विजयी महिलाओं को भी परख रही है। सर्वे में ऐसी महिलाओं महिला प्रतिनिधियों के बारे में राय जुटाई जा रही है कि यदि उन्हें टिकट दिया जाए तो वह कितनी टक्कर दे सकती हैं ।

    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के दौरान प्रियंका गांधी ने “लड़की हूं ,लड़ सकती हूं” का नारा देकर कई महिला प्रत्याशियों को मैदान में उतारा था। कांग्रेस प्रदेश में कुछ ऐसी ही रणनीति अपना सकती है।

    कांग्रेस प्रदेश में महिलाओं की स्थिति औरमहिलाओं को लेकर बढ़ते अपराध को भी मुद्दा बनाकर आंदोलन करने की तैयारी कर रही है।

    चुनाव तक पन्द्रह सौ करोड़ का खर्च ?

    राज्य सरकार ने चुनावी वर्ष में महिला मतदाताओं को साधने के लिए खजाने का दरवाजा खोल दिया है . यदि कम से कम पच्चीस लाख भ्मों को इस योजना के दायरे में शामिल किया गया तो हर महीने खजाने पर 250 करोड़ रूपये का भर आएगा .यानि चुनाव तक सरकार छह माह तक भी एकेक हजार रूपये बहनों को देती है तो बहनों को छह हजार रूपये मिलेंगें वहीं छह माह में बहनों के खातों में कुल पन्द्रह सौ करोड़ रूपये जायेंगें ,इस तरह सरकार एक साल में इस योजना पर कम से कम तीन हजार करोड़ रूपये खर्च कर सकती है ,

  • अब पंगत में संगत के जरिए कार्यकर्ताओं को एक जुट करेंगी कांग्रेस ?

    अब पंगत में संगत के जरिए कार्यकर्ताओं को एक जुट करेंगी कांग्रेस ?

    भोपाल//आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी में सूबे के दोनों ही राजनीतिक दलों ने अपने को झोंक दिया है, कोई भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहता। रोज-रोज नई-नई रणनीतियां और दांवपेच सामने आ रहे हैं। सत्ताधारी भाजपा सत्ता हमेशा की तरह इसमें आगे ही दिखाई देती है, इन दिनों सरकारी अमले की मदद से निकाली जा रही विकास यात्राओं के जरिए अपने कार्यकर्ताओं को वह सक्रिय बनाए हुए है । वहींभारत जोड़ो यात्रा के बाद घोषित किया गया हाथ से हाथ जोड़ो अभियान  घोषणा और खबर बन के रह गया।

    कांग्रेस की सबसे बड़ी समस्या संगठन की कमजोरी है। पार्टी की सारी ताकत एकजुटता दिखाने की कोशिश में जाया होती नजर आ रही है राजधानी से लेकर गांव गांव तक पार्टी खेतों में बटी है।

    अब खबर है कि अपने विक्रय कार्यकर्ता को एकजुट करने के लिए पार्टी हर विधानसभा क्षेत्र में कार्यकर्ताओं को एक जगह बैठा कर भोजन कराने की रणनीति अपनाने जा रही है पंगत में संगत वाला यह फार्मूला कांग्रेस 2018 में भी आजमा चुकी है जब इसी तरह के आयोजनों में भोजन से पहले नेता और कार्यकर्ताओं को एकजुटता की कसमें दिलाई गई थी।

    फिलहाल कांग्रेस मान रही है कि आगामी चुनाव में उसे सत्ता मिल सकती है और इसके लिए उसके बिखरे कार्यकर्ताओं और नेताओं का एकजुट होना बहुत जरूरी है। इसलिए वह प्राथमिकता से एक जुटता की बात कर कार्यकर्ताओं में जोश भरने का प्रयास करना चाहती है। उसका मकसद अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं को यह समझना है कि चुनावी मैदान में जन समर्थन को हम तभी अपनी ओर मोड़ सकेंगे जब हम अपने गिले शिकवे भुलाकर एक जुट होंगे। हमें भाजपा को दिखाना होगा कि हमारी एकता को कम न समझा जाए।

    हर छोटे बड़े कार्यकर्ता नेता से होगी बात

    पार्टी सूत्रों के अनुसार अपने पुराने और आजमाए फार्मूले पर लौटी कांग्रेस हर विधानसभा क्षेत्र में मंडल और सेक्टर से लेकर बूथ स्तर तक के नेताओं और कार्यकर्ताओं से बात कर रही है। जहां आपस में विरोधऔर मनमुटाव की स्थिति है वहां कार्यकर्ताओं को एक जगह बैठा कर यही संकल्प दिलाने की तैयारी हो रही है। कांग्रेस की वचन पत्र समिति के सदस्य वीरेंद्र खोंगल ने कहा बताया कि पिछली बार कार्यकर्ताओं की एकजुटता और मेहनत से पार्टी ने सफलता पाई थी और इस बार भी कांग्रेस को मतदाता का आशीर्वाद प्राप्त होगा और वह सरकार बनाएगी। खोंगल कहा कि प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ हर वर्ग को साथ लेकर चलने वाले नेता है उन पर प्रत्येक प्रदेश की जनता को अटूट विश्वास है।

    अब कमलनाथ भी हर विधान का दौरा करेंगे

    इस बार कांग्रेस सरकार बनाने के लिए कोशिश में कोई भी कमी नहीं रखना चाहती है । वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह प्रतिदिन एक विधानसभा क्षेत्र में पहुंचने  का अभियान शुरू कर चुके हैं और अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ भी हर दिन 1 विधानसभा का दौरा करेंगे जहां वे सभा के बाद  मंडल सेक्टर और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ बैठ कर बात करेंगे। पार्टी में काम करने के दौरान उन्हें कहां क्या समस्या आ रही है इस तरह की बातें व कार्यकर्ताओं उसे करेंगे और उनका पक्ष भी सुनेंगे और उनको हल करने का प्रयास करेंगे ।

  • यदि म. प्र.में रहते हैं, तो आप 38,000 रू के कर्जे में हैं ?

    यदि म. प्र.में रहते हैं, तो आप 38,000 रू के कर्जे में हैं ?

    भोपाल // मध्य प्रदेश का हर नागरिक  साल के अंत तक राज्य में चुनाव होने तक 38,000 रुपये से अधिक के ऋण के अधीन होगा। देश के प्रमुख दैनिक टाइम्स ऑफ़ इन्डिया में छपी एक खबर के अनुसार राज्य में औसत प्रति व्यक्ति कर्ज पिछले छह वर्षों में तेजी से बढ़ा है। मार्च 2016 के अंत तक यह 13,853 रुपये होने का अनुमान लगाया गया था, जबकि वित्त वर्ष 2013-14 में यह 10,896 रुपये दर्ज किया गया था। पिछले 20 सालों में सरकार ने करीब तीन लाख करोड़ रूपये का कर्ज लिया हैं .

    वित्त विभाग के अनुसार, 31 मार्च, 2022 तक मप्र का कुल ऋण 295532.9 करोड़ रुपये से अधिक था। प्रमुख हिस्सा बाजार ऋण से है, जो 174373.2 करोड़ रुपये से अधिक है। मुआवजा और अन्य बांड लगभग 7,360.4 करोड़ रुपये, वित्तीय संस्थानों से ऋण 12,158 करोड़ रुपये से अधिक, केंद्र सरकार से ऋण और अग्रिम 44,675.5 करोड़ रुपये थे। अन्य देनदारियों का हिसाब 22,208.9 करोड़ रुपये और केंद्र सरकार के राष्ट्रीय लघु बचत कोषों को जारी की गई विशेष प्रतिभूतियां लगभग 34,756.7 करोड़ रुपये थीं।

    सरकार कुछ दिनों में 4,000 करोड़ रुपए और कर्ज लेने की औपचारिकताएं पूरी कर लेगी। सूत्रों का कहना है कि पिछले साल इसने अलग-अलग अंतराल पर कर्ज लिया और यह प्रक्रिया इस साल चुनाव तक जारी रहेगी।

    राजपत्र में वर्णित मप्र सरकार की वित्तीय एवं बजटीय स्थिति के अनुसार वर्ष 2020-21 में राजस्व प्राप्तियां 146376.78 करोड़ रुपये थी जबकि वर्ष के लिए राजस्व व्यय 164733.01 करोड़ था, जिससे 18356.23 करोड़ का घाटा हुआ।

    वर्ष 2021-22 के संशोधित अनुमान में, राजस्व प्राप्तियां 171,697.2 करोड़ रुपये रही, जबकि राजस्व व्यय लगभग 177,398.4 करोड़ रुपये था, जिससे 5,701.1 करोड़ रुपये से अधिक का घाटा हुआ। दो साल के खर्च में ज्यादा अंतर नहीं आया, लेकिन प्राप्तियां काफी बढ़ गईं।

    सरकार द्वारा लिए गए ऋण का उपयोग राज्य में लागू होने वाले उत्पादक विकास कार्यक्रमों और परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए किया जाता है। यह मुख्य रूप से विकास योजनाओं की लागत वहन करती है। केंद्र से और अन्य स्रोतों से लिए गए ऋणों का उपयोग मुख्य रूप से राज्य के विकास और लाभकारी संपत्तियों के निर्माण जैसे बांधों के निर्माण, परिवहन सेवाओं में सुधार, किसानों, स्थानीय निकायों जैसे तीसरे पक्षों को ऋण प्रदान करने के लिए किया गया था और  बिजली उत्पादन के लिए ऋण देंने में होता है .

  • ज़िले की सियासत: चुनावी साल में भाजपा में बढ़ी खेमेबाजी?  

    ज़िले की सियासत: चुनावी साल में भाजपा में बढ़ी खेमेबाजी?  

    इटारसी -नर्मदापुरम // पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम से साफ जाहिर हो रहा है कि जो पार्टी” पार्टी विद डिफरेंस”होने का दावा करती थी, जिसे उसे अपने अनुशासित और संस्कारित पार्टी और कार्यकर्ताओं पर गर्व था ,वह पार्टी अब भीतर से दरकने लगी है। उसमें गुटबाजी और खेमेबाजी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगी है। वैसे पार्टी के नेता इसे नहीं स्वीकार रहे हैं , घटनाओं को सामान्य मतभेद बताकर सवालों से कन्नी काट रहे हैं। पर घटनाएं असलियत बयां कर रही हैं।

     भाजपा जिलाध्यक्ष के विरोध में पदाधिकारियों का इस्तीफा ?

    लगभग 10 दिन पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष माधव दास अग्रवाल के विरोध में उनके ही गृह क्षेत्र पिपरिया- खापाखेड़ा के पदाधिकारियों के इस्तीफे का एक वायरल पत्र चर्चा में रहा। यह कथित पत्र पिपरिया मंडल अध्यक्ष के लेटर पैड पर लिखा गया था। इस पत्र में करीब 25 पदाधिकारियों ने मय नाम हस्ताक्षर किए गए थे ।यह पत्र 18 दिसंबर 2022 का बताया गया। वायरल पत्र में यह आरोप लगाया गया था कि जिला अध्यक्ष की कार्यप्रणाली ठीक नहीं है, इसी वजह से नर्मदापुरम में कांग्रेस का जिला पंचायत अध्यक्ष बना था, जबकि जिला पंचायत में भाजपा के 12 सदस्य और कांग्रेस के मात्र 3 सदस्य ही थे ।इस मामले में प्रदेश संगठन ने जो जांच समिति बनाई थी उसमें भी जिलाध्यक्ष को जिम्मेदार माना गया था। बताया जा रहा है कि जिले के चारों विधायक व सांसद ने भी प्रदेश संगठन से जिलाध्यक्ष की शिकायत की थी, पर जब मामला चर्चा में आया तो पदाधिकारियों ने इस्तीफे से इंकार कर दिया संगठन के लोगों ने इस तरह के किसी भी पत्र के अस्तित्व से इंकार कर दिया। पार्टी की ओर से पत्र को फर्जी बताया है और सच्चाई का पता लगाने थाने में रिपोर्ट करने की बात की पर अभी तक क्या सच्चाई है? और यदि पत्र फर्जी है तो क्या खाने में इसकी शिकायत की गई है इसका पता नहीं चल सका है।

    किसान संघ और भाजपा नेता पीयूष शर्मा का विवाद ?

    कुछ दिन पूर्व भारतीय जनता पार्टी के किसान संगठन भारतीय किसान संघ और भाजपा नेता पीयूष शर्मा के बीच खटपट की खबरें मीडिया की सुर्खियों में रहीं। बताया जाता है कि पीयूष शर्मा ने माखन नगर के ताल केसरी में एक श्रद्धांजलि सभा के दौरान यह कहा था कि “आज किसानों की जो दुर्दशा है, खाद की किल्लत है, आदि के लिए भारतीय किसान संघ जिम्मेदार है” इस बयान से किसान संघ के पदाधिकारी नाराज हो गए .संघ के अध्यक्ष सर्वज्ञ दीवान ने यहां तक कह दिया कि भाजपा नेता ने पूरे किसान समाज का अपमान किया है और उन्होंने नर्मदा पुरम के साथ रास्ते पर भाजपा नेता पीयूष शर्मा के पुतला दहन की घोषणा कर दी।

     इस मामले में पीयूष शर्मा का कहना था कि बात अनौपचारिक थी मेरी बात का गलत मतलब निकाला गया, मेरी मंशा भारतीय किसान संघ भारतीय किसान संघ की भावनाओं को आहत करने की नहीं थी ,यह कहते हुए उन्होंने माफी मांग ली ।शर्मा के माफी मांगने पर किसान संघ ने भी अपना पुतला दहन का कार्यक्रम निरस्त कर दिया

     भाजपा नेताओं में हाथापाई ,पिस्टल तक निकलने की खबरें !!

    पिछले शुक्रवार को जब भाजपा के प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव सर्किट हाउस में कार्यकर्ताओं को चुनाव जीतने का गणित समझा रहे थे, उसी दौरान पार्टी के दो नेता आपस में भिड़ गए नौबत यहां तक आ गई कि एक पक्ष ने पिस्तौल तक निकाल ली। बताया जा रहा है कि भाजपा नेता रेवेंद्र चौहान सर्किट हाउस के एक कमरे में अपने कुछ साथियों के साथ खाना खा रहे थे, उसी दौरान भाजपा के नेता पीयूष शर्मा ने उनसे भोजन स्थल पर जाकर भोजन करने को कहा।इस बात को लेकर दोनों में विवाद हो गया और बात  गाली गलौज हाथापाई और पिस्टल निकलने तक पहुंच गई। दोनों के समर्थक सर्किट हाउस में जमा हो गए। विवाद बढ़ता देख कुछ वरिष्ठ नेताओं ने बीच-बचाव कर मामले को शांत कराया खबर यह भी है कि स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि दोनों गुटों के कार्यकर्ताओं को अलग-अलग वहां वाहनों से वहां से ले जाया गया ।घटना के वक्त प्रभारी मुरलीधर राव भी सर्किट हाउस में थे उन्हें भी घटना की जानकारी लगी । वैसे घटना को लेकर संगठन और नेताओं ने चुप्पी साध रखी है।

    प्रदेश प्रभारी के दौरे में शक्ति प्रर्दशन जैसा माहौल?

    भाजपा के प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव का दौरा भी यह संकेत दे गया कि भाजपा में खेमेबाजी और आपसी प्रतिद्वंद्विता चरम पर है। चुनाव से पहले जमीनी हकीकत का पता लगाने आए प्रदेश प्रभारी के सामने जिलेभर से आए विधायक की टिकट के दावेदारों ने अपनी दावेदारी कुछ-कुछ शक्ति प्रदर्शन जैसी ही की।  प्रदेश प्रभारी श्री राव के आने के पहले ही और आने के दिन अखबारों में एक  गुट विशेष द्वारा बड़े-बड़े स्वागत विज्ञापन प्रकाशित किए गए। उन विज्ञापनों में छपी फोटो की आकार प्रकार को देखकर भी गुटबाजी की चर्चा रही। भाजपा के नए नए नेता डा राजेश शर्मा जो कि नर्मदापुरम से टिकट के दावेदार माने जा रहे हैं ने एक समाचार पत्र में प्रभारी राव पर एक आलेख भी लिखा जिसकी खासी चर्चा रही।

     बताया जाता है कि प्रदेश प्रभारी को जिले में भारी गुटबाजी और खेमे बाजी का एहसास हो गया है, उन्होंने चर्चा के दौरान मिलजुल कर काम करने की सीख नेता और कार्यकर्ताओं को दी हैं, वहीं कई नेताओं ने व्यक्तिगत तौर पर प्रभारी को पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी की जानकारी भी दी।

    सब्ज़ी मंडी दुकानों की जांच और गुटबाजी !

    इटारसी सब्जी मंडी की दुकानों के आवंटन में हुई गड़बड़ियों की फाइल एक बार फिर खुल गई है। कमिश्नर द्वारा जांच के बाद आवंटन रद्द करने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश के बाद लंबे समय तक ठंडे बस्ते में पड़ी रही फाइल के फिर से खुलने के पीछे लोग स्थानीय राजनीति और भाजपा की गुटबाजी देख रहे हैं ।  नगर पालिका चुनाव के दौरान की खींचतान अब रंग लाती दिख रही है । बताया जाता है कि इस आवंटन में भाजपा नेता के सबसे ज्यादा जिम्मेदार होने की बात की जा रही है वह भी विधानसभा की टिकट के दावेदार हैं, और वर्तमान के लोग इस तरह की कोई चुनौती नहीं चाहते ,जबकि उस नेता की सत्ता और संगठन में अच्छी पकड़ बताई जा रही है । उसे भाजपा के सांसद खेमे का भी समर्थन है। लोगों का कहना है कि दूकानों के निर्माण और आवंटन के समय से ही इसमें गड़बड़ी की चर्चा थी, तब जन प्रतिनिधियों ने जांच की मांग क्यों नहीं की?

    कुल मिलाकर भाजपा की अंदरूनी कलह और गुटबाजी  से प्रदेश आलाकमान वाकिफ और परेशान है, पर इसमें कमी आने की संभावना नजर नहीं आ रही है, जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे और टिकट के लिए दावेदारियां बढ़ेंगी । नए पुराने दावेदारों के बीच कड़वाहट बढ़ेगी। देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इस समस्या से कैसे निपटती है और यह भाजपा के चुनाव कितना नुकसान पहुंचाती है?