Category: देश

  • क्या है “सेंगोल” जिसे नए संसद भवन के उद्घाटन के मौके पर नेहरु की तरह थामेंगे मोदी !

    क्या है “सेंगोल” जिसे नए संसद भवन के उद्घाटन के मौके पर नेहरु की तरह थामेंगे मोदी !

    नई दिल्ली// रविवार को नए संसद भवन के उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिल पुजारियों से एक सुनहरा राजदंड यानी सैंगोल प्राप्त करेंगे ।इसकी मीडिया में खासी चर्चा है।

    सैंगोल हस्तान्तारण एक ऐतिहासिक परंपरा है इस तरह का समारोह चोल साम्राज्य के दौरान होता था जो एक राज्य से दूसरे राज्य को सत्ता हस्तांतरण को दर्शाता है

    15 अगस्त 1947 की मध्य रात्रि को नेहरू ने स्वीकार किया था सेंगोल

    आज से 75 साल पहले इसी तरह के समारोह में 15 अगस्त 1947 की मध्य रात्रि को अपने ऐतिहासिक भाषण से कुछ घंटे पहले देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने सैंगोल स्वीकार किया था जो अंग्रेजों से भारतीयों को सत्ता हस्तांतरित स्थानांतरण का प्रतीक था। आज़ाद भारत के प्रथम वायसराय श्री राजा राजगोपालाचारी ने नेहरू को वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन से सत्ता हस्तांतरण को दर्शाने के लिए चोल साम्राज्य की परंपरा के तहत सैंगोल को शामिल करने का सुझाव दिया था और नेहरू ने राजेंद्र प्रसाद और अन्य लोगों की उपस्थिति में सैंगोल स्वीकार किया था। इस घटना को टाइम मैगजीन सहित कई समाचार पत्रों में प्रकाशित किया गया था लेकिन बाद में इसे भुला दिया गया यह सैंगोल प्रयागराज के इलाहाबाद संग्रहालय में पिछले 7 दशक से रखा हुआ है।अब सेंगोल को  न्याय पूर्ण शासन के प्रतीक के तौर पर सदन के अध्यक्ष के आसन के समीप स्थापित किया जाएगा।

    क्या और कैसा हैं सेंगोल?

     सेंगोल संस्कृत शब्द “संकु” से लिया गया माना जाता है, जिसका अर्थ है “शंख”. शंख हिंदू धर्म में एक पवित्र वस्तु थी, और इसे अक्सर संप्रभुता के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया जाता था. राजदंड भारतीय सम्राट की शक्ति और अधिकार का प्रतीक था. यह सोने या चांदी से बना था, और इसे अक्सर कीमती पत्थरों से सजाया जाता था. सेंगोल राजदंड औपचारिक अवसरों पर सम्राट द्वारा ले जाया जाता था, और इसका उपयोग उनके अधिकार को दर्शाने के लिए किया जाता था. सेंगोल सत्ता के हस्तांतरण का प्रतीक भी माना जाता है. संसद भवन में जिस सेंगोल की स्थापना होगी उसके शीर्ष पर नंदी विराजमान हैं.  

    सेंगोल शब्द का तमिल में एक और अर्थ बताया जाता है जिसका अर्थ है नीति परायणता । इस चांदी से बनी सैंगोल पर सोने की परत चढ़ाई गई है और उसके शीर्ष पर न्याय के प्रतीक के तौर पर पवित्र नंदी विराजमान है सैंगोल उसी भावना का प्रतिनिधित्व करता है जिसका एहसास 14 अगस्त 1947 को जवाहरलाल नेहरू ने किया था।  

    जब माउंटबेटन ने नेहरू से सप्ताह स्थानांतरण के प्रतीक समारोह के बारे में पूछा तो राजगोपालाचारी जी से चर्चा की गई, राजगोपालाचारी ने तमिलनाडु के चंद्रपुर जिले में शैव संप्रदाय के धार्मिक मठ तिरुवदुथुराई अधीनम से संपर्क किया था। अधीनम के प्रमुख में चेन्नई के जौहरी बुम्मिडी बंगारू चेट्टी को सेंगोल( 5 फुट लंबा) तैयार करने का जिम्मा सौंपा सा था।  नए संसद भवन के उद्घाटन के अवसर पर सैंगोल बनाने वाले 96 वर्षीय बुम्मिडी एथिराजुलू और 88 वर्षीय बुम्मिडी सुधाकर शिल्पकार को भी समारोह में शामिल होंगे।

  • व्यापारी क्यों चाहते हैं कि आप अरहर की दाल छोड़ दें और दूसरी दालें खाएं ?

    व्यापारी क्यों चाहते हैं कि आप अरहर की दाल छोड़ दें और दूसरी दालें खाएं ?

    नई दिल्ली// व्यापारी चाहते हैं कि बढ़ती कीमतों को रोकने के लिए आप अरहर की जगह मसूर, मूंग, चना और पीली मटर जैसी अन्य दालों का इस्तेमाल करें। अरहर व्यापारियों ने सरकार से मांग की है कि उपभोक्ताओं को तुवर दाल के अलावा चना मसूर मूंग और पीली मटर जैसी अन्य डालें खाने के बारे में शिक्षित करने के लिए एक राष्ट्रीय अभियान शुरू किया जाए। व्यापारियों का मानना है कि उपभोक्ता वरीयता में बदलाव को प्रभावित करके अरहर की मांग को कम करना आवश्यक है क्योंकि मांग को पूरा करने के लिए देश में तुअर का पर्याप्त उत्पादन नहीं हो रहा है। जबकि अन्य दालें सस्ती दरों पर काफी मात्रा में उपलब्ध हैं। 
    सरकारी आंकड़ों के अनुसार तूुअर की खुदरा कीमतें, जिसे अरहर दाल भी कहा जाता है, 27 फीसदी बढ़ी हैं और पिछले छह महीनों में 10 फीसदी बढ़ी हैं। दिल्ली में मौजूदा कीमत 132 रुपये किलो है जबकि औसत कीमत 119 रुपये किलो है। दिल्ली में खुदरा अरहर दाल की कीमतों में पिछले पांच वर्षों में 60% के करीब वृद्धि हुई है। उत्पादन मांग के अनुरूप नहीं रहा है और सबसे अधिक बिकने वाली दाल का थोक मूल्य लगभग 60% बढ़ गया है।
    एक सरकारी अनुमान के अनुसार, भारत का 2022-23 अरहर का उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में 14% कम होना चाहिए। उद्योग को उम्मीद है कि गिरावट 20% से अधिक होगी।उत्पादन में कमी का कारण बेमौसम बारिश है।

    भारतीय दलहन और अनाज संघ (आईपीजीए) ने अरहर के विकल्प के रूप में मसूर, मूंग, चना और पीली मटर जैसी दालों की खपत को बढ़ावा देने के लिए खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के साथ एक संयुक्त अभियान का प्रस्ताव दिया है।
    एगमार्कनेट के आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र के लातूर थोक बाजार में असंसाधित अरहर की औसत कीमत एक साल पहले इसी तारीख को 60 रुपये किलो से बढ़कर बुधवार को 90 रुपये किलो हो गई, जो 50% अधिक है। जनवरी में नई फसल की कटाई शुरू होने के बाद से पिछले चार महीनों में कीमतों में 24% की वृद्धि हुई है।
    “भारत के तुअर उत्पादन में भारी गिरावट आई है, जबकि तूर की मांग बरकरार है। केंद्र सरकार के साथ हमारी हालिया बैठक में, हमने अधिकारियों को सूचित किया है कि आईपीजीए अन्य दालों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए सरकार के साथ एक अभियान चलाने के लिए तैयार है। आईपीजीए के अध्यक्ष बिमल कोठारी ने कहा, जिसमें अरहर के बराबर या बेहतर प्रोटीन सामग्री है।
    घरेलू मांग और आपूर्ति में अंतर को पूरा करना आयात के माध्यम से भी संभव नहीं होगा। भारत के बाहर, तुअर केवल म्यांमार और कुछ देशों में उपलब्ध है। पूर्वी अफ्रीका में, जो उन्हें केवल भारतीय बाजार के लिए उगाते हैं।
    कोठारी ने कहा, “मौजूदा मांग को पूरा करने के लिए अरहर की आपूर्ति का प्रबंध करना संभव नहीं है। म्यांमार में सिर्फ एक लाख टन अरहर बचा है, जबकि पूर्वी अफ्रीका से हमें तुअर की खेप सितंबर में ही मिल सकती है।” .
    उन्होंने कहा कि लोग मसूर, चना, पीली मटर और मूंग जैसी दालों का विकल्प चुन सकते हैं, जो कम दरों पर भी उपलब्ध हैं।
    2010 में, नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (नेफेड) ने आयातित पीली मटर को मुख्य दाल के रूप में बढ़ावा देने के लिए एक अभियान चलाया था, जब स्थानीय स्तर पर उगाई जाने वाली लगभग सभी दालों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई थी। उस समय तक बेसन बनाने के लिए चने में मिलाने के लिए पीली मटर आयात की जाती थी।
    आईपीजीए ने यह भी सुझाव दिया है कि केंद्र और राज्य सरकारों को अपनी कल्याणकारी योजनाओं के तहत आपूर्ति के लिए खुले बाजार से तूर खरीदना बंद कर देना चाहिए। कोठारी ने कहा, “दालें, जो प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं और सस्ती हैं, का उपयोग सरकारी कल्याणकारी योजनाओं में किया जाना चाहिए।”
    अफ्रीकी अरहर
    व्यापारियों के अनुसार, अफ्रीका में तुअर की कीमतें, भारत को जिंसों की एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता, आगे के व्यापार में 25% अधिक खुली हैं। मयूर ग्लोबल कॉरपोरेशन के वाइस प्रेसिडेंट (सेल्स) हर्षा राय ने कहा, “अफ्रीकी तुअर के लिए वायदा कारोबार पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 25% अधिक है।”
    अफ्रीकी फसल, जो भारत के लिए उगाई जाती है और जुलाई/अगस्त में काटी जाती है, अगस्त से नवंबर तक त्योहारी सीजन के दौरान तुअर दाल की कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए महत्वपूर्ण होगी क्योंकि देश तुअर की कमी का सामना कर रहा है। राय ने कहा, ‘हालांकि, भारतीय बाजारों में अरहर की कीमतों में पिछले सप्ताह तेजी आने के कारण अफ्रीकी अरहर के वायदा अनुबंधों ने विराम ले लिया है। आयातक कटाई की अवधि तक इंतजार करना पसंद कर सकते हैं, क्योंकि आवक का दबाव कीमतों में नरमी ला सकता है।

    भारत सरकार पहले ही म्यांमार में व्यापारियों को अरहर और उड़द की जमाखोरी के प्रति आगाह कर चुकी है। इसने चेतावनी दी कि अगर म्यांमार में व्यापारियों ने दालों की जमाखोरी की तो वह सरकार से सरकार खरीद का सहारा ले सकती है।

    ( इकोनॉमिक टाइम्स के आधार पर)

  • अफसरों के ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर सच साबित हुआ दिल्‍ली के सीएम का डर !

    अफसरों के ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर सच साबित हुआ दिल्‍ली के सीएम का डर !

    केंद्र सरकार ने अध्यादेश के जरिये अफसरों के ट्रांसफर-पोस्टिंग के अधिकार फिर उपराज्यपाल को सौंप दिए

    नई दिल्ली// देश की राजधानी में अफसरों के ट्रांसफर-पोस्टिंग के मामले में मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल का डर सच साबित हुआ है।दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार को अधिकारियों के तबादले का अधिकार मिले अभी आठ दिन ही हुए थे कि केंद्र सरकार ने अध्यादेश के जरिये यह अधिकार फिर उपराज्यपाल को सौंप दिए। दिल्‍ली के लिए केंद्र सरकार अध्यादेश लाई है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इसे लाया गया है। केजरीवाल का दावा है कि इसके जरिये सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने की साजिश की गई है। शीर्ष अदालत ने ट्रांसफर और पोस्टिंग को लेकर दिल्ली सरकार के पक्ष में फैसला दिया था। अध्‍यादेश के तहत राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण के गठन की बात कही गई है। अध्‍यादेश कहता है क‍ि ट्रांसफर-पोस्टिंग और विजिलेंस का काम राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण (NCCSA) देखेगा।
    मुख्यमंत्री प्राधिकरण के पदेन अध्यक्ष होंगे, जबकि दिल्ली के प्रधान गृह सचिव पदेन सदस्य-सचिव होंगे।
    यही प्राधिकरण सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर तबादले की सिफारिश करेगा, पर आखिरी फैसला दिल्ली के उपराज्यपाल का होगा। मुख्यमंत्री तबादले का फैसला अकेले नहीं कर सकेंगे।दानिक्स कैडर के समूह-ए अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए भी यही प्राधिकरण अधिकृत होगा। केंद्र सरकार ने अध्यादेश के जरिये 11 मई के सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया है, जिसमें तबादले-नियुक्ति का अधिकार राज्य सरकार को दिया गया था। बीते हफ्ते सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा था, उपराज्यपाल राज्य कैबिनेट के फैसले को मानने के लिए बाध्य हैं। वे कैबिनेट के फैसले में बदलाव नहीं कर सकते। इस फैसले के बाद केंद्र सरकार ने अब अध्यादेश जारी कर उपराज्यपाल को पहले की तरह फिर से असीमित शक्तियां दे दीं। 
    यह दिया तर्क
    केंद्र सरकार ने अध्यादेश में इस फैसले की वजह बताई है…इसमें कहा गया है कि दिल्ली की स्थिति बेहद खास है। यहां कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थान और प्राधिकारी जैसे राष्ट्रपति, संसद, सुप्रीम कोर्ट मौजूद हैं। विदेशी राजनयिकों का आगमन होता रहता है। इसलिए यहां प्रशासन में उच्च गुणवत्ता का होना राष्ट्रीय हित में है।

    अध्यादेश को लेकर केजरीवाल ने पहले ही जताया था अंदेशा
    केंद्र द्वारा लाए गए अध्यादेश को लेकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शाम को पहले ही अंदेशा जताया था। उन्होंने ट्वीट कर लिखा था, एलजी साहिब सुप्रीम कोर्ट के आदेश क्यों नहीं मान रहे? दो दिन से सर्विसेज़ सेक्रेटरी की फाइल साइन क्यों नहीं की? कहा जा रहा है कि केंद्र अगले हफ्ते आर्डिनेंस लाकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलटने वाली है? क्या केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलटने की साजिश कर रही है? क्या एलजी साहिब आर्डिनेंस का इंतजार कर रहे हैं, इसलिए फाइल साइन नहीं कर रहे?

    अध्यादेश पर लेनी होगी संसद की मंजूरी
    केंद्र सरकार को संसद के मानसून सत्र में इस अध्यादेश पर लोकसभा व राज्यसभा की मंजूरी लेनी होगी। राज्यसभा में सरकार का बहुमत नहीं है। वहां विपक्षी पार्टियां इसे लेकर एकजुट हो सकती हैं।

    अध्यादेश से संघवाद को नुकसान : सिंघवी 
    सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली सरकार के वकील रहे अभिषेक मनु सिंघवी ने ट्वीट कर इस अध्यादेश को बेहद खराब तरीके से बनाया गया करार दिया। उन्होंने लिखा, अध्यादेश जिस व्यक्ति ने तैयार किया है उसने बेहद आसानी से कानून की अवहेलना की है। सिविल सेवा पर दिल्ली सरकार को अधिकार संविधान पीठ ने दिया था जिसे अध्यादेश के जरिये पलट दिया गया। संघवाद संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा है जिसे नुकसान पहुंचाया गया है। चुनी हुई सरकार के प्रति अधिकारियों की जवाबदेही को सिर के बल पलट दिया गया। अरविंद केजरीवाल ने सिंघवी के इस ट्वीट को रीट्वीट किया है।
     सौरभ भारद्वाज का केंद्र पर हमला
    दिल्ली सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा कि केंद्र यह अध्यादेश हार से बौखलाकर लेकर आई है। केंद्र ने संविधान से छल किया है। 

    ‘दिल्ली देश की राजधानी है, पूरे भारत का इस पर अधिकार’
    दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा है कि दिल्ली देश की राजधानी है, पूरे भारत का इस पर अधिकार है और गत काफी समय से दिल्ली की प्रशासकीय गरिमा को स्थानिय अरविंद केजरीवाल सरकार ने ठेस पहुंचाई है। दिल्ली में विश्व के हर देश के राजदूत रहते हैं और यहां जो कुछ प्रशासकीय अनहोनी होती है उससे विश्व भर में भी भारत की गरिमा खराब होती है।केंद्र सरकार जो अध्यादेश लाई है भारतीय जनता पार्टी उसका स्वागत करती है। 

    आतिशी ने बताया सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना

    केंद्र सरकार जो अध्यादेश लेकर आई है वह सुप्रीम कोर्ट की संविधानिक पीठ की साफ अवमानना है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि चुनी हुई सरकार के पास निर्णय लेने की ताकत होनी चाहिए। यही लोकतंत्र है, यही लोकतंत्र का सम्मान है। लेकिन आज सरकार जो अध्यादेश लेकर आई है वो हार के डर से, केजरीवाल सरकार को पावर देने के डर से लेकर आई है। केंद्र सरकार केजरीवाल से डरी हुई है और यह अध्यादेश सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अवमानना है। 

  • अफसरों के ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर सच साबित हुआ दिल्‍ली के सीएम का डर !

    अफसरों के ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर सच साबित हुआ दिल्‍ली के सीएम का डर !

    केंद्र सरकार ने अध्यादेश के जरिये अफसरों के ट्रांसफर-पोस्टिंग के अधिकार फिर उपराज्यपाल को सौंप दिए

    नई दिल्ली// देश की राजधानी में अफसरों के ट्रांसफर-पोस्टिंग के मामले में मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल का डर सच साबित हुआ है।दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार को अधिकारियों के तबादले का अधिकार मिले अभी आठ दिन ही हुए थे कि केंद्र सरकार ने अध्यादेश के जरिये यह अधिकार फिर उपराज्यपाल को सौंप दिए। दिल्‍ली के लिए केंद्र सरकार अध्यादेश लाई है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इसे लाया गया है। केजरीवाल का दावा है कि इसके जरिये सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने की साजिश की गई है। शीर्ष अदालत ने ट्रांसफर और पोस्टिंग को लेकर दिल्ली सरकार के पक्ष में फैसला दिया था। अध्‍यादेश के तहत राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण के गठन की बात कही गई है। अध्‍यादेश कहता है क‍ि ट्रांसफर-पोस्टिंग और विजिलेंस का काम राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण (NCCSA) देखेगा।
    मुख्यमंत्री प्राधिकरण के पदेन अध्यक्ष होंगे, जबकि दिल्ली के प्रधान गृह सचिव पदेन सदस्य-सचिव होंगे।
    यही प्राधिकरण सर्वसम्मति या बहुमत के आधार पर तबादले की सिफारिश करेगा, पर आखिरी फैसला दिल्ली के उपराज्यपाल का होगा। मुख्यमंत्री तबादले का फैसला अकेले नहीं कर सकेंगे।दानिक्स कैडर के समूह-ए अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए भी यही प्राधिकरण अधिकृत होगा। केंद्र सरकार ने अध्यादेश के जरिये 11 मई के सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया है, जिसमें तबादले-नियुक्ति का अधिकार राज्य सरकार को दिया गया था। बीते हफ्ते सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा था, उपराज्यपाल राज्य कैबिनेट के फैसले को मानने के लिए बाध्य हैं। वे कैबिनेट के फैसले में बदलाव नहीं कर सकते। इस फैसले के बाद केंद्र सरकार ने अब अध्यादेश जारी कर उपराज्यपाल को पहले की तरह फिर से असीमित शक्तियां दे दीं। 
    यह दिया तर्क
    केंद्र सरकार ने अध्यादेश में इस फैसले की वजह बताई है…इसमें कहा गया है कि दिल्ली की स्थिति बेहद खास है। यहां कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थान और प्राधिकारी जैसे राष्ट्रपति, संसद, सुप्रीम कोर्ट मौजूद हैं। विदेशी राजनयिकों का आगमन होता रहता है। इसलिए यहां प्रशासन में उच्च गुणवत्ता का होना राष्ट्रीय हित में है।

    अध्यादेश को लेकर केजरीवाल ने पहले ही जताया था अंदेशा
    केंद्र द्वारा लाए गए अध्यादेश को लेकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शाम को पहले ही अंदेशा जताया था। उन्होंने ट्वीट कर लिखा था, एलजी साहिब सुप्रीम कोर्ट के आदेश क्यों नहीं मान रहे? दो दिन से सर्विसेज़ सेक्रेटरी की फाइल साइन क्यों नहीं की? कहा जा रहा है कि केंद्र अगले हफ्ते आर्डिनेंस लाकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलटने वाली है? क्या केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलटने की साजिश कर रही है? क्या एलजी साहिब आर्डिनेंस का इंतजार कर रहे हैं, इसलिए फाइल साइन नहीं कर रहे?

    अध्यादेश पर लेनी होगी संसद की मंजूरी
    केंद्र सरकार को संसद के मानसून सत्र में इस अध्यादेश पर लोकसभा व राज्यसभा की मंजूरी लेनी होगी। राज्यसभा में सरकार का बहुमत नहीं है। वहां विपक्षी पार्टियां इसे लेकर एकजुट हो सकती हैं।

    अध्यादेश से संघवाद को नुकसान : सिंघवी 
    सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली सरकार के वकील रहे अभिषेक मनु सिंघवी ने ट्वीट कर इस अध्यादेश को बेहद खराब तरीके से बनाया गया करार दिया। उन्होंने लिखा, अध्यादेश जिस व्यक्ति ने तैयार किया है उसने बेहद आसानी से कानून की अवहेलना की है। सिविल सेवा पर दिल्ली सरकार को अधिकार संविधान पीठ ने दिया था जिसे अध्यादेश के जरिये पलट दिया गया। संघवाद संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा है जिसे नुकसान पहुंचाया गया है। चुनी हुई सरकार के प्रति अधिकारियों की जवाबदेही को सिर के बल पलट दिया गया। अरविंद केजरीवाल ने सिंघवी के इस ट्वीट को रीट्वीट किया है।
     सौरभ भारद्वाज का केंद्र पर हमला
    दिल्ली सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा कि केंद्र यह अध्यादेश हार से बौखलाकर लेकर आई है। केंद्र ने संविधान से छल किया है। 

    ‘दिल्ली देश की राजधानी है, पूरे भारत का इस पर अधिकार’
    दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा है कि दिल्ली देश की राजधानी है, पूरे भारत का इस पर अधिकार है और गत काफी समय से दिल्ली की प्रशासकीय गरिमा को स्थानिय अरविंद केजरीवाल सरकार ने ठेस पहुंचाई है। दिल्ली में विश्व के हर देश के राजदूत रहते हैं और यहां जो कुछ प्रशासकीय अनहोनी होती है उससे विश्व भर में भी भारत की गरिमा खराब होती है।केंद्र सरकार जो अध्यादेश लाई है भारतीय जनता पार्टी उसका स्वागत करती है। 

    आतिशी ने बताया सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना

    केंद्र सरकार जो अध्यादेश लेकर आई है वह सुप्रीम कोर्ट की संविधानिक पीठ की साफ अवमानना है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि चुनी हुई सरकार के पास निर्णय लेने की ताकत होनी चाहिए। यही लोकतंत्र है, यही लोकतंत्र का सम्मान है। लेकिन आज सरकार जो अध्यादेश लेकर आई है वो हार के डर से, केजरीवाल सरकार को पावर देने के डर से लेकर आई है। केंद्र सरकार केजरीवाल से डरी हुई है और यह अध्यादेश सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अवमानना है। 

  • भारत में धनी कहलाने के लिए कितने रूपये चाहिए ?

    भारत में धनी कहलाने के लिए कितने रूपये चाहिए ?

    देश सबसे अमीर 1% में शामिल होने के लिए शामिल होने का आंकड़ा बताती है वेल्थ रिपोर्ट -2023

    नई दिल्ली // हिंदी की प्रसिद्ध फिल्म दीवार में अमिताभ बच्चन का एक बड़ा ही मशहूर डायलाग  है ‘मेरे पास बंगला है, गाड़ी है, बैंक बैलेंस है।’  जो फिल्म के दृश्य में वे अपनी हैसियत या अपने को अमीर बताने के लिए बोलते हैं, लेकिन वह सिर्फ अमीर होना है । हर अमीर देश के रिची रिच क्लब (एक फीसदी अमीर लोग ) में शामिल नहीं है . देश के सबसे आमिर एक प्रतिशत लोगों में शामिल होने पर ही आप रिची रिच कहला सकेंगें  और उसका हिस्सा बनने के लिए आपके पास कितना पैसा होना चाहिए?   

    ग्लोबल रियल एस्टेट कंसल्टेंसी नाइट फ्रैंक की वेल्थ रिपोर्ट इसका जबाब देती है । फर्म ‘वेल्थ रिपोर्ट 2023’ सिर्फ हिंदुस्तान ही नहीं दुनिया भर और भी कई देशों में किसी व्यक्ति को ‘रिची रिच’ क्लब का हिस्सा बनने के लिए कितनी रकम जरूरत है यह बताती है.

    बुधवार को जारी वेल्थ रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के 1% सबसे अमीर लोगों में शामिल होने के लिए सिर्फ 175,000 डॉलर (1.44 करोड़ रुपये) नेटवर्थ की जरूरत है। यह राशि अन्य देशों के 1% क्लब में प्रवेश बिंदु से बहुत कम है, भले ही भारत में अमीर लोगों की आबादी में तेजी से बढ़ रही है।

     मोनाको में,  एक ऐसा देश जो भारत के किसी महानगर के एक हिस्से से भी छोटा होगा और जहां दुनिया के सबसे धनी व्यक्तियों की आबादी सबसे अधिक है, 1% क्लब के प्रवेश में प्रवेश के लिए कम से कम 12.4 मिलियन डॉलर (102 करोड़) की सम्पत्ति  की जरूरत है. जो भारत के मुकाबले 160 गुना ज्यादा है . नाइट फ्रैंक की सूची में अगले दो देश स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रेलिया हैं। इन दो देशों के सबसे अमीर एक प्रतिशत लोगों में शामिल  होने के लिए  स्विट्ज़रलैंड में 6.6 मिलियन डॉलर (54 करोड़ रुपये) की आवश्यकता होती है, जबकि ऑस्ट्रेलिया में यह रकम 5.5 मिलियन डॉलर (45 करोड़ रुपये) है।

    एशिया महाद्वीप  की बात करें तो सिंगापुर में 3.5 मिलियन डॉलर  (28 करोड़ रु.) की आवश्यकता है। इसके बाद हांगकांग में 3.4 मिलियन डॉलर है। चीनी में, जिसकी जनसंख्या की तुलना भारत से की जा सकती है, 1% क्लब का आंकड़ा 960,000 डालर आंका गया है। लगभग 25 देशों की इस सूची में भारत का 22 वां स्थान है ,उसे दक्षिण अफ्रीका, फिलीपींस और केन्या से पहले रखा गया था।

    संयोग से, मोनाको में अमीर कहलाने का आंकड़ा (प्रवेश बिंदु) केन्या के 200 गुना से अधिक है – जो स्पष्ट रूप से देशों के बीच बढ़ती आय असमानता की खाई को उजागर करता है।

    लैटिन अमेरिका में, ब्राजील में 430,000 डॉलर (लगभग 3.5 करोड़ रुपये) की उच्चतम सीमा है, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए सीमा 5.1 मिलियन डॉलर (लगभग 42 करोड़ रुपये) है । मध्य पूर्व में, सबसे अधिक 1.6 मिलियन डॉलर (13 करोड़ रुपये) की सीमा के साथ संयुक्त अरब अमीरात है । संयोग से, मोनाको में रिच क्लब का प्रवेश बिंदु केन्या के 200 गुना से अधिक है – जो स्पष्ट रूप से देशों के बीच बढ़ती आय असमानता की खाई को उजागर करता है। हाल के दिनों में कोविड महामारी के साथ-साथ वैश्विक मुद्रास्फीति में वृद्धि के कारण अमीर और गरीब देशों के बीच की खाई चौड़ी हो गई है। ।

    भारत में अरबपतियों की संख्या बढ़ी

    भारत के अमीर बढ़ रहे हैं . नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNI) की संख्या – जिनकी संपत्ति का मूल्य 1 मिलियन डॉलर या उससे अधिक है – अगले पांच वर्षों में 108 प्रतिशत की भारी वृद्धि के साथ 1.7 मिलियन डॉलर हो जाएगी। 2022 में देश में एचएनआई की संख्या 797,714 थी।

    रिपोर्ट में यह भी दिखाया गया है कि भारत के अल्ट्रा-हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल (UHNWIs) – जिनकी कुल संपत्ति 30 मिलियन डॉलर से अधिक है – 58.4 प्रतिशत की दर से बढ़ने वाली है । रिपोर्ट में कहा गया है कि अल्ट्रा-हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल की संख्या 2022 में 12,069 से बढ़कर 19,119 और 2027 तक होनी थी। भारत के अरबपतियों की संख्या भी मौजूदा 161 अरबपतियों से बढ़कर 195 होने की उम्मीद है। यह प्रवृत्ति दुनिया भर के परिदृश्य के ठीक विपरीत है। नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक यूएचएनआई आबादी में पिछले साल 3.8 फीसदी की गिरावट आई है। इसके अतिरिक्त, वैश्विक स्तर पर अरबपतियों की संख्या भी 5 प्रतिशत घटकर 2,629 रह गई।

    दुनिया में अमीर गरीब की खाई बढती जा रही है ,श्रम ,बुद्धि या विवेक से ज्यादा नई व्यवस्था में पैसा काम पर लग रहा है .

  • पूर्व क्रिकेटर  ने क्यों किया पंजाब केसरी पर मुकदमा ?

    पूर्व क्रिकेटर  ने क्यों किया पंजाब केसरी पर मुकदमा ?

    नई दिल्ली// पूर्व क्रिकेटर और भाजपा सांसद गौतम गंभीर ने पंजाब केसरी अखबार के खिलाफ ₹2 करोड़ हर्जाने की मांग को लेकर दिल्ली एचसी के समक्ष मानहानि का मुकदमा दायर किया है

    गंभीर ने अखबार द्वारा प्रकाशित कहानियों के एक समूह के लिए पंजाब केसरी, इसके प्रधान संपादक और दो पत्रकारों पर मुकदमा दायर किया है।
    पूर्व क्रिकेटर और बीजेपी सांसद (सांसद) गौतम गंभीर ने हिंदी अखबार पंजाब केसरी के खिलाफ ₹2 करोड़ का हर्जाना मांगने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया है।

    गंभीर ने अखबार, उसके संपादक आदित्य चोपड़ा के साथ-साथ संवाददाताओं अमित कुमार और इमरान खान पर यह कहते हुए मुकदमा दायर किया है कि उन्होंने व्यवस्थित रूप से उन्हें निशाना बनाते हुए कई दुर्भावनापूर्ण और अपमानजनक लेख प्रकाशित करके अपनी पत्रकारिता की स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया है।

    अधिवक्ता जय अनंत देहदराई के माध्यम से दायर अपने मुकदमे में, गंभीर ने दावा करने के लिए रिपोर्टों के एक समूह का हवाला दिया कि कागज ने अपनी कहानियों को एक भ्रामक स्पिन दिया। एक रिपोर्ट में उनकी तुलना पौराणिक राक्षस भस्मासुर से भी की गई थी, इसका विरोध किया गया था।

    सूट में उल्लिखित कुछ रिपोर्ट हैं:

    सांसद गौतम गंभीर लापता गली-गली में लगे पोस्टर;

    दिल्ली के लापता सांसद लखनऊ सुपर जाइंट्स के लिए बने भस्मासुर (लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए दिल्ली का लापता सांसद बना भस्मासुर);

    आदेश गुप्ता बोलते रह गए, गौतम गंभीर उठ चले (आदेश गुप्ता बोलते रहे, गौतम गंभीर चले गए);

    ये नए मिजाज के सांसद है जरा फासलो से मिला करो।

    गंभीर ने तर्क दिया कि ये रिपोर्ट उनके काम के बारे में एक झूठी और गहरी अपमानजनक कहानी बनाती हैं और पाठकों के मन में एक सांसद के रूप में रहती हैं।

    रिपोर्ट में उन्हें एक जातिवादी व्यक्ति और एक उच्च नाक वाले राजनेता के रूप में चित्रित किया गया था, यह इंगित किया गया था।

    गंभीर ने धर्मार्थ संगठनों को 2 करोड़ रुपये का हर्जाना देने की मांग की है। उन्होंने यह भी प्रार्थना की कि प्रतिवादियों को बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए और इसे पंजाब केसरी द्वारा प्रसारित सभी समाचार पत्रों (डिजिटल संस्करणों सहित) में प्रकाशित किया जाना चाहिए।

    उन्होंने यह भी प्रस्तुत किया कि उनके खिलाफ किए गए प्रत्येक अपमानजनक प्रकाशन को वापस लेने के लिए कागज को निर्देश जारी किए जाने चाहिए।

    वाद को न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

  • अब उधार में मिल सकेगा रेल्वे का टिकट ? जाने क्या है रेलवे की स्कीम .

    अब उधार में मिल सकेगा रेल्वे का टिकट ? जाने क्या है रेलवे की स्कीम .

    भोपाल// ट्रेन मैं यात्रा करने वाले देश के लाखों लोगों के लिए एक अच्छी खबर है ,अब तत्काल पैसे दिए बिना भी यात्रा की जा सकेगी। इसके लिए इंडियन रेलवे कैटरिंग एवं टूरिज्म कॉरपोरेशन  एक नई स्कीम लेकर आया है। रेलवे से मिली जानकारी के अनुसार आईआरसीटीसी ने एक नई स्कीम जारी की है जिसका नाम “बाय नाउ, पे लेटर “है मतलब अभी खरीदिए है और पैसा बाद में दीजिए। इस स्कीम के तहत यात्री ट्रेन में कंफर्म टिकट बुक करा सकते हैं और उसका भुगतान कुछ दिन बाद कर सकते हैं। जानकारी के अनुसार आईआरसीटीसी ने देश की मोबाइल पर पेमेंट कंपनी पेटीएम से एक करार किया है, जिसमें पेटीएम यूजर ट्रेन की टिकट बुक करा सकते हैं । आईआरसीटी की ओर से यह बताया गया है कि रेलवे की ऐप में अब पेटीएम की पोस्टपेड सर्विस को ईनेबल कर दिया गया है। यानी टिकट पहले खरीदो और भुगतान बाद में करो। पेटीएम की पोस्ट पैड सर्विस में यात्री बिना पैसे दिए टिकट बुक करा पाएंगे।

     इस तरीके से करा सकते हैं टिकट बुक

    -टिकट बुक करने के लिए सबसे पहले मोबाइल में आईआरसीटीसी ऐप डाउनलोड कर उसे लॉगिन करें।

     -अब अपना नाम, तारीख, बोर्डिंग स्टेशन सहित अपनी यात्रा की जानकारी को भरें ।

    -अब आपको जिस ट्रेन से यात्रा करना है उसे चुने और बुकिंग के लिए आगे बढ़े ।

    -जब आप पेमेंट सेक्शन में पहुंचेंगे तो यहां पर आपको buy now,pe later का ऑप्शन मिल जाएगा।

    – अब अगली स्टेप में आपको peytm post सेलेक्ट करना होगा ।यहां आपको अपना पेटीएम को लॉगइन  करना होगा।

    – पेटीएम लॉगिन करने के बाद आपको एक वेरिफिकेशन कोड भेजा जाएगा ।

    -आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर जो कोड पहुंचा है उसे भरने के बाद आपके आपका टिकट बुक हो जाएगा।

    30 दिन का समय 60 हजार  की लिमिट

    आईआरसीटीसी ने जो नया प्लान पेश किया है उसमें यात्रियों को टिकट का पैसा लौटाने के लिए 30 दिन का समय दिया जा रहा है, यानी यात्री अपनी सहूलियत के हिसाब से 1 माह के अंदर भुगतान कर सकता है। इतना ही नहीं आईआरसीटीसी की इस स्कीम  से यात्री  ₹60000 तक की टिकट बुक कर सकता है यानी एक यात्री को 60 हजार रूपए की लिमिट पेटीएम के माध्यम से दी जा रही है।

     अन्य यूपीआई एप को भी जोड़ने की तैयारी

    आईआरसीटीसी के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार फिलहाल इस स्कीम में सिर्फ पेटीएम को जगह दी गई है लेकिन बहुत ही जल्दी अन्य यूपीआई ऐप जैसे भीम ऐप,गूगल पे, फोन पे आदि को भी जोड़ा जाएगा, जिससे अधिक से अधिक यात्री इस स्कीम का फायदा उठा सकें।

  • 67 फीसदी ग्रामीण घरों में लकड़ी और उपलों पर बन रहा है खाना,सरकारी रिपोर्ट ही बता रही है उज्ज्वला की सच्चाई!

    67 फीसदी ग्रामीण घरों में लकड़ी और उपलों पर बन रहा है खाना,सरकारी रिपोर्ट ही बता रही है उज्ज्वला की सच्चाई!

    नई दिल्ली// केन्द्र सरकार ने “स्वच्छ जीवन ,बेहतर जीवन” नारे के साथ देश के प्रत्येक रसोईघर को धुआं मुक्त करने के लिए 1 मई 2016 से उज्ज्वला योजना की शुरुआत की थी, पर यह योजना अब तक अपना लक्ष्य पूरी तरह से हासिल नहीं कर पाई है और और यह बात कोई और नहीं पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की तरफ से ऊर्जा उपभोग में बदलाव पर सलाहकार समिति की रिपोर्ट ही बताती है।

     रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्र के 80 प्रतिशत घरों में एलपीजी गैस कनेक्शन है लेकिन इसके बावजूद आज भी 67% घरों में लकड़ी, कंडो (उपलों) या दूसरे स्रोतों से खाना पकाया जा रहा है।

     रिपोर्ट ने इस बात की भी पड़ताल की है कि लोग क्यों एलपीजी कनेक्शन होने के बावजूद गैस पर खाना नहीं पकाते तो मोटे तौर पर इसके लिए गैस सिलेंडर की ज्यादा कीमत को जिम्मेदार ठहराया गया है ।

    उज्जवला के तहत गैस कनेक्शन लेते समय तो कोई राशि नहीं देनी पड़ती है लेकिन उस की लागत उन्हें मासिक किस्त के में नगद के तौर पर चुकानी होती है।

     देश में ग्रामीण सालाना 6.2 सिलेंडर इस्तेमाल करते हैं। रिपोर्ट में यह बताया गया है कि भारत में अमूमन हर गैस कनेक्शन धारक 6.7 सिलेंडर सालाना इस्तेमाल करता है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह संख्या कम है ।ग्रामीण क्षेत्र में यह संख्या ओसतन 6.2 है। हालांकि जिन घरों में अभी भी दूसरे ईंधन जैसे लकड़ी कंडे आदि का इस्तेमाल हो रहे हैं वहां सिर्फ सालाना 4.1 सिलेंडर की औसतन इस्तेमाल किया जा रहा है।सनद रहे कि उज्जवला योजना के तहत अभी तक कुल 9.5 करोड़ घरों को एलपीजी कनेक्शन दिया गया है।

  • जासूसी के आरोप में डीआरडीओ का वैज्ञानिक गिरफ्तार, पाकिस्तानी महिला को गुप्त सूचना देंने का आरोप

    जासूसी के आरोप में डीआरडीओ का वैज्ञानिक गिरफ्तार, पाकिस्तानी महिला को गुप्त सूचना देंने का आरोप

    मुंबई। महाराष्ट्र एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) की टीम ने पाकिस्तानी महिला को गुप्त सूचना देने वाले पुणे डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गनाइनेशन (डीआरडीओ) के अधिकारी प्रदीप कुरुलकर को गिरफ्तार कर लिया है। प्रदीप कुरुलकर पर आरोप है कि उन्होंने हनीट्रैप में फंसकर भारतीय सुरक्षा से संबंधित जानकारी पाकिस्तानी महिला को दी है। इस मामले की गहन छानबीन एटीएस की टीम कर रही है।

    जानकारी के अनुसार, प्रदीप कुरुलकर पाकिस्तान इंटेलिजेंस ऑपरेटिव्स (पीआईओ) के एक महिला के संपर्क में थे। सोशल मीडिया पर महिलाओं की तस्वीरों से पाकिस्तान के एजेंट ने उसे फंसाया। वह पिछले साल सितंबर-अक्टूबर से पाकिस्तानी एजेंट के कांटेक्ट में था।उन्होंने पुणे स्थित कार्यालय से सोशल मीडिया और वाट्सएप के माध्यम से वॉयस मैसेज और वीडियो कॉल के माध्यम से पाकिस्तानी जासूस के साथ सूचनाओं का आदान-प्रदान किया था। साथ ही कुरुलकर ने अपने पद का गलत इस्तेमाल करते हुए संवेदनशील सरकारी सूचनाएं पाकिस्तान को मुहैया कराईं थी। इस मामले में उन्हें एटीएस ने गिरफ्तार किया है।

    पुलिस का कहना है कि यह हनीट्रैप का मामला प्रतीत हो रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर महिलाओं की फोटो का इस्तेमाल कर उन्हें फंसाया गया। प्रदीप कुरुलकर के रिटायरमेंट के छह महीने बचे थे।

    सोशल मीडिया पर महिलाओं की तस्वीरों से पाकिस्तान के एजेंट ने उसे फंसाया। वह पिछले साल सितंबर-अक्टूबर से पाकिस्तानी एजेंट के कांटेक्ट में था।

  • कौन से शहर के लोग हैं सबसे ज्यादा भुलक्कड़? ऐसे भी जो  कैब में भूल जाते हैं टीवी से लेकर कमोड तक ?

    कौन से शहर के लोग हैं सबसे ज्यादा भुलक्कड़? ऐसे भी जो कैब में भूल जाते हैं टीवी से लेकर कमोड तक ?

    नई दिल्ली // पिछ्ले दिनों ऊबर ने अपने लोस्ट एण्ड फाउन्ड इन्डैक्स के 2023 संस्करण को जारी किया है, जो सबसे ज़्यादा भूले जाने वाले आइटमों, सबसे ज़्यादा भूलने वाले शहरों और सप्ताह के उन दिनों एवं साल के उस समय के बारे में रोचक जानकारी देता है।

    क्या आप जानते है कि देश में किस शहर के लोग सबसे ज्यादा भुलक्कड़ हैं। कैब प्रोवाइडर ऊबर की लॉस्ट एण्ड फाउन्ड इन्डैक्स 2023 रिपोर्ट इस बारे में रोचक जानकारी देती है । इस रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के लोग सबसे ज्यादा भुलक्कड़ है, वह सूची में पहले नम्बर पर है,जबकि मुंबई दूसरे नम्बर पर, हैदराबाद तीसरे और बेंगलुरु चौथे स्थान पर है। यह रिपोर्ट ऊबर के कैब में सामान भूलने के आधार पर तैयार की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल के दौरान देश भर में ऐसे मामले सबसे ज़्यादा पाए गए जब ऊबर में बैठने वाले लोग अपने फोन, बैग, वॉलेट और कपड़ों जैसे आइटम कैब में ही भूल गए, इसके अलावा उपयोगी सामान जैसे पानी की बोतल, चाबी और एक्सेसरीज़ जैसे चश्मा, ज्वैलरी आदि भूलने के मामले भी अधिक संख्या में पाए गए।  लोग अजीब-अजीब चीज़ें कैब में ही छोड़ कर चले गए जैसे झाड़ू, कॉलेज का एडमिट कार्ड या अपने बच्चे का स्ट्रोलर। एक राइडर तो अपनी छड़ी भूल कर चला गया, वहीं एक और राइडर अपना बड़ी स्क्रीन वाला टेलीविजन ही कैब में छोड़ गया।

    शानिवार को लोग सबसे ज्यादा भूले सामान
    इतना ही नहीं यह रिपोर्ट भूलने वाले दिन, समय और रंग के बारे में भी रोचक जानकारी देती है जैसे यह  बताती है कि  लोग सबसे ज़्यादा शनिवार के दिन अपनी चीज़ें कैब में भूलते हैं। इसके बाद रविवार और शुक्रवार का नंबर आता है। मार्च और अप्रैल में लोग ज्यादा भूलते हैं।
      फोन की बात करें तो ऊबर में आईफोन की तुलना में 3 गुना एंड्रोइड फोन भूले गए।   लोगों ने ऊबर में सबसे ज़्यादा रैड कलर के आइटम छोड़े।  शाम के समय तकरीबन 7 बजे के आस-पास लोग सबसे ज़्यादा चीज़ें भूलकर चले गए।

    10 सबसे अजीब चीज़ें जिन्हें राइडर ऊबर में ही भूल कर चले गए
    इस सूची में    टीवी ,वेस्टर्न कमोड,   3 पैकेट दूध और पर्दे,  झाडू ,कॉलेज का एडमिट कार्ड ,छड़ी, इंडक्शन स्टोव, फैमिली कोलाज,हैवी मशीनरी, प्रिंटेड ‘दुपट्टा (स्कार्फ)

    10 सबसे ज़्यादा भूले जाने वाले आइटमों में     फोन, लैपटॉप बैग.वॉलेट,कपड़े,हैडफोन,पानी की बोतल, चश्मा/ सनग्लासेज़, चाबी, ज्वैलरी,घड़ी

    5 रंग के आइटम जो सबसे ज़्यादा भूले जाते हैं    लाल,  नीला, पीला, रोज़, गुलाबी

    उबर के डायरेक्टर (सेंट्रल ऑपरेशंस) नितीश भूषण ने बताया कि इस सालाना सर्वेक्षण के परिणाम बेहद दिलचस्प हैं, जो बताते हैं कि लोग किस तरह का सामान कैब्स में भूलकर चले जाते हैं और कैसे ऐप में ही दिए गए विकल्पों की मदद से उन्हें अपना यह सामान सुरक्षित वापस भी मिल सकता है। उन्होंने कहा कि गर्मियों का सीजन सबसे व्यस्त ट्रैवल सीजन माना जाता है, ऐसे में यह इस रिपोर्ट को जारी करने और इसके माध्यम से लोगों को अलर्ट और अवेयर करने का सबसे अच्छा समय है।