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  • पर्यवेक्षक के दौरे के बीच नर्मदापुरम से ब्राह्मण उम्मीदवार उतारने की चर्चा ?

    पर्यवेक्षक के दौरे के बीच नर्मदापुरम से ब्राह्मण उम्मीदवार उतारने की चर्चा ?

    नर्मदा पुरम/ इटारसी//  जिले की दो विधानसभा नर्मदापुरम( होशंगाबाद ) और पिपरिया के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस के पर्यवेक्षक के रूप में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा शुक्रवार को नर्मदापुरम आ रहे हैं जो शाम के समय कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर भावी प्रत्याशियों के लिए उनकी पसंद को जानेंगे।

    केंद्रीय पर्यवेक्षक के आने से टिकट के दावेदारों में सरगर्मियां हैं। वे वरिष्ठ नेताओं से मिल कर या फ़ोन कर अपना नाम पर्यवेक्षक के सामने प्रस्तावित  करने की गुजारिश करते नज़र आए हैं।

    वैसे कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि जैसे आप पूर्व का इतिहास रहा है पर्यवेक्षकों का आना महज़ औपचारिकता ही रहती आई है, टिकट तो अंतिम समय पर जिले के माई बाप नेताओं के की मर्जी से ही तय होती है और इस बार भी तस्वीर कोई अलग होगी ऐसा नहीं लगता।

    दो दर्जन दावेदार?

     जैसी कि कांग्रेस की परंपरा रही है लगातार दो दशकों से ज्यादा समय तक भाजपा की इस अजेय सीट पर कांग्रेस के पास भले ही कार्यकर्ता न हों टिकट के  दावेदारों की कमी नहीं रहती है ।

    अभी भी कहां जा रहा है कि लगभग दो दर्जन दावेदार अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं। इस बार भी जो नाम चर्चा में हैं उनमें पूर्व जिला पंचायत सदस्य चंद्र गोपाल मलैया, कांग्रेस के जिला कार्यकारी जिलाध्यक्ष शिवराज चंद्रोल, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष मीना वर्मा, पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष सतेंद्र फौजदार, कपिल फौजदार,पूर्व युवक कांग्रेस जिला अध्यक्ष प्रेम सिंह सोलंकी, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य शिवाकांत पांडे (गुड्डन), प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारी महेंद्र शर्मा, प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष मानक अग्रवाल , प्रदेश एन एस यू आई अध्यक्ष आशुतोष चौकसे ,रश्मि दीक्षित, नीरजा फौजदार, राजकुमार उपाध्याय केलू, राममोहन मलैया ,मोहन झलिया, नर्मदा पुरम नगर कांग्रेस अध्यक्ष धर्मेंद्र तिवारी , इटारसी के पूर्व नगर अध्यक्ष पंकज राठौर,अजय सैनी, सेवा दल यंग ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष गजानन तिवारी (गज्जू तिवारी) शामिल हैं । इनके आलावा भी कुछ नामों की चर्चा बनी हुई है, और यदि अखबारों की खबरों पर भरोसा किया जाए तो यह नाम कांग्रेसी विचारधारा होने के कारण कथित सर्वे टीम के माध्यम से आलाकमान तक पहुंचे हैं उसमें पूर्व विधायक अंबिका शुक्ला के बेटे हेमंत शुक्ला वरिष्ठ कांग्रेसी नेता रहे स्वर्गीय समीरमल के पुत्र संजय गोठी और सर्व ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष जितेंद्र ओझा का नाम शामिल है। एक नाम को एक समाचार पत्र में प्रकाशित किया है वह सविता दीवान का, पर बताया जा रहा है कि उनकी दावेदारी सोहागपुर से है।

    एक रोचक बात यह भी कही जा रही है कि कांग्रेस के इन दावेदारों में से कुछ दावेदार ऐसे हैं वह तभी चुनाव लड़ेंगे जब भाजपा के वर्तमान विधायक चुनाव में चुनाव मैदान में नहीं होंगे, इसलिए उनकी दावेदारी तो है पर आधे अधूरे मन से, वे असमंजस में है की टिकट मांगे या न मांगे?

    एक डर ऐसा भी ?

    पिछले दिनों दिग्विजय सिंह के सामने कांग्रेस पार्टी कार्यकर्ताओं ने एक स्वर से भाजपा के आए व्यक्ति को टिकट न दिए जाने की मांग की थी, ऐसा माना जा रहा है कि नेताओं और कार्यकर्त्ताओं के रूख को देखकर फिलहाल इस तरह की चर्चाओं पर विराम सा लग गया है, पर कुछ नेता  अभी भी इस पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं उन्हें लगता है कि प्रदेश आलाकमान अंतिम समय पर भाजपा से आने वाले किसी व्यक्ति को टिकट दे सकता है।

    ब्राह्मण होगा उम्मीदवार?

    एक चर्चा क्षेत्र के राजनीतिक गली गलियारों में यह भी है कि जिले की 4 सीटों में से एक पर कांग्रेस किसी ब्राह्मण उम्मीदवार को उतारना चाहती है और फिलहाल वोटों के गणित के हिसाब से इसके लिए नर्मदापुरम सीट को ज्यादा मुफीद माना जा रहा है। क्योंकि क्षेत्र में कुर्मी और ब्राह्मण मतदाताओं की खासी संख्या रही है और ब्राह्मण उम्मीदवार यहां से जीते भी रहे हैं । पार्टी के सूत्र बताते हैं कि जिले की कांग्रेस की राजनीति के जिम्मेदार नेता सुरेश पचौरी भी यही चाहते हैं और क्षेत्र का टिकट उनकी सहमति से ही तय होगा । पर ब्राह्मण दावेदारों में से उनका पसंदीदा कौन है या होगा इसको लेकर सस्पेंस है! वैसे आधा दर्जन से ज्यादा ब्राह्मण उम्मीदवार इस क्षेत्र से टिकट के दावेदार हैं .

    मलैया की सक्रियता चर्चा में!

    पर वही कुर्मी समाज से आने वाले कांग्रेस के नेता चंद्र गोपाल मलैया सक्रिय हो गए हैं। बताया जाता है कि उन्हें प्रदेश नेतृत्व ने फील्ड पर काम करने का इशारा दे दिया है। क्षेत्र में कुर्मी मतदाताओं की खासी संख्या है और यह माना जाता है कि यदि में लामबंद हो जाए तो विधायक उनका हो सकता है पर क्षेत्र में अभी तक ऐसा नहीं हो सका है।  पिछले कई सालों से इस समाज को भाजपा समर्थक माना जाता रहा है पर अब कहा जा रहा है कि कुर्मियों में इस बात की मांग उठने लगी है कि विधायक हमारे समाज का होना चाहिए और इस बार वे दोनों ही दलों से कुर्मी समाज के किसी व्यक्ति को टिकट देने की मांग करेंगे।

  • भाजपा कांग्रेस – किसके लिए सत्ता की चाबी साबित होगा महाकौशल ?

    भाजपा कांग्रेस – किसके लिए सत्ता की चाबी साबित होगा महाकौशल ?

    भोपाल /जबलपुर // चुनावी तैयारियों में जुटी प्रदेश की दोनों प्रमुख राजनीतिक पार्टियों का फोकस इस बार महाकौशल क्षेत्र पर है । इन दलों के नेता तो इस क्षेत्र को सत्ता की चाबी तक बता रहे हैं । सत्ताधारी भाजपा बुंदेलखंड, चंबल इलाके में मचे घमासान और मालवा निमाड़ सहित अन्य क्षेत्रों के असंतोष की भरपाई महाकौशल से करना चाहती है।
    पिछले चुनाव में कांग्रेस का महाकौशल में प्रदर्शन काफी अच्छा रहा था । वह न सिर्फ इसे दोहराना चाहती है, बल्कि इसमें इजाफा करने का इरादा भी रखती है।  इन कारणों के चलते महाकौशल क्षेत्र आगामी कुछ दिनों तक राजनीतिक आयोजनों की सरगर्मियां का केंद्र नजर आने वाला है।
    दिग्गजों का जमावड़ा
    आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर महत्वपूर्ण हुए महाकौशल क्षेत्र में अगले 3 हफ्ते सरगर्मी भरे हो सकते हैं। दोनों ही दल अपने-अपने दिग्गजों और महत्वपूर्ण नेताओं के कार्यक्रम क्षेत्र में आयोजित करवाने जा रही है । 10 जून को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जबलपुर में लाडली बहना योजना की पात्र हितग्राही बहनों के खाते में ₹1000 की रकम ट्रांसफर करेंगे। वही 2 दिन बाद यानी 12 जून को प्रियंका गांधी महाकौशल के केंद्र नगर जबलपुर से विधानसभा चुनाव अभियान का आगाज करने वाली है । नर्मदा पूजन के साथ-साथ रोड शो और रैली का भी को भी संबोधित करेंगी। कांग्रेस इस आयोजन की तैयारी में जुट गई है। बताया जाता है कि प्रियंका की रैली में एक लाख लोगों को जुटाने की कवायद इस क्षेत्र के नेता कर रहे हैं ।
    योग दिवस पर प्रधानमंत्री उपराष्ट्रपति?
    प्रदेश का आयुष विभाग 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस बड़े पैमाने पर आयोजित करने जा रहा है। खबर है कि विभाग इस आयोजन के लिए उपराष्ट्रपति जगदीप धनकर को आमंत्रित कर रहा है ,वैसे दो-तीन दिन पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में यह खबर भी थी कि इस आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिरकत कर सकते हैं।
    महाकौशल क्यों बना जरूरी?
    2018 के चुनाव में कांग्रेस ने महाकौशल में बढ़िया प्रदर्शन किया था।महाकौशल की 38 में से 24 सीटें कांग्रेस के खाते में गईं थीं । बीजेपी को महाकौशल इलाके से निराशा हाथ लगी थी. बीजेपी को 13 सीटों से ही संतोष करना पड़ा । 1 सीट निर्दलीय के खाते में गई थी,और इसकी बड़ी वजह आदिवासियों की नाराजगी मानी गईं थी । 2018 में कांग्रेस ने कमलनाथ को सीएम का चेहरा बनाकर चुनाव लड़ा था. इससे उनके गृह जिले छिंदवाड़ा की सभी 7 सीट कांग्रेस ने जीत ली थीं. वहीं जबलपुर में कांग्रेस को 8 में से 4 सीटें मिली थीं. ।
    अब बड़ा सवाल है कि क्या 2023 के चुनाव में भी कांग्रेस ऐसा ही प्रदर्शन कर पाएगी या बीजेपी को बड़ी सफलता मिलेगी? वैसे फ़िलहाल कांग्रेस ने महाकौशल से आने वाले कमलनाथ को ही अपना सीएम चेहरा बनाया है इसके चलते  भी अगले चुनाव में यहां से कांग्रेस को बेहतर नतीजों की उम्मीद है।
    कांग्रेस को लगता है कि पिछ्ले चुनाव में खासी बढ़त बनाने वाले महाकौशल क्षेत्र से चुनावी आभियान का आगाज़ कर वह ज्यादा फायदा उठा सकती है, क्योंकि बुंदेलखंड और बघेल खंड की सीमाएं इस क्षेत्र को छूती हैं, यहां का माहौल इन क्षेत्रो को भी प्रभावित करेगा। वहीं मध्य भारत के नर्मदापुरम, बैतूल और हरदा जिले जो कि कभी महाकोशल का हिस्सा थे, सांस्कृतिक और राजनीतिक रुप से उसके जैसे ही है, जैसे नर्मदापुरम जिला  महाकौशल के नरसिंहपुर क्षेत्र से लोकसभा सीट को साझा करता है, प्रभावित किया जा सकता है।
    वहीं भाजपा की बात करें तो दूसरे अंचलों में जिस तरह भीतरी खींचतान है, उतनी इस अंचल में नजर नहीं आती है, इसलिए भाजपा यहां अपने को कुछ हद तक कंफर्टेबल मान रही है। उसे पिछ्ले कुछ सालों में अपने आदिवासियों के लिए किए कामों का भी भरोसा है। भाजपा दूसरे क्षेत्रो के नुकसान की भारपाई भी यहां से करने के मूड में है।
    महाकौशल क्षेत्र?
    राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण महाकौशल इलाके में जबलपुर, छिंदवाड़ा, कटनी, सिवनी, नरसिंहपुर, मंडला, डिंडोरी और बालाघाट जिले है  शामिल है

  • प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं के दम पर चुनाव रण में उतरेगी भाजपा? कमल मित्र के जरिए आधी आबादी तक पहुंचने की कवायद

    प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं के दम पर चुनाव रण में उतरेगी भाजपा? कमल मित्र के जरिए आधी आबादी तक पहुंचने की कवायद

    नई दिल्ली// भाजपा सिर्फ पांच राज्यों के चुनाव की तैयारी ही नहीं कर रही है, उसने 2024 के लोकसभा चुनाव की भी जोरदार तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी ने नेताओं को अगले 8 महीने तक जमीन पर काम करने की हिदायत दी है।

     गांव गांव तक पहुंचने के लिए भाजपा का जनसंपर्क अभियान शुरू हो गया है जो 30 मई से 30 जून तक चलाया जाएगा।

     जमीनी तैयारी के रूप में चुनाव के लिए प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं को मैदान में उतारने की तैयारी है। बताया जाता है कि इन प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं की मदद से पार्टी गांव गांव अपनी रणनीतियों को मूर्त रूप देगी। यह कार्यकर्ता हर संसदीय क्षेत्र में तैनात किए जाएंगे और इनकी भूमिकाएं तय होंगी।

     तैयारी में जुटी राष्ट्रीय टीम ने सभी प्रदेश इकाइयों को प्रशिक्षण के लिए सक्रिय कार्यकर्ताओं की सूची बनाने का निर्देश दिए हैं । इन सक्रिय कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने के लिए बाकायदा कैंप लगाए जाएंगे। राष्ट्रीय पदाधिकारी इन कार्यकर्ताओं को सिखाएंगे कि मोदी सरकार की नीतियों को घर-घर पहुंचा कर कैसे वोट मांगा जाए।  यह कार्यकर्ता भाजपा सरकार की सभी योजनाओं की जानकारी और आंकड़ों से लैस होंगे।

      कमल मित्र के जरिए आधी आबादी के बीच जाने की कवायद

     वहीं दूसरी ओर भाजपा महिला मोर्चा पूरे देश में एक लाख का महिला कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने जा रही है। इस अभियान को कमल मित्र नाम दिया गया है न्यू 18 के मुताबिक बीजेपी महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष वानाती श्रीनिवासने ने बताया कि इस अभियान के लिए हर लोकसभा सीट से 200 महिला कार्यकर्ताओं को डिजिटली प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद एक टेस्ट होगा। टेस्ट पास करने के बाद ही कार्यकर्त्ता महिला को कमल मित्र सर्टिफिकेट पार्टी की तरफ से दिया जाएगा । इस अभियान के तहत मोदी सरकार की 15 प्रमुख योजनाएं जिसमें पीएम आवास ,सुकन्या समृद्धि योजना, उज्जवला योजना, मातृत्व वंदना योजना जैसी योजनाएं शामिल है को इन कार्यकर्ताओं के जरिए महिलाओं तक पहुंचाया जाएगा।  यह कार्यकर्ता पूरे देश में महिला लाभार्थियों को इन योजनाओं की जानकारी देकर योजनाओं का फायदा दिलायेंगीं।

  • जब हम आसमान में तारे देखने को तरस जाएंगे,वैज्ञानिकों ने की चौंकाने वाली भविष्यवाणी

    जब हम आसमान में तारे देखने को तरस जाएंगे,वैज्ञानिकों ने की चौंकाने वाली भविष्यवाणी

    रात को टिमटिमाते तारे हर किसी को देखना पसंद है लेकिन वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि अब वो दिन दूर नहीं जब ये तारे हमें दिखाई नहीं देखेंगे. 

    नई दिल्ली// आसमान में तारों को टिमटिमाते हम सभी बचपन से ही देखते आ रहे हैं. इन्हें रात को  निहारने का अपना अलग मजा होता है, लेकिन हो सकता है कि अब आने वाले सालों में टिमटिमाते तारे हमें दिखने बंद हो जाएं और इसके जिम्मेदार है हम इंसान और हमारे द्वारा बढ़ाया जा रहा प्रदूषण ..जी हां,!  वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि स्काईग्लो या दूसरे शब्दों में कहें तो प्रकाश प्रदूषण के  कारण मनुष्य की रात के आकाश में तारों को देखने की क्षमता केवल 20 वर्षों में समाप्त हो सकती है.
    द गार्जियन के मुताबिक को ब्रिटिश खगोलशास्त्री मार्टिन रीस ने का कहना है कि कि रात को आसमान हमारे पर्यावरण का हिस्सा होता है और अगर अगली पीढ़ी इसे हमारे कारण कभी नहीं देख पाए तो यह एक बड़ी त्रासदी होगी.

    रीस बताया किआकाश का रंग धुंधला हो रहा है, आसान शब्दो में कहें तो अब आकाश का रंग काला नहीं हल्का ग्रे दिखता है। और कुछ ही तारे दिखते हैं।  पॉल्यूशन का  ग्राफ 2016 के बाद तेजी बढ़ा है. हर साल नाइट स्काई  ब्राइटनेस 10 प्रतिशत  बढ़ रही है हैरानी की बात तो ये हैं कि अभी ही  आकाश गंगा (Milky Way) को लगभग एक तिहाई आबादी नहीं देख पा रही है। इसका एक कारण हमारे द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाला LED भी है.

    लाइट पॉल्यूशन, आर्टिफिशियल लाइट, मोबाइल,लैपटॉप, जैसे गेजेट्स, शो रूम्स के बाहर लगी चमकती लाईट, कार की हैडलाइट, होर्डिंग्स की तेज रोशनी के कारण होता है।
    पूरी बात को आसान शब्दों में समझाते हुए जर्मन सेंटर फॉर जियोसाइंसस के क्रिस्टोफर कबा ने इस मुद्दे पर कहा कि अगर एक बच्चा जो एक ऐसे स्थान पर पैदा हुआ है जहां रात को आसमान में 250 सितारे दिखाई देते हैं तो वहीं अब वह जब 18 साल का साल का हो जाएगा तो उसे केवल 100 तारे दिखेंगे और जैसे-जैसे उम्र बढ़ेगी ये संख्या कम होती जाएगी.।

    लाईट की चमक से पर्यावरण को भी नुकसान

    लाइट पॉल्यूशन से सिर्फ तारों का दिखना निबंध नहीं है हो रहा है बल्कि इस पोलूशन से पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र को भी नुकसान पहुंच रहा है शंघाई के रुईजीन अस्पताल के डॉक्टर यूजू कहते हैं कि अमेरिका और यूरोप के 99% लोग लाइट प्रदूषण वाले आसमान के नीचे रहते हैं । धरती का 24 घंटे का दिन रात की एक घड़ी होती, जो सूरज की रोशनी और अंधकार से तय होती है। यह इस ग्रह पर रहने वाले हर जीव पर लागू होती है लेकिन इंसानों ने इसमें छेड़छाड़ कर दी है लाइट पोलूशन की वजह से कीड़े मकोड़े परिंदों और जानवरों का जीवन चक्र बदल गया है इससे समय से पहले ही इनकी मौत हो रही है और इससे दुनिया भर में जैव विविधता का बहुत ज्यादा नुकसान हो रहा है।

  • दुनिया में “दोस्ती में मंदी” की चर्चा – कौन चिंतित है इस मंदी से ?

    दुनिया में “दोस्ती में मंदी” की चर्चा – कौन चिंतित है इस मंदी से ?

    अभी तक आपने आर्थिक मंदी के बारे में सुना होगा , लेकिन बदलते सामाजिक परिवेश में दोस्ती की मंदी की बातें की जा रहीं हैं. इस को लेकर फोर्ब्स के अरबपतियों की लिस्ट में जगह बनाने वाले जीरोधा के को-फाउंडर निखिल कामथ का एक ट्वीट इन दिनों काफी चर्चा में है जिसमें उन्होंने दुनिया में फ्रेंडशिप रिसेशन यानी दोस्ती की मंदी को लेकर चिंता जताई है।  इस अरबपति एन्त्ररोप्रन्युँर ने लोगों से दोस्ती की अहमियत को याद दिलाई है । 

    उन्होंने दोस्ती से जुड़ा एक दिलचस्प रिसर्च भी अपने टि्वटर अकाउंट से शेयर किया है। इस रिसर्च को अमेरिकन पर्सपेक्टिव के रिचर्ड रिब्स ने तैयार किया है. इस रिसर्च सर्वे में कहा गया है कि पूरी दुनिया इस समय फ्रेंडशिप रिसेप्शन या ने दोस्तों की कमी की समस्या से जूझ रही है  । जिसके चलते लोगों के पास करीबी दोस्तों की संख्या कम हो गई है।  निखिल कामथ ने कहा है कि यह एक बड़ा संकट है क्योंकि अकेलापन 1 दिन में 15 सिगरेट पीने के बराबर है।

     जोधा के कोफाउंडर ने  रिसर्च की मुख्य बातें शेयर करते हुए कहा कि दोस्ती जीवन को बदलने वाला रिश्ता  होता है । दार्शनिक तौर पर  एक समुदाय का होना खुशहाली का सबसे बड़ा संकेत माना जाता है। मेरे जीवन में 5 भाई हैं जिनके लिए मैं सब कुछ कर लूंगा ,मैं इसे लेकर गंभीर हूं। 

     निखिल कामथ ने मानवीय संबंधों और उसके महत्व पर भी शेयर किया है इसमें इस बात पर प्रकाश डाला है कि दोस्ती लोगों के जीवन के लिए काफी अहम है रिपोर्ट में कहा गया है कि इस समय बच्चों पर मां बाप का  अधिक फोकस, लगातार शहर बदलने ,ऑफिस पर अधिक फोकस वॉल कर चलो ब्रेकअप के चलते पूरे समूह के साथ अलग होने की समस्याओं के चलते आजकल लोगों के दोस्त कम हो रहे हैं।

    ग्रीक दार्शनिक अरस्तु ने कहा था  मनुष्य सामजिक प्राणी है और दोस्ती सबसे आदर्श रिश्ता. सामाजिकता दोस्ती का महत्वपूर्ण आधार है मनुष्य के कल्याण के लिए मित्रता महत्वपूर्ण होती है । हालाँकि, पिछले कुछ वर्षों में कई कारणों और दबावों ने दोस्ती के बनाने ओए उसे बनाये रखने में मुश्किल होती जा रही है । दोस्ती के महत्व को पहचानते हुए, ज़ेरोधा के सह-संस्थापक निखिल कामथ ने पिछले दिनों लेखक रिचर्ड रीव्स के इस विषय पर एक दिलचस्प दर्शन को साझा किया।

    अमेरिकन पर्सपेक्टिव द्वारा 2021 के एक सर्वेक्षण के अनुसार, दुनिया “दोस्ती की मंदी” देख रही है क्योंकि ऐसे लोगों में वृद्धि हुई है जिनके करीबी दोस्तों की कमी है। और यह भविष्य में एक गंभीर संकट बन सकता है क्योंकि अकेलापन एक दिन में 15 सिगरेट पीने के बराबर है।

    दोस्ती में मंदी के कारण

    अमेरिकन पर्सपेक्टिव सर्वे ने चार ऐसे कारणों की ओर इशारा किया जो “मित्रता में गिरावट” का कारण बन रही  हैं – भौगोलिक गतिशीलता (geographic mobility), बच्चे के पालन-पोषण पर माता-पिता का बढ़ता ध्यान(increased parental focus on child rearing )कार्य-केंद्रित संस्कृति (work centric culture ) और रिश्तों का टूटना ( breakdown of relationship ) दोस्ती और दोस्तों समूहों के में कमी ला रहा है.

    अवसरों और नौकरी के संपर्कों की कमी, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव, और उदासी और अकेलेपन की भावनाओं को कम दोस्त होने के कुछ नकारात्मक पहलू के रूप में जाना जाता है ।

    सर्वेक्षण में बताया गया है कि 15% पुरुषों ने एक करीबी दोस्त की कमी को स्वीकार है । जबकि 1990 के दशक में केवल 3% पुरुष ही इसी तरह भावना का अनुभव करते थे .इसके अलावा, कोविड महामारी के दौरान आधी से अधिक महिलाओं का अपने दोस्तों से संपर्क टूट गया ।

    ‘दोस्ती में मंदी’ पर चेतावनी देते हुए, सर्वेक्षण में कहा गया है कि यदि प्रवृत्ति जारी रहती है तो व्यक्ति अधिक अकेला और खराब दृष्टिकोण (atomized indivisual and a dystopian outlook) वाला हो सकता है। हमारे जीवन में मित्रों की संख्या कम होने से “दुख और अस्वस्थता” भी बढ़ेगी ।

    दोस्ती को हमेशा के लिए कैसे बनाए रखें?

    लेखक रीव्स ने अकेलेपन और दोस्ती की मंदी को दूर करने के लिए तीन उपाय साझा किए हैं।

    -“दोस्ती को बनाये रखने के लिए सक्रियता से काम करने के महत्व को पहचानें।

    -मित्रता के लिए हमेशा प्रयास की आवश्यकता होती है, लेकिन पुरस्कार इसके लायक होते हैं।

    -दोस्त और दोस्ती के प्रति सवेदनशील  रहें और एक दोस्त की जरूरत के लिए खुले और तैयार  रहें। और इस बात को स्वीकार करने में संकोच करना छोड़ दें कि जैसे-जैसे आप बड़े होते हैं दोस्ती की आपकी इच्छा और जरूरत बढती जाती है .

    निखिल कामथ ने ट्विटर पर रीव्स के द फ्रेंडशिप मंदी दर्शन को साझा किया और लिखा, “मेरे जीवन में 5 भाई हैं, मैं जीवन बदलने के लिए सब कुछ करूंगा, गंभीरता से”।

    कितने दोस्त आदर्श होते हैं?

    लेखक रीव्स ने उल्लेख किया है कि पूरे इतिहास में, लगभग 12-15 मित्रों के एक जनजातीय आकार( tribal size) को उचित माना गया है। हालाँकि, लगभग 3-4 करीबी दोस्त होना अक्सर “अर्थपूर्ण सम्बन्ध ” के लिए आदर्श होता है।

    निखिल कामथ के टिविट्स का हिंदी रूपांतर –

    जितना अधिक #दर्शन आप पढ़ते हैं (स्थिर नहीं), एक समुदाय का होना #खुशी का सबसे बड़ा अग्रदूत लगता है (जितना क्षणभंगुर हो सकता है)।

    मेरे जीवन में मेरे 5 भाई हैं जिनके लिए मैं सब कुछ करूंगा, यह जीवन बदलने वाला है, गंभीरता से ♥️ pic.twitter.com/jMxVDKs031

    – निखिल कामथ (@nikhilkamathcio) 26 मई, 2023

  • पांच राज्यों के लिए नए सिरे से चुनावी रणनीति बनाने में जुटी भाजपा ?

    पांच राज्यों के लिए नए सिरे से चुनावी रणनीति बनाने में जुटी भाजपा ?

    नई दिल्ली // कर्नाटक चुनाव मिली हार के बाद भाजपा इस साल होने वाले पांच राज्यों के चुनाव को लेकर नए सिरे से रणनीति बनाएगी सूत्रों के मुताबिक 28 मई के बाद भाजपा महासचिव इस मुद्दे पर विचार करने के लिए बैठेंगे पार्टी नेताओं का मानना है कि मध्य प्रदेश राजस्थान, छत्तीसगढ़ में मुकाबला आसान नहीं है । पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि किसी भी राज्य का चुनाव आसान नहीं होता है, भाजपा ना सिर्फ जीतने के लिए बल्कि अपना वोट शेयर और जनाधार बढ़ाने के लिए भी चुनाव लड़ती है। 

    इन तीनों राज्यों में राजस्थान में भाजपा खुद को सबसे मजबूत मानती है बावजूद इसके पार्टी यहां अपनी कमियों को दूर करने के लिए अभी से तैयारी कर रही है।  मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को लेकर पार्टी अभी तक जिस रणनीति के साथ आगे बढ़ रही थी वर्तमान परिस्थितियों और पार्टी की भीतरी खींचतान को देखते हुए इसमें कुछ बदलाव हो सकते हैं । पार्टी अपनी रणनीति में क्या बदलाव करने जा रही है ? इसके ज़बाब में पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि इन राज्यों में मिले फीडबैक से जो खामियां सामने दिख रही हैं उसे दूर करने के लिए रणनीति में बदलाव होगा। मसलन किस राज्य में सीएम प्रत्याशी घोषित करना है इसमें नहीं।  कहां के लिए किन किन मुद्दों को प्राथमिकता से उठाना है। जैसी बातें में बदलाव किए जा सकते हैं।

    ब्रांड मोदी पर ही होगा जोर

    चुनावी राज्यों में वैसे तो भाजपा अपने  हिन्दुत्व जैसे परंपरागत मुद्दों को लेकर ही आगे बढ़ने की बात कर रही है पर 2024 की तैयारी को इसमें जोड़ते हुए पार्टी मोदी सरकार के 9 साल के कार्यकाल को का रिपोर्ट कार्ड लेकर गांव गांव पहुंचने की योजना बना रही है। इसके लिए पाई पाई जनहित में खर्च का स्लोगन रखा गया है भाजपा नेताओं का कहना है की पार्टी कार्यकर्ता इन योजनाओं को लेकर देश के गांव-गांव तक पहुंचेंगे और लोगों को यह बताएंगे कि किस तरह मोदी के 9 साल के कार्यकाल में भारत ने बुलंदियां हासिल की है 30 मई से 30 जून तक यह कार्यक्रम देशभर में चलेगा।

  • बदल रही हैं पक्षियों की फूड हेबिट्स ?

    बदल रही हैं पक्षियों की फूड हेबिट्स ?

    लंदन// इंसानों के खाने से पक्षियों की भी खाने की आदतें बदल रही है, दरअसल परिंदे भी इंसानों को खाते हुए देखकर आकर्षित होते हैं और उस तरह की चीजें खाने लगते हैं जिन्हें वे इंसानों को खाते देखते हैं। ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ सक्सेस में हुए एक शोध के मुताबिक पक्षी इंसानों को खाते हुए बहुत बारीकी से देखते हैं। जिस चीज में इंसान कुछ खाते हैं पक्षी उस बर्तन या रैपर से भी आकर्षित होते हैं।

    वैज्ञानिकों ने ब्राइटन बीच पर सीगल पक्षी के साथ यह प्रयोग किया। इसमें वैज्ञानिकों ने स्नेक्स के जिस पैकेट से कुछ खाया और पक्षियों ने कुछ दूरी से उन्हें खाते हुए देखा, उसकी तरफ आकर्षित हुए । ऐसे ही जब इनके समूह में किसी खाने के पैकेट को रखा गया तो 5 में से सिर्फ एक चिड़िया उस तक पहुंची लेकिन जब वैज्ञानिकों को उन्होंने उस पैकेट से खाते हुए देखा तो आधी चिड़िया करीब 48 फीसदी उस पैकेट से खाने के लिए पहुंच गई और बाद में भी उस तरह के पैकेट किया खाने से आकर्षित हुई।

     यूनिवर्सिटी ऑफ सक्सेस के जैव वैज्ञानिक फ्रेजिस्का  फीस्ट कहती हैं – परिंदे इंसानों के व्यवहार का अवलोकन बहुत ध्यान से करते हैं और उसे अपनाने लगते हैं । यही वजह है कि चिड़ियों का भी शहरीकरण हो रहा है।

  • क्या है “सेंगोल” जिसे नए संसद भवन के उद्घाटन के मौके पर नेहरु की तरह थामेंगे मोदी !

    क्या है “सेंगोल” जिसे नए संसद भवन के उद्घाटन के मौके पर नेहरु की तरह थामेंगे मोदी !

    नई दिल्ली// रविवार को नए संसद भवन के उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिल पुजारियों से एक सुनहरा राजदंड यानी सैंगोल प्राप्त करेंगे ।इसकी मीडिया में खासी चर्चा है।

    सैंगोल हस्तान्तारण एक ऐतिहासिक परंपरा है इस तरह का समारोह चोल साम्राज्य के दौरान होता था जो एक राज्य से दूसरे राज्य को सत्ता हस्तांतरण को दर्शाता है

    15 अगस्त 1947 की मध्य रात्रि को नेहरू ने स्वीकार किया था सेंगोल

    आज से 75 साल पहले इसी तरह के समारोह में 15 अगस्त 1947 की मध्य रात्रि को अपने ऐतिहासिक भाषण से कुछ घंटे पहले देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने सैंगोल स्वीकार किया था जो अंग्रेजों से भारतीयों को सत्ता हस्तांतरित स्थानांतरण का प्रतीक था। आज़ाद भारत के प्रथम वायसराय श्री राजा राजगोपालाचारी ने नेहरू को वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन से सत्ता हस्तांतरण को दर्शाने के लिए चोल साम्राज्य की परंपरा के तहत सैंगोल को शामिल करने का सुझाव दिया था और नेहरू ने राजेंद्र प्रसाद और अन्य लोगों की उपस्थिति में सैंगोल स्वीकार किया था। इस घटना को टाइम मैगजीन सहित कई समाचार पत्रों में प्रकाशित किया गया था लेकिन बाद में इसे भुला दिया गया यह सैंगोल प्रयागराज के इलाहाबाद संग्रहालय में पिछले 7 दशक से रखा हुआ है।अब सेंगोल को  न्याय पूर्ण शासन के प्रतीक के तौर पर सदन के अध्यक्ष के आसन के समीप स्थापित किया जाएगा।

    क्या और कैसा हैं सेंगोल?

     सेंगोल संस्कृत शब्द “संकु” से लिया गया माना जाता है, जिसका अर्थ है “शंख”. शंख हिंदू धर्म में एक पवित्र वस्तु थी, और इसे अक्सर संप्रभुता के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया जाता था. राजदंड भारतीय सम्राट की शक्ति और अधिकार का प्रतीक था. यह सोने या चांदी से बना था, और इसे अक्सर कीमती पत्थरों से सजाया जाता था. सेंगोल राजदंड औपचारिक अवसरों पर सम्राट द्वारा ले जाया जाता था, और इसका उपयोग उनके अधिकार को दर्शाने के लिए किया जाता था. सेंगोल सत्ता के हस्तांतरण का प्रतीक भी माना जाता है. संसद भवन में जिस सेंगोल की स्थापना होगी उसके शीर्ष पर नंदी विराजमान हैं.  

    सेंगोल शब्द का तमिल में एक और अर्थ बताया जाता है जिसका अर्थ है नीति परायणता । इस चांदी से बनी सैंगोल पर सोने की परत चढ़ाई गई है और उसके शीर्ष पर न्याय के प्रतीक के तौर पर पवित्र नंदी विराजमान है सैंगोल उसी भावना का प्रतिनिधित्व करता है जिसका एहसास 14 अगस्त 1947 को जवाहरलाल नेहरू ने किया था।  

    जब माउंटबेटन ने नेहरू से सप्ताह स्थानांतरण के प्रतीक समारोह के बारे में पूछा तो राजगोपालाचारी जी से चर्चा की गई, राजगोपालाचारी ने तमिलनाडु के चंद्रपुर जिले में शैव संप्रदाय के धार्मिक मठ तिरुवदुथुराई अधीनम से संपर्क किया था। अधीनम के प्रमुख में चेन्नई के जौहरी बुम्मिडी बंगारू चेट्टी को सेंगोल( 5 फुट लंबा) तैयार करने का जिम्मा सौंपा सा था।  नए संसद भवन के उद्घाटन के अवसर पर सैंगोल बनाने वाले 96 वर्षीय बुम्मिडी एथिराजुलू और 88 वर्षीय बुम्मिडी सुधाकर शिल्पकार को भी समारोह में शामिल होंगे।

  • दुनिया में सबसे दयनीय देशों की रैंकिंग में जिम्बाब्वे नम्बर एक पर, जानिए किस स्थान पर है भारत ?

    दुनिया में सबसे दयनीय देशों की रैंकिंग में जिम्बाब्वे नम्बर एक पर, जानिए किस स्थान पर है भारत ?

    नई दिल्ली // मशहूर अर्थशास्त्री स्टीव हैंक (Steve Hanke) हर साल एक  एनुअल मिजरी इंडेक्स (Hanke’s Annual Misery Index) जारी करते हैं . अर्थशास्त्री स्टीव हैंके की रिपोर्ट का आधार आर्थिक स्थितियों के मुताबिक तय होता है। इसे तैयार करते समय देशों की बेरोजगारी, महंगाई और बैंक कर्ज की दरों और ‘रियल GDP पर कैपिटा ग्रोथ’ को शामिल किया जाता है.

    स्टीव हैंके के वार्षिक दुख सूचकांक (HAMI) के मुताबिक जिम्बाब्वे दुनिया में सबसे दयनीय देशों की सूची में नंबर एक पर है। इस रैंकिंग के लिए 157 देशों का विश्लेषण किया गया था।  वर्ष 2023 के लिए पेश की गयी इस रिपोर्ट के मुताबिक अफ्रीकी देश जिम्बाब्वे ने बदतर हालात से जूझ रहे मुल्कों की इस लिस्ट में यूक्रेन, सीरिया और सूडान जैसे युद्धग्रस्त देशों को पीछे छोड़ दिया है। इस सूचकांक के मुताबिक स्विट्जरलैंड का स्कोर सबसे कम है , जिसका अर्थ है कि वहां के नागरिक सबसे खुश हैं।

    क्या कारण हैं?

    ”बढ़ती महंगाई,  बेरोजगारी,उधार की दरों में उछाल और और बदहाल अर्थव्यवस्था ने  जिम्बाब्वे के हालात खराब कर दिए हैं। हैंके की इस रिपोर्ट  ने देश की सत्ताधारी राजनीतिक पार्टी ज़ानू-पीएफ और उसकी नीतियों को भी इन हालात के लिए जिम्मेदार बताया है।  वेनेज़ुएला, सीरिया, लेबनान, सूडान, अर्जेंटीना, यमन, यूक्रेन, क्यूबा, तुर्की, श्रीलंका, हैती, अंगोला, टोंगा और घाना सबसे दयनीय देशों की शीर्ष 15 सूची में अन्य देश हैं।

    सबसे खुश देश

    अर्थशास्त्री स्टीव हैंके की रिपोर्ट के मुताबिक स्विट्जरलैंड का स्कोर सबसे कम था, जिसका अर्थ है कि वहां के नागरिक सबसे खुश हैं। दूसरा सबसे खुशहाल मुल्क इस रिपोर्ट के मुताबिक कुवैत है उसके बाद आयरलैंड, जापान, मलेशिया, ताइवान, नाइजर, थाईलैंड, टोगो और माल्टा का नंबर है।

    भारत कौनसे नंबर पर है?

     भारत इस सूची में 103वें स्थान पर है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत बेरोजगारी से गुज़र रहा है । इस सूची में अमेरिका 134वें स्थान पर है। हैं। मुख्य तौर पर द एनुअल मिसरी इंडेक्स को जॉन हॉपकिंस विश्वविद्यालय में एप्लाइड इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर स्टीव हैंके द्वारा संकलित किया गया है।

  • शहरों के स्कूलों में सालों  से जमे शिक्षकों को भेजा जाएगा गावों में,15 जून से होंगे शिक्षा विभाग में ट्रांसफर

    भोपाल // सूबे में स्कूल शिक्षा विभाग की नई ट्रांसफर पॉलिसी के तहत ट्रांसफर का काम शुरू हो गया है इसकी महत्वपूर्ण बात यह बताई जा रही है कि शहरी स्कूलों में सालों से जमे शिक्षकों को अनिवार्य रूप से गांव में भेजा जा सकता है। स्कूली शिक्षा विभाग के तबादले की प्रक्रिया 15 मई तक पूरी होनी थी लेकिन वरिष्ठ पदों पर प्रभार देने की प्रक्रिया के चलते तबादले 15 जून के बाद ही हो सकेंगे। सरकार ने पिछले साल स्कूल शिक्षा विभाग की नई स्थानांतरण नीति को मंजूरी दी है यह व्यवस्था इस साल यानी 2023 24 से लागू होना है वैसे तो स्थानांतरण नीति के अंतर्गत शिक्षा विभाग में सभी संवर्ग ओं के लिए स्थानांतरण की प्रक्रिया 31 मार्च से 15 मई के बीच पूरी की जानी थी लेकिन वरिष्ठ पदों पर प्रभाव की प्रक्रिया में हुई देरी के चलते अब पूरी प्रक्रिया 15 जून के बाद शुरू होगी।
    ऑनलाइन होगी आवेदन की प्रक्रिया
    स्कूल शिक्षा विभाग के तबादलों के लिए आवेदन ऑनलाइन ही लिए जाएंगे उत्कृष्ट स्कूल मॉडल स्कूल और सीएम राइस स्कूलों में स्वैच्छिक स्थानांतरण नहीं होंगे साथ ही प्राचार्य सहायक संचालक गया उससे वरिष्ठ पदों के स्वैच्छिक स्थानांतरण आवेदन ऑनलाइन लिए जाएंगे लेकिन उनका निराकरण ऑफलाइन भी किया जा सकेगा रिलीविंग और जॉइनिंग की कार्यवाही ऑनलाइन होगी।
    इन्हें मिल सकती है छूट?
    ऐसी शिक्षक जिनकी सेवानिवृत्ति 3 वर्ष शेष है और गंभीर बीमारी या विकलांगता से पीड़ित है उन्हें इस प्रक्रिया से मुक्त रखा जाएगा स्थानांतरण प्रक्रिया में वरीयता क्रम निर्धारित किया गया है नई नीति के अनुसार शिक्षकों को निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की निजी पदस्थापना में पदस्थ नहीं किया जाएगा
    3 साल तक तबादला नहीं
    शिक्षा विभाग की नई स्थानांतरण नीति में एक बार स्वैच्छिक स्थानांतरण होने के बाद विशेष परिस्थितियों को छोड़कर 3 वर्ष तक स्थानांतरण नहीं किया जा सकेगा सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई शाला शिक्षक भी ना हो जाए प्रथम श्रेणी अधिकारियों के स्थानांतरण समन्वय मुख्यमंत्री के अनुमोदन से किए जाएंगे।
    नई शिक्षा नीति के अंतर्गत नए नियुक्त शिक्षकों को ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों में कम से कम 3 वर्ष तक और अपने संपूर्ण सेवाकाल में कम से कम 10 साल तक कार्य करना होगा।  10 वर्ष या इससे अधिक अवधि तक एक ही संस्था विशेषकर शहरी क्षेत्रों में पदस्थ शिक्षकों को ग्रामीण क्षेत्र की शिक्षक विहीन और शिक्षकों की कमी वाले विद्यालयों में पदस्थ किया जाएगा।
    प्रभारी मंत्रियों की भूमिका खत्म
    अभी तक शिक्षकों के तबादले में प्रभारी मंत्रियों की चलती थी, नई नीति के तहत प्रभारी मंत्रियों की इसमें कोई भूमिका नहीं रहेगी। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन ही होगी शिक्षकों की पोस्टिंग उपलब्ध सीटों के आधार पर होगी