नागदेव ने रोका रास्ता… बोले- आस्था मन में रखिए……


पचमढ़ी। दुर्गम पहाड़ी रास्ता… चारों तरफ घना जंगल… नागद्वारी गुफा और देवस्थल के दर्शन की आस में आगे बढ़ता श्रद्धालु। तभी रास्ते में सामने आता है एक विशाल नागदेव। श्रद्धालु ठिठक जाता है। नागदेव उससे सवाल करते हैं—“दर्शन करने आए हो, लेकिन क्या इस जंगल की जिम्मेदारी भी समझते हो?”
यहीं से शुरू होती है सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की वह कहानी, जो इस बार नागद्वारी मेले में श्रद्धालुओं को आस्था के साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश दे रही है।
नागद्वारी मेला शुरू हो चुका है और 17 अगस्त, नाग पंचमी तक चलेगा। करीब 10 दिन चलने वाले इस मेले को प्रशासन ने इस बार ग्रीन और प्लास्टिक मुक्त मेला बनाने की थीम रखी है। इसी अभियान को प्रभावी बनाने के लिए सतपुड़ा टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने एक रचनात्मक एनिमेटेड वीडियो जारी किया है। इसमें नागदेव स्वयं श्रद्धालुओं को जंगल की अहमियत समझाते नजर आते हैं।


“यह रास्ता सिर्फ आपका नहीं, वन्यजीवों का भी घर है”
वीडियो में श्रद्धालु नागद्वारी की कठिन यात्रा पर निकलता है। रास्ते में उसकी मुलाकात नागदेव से होती है। बातचीत में नागदेव बताते हैं कि जिस जंगल से होकर श्रद्धालु गुजर रहे हैं, वह केवल तीर्थयात्रियों का रास्ता नहीं है। यह असंख्य जीव-जंतुओं और वन्यप्राणियों का घर भी है।
श्रद्धालु जब आस्था के नाम पर जंगल में कपड़े, प्रसाद सामग्री या दूसरी चीजें छोड़ने की बात करता है, तो नागदेव उसे समझाते हैं—श्रद्धा मन में होती है, जंगल में कपड़े या प्लास्टिक छोड़ने में नहीं।
संदेश साफ है—भगवान का आशीर्वाद लेने आए हैं तो उनके बनाए जंगल का सम्मान करना भी सीखिए।


बोतल, रैपर और पुराने कपड़े बन रहे संकट
मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से प्लास्टिक बोतलें, रैपर, पॉलीथिन, दोने-पत्तल और पुराने कपड़ों का कचरा जंगल के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। यही वजह है कि प्रशासन प्रवेश मार्गों पर वाहनों की जांच और प्लास्टिक सामग्री पर नियंत्रण की तैयारी कर रहा है।
एसटीआर का वीडियो श्रद्धालुओं को यह भी संदेश देता है कि जो सामान लेकर जंगल में आए हैं, उसे वापस भी साथ लेकर जाएं। कचरा रास्ते में छोड़ने के बजाय अपने बैग में रखें और बाहर निकलकर निर्धारित स्थान पर ही डालें।


श्रद्धालु ने उठाया कचरा, नागदेव ने दिया आशीर्वाद
कहानी का सबसे खूबसूरत हिस्सा तब आता है जब श्रद्धालु नागदेव की बात समझता है। वह रास्ते में बिखरा प्लास्टिक और कचरा खुद उठाकर अपने बैग में भर लेता है और जंगल को साफ रखने का संकल्प लेता है।
उसकी इस पहल से प्रसन्न होकर नागदेव पंचमुखी अवतार में उसे आशीर्वाद देते हैं।
वीडियो का संदेश भी इसी दृश्य के साथ सामने आता है—प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति जिम्मेदारी निभाना ही सच्ची तीर्थयात्रा है।


आस्था भी रहे, जंगल भी बचे
नागद्वारी यात्रा सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि सतपुड़ा के संवेदनशील जंगलों से होकर गुजरने वाली यात्रा भी है। इसलिए एसटीआर प्रबंधन श्रद्धालुओं से अपील कर रहा है कि वे प्लास्टिक बोतल, पॉलीथिन, रैपर, पुराने कपड़े और अन्य कचरा जंगल में न छोड़ें।
प्रशासन की कोशिश है कि इस बार श्रद्धालु दर्शन की पुण्य स्मृति लेकर लौटें, लेकिन जंगल के हिस्से में अपना कचरा छोड़कर नहीं।
नागदेव का संदेश सीधा है—भगवान को प्रसाद चढ़ाइए, जंगल को कचरा नहीं।

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