Category: राजनीति

  • लगातार हार रही सीटों के लिए कांग्रेस अपना रही है यह रणनीति ?

    लगातार हार रही सीटों के लिए कांग्रेस अपना रही है यह रणनीति ?

    भोपाल //सूबे में जहां विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा पिछली बार हारी हुई सीटों को जीतने की रणनीति पर काम कर रही है, वही कांग्रेस प्रदेश की ऐसी सीटों पर फोकस कर रही है, जहां पार्टी लगातार चुनाव हार रही है। प्रदेश में ऐसी 70 सीटें हैं।  कांग्रेस इन सीटों पर प्रत्याशियों के चयन के लिए तीन तीन सर्वे कराने की कवायत कर रही है, वहीं कार्यकर्ताओं को तैयार करने और बूथ मैनेजमेंट के लिए शिविरों का आयोजन करेगी।

    तीन तीन सर्वे से चुने जायेंगे उम्मीदवार ?

      खबर यह है कि कांग्रेस 3 बार या उससे ज्यादा बार चुनाव हारने वाली सीटों पर इस बार उम्मीदवार चयन के लिए तीन अलग-अलग सर्वे करवाएगी । एक सर्वे एआईसीसी ,एक प्रदेश कांग्रेस और एक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ खुद करवा रहे हैं।  इन तीनों सर्वे के निचोड़ के बाद ही प्रत्याशी का चयन किया जाएगा। बताया जाता है कि यह फैसला पिछले दिनों कांग्रेस की पॉलिटिकल अफेयर कमेटी की बैठक में लिया गया है। इन तीनों सर्वे के बाद जो उम्मीदवार सबसे बेहतर होगा दिग्गज नेताओं (? ) के साथ ही स्थानीय और संगठन कि पसंद होगा उसे उम्मीदवार बनाया जाएगा।  पहले चरण में इन हारी सीटों पर  सर्वे होगा के बाद दूसरे चरण में बाकी लगभग 90 सीटों पर इसी तर्ज पर सर्वे होगा।  वैसे यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस अधिकतर सीटों पर वर्तमान विधायकों को दोहराने के मूड में इसीलिए उन्हें अभी से अपने क्षेत्र में सक्रिय होने के लिए आलाकमान ने निर्देश दे दिए हैं।

    शिविरों का होगा आयोजन !

    दूसरी खबर है कि कांग्रेस लगातार हार वाले विधानसभा क्षेत्रों में शिविर लगाकर कार्यकर्ताओं को तैयार करेगी और इन शिविरों को आयोजित करने की जिम्मेदारी सेवादल को दी गई है।  यह शिविर मई और जून में लगाए जाएंगे । 3 से 5 दिनों के इन शिविरों में क्षेत्र में हार के कारणों के अलावा कार्यकर्ताओं को  बूथ प्रबंधन की बारीकियों की जानकारी, मतदाता से संपर्क करने के और प्रमुख बिंदु पर बात करने को के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।  इस दौरान वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहेंगे।

     सेवा दल के प्रमुख संगठन योगेश यादव का कहना है कि शिविर क्षेत्र में कांग्रेस की कमजोरियों और समस्याओं की जानकारी का एक प्रतिवेदन भी तैयार करेंगे ताकि संगठन को चुनावी तैयारी में सहयोग मिल सके । बताया जा रहा है कि विधानसभा क्षेत्रों से सेवा दल के शिविर आयोजित करने से पहले 27 से 29 अप्रैल तक इंदौर में जिला अध्यक्ष व प्रभारियों का एक शिविर भी आयोजित होगा।

    इन सीटों पर लगातार हार रही है कांग्रेस

     रहली ,सागर, बीना ,नरयावली ,गुना, शिवपुरी ,दतिया डॉक्टर अंबेडकर नगर( महू) इंदौर दो इंदौर चार इंदौर पांच,बिजावर ,चांदला, पथरिया, हटा, सिरमौर, सिमरिया, त्योथर, रामपुर बघेलान, रीवा, सीधी सिंगरौली, देवसर , धौहनी, जैतपुर ,बांधवगढ़, मानपुर , मुड़वारा ,जयसिंह नगर ,जबलपुर कैंट, पनागर ,सिहोरा परसवाड़ा ,बालाघाट ,सिवनी ,आमला, टिमरनी, सिवनी मालवा, होशंगाबाद ,सोहागपुर, पिपरिया, भोजपुर, कुरवाई ,शमशाबाद ,बैरसिया ,नरेला, हुजूर, गोविंदपुरा बुधनी ,आष्टा ,सीहोर, सारंगपुर ,सुसनेर ,सुजालपुर देवास ,खातेगांव, बागली ,हरसूद, खंडवा, पंधाना, बुरहानपुर, धार, उज्जैन उत्तर, उज्जैन दक्षिण, रतलाम सिटी ,मंदसौर, मल्हारगढ़, जावद और नीमच।

  • सूबे में कई नए राजनैतिक खिलाड़ी मैदान में ! भाजपा- कांग्रेस की नींद उड़ी..?

    सूबे में कई नए राजनैतिक खिलाड़ी मैदान में ! भाजपा- कांग्रेस की नींद उड़ी..?

    भोपाल//  सूबे में साल के अंत तक होने वाले चुनावों में भाजपा या कांग्रेस ही नहीं अन्य राजनीतिक दल भी चुनावी मैदान में ताल ठोकने की तैयारी में है इनमें से कुछ नए हैं तो कुछ पुराने हैं ।
    यह नए खिलाड़ी दोनों ही पार्टी की नींद उड़ा सकते हैं मध्य प्रदेश कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी वरद मूर्ति मिश्रा की वास्तविक भारत पार्टी इस बार पहली बार मैदान में उतरेगी ।
    पिछले रविवार को राजधानी में इसका एक सम्मेलन हुआ जिसमें इस पार्टी ने विधानसभा चुनाव के लिए 2 प्रत्याशियों की घोषणा तक कर दी। वरदमूर्ति ने जबलपुर जिले के बरगी और नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव विधानसभा सीट से उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया। गोटेगांव से नरसिंहपुर में सपा के जिलाध्यक्ष रहे हरिगोविंद झरिया , तो बरगी से भाजपा के अंत्योदय प्रकोष्ठ के जिला सह संयोजक रहे आशीष पटेल को उम्मीदवार बनाया गया है। श्री मिश्रा का कहना है कि उनकी पार्टी के 28 उम्मीदवार तय हो चुके हैं और अगले महीने तक आधिकारिक तौर पर सूची जारी कर दी जाएगी ।
    वहीं कथावाचक संत देव मुरारी बापू मध्य प्रदेश से राजनीति में किस्मत आजमाने की तैयारी में है । उन्होंने राष्ट्रव्यापी जनता पार्टी नाम से राजनीतिक दल का गठन किया है । वे प्रदेश की 230 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं।  वैसे 2022 में यूपी चुनाव में उन्होंने कुछ उम्मीदवारों को उतारा था पर बाद में भाजपा से समझौता होने से पार्टी ने भाजपा को समर्थन दे दिया था।
    सोमवार को विंध्य के चर्चित भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी ने नई पार्टी का ऐलान किया है। उसका नाम विंध्य पार्टी होगा। उन्होंने बताया कि विंध्य पार्टी के पंजीयन की प्रक्रिया लगभग पूरी हो गई है ,15 तारीख तक पार्टी का पंजीयन भी हो जाएगा। उन्होंने विंध्य के लोगों से आवाहन करते हुए कहा कि वे विधानसभा चुनाव के लिए तैयार हो जाएं। विंध्य के लोग ही इस पार्टी से चुनाव लड़ेंगे। त्रिपाठी ने क्षेत्र की30 सीटों पर अपनी दावेदारी जताई है।
    राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल कर चुकी आम आदमी पार्टी इस बार बड़ी चुनौती है। कुछ दिन पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल  भोपाल में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ एक रैली कर चुनावी बिगुल फूंक चुके हैं और  प्रदेश की सभी 230 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान भी कर चुके हैं। फिलहाल प्रदेश के कई इलाकों में स्थानीय  निकाय चुनावो में वे अपने प्रदर्शन से उत्साहित हैं।
    इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी भी सक्रिय हो गई है। ओवैसी की पार्टी धीरे-धीरे सक्रियता बढ़ा रही है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के अलावा फरवरी में भीम आर्मी ने आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर रावण के नेतृत्व में शक्ति प्रदर्शन कर प्रदेश की राजनीति में अपनी दस्तक देने का प्रयास किया है। पिछले चार-पांच महीनों में प्रदेश की राजधानी भोपाल में तीन बड़े राजनीतिक आयोजन हुए हैं। 
    कौन कितना असरदार?
    इन नए चुनावी दावेदारों में कौन कितना असरदार रहेगा कौन किसको कितना फायदा पहुंचाएगा या कौन किसका कितना नुकसान कराएगा यह भी कहना मुश्किल है।

    जहां तक चुनावी आंकड़ों और गणित का सवाल है यह तय है कि  साल 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के बीच जीत हार में सीटों का अंतर 5 था, ऐसे आज  छोटे और नए राजनीतिक दल प्रदेश की सियासी समीकरण को काफी हद तक प्रभावित करेंगे, और चाहे खुद न जीत सकें पर जीत हार का गणित बना या बिगाड़ देंगे। राजनीतिक पंडितों मुताबिक, इस साल प्रदेश की सरकार में बनाने में छोटे-छोटे राजनीतिक दलों की अहम भूमिका रहेगी।
    नए सियासी समीकरण का आगाज
    14 अप्रैल को डॉक्टर बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर उनके जन्म स्थान महू (इंदौर) में आजाद समाज पार्टी, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और समाजवादी पार्टी एक बड़ा आयोजन करने वाली हैं। इस कार्यक्रम के दौरान मंच पर समाजवादी पार्टी नेता और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष जयंत चौधरी, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर रावण एक मंच पर दिखाई देंगे।
    क्या कहते हैं आंकड़े?
    230 विधानसभा सीटों वाली मध्य प्रदेश में सामान्य वर्ग के लिए 148, अनुसूचित जनजाति के लिए 47 और अनुसूचित जाति के लिए 35 सीटें आरक्षित हैं। राज्य में करीब ओबीसी यानी अन्य पिछड़ा वर्ग मतदाता 48 फीसदी, अनुसूचित जनजाति वोटर 17 फीसदी और अनुसूचित जाति राज्य की आबादी का 21 फीसदी है। ऐसे में यदि इन जातियों  का गठजोड़ छोटे दल निकाल लेते तो भाजपा, कांग्रेस का खेल बिगड़ने की संभावनाएं हैं। 
    ,राज्य में पिछले कुछ महीनों से ओबीसी आरक्षण का मुद्दा गर्म है। इससे जुड़े कुछ मामले अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। आरक्षण के मुद्दों को लेकर ओबीसी वर्ग के मतदाता नाराज दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में यदि इन छोटे राजनीतिक दलों को ओबीसी का सहयोग मिल जाता है तो देश की राजनीतिक में नया भूचाल देखने को मिल सकता है।  छोटे दलों की शुरूआती रैली के मुताबिक ये दल चुनाव मैदान में दलित आदिवासी और ओबीसी गठजोड़ बना कर उतर सकते हैं। ऐसे में यदि ये गठबंधन हुआ तो दलित आदिवासी सीटों के मामले में बुंदेलखंड की 25, ग्वालियर, चंबल 16 और विंध्य की 12 सीट समेत महाकौशल के करीब 35 सीटों पर नए राजनीतिक आंकड़े नजर आएंगे। साल 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 114 सीटें जीतकर 40.09 फीसदी वोट हासिल किए थे और भाजपा ने 109 सीटों पर जीतकर 41 फीसदी वोट हासिल किए थे। वहीं राज्य में निर्दलीय दलों ने 4 सीटें जीतीं थी। इनका वोट प्रतिशत 5.8 था। इसमें बहुजन समाज पार्टी ने 2 सीट जीतकर 5 फीसदी वोट हासिल किए थे। हालांकि गोंडवाना गणतंत्र पार्टी एक भी सीट हासिल नहीं कर पाई थी लेकिन उस दौरान पार्टी का वोट प्रतिशत 1.3 था। इस चुनाव में नोटा को 1.4 फीसदी मत हासिल हुए थे। लेकिन, इन छोटे दलों ने 7 सीटों को जीतकर कुल 13.9 फीसदी वोट हासिल किए थे। 2018 के चुनाव में अनुसूचित जनजाति की रिजर्व 47 सीटों पर कांग्रेस ने 30 पर अपना कब्जा जमाया। जबकि बीजेपी महज 16 सीटों पर जीत हासिल कर सकी। वहीं अनुसूचित जाति की सीटों की बात करें तो 35 रिजर्व सीटों में से भाजपा ने 18 और कांग्रेस 17 पर विजयी हुई।
    मध्य प्रदेश में एससी और एसटी सीटों का प्रभाव बहुत ज्यादा है। उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे 14 जिलों में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी का जनाधार दिखाई देता है। सूबे के सतना, छतरपुर, टीकमगढ़, रायसेन, रीवा, दमोह, पन्ना, बालाघाट, सीधी, अशोकनगर, निवाड़ी में समाजवादी पार्टी का अच्छा खासा दबदबा है। वहीं बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशियों ने भिंड, ग्वालियर पूर्व, रामपुर बघेलान में 50 हजार से अधिक वोट हासिल किए थे। इसके अलावा देवताल, पौहारी, जोरा और सबलगढ़ में पार्टी को 40 हजार से अधिक वोट मिले थे। वहीं सतना, लहार, चंदेरी, गुन्नौर, अमरपाटन, सिमरिया और पथरिया में बसपा प्रत्याशी ने 30 हजार से अधिक वोट मिले थे। साफ है यदि छोटे दल इस साल विधानसभा चुनाव में एक साथ मिलकर चुनाव लड़ते है तो राज्य की दो प्रमुख पार्टी को इसका नुकसान हो सकता है।  

  • सूबे में टूटने लगी जुबां की मर्यादा ! कोई किसी को कह रहा पागल तो कोई कह रहा गुंडा !

    सूबे में टूटने लगी जुबां की मर्यादा ! कोई किसी को कह रहा पागल तो कोई कह रहा गुंडा !

     भोपाल//सूबे विधानसभा चुनाव निकट आते जा रहे हैं, और राजनीतिक दलों के नेताओं की जुबानी जंग तेज हो गई है , कई बार तो बयान बाजी सामान्य मर्यादाओं को लांघती दिखाई देने लगी है ,और जैसे-जैसे चुनाव की सरगर्मियां और बढ़ेगी, इसके बढ़ने का अनुमान है। 2 दिन पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राहुल गांधी को स्वार्थी बताते हुए कांग्रेस की विचारधारा को गद्दार कह दिया था, वहीं उस पर पलटवार करते हुए दिग्विजय सिंह ने एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि क्यों ना हमें इन्हे गद्दार कहें।

    फिलहाल नया मामला मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का है। शुक्रवार को शिवराज सिंह ने कमलनाथ को पागल कह दिया तो कमलनाथ ने सीएम को सड़क छाप गुंडा और कुंठित व्यक्ति कह डाला।

    कुछ यह कहा मुख्यमंत्री ने सीएम शिवराज सिंह ने

     शुक्रवार को स्मार्ट पार्क के पौधरोपण के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘कमलनाथ चुनाव के पहले कह रहे थे कि मुसलमानों के पोलिंग बूथ पर 90 परसेंट वोट क्यों नहीं डालते ? यह वीडियो सारी दुनिया ने देख। वे मुसलमानों को वोट बैंक मानते हैं। क्या वोट के लिए अब धर्म और जातियों में बांट कर लोगों को भड़काया जाएगा ? वो फिर( कमलनाथ ) एक समुदाय से कह रहे हैं कि प्रदेश में दंगे भड़क रहे हैं। मैं पूछता हूं कहां दंगे भड़क रहे हैं?लेकिन वोट की भूख ने आप( कमलनाथ) इतने पागल हो गए हैं कि मध्यप्रदेश को वैमनस्यता की खाई में झोंकना चाहते हैं।’

    कमलनाथ ने भी उसी शैली में दिया जवाब !

    सीएम शिवराज के बयान पर कमलनाथ ने जवाब देते हुए कहा कि  ‘शिवराज जी कुछ दिन पहले आप मेरा अंत करना चाहते थे और आज आपने मुझे पागल कहा है। पूरी दुनिया देख रही है कि मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री कैसी सड़क छाप गुंडों की भाषा बोल रहा है। उसके भीतर की सारी सभ्यता और संस्कार समाप्त हो चुके हैं। मुझे अपने अपमान की फिक्र नहीं है, लेकिन, दुख इसका है कि मध्य प्रदेश जैसे महान राज्य के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर ऐसे कुंठित विचारों वाला व्यक्ति बैठा है। ये प्रदेश की आठ करोड़ जनता का अपमान है। आप का षड्यंत्र कामयाब नहीं होगा।’

    नाथ का वीडियो सामने आने के बाद शुरू हुई बयान बाजी!

     दरअसल बुधवार को छिंदवाड़ा में रोजा इफ्तार के कार्यक्रम में शामिल हुए कमलनाथ का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि यह लोग (भाजपा वाले) पूरे देश में दंगे फसाद कराना चाहते हैं. आप लोग छिंदवाड़ा संभालिए, मुझे प्रदेश संभालने दीजिए। आप चाहते हैं मैं यहां बंध कर रह जाऊं, तो मैं बंध कर रह जाता हूं । कमलनाथ का यह वीडियो सामने आने के बाद से बीजेपी उन पर हमलावर है।

  • अब पंगत में संगत के जरिए कार्यकर्ताओं को एक जुट करेंगी कांग्रेस ?

    अब पंगत में संगत के जरिए कार्यकर्ताओं को एक जुट करेंगी कांग्रेस ?

    भोपाल//आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी में सूबे के दोनों ही राजनीतिक दलों ने अपने को झोंक दिया है, कोई भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहता। रोज-रोज नई-नई रणनीतियां और दांवपेच सामने आ रहे हैं। सत्ताधारी भाजपा सत्ता हमेशा की तरह इसमें आगे ही दिखाई देती है, इन दिनों सरकारी अमले की मदद से निकाली जा रही विकास यात्राओं के जरिए अपने कार्यकर्ताओं को वह सक्रिय बनाए हुए है । वहींभारत जोड़ो यात्रा के बाद घोषित किया गया हाथ से हाथ जोड़ो अभियान  घोषणा और खबर बन के रह गया।

    कांग्रेस की सबसे बड़ी समस्या संगठन की कमजोरी है। पार्टी की सारी ताकत एकजुटता दिखाने की कोशिश में जाया होती नजर आ रही है राजधानी से लेकर गांव गांव तक पार्टी खेतों में बटी है।

    अब खबर है कि अपने विक्रय कार्यकर्ता को एकजुट करने के लिए पार्टी हर विधानसभा क्षेत्र में कार्यकर्ताओं को एक जगह बैठा कर भोजन कराने की रणनीति अपनाने जा रही है पंगत में संगत वाला यह फार्मूला कांग्रेस 2018 में भी आजमा चुकी है जब इसी तरह के आयोजनों में भोजन से पहले नेता और कार्यकर्ताओं को एकजुटता की कसमें दिलाई गई थी।

    फिलहाल कांग्रेस मान रही है कि आगामी चुनाव में उसे सत्ता मिल सकती है और इसके लिए उसके बिखरे कार्यकर्ताओं और नेताओं का एकजुट होना बहुत जरूरी है। इसलिए वह प्राथमिकता से एक जुटता की बात कर कार्यकर्ताओं में जोश भरने का प्रयास करना चाहती है। उसका मकसद अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं को यह समझना है कि चुनावी मैदान में जन समर्थन को हम तभी अपनी ओर मोड़ सकेंगे जब हम अपने गिले शिकवे भुलाकर एक जुट होंगे। हमें भाजपा को दिखाना होगा कि हमारी एकता को कम न समझा जाए।

    हर छोटे बड़े कार्यकर्ता नेता से होगी बात

    पार्टी सूत्रों के अनुसार अपने पुराने और आजमाए फार्मूले पर लौटी कांग्रेस हर विधानसभा क्षेत्र में मंडल और सेक्टर से लेकर बूथ स्तर तक के नेताओं और कार्यकर्ताओं से बात कर रही है। जहां आपस में विरोधऔर मनमुटाव की स्थिति है वहां कार्यकर्ताओं को एक जगह बैठा कर यही संकल्प दिलाने की तैयारी हो रही है। कांग्रेस की वचन पत्र समिति के सदस्य वीरेंद्र खोंगल ने कहा बताया कि पिछली बार कार्यकर्ताओं की एकजुटता और मेहनत से पार्टी ने सफलता पाई थी और इस बार भी कांग्रेस को मतदाता का आशीर्वाद प्राप्त होगा और वह सरकार बनाएगी। खोंगल कहा कि प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ हर वर्ग को साथ लेकर चलने वाले नेता है उन पर प्रत्येक प्रदेश की जनता को अटूट विश्वास है।

    अब कमलनाथ भी हर विधान का दौरा करेंगे

    इस बार कांग्रेस सरकार बनाने के लिए कोशिश में कोई भी कमी नहीं रखना चाहती है । वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह प्रतिदिन एक विधानसभा क्षेत्र में पहुंचने  का अभियान शुरू कर चुके हैं और अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ भी हर दिन 1 विधानसभा का दौरा करेंगे जहां वे सभा के बाद  मंडल सेक्टर और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ बैठ कर बात करेंगे। पार्टी में काम करने के दौरान उन्हें कहां क्या समस्या आ रही है इस तरह की बातें व कार्यकर्ताओं उसे करेंगे और उनका पक्ष भी सुनेंगे और उनको हल करने का प्रयास करेंगे ।

  • ज़िले की सियासत: चुनावी साल में भाजपा में बढ़ी खेमेबाजी?  

    ज़िले की सियासत: चुनावी साल में भाजपा में बढ़ी खेमेबाजी?  

    इटारसी -नर्मदापुरम // पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम से साफ जाहिर हो रहा है कि जो पार्टी” पार्टी विद डिफरेंस”होने का दावा करती थी, जिसे उसे अपने अनुशासित और संस्कारित पार्टी और कार्यकर्ताओं पर गर्व था ,वह पार्टी अब भीतर से दरकने लगी है। उसमें गुटबाजी और खेमेबाजी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगी है। वैसे पार्टी के नेता इसे नहीं स्वीकार रहे हैं , घटनाओं को सामान्य मतभेद बताकर सवालों से कन्नी काट रहे हैं। पर घटनाएं असलियत बयां कर रही हैं।

     भाजपा जिलाध्यक्ष के विरोध में पदाधिकारियों का इस्तीफा ?

    लगभग 10 दिन पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष माधव दास अग्रवाल के विरोध में उनके ही गृह क्षेत्र पिपरिया- खापाखेड़ा के पदाधिकारियों के इस्तीफे का एक वायरल पत्र चर्चा में रहा। यह कथित पत्र पिपरिया मंडल अध्यक्ष के लेटर पैड पर लिखा गया था। इस पत्र में करीब 25 पदाधिकारियों ने मय नाम हस्ताक्षर किए गए थे ।यह पत्र 18 दिसंबर 2022 का बताया गया। वायरल पत्र में यह आरोप लगाया गया था कि जिला अध्यक्ष की कार्यप्रणाली ठीक नहीं है, इसी वजह से नर्मदापुरम में कांग्रेस का जिला पंचायत अध्यक्ष बना था, जबकि जिला पंचायत में भाजपा के 12 सदस्य और कांग्रेस के मात्र 3 सदस्य ही थे ।इस मामले में प्रदेश संगठन ने जो जांच समिति बनाई थी उसमें भी जिलाध्यक्ष को जिम्मेदार माना गया था। बताया जा रहा है कि जिले के चारों विधायक व सांसद ने भी प्रदेश संगठन से जिलाध्यक्ष की शिकायत की थी, पर जब मामला चर्चा में आया तो पदाधिकारियों ने इस्तीफे से इंकार कर दिया संगठन के लोगों ने इस तरह के किसी भी पत्र के अस्तित्व से इंकार कर दिया। पार्टी की ओर से पत्र को फर्जी बताया है और सच्चाई का पता लगाने थाने में रिपोर्ट करने की बात की पर अभी तक क्या सच्चाई है? और यदि पत्र फर्जी है तो क्या खाने में इसकी शिकायत की गई है इसका पता नहीं चल सका है।

    किसान संघ और भाजपा नेता पीयूष शर्मा का विवाद ?

    कुछ दिन पूर्व भारतीय जनता पार्टी के किसान संगठन भारतीय किसान संघ और भाजपा नेता पीयूष शर्मा के बीच खटपट की खबरें मीडिया की सुर्खियों में रहीं। बताया जाता है कि पीयूष शर्मा ने माखन नगर के ताल केसरी में एक श्रद्धांजलि सभा के दौरान यह कहा था कि “आज किसानों की जो दुर्दशा है, खाद की किल्लत है, आदि के लिए भारतीय किसान संघ जिम्मेदार है” इस बयान से किसान संघ के पदाधिकारी नाराज हो गए .संघ के अध्यक्ष सर्वज्ञ दीवान ने यहां तक कह दिया कि भाजपा नेता ने पूरे किसान समाज का अपमान किया है और उन्होंने नर्मदा पुरम के साथ रास्ते पर भाजपा नेता पीयूष शर्मा के पुतला दहन की घोषणा कर दी।

     इस मामले में पीयूष शर्मा का कहना था कि बात अनौपचारिक थी मेरी बात का गलत मतलब निकाला गया, मेरी मंशा भारतीय किसान संघ भारतीय किसान संघ की भावनाओं को आहत करने की नहीं थी ,यह कहते हुए उन्होंने माफी मांग ली ।शर्मा के माफी मांगने पर किसान संघ ने भी अपना पुतला दहन का कार्यक्रम निरस्त कर दिया

     भाजपा नेताओं में हाथापाई ,पिस्टल तक निकलने की खबरें !!

    पिछले शुक्रवार को जब भाजपा के प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव सर्किट हाउस में कार्यकर्ताओं को चुनाव जीतने का गणित समझा रहे थे, उसी दौरान पार्टी के दो नेता आपस में भिड़ गए नौबत यहां तक आ गई कि एक पक्ष ने पिस्तौल तक निकाल ली। बताया जा रहा है कि भाजपा नेता रेवेंद्र चौहान सर्किट हाउस के एक कमरे में अपने कुछ साथियों के साथ खाना खा रहे थे, उसी दौरान भाजपा के नेता पीयूष शर्मा ने उनसे भोजन स्थल पर जाकर भोजन करने को कहा।इस बात को लेकर दोनों में विवाद हो गया और बात  गाली गलौज हाथापाई और पिस्टल निकलने तक पहुंच गई। दोनों के समर्थक सर्किट हाउस में जमा हो गए। विवाद बढ़ता देख कुछ वरिष्ठ नेताओं ने बीच-बचाव कर मामले को शांत कराया खबर यह भी है कि स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि दोनों गुटों के कार्यकर्ताओं को अलग-अलग वहां वाहनों से वहां से ले जाया गया ।घटना के वक्त प्रभारी मुरलीधर राव भी सर्किट हाउस में थे उन्हें भी घटना की जानकारी लगी । वैसे घटना को लेकर संगठन और नेताओं ने चुप्पी साध रखी है।

    प्रदेश प्रभारी के दौरे में शक्ति प्रर्दशन जैसा माहौल?

    भाजपा के प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव का दौरा भी यह संकेत दे गया कि भाजपा में खेमेबाजी और आपसी प्रतिद्वंद्विता चरम पर है। चुनाव से पहले जमीनी हकीकत का पता लगाने आए प्रदेश प्रभारी के सामने जिलेभर से आए विधायक की टिकट के दावेदारों ने अपनी दावेदारी कुछ-कुछ शक्ति प्रदर्शन जैसी ही की।  प्रदेश प्रभारी श्री राव के आने के पहले ही और आने के दिन अखबारों में एक  गुट विशेष द्वारा बड़े-बड़े स्वागत विज्ञापन प्रकाशित किए गए। उन विज्ञापनों में छपी फोटो की आकार प्रकार को देखकर भी गुटबाजी की चर्चा रही। भाजपा के नए नए नेता डा राजेश शर्मा जो कि नर्मदापुरम से टिकट के दावेदार माने जा रहे हैं ने एक समाचार पत्र में प्रभारी राव पर एक आलेख भी लिखा जिसकी खासी चर्चा रही।

     बताया जाता है कि प्रदेश प्रभारी को जिले में भारी गुटबाजी और खेमे बाजी का एहसास हो गया है, उन्होंने चर्चा के दौरान मिलजुल कर काम करने की सीख नेता और कार्यकर्ताओं को दी हैं, वहीं कई नेताओं ने व्यक्तिगत तौर पर प्रभारी को पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी की जानकारी भी दी।

    सब्ज़ी मंडी दुकानों की जांच और गुटबाजी !

    इटारसी सब्जी मंडी की दुकानों के आवंटन में हुई गड़बड़ियों की फाइल एक बार फिर खुल गई है। कमिश्नर द्वारा जांच के बाद आवंटन रद्द करने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश के बाद लंबे समय तक ठंडे बस्ते में पड़ी रही फाइल के फिर से खुलने के पीछे लोग स्थानीय राजनीति और भाजपा की गुटबाजी देख रहे हैं ।  नगर पालिका चुनाव के दौरान की खींचतान अब रंग लाती दिख रही है । बताया जाता है कि इस आवंटन में भाजपा नेता के सबसे ज्यादा जिम्मेदार होने की बात की जा रही है वह भी विधानसभा की टिकट के दावेदार हैं, और वर्तमान के लोग इस तरह की कोई चुनौती नहीं चाहते ,जबकि उस नेता की सत्ता और संगठन में अच्छी पकड़ बताई जा रही है । उसे भाजपा के सांसद खेमे का भी समर्थन है। लोगों का कहना है कि दूकानों के निर्माण और आवंटन के समय से ही इसमें गड़बड़ी की चर्चा थी, तब जन प्रतिनिधियों ने जांच की मांग क्यों नहीं की?

    कुल मिलाकर भाजपा की अंदरूनी कलह और गुटबाजी  से प्रदेश आलाकमान वाकिफ और परेशान है, पर इसमें कमी आने की संभावना नजर नहीं आ रही है, जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे और टिकट के लिए दावेदारियां बढ़ेंगी । नए पुराने दावेदारों के बीच कड़वाहट बढ़ेगी। देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इस समस्या से कैसे निपटती है और यह भाजपा के चुनाव कितना नुकसान पहुंचाती है?

  • चुनाव तैयारियां – भाजपा -कांग्रेस में बूथ तक पहुँचने की कवायद तेज

    चुनाव तैयारियां – भाजपा -कांग्रेस में बूथ तक पहुँचने की कवायद तेज

    भोपाल//दस माह बाद मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और भाजपा दोनों ही अपनी जीत को पक्का करने के लिए चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है .तैयारियों में दोनों ही दल एक दूसरे का अनुसरण और रणनीति की काट ढूंढते नजर आ रहे हैं. विशेष बात यह है कि दोनों ही दल इस बार बूथ स्तर तक एप्रोच कर रहे हैं और इसके लिए कोई कसर छोड़ते भी नजर नहीं आ रहे हैं .भाजपा डिजिटल बूथ की बात कर रही है तो कांग्रेसी उसका मुकाबला इंटरनेट मीडिया टीम और बूथ वार जानकारी जुटाने की तैयारी में है

    भाजपा ने शुरु किया स्मार्ट बूथ योजना पर काम

    भाजपा ने स्मार्ट बूथ पर योजना पर काम शुरू किया है। इसके अनुसार अब बूथ स्तर के कार्यकर्ता को भी नहीं पहचान मिल सकेगी पार्टी प्रदेश के 65 हजार बूथ अध्यक्ष, महामंत्री और बूथ एजेंट को पार्टी संगठन में विशेष तवज्जो देने जा रही है।

      बीजेपी चुनाव आभियान को पूरी तरह से तकनीकी बनाती एलजी रही है। पार्टी हर बूथ को डिजिटल बनाकर नेतृत्व करने वाले अध्यक्ष महामंत्री और एजेंट सहित पन्ना प्रमुखों को अलग विशेष कोड यानी पहचान दी जाएगी, इससे विशेष लाभ यह होगा कि कोड के जरिए ये पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से भी सीधा संपर्क कर सकेंगे। पार्टी मानती है कि इससे संगठन में नए नेतृत्व को उभरने का अवसर मिल सकेगा, वहीं चुनावों में बूथ स्तर पर मजबूती से जीत आसान होगी। मध्यप्रदेश में संगठन ने बूथ स्तर पर पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का डिजिटल डेटा तैयार कर लिया है ।

    पन्ना की जगह होंगे डिजिटल पेज

     पिछ्ले कुछ चुनावों से मतदाता तक पहुंच बनाने के लिए बी जे पी पन्ना प्रमुख की रणनीति पर चल रही है अब यह पन्ना डिजिटल पेज में बदल जाएगा। बूथ समिति के सदस्यों से डिजिटल बूथ की भौगोलिक एवं सामाजिक परिस्थितियों की जानकारी भी ली जा रही है। केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं के हितग्राहियों से संवाद का प्रशिक्षण भी उन्हें दिया गया है।

     बूथ कार्यकर्ताओं को अहमियत बढ़ेगी।

    भाजपा पिछले कुछ वर्षों से वृहद स्तर पर सदस्यता अभियान के बाद खुद को विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक दल बताती है इसका श्रेय किसी बड़े चेहरे या पदाधिकारी के बजाय लाखों कार्यकर्ताओं को दिया जाता है ,लेकिन उन्हें अलग से पहचान की कमी महसूस होती रही है।

     स्मार्ट कार्ड दिए जाएंगे

     बूथ के तीन बीएलए जिन्हें संगठन में त्रिदेव की संज्ञा दी गई है उन्हें स्मार्ट कार्ड दिए जाएंगे ।इस पर यूनिक नंबर के साथ पूरा परिचय होगा। पन्ना प्रमुख को भी विशिष्ट पहचान पत्र मिलेगा पार्टी ने बूथ विस्तारक योजना के तहत बूत समिति का अंकन रजिस्टर और संगठन एप में किया है। इसमें बूथ समिति बूथ अध्यक्ष बूथ महामंत्री और सहित पूरी समिति और पन्ना प्रमुख समिति के साथ मतदाताओं के नाम भी दर्ज है।

    यह योजना सिर्फ प्रदेश में ही नहीं बल्कि पूरे देश में लागू करने जा रही है।

    कांग्रेस इंटरनेट मीडिया टीम तैयार करेगी

    भाजपा की इस रणनीति  को टक्कर देने के लिए कांग्रेसी भी इंटरनेट मीडिया इंटरनेट मीडिया की टीम तैयार कर रही है, इसमें कांग्रेस का सबसे ज्यादा जोर भाजपा के दावों का जवाब देने को लेकर रहेगा। राहुल गांधी की मध्य प्रदेश में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी कांग्रेस ने यही रणनीति अपनाई थी ।यात्रा के दौरान भाजपा नेताओं की तरफ से जो भी बयान आए थे कांग्रेस ने उसका तुरंत प्रत्युत्तर दिया था यही रणनीति विधानसभा चुनाव में रहेगी। चुनाव के दौरान दोनों ही बड़े दलों के राष्ट्रीय पदाधिकारियों के भी दौरे होंगे , इस दौरान भाजपा नेताओं द्वारा कोई भी आरोप लगाया जाता है तो इंटरनेट मीडिया टीम पूरे तथ्यों के साथ अपना पक्ष इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित करेगी इस टीम पर पार्टी के बड़े-बड़े नेताओं के भाषण को भी इंटरनेट मीडिया पर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी रहेगी प्रदेशभर के लिए यह दायित्व प्रदेश कांग्रेस कमेटी की तरफ से अभय तिवारी को दिया गया है मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष केके मिश्रा ने कहा कि हम इंटरनेट मीडिया की टीम तैयार कर रहे हैं वार्ड और बूथ स्तर तक टीम बनाने का काम चल रहा है

    95% मतदाता इंटरनेट पर 

    पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ ने पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से कहा है कि पिछले विधानसभा चुनाव में मात्र 25% लोग ही इंटरनेट मीडिया पर थे पर अब 95% लोग इसका उपयोग कर रहे हैं ऐसे में 2023 के चुनाव में इंटरनेट मीडिया को ज्यादा से ज्यादा उपयोग करने की जरूरत है उनके कहने पर पार्टी के नेता इंटरनेट मीडिया में अपने फॉलोअर्स बढ़ाने में भी लगे हैं।

    जातीय समीकरण साधने बूथवार जानकारी जुटाएगी कांग्रेस

    प्रदेश कांग्रेस ने सभी वर्गों में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए नए प्रकोष्ठ बनाने के साथ ही मतदान केंद्र पर जातीय समीकरण साधने की कार्य योजना बनाई है  कई बड़े नेताओ और प्रकोष्ठों को इसकी जिम्मेदारी दी गई है ।  मतदान केंद्र वार जानकारी जुटाई जा रही है इसमें केंद्र पर कुल मतदाता, जातिगत समीकरण ,प्रभावशाली व्यक्ति, पिछले चुनाव परिणाम आदि की जानकारी रहेगी। इसके आधार पर पार्टी मत का मतदान केंद्र स्तर पर संचालित की जाने वाली गतिविधियां निर्धारित करेगी। प्रभावशाली व्यक्तियों से प्रदेश स्तर के पदाधिकारी सम्पर्क स्थापित करेंगें। विभिन्न समाजों के अलग-अलग सम्मेलन किए जाएंगे पार्टी के महामंत्री जेपी धनोपिया का कहना है कि नए प्रकोष्ठ का गठन करके विभिन्न समाजों को महत्व देने का काम किया जा रहा है चुनाव के दृष्टिगत सभी स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं पूरे प्रदेश संभाग और जिला स्तर पर बैठक और सम्मेलन भी आयोजित किए जाएंगे इसका दायित्व अनुसूचित जाति और जनजाति विभाग को दिया गया है ।पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव को सामाजिक संगठनों से तालमेल बनाने की जिम्मेदारी भी दी गई है।

  • नए साल में कांग्रेस संगठन में नया बड़ा बदलाव प्रस्तावित?

    नए साल में कांग्रेस संगठन में नया बड़ा बदलाव प्रस्तावित?

    भोपाल // मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए 1 वर्ष से भी कम समय बचा है चुनाव के लिए संगठन को तैयार करने नए साल में मध्यप्रदेश कांग्रेस में व्यापक स्तर पर परिवर्तन होने की संभावना है। प्रदेश से लेकर जिला और ब्लॉक स्तर तक पदाधिकारी बदले जाएंगे । प्रदेश कांग्रेस ने इसकी प्रारंभिक तैयारी कर ली है ,उसमें उन पदाधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर संगठन की जिम्मेदारियों से मुक्त किया जाएगा जिन्हें चुनाव लड़ाया जाना है ,वही निष्क्रिय पदाधिकारियों की छुट्टी की जाएगी इसको लेकर प्रदेश कांग्रेश अध्यक्ष कमल नाथ केंद्रीय संगठन से भी चर्चा कर चुके हैं।

    कांग्रेस में राष्ट्रीय स्तर पर संगठन चुनाव के बाद से ही ब्लॉक स्तर तक पदाधिकारियों की जिम्मेदारी में बदलाव प्रस्तावित है इस को लेकर संगठन ने जिला प्रभारी और सह प्रभारियों के माध्यम से जिला व ब्लॉक इकाइयों के प्रदर्शन पर आधारित रिपोर्ट भी तैयार करवा ली है। कमलनाथ प्रभारियों के साथ बैठक करके जानकारी ले चुके हैं केंद्रीय संगठन ने परिवर्तन के लिए हरी झंडी दे दी है ।अब प्रदेश संगठन की ओर से अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी को प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा उनमें उन पदाधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर संगठन के दायित्व से मुक्त किया जाएगा जो चुनाव लड़ने की इच्छा जता चुके हैं उनके स्थान पर ऐसे नेताओं को मौका दिया जाएगा जो संगठन का काम करना चाहते हैं। जिला प्रभारी और संगठन मंत्री की नियुक्ति में इनका ध्यान रखा गया है।

     प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष व संगठन प्रभारी चंद्र प्रभाष शेखर का कहना है कि नए साल में संगठन स्तर पर परिवर्तन प्रस्तावित है उसको लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष संगठन पदाधिकारियों को तैयारी करने के निर्देश भी दे चुके हैं। जनवरी में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ बैठक करके इसे अंतिम रूप देंगे वहीं कुछ अन्य जिला एवं ब्लाक इकाइयों के अध्यक्ष व अन्य पदाधिकारियों को प्रदर्शन के आधार पर बदला जाना है ग्वालियर चंबल महाकौशल संभाग में परिवर्तन होने की संभावना जताई जा रही है सभी सहयोगी संगठन से कहा गया है कि ऐसे पदाधिकारी जो चुनाव लड़ना चाहते हैं उन्हें काम करने के लिए मुक्त किया जाए ताकि संगठन की गतिविधियां प्रभावित ना हो।