Category: राजनीति

  • क्यों खतरे में हैं भाजपा के सत्तर विधायको की टिकट ?

    क्यों खतरे में हैं भाजपा के सत्तर विधायको की टिकट ?

    भोपाल//  मध्यप्रदेश में इसी साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा संगठन तक जो जमीनी फीडबैक आ रहा है वो परेशान करने वाला है। राज्य के कई दिग्गज नेताओं के लिए यह फीडबैक अच्छा नहीं है। यही कारण है कि तमाम दावेदारों की नींद उड़ी हुई है।

    खबर है कि इस बार भाजपा तीन  ने तीन सर्वे कराए हैं ।पार्टी के सूत्रों के अनुसार एक फीडबैक सर्वे राज्य स्तर पर हो हुआ है जो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के करीबी की एक एजेंसी से  कराया गया है। दूसरा सर्वे केंद्रीय नेतृत्व कराया है। एक गुजराती कंपनी को यह जिम्मा सौंपा गया है। तीसरा फीडबैक सर्वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के जमीनी स्तर पर सक्रिय स्वयंसेवकों के बीच कराया जा रहा है। इन सर्वे के फीडबैक से केन्द्रीय नेतृत्व को भी अवगत कराया है। बताया जाता है कि सर्वे ने भाजपा नेतृृत्व को चिंता में डाल दिया है।

    मीडिया रिपोर्ट पर भरोसा किया जाए तो पांच महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा के सत्तर विधायकों के टिकट पर संकट के बादल छा गए हैं। पार्टी द्वारा कराए गए सर्वे में इन विधायकों का परफार्मेन्स ठीक नहीं आया है। इनमें से कई अपने क्षेत्र में बेहद निष्क्रिय पाए गए हैं। समय रहते विधायकों की छवि में सुधार न हुआ तो इनके टिकट काटे जा सकते हैं। इसके अलावा ख़बर यह भी है कि आधा दर्जन से अधिक विधायकों के टिकट सत्तर की उम्र पार होने के कारण बदले जाएंगे।

     मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान  विधायकों के साथ वन टू वन में उन्हें यह सर्वे रिर्पोट दिखा भी चुके हैं और रिपोर्ट के आधार पर सामने आई कमियों को दूर करने का आग्रह इस चेतावनी के साथ कर चुके हैं कि वक्त है, संभल जाओं वर्ना फिर संभलने का मौका नहीं मिलेगा। संगठन सूत्रों की माने तो करीब तीन दर्जन विधायक ऐसे हैं जो क्षेत्र में पूरी तरह सक्रिय नहीं हैं। इन सालों में इनकी छवि भी पहले जैसी नहीं रही है। बताया जाता है कि सर्वे के दौरान कुछ विधायकों के बारे में जिले के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने ही खुलकर विपरीत टिप्पणियां की हैं । इनमें उप चुनाव जीत कर आए ज्योतिरादित्य सिंधिया  के समर्थक मंत्री और विधायक भी शामिल हैं।

    सत्तर पार पर संकट की चर्चा ?

    भाजपा में इस समय करीब तीन दर्जन से अधिक ऐसे विधायक हैं जो तीन और चार बार से लगातार विधायक हैं। इसके अलावा पांच या उससे अधिक बार के विधायकों की संख्या भी एक दर्जन के करीब है। सूत्रों की माने तो ऐसे विधायक जो चार बार से विधायक हैं और उनकी उम्र सत्तर को पार कर रही है, उनके टिकट कट सकते हैं। संगठन इस बारे में नीति तैयार कर रहा है। इसके अलावा कुछ विधायकों के टिकट काट कर उनके परिजन को चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है। गौरतलब है कि भाजपा के अभी 126 विधायक हैं। प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों में से 148 सामान्य हैं, इसके अलावा 47 अनुसूचित जनजाति और 35 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। सूत्रों की माने तो प्रदेश कार्यसमिति के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, प्रदेश संगठन प्रभारी मुरलीधर राव, प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा, संगठन महामंत्री हितानंद के बीच लंबी मंत्रणा हुई है। इसमें प्रदेश के हर जिले का दौरा कर चुके अजय जामवाल ने भी सीएम को विधायकों को लेकर मिले फीडबैक की जानकारी दी गई, उन्होंने फीडबैक से केन्द्रीय नेतृत्व को भी अवगत कराया है।

    पिछली बार कुछ यूं हुआ था

    भाजपा ने 2018 के विधानसभा चुनावों में पांच मंत्रियों समेत 54 विधायकों के टिकट काटे थे। पिछली बार हुए सर्वे में भी पार्टी के सत्तर विधायकों का प्रर्दशन अच्छा नही माना गया  था। जिन पांच मंत्रियों के टिकट काटे गए थे उनमें कुसुम मेहदेले, डाक्टर गौरीशंकर शेजवार, माया सिंह, सूर्यप्रकाश मीणा और हर्ष सिंह शामिल थे। इनमें शेजवार और हर्ष सिंह के स्थान पर उनके पुत्रों को टिकट दिया गया था।

  • दिग्विजय की सक्रियता से भयभीत है भाजपा ?

    दिग्विजय की सक्रियता से भयभीत है भाजपा ?

    भोपाल // वैसे तो प्रदेश में नबंबर  में होने वाले विधान सभा चुनाव में भाजपा के लिए हिंदुत्व मुख्य मुद्दा है, पर वह पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के कार्यकाल की कमियों को जनता के बीच उजागर करने की भी तैयारी कर रही है और उसे 2003 के दिग्विजय शासन बनाम शिवराज शासन के रूप में पेश करना चाहती है। चुनाव की तैयारी में सब कुछ झोंक देने को आतुर भाजपा ने पिछले दिनों प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में यह लिया गया है । यह निर्णय भाजपा खेमे की घबराहट को दर्शाता है।

    प्रदेश में पिछले 20 साल से भाजपा सत्ता में( इस बार के 18 महीने छोड़ कर) है तो ऐसे में अपनी सरकार की उपलब्धियों पर स्वतंत्र रूप से वोट ना मांग कर शिवराज सरकार की तुलना दिग्विजय सिंह सरकार की कोशिश को क्या कहा जाए?

    राजधानी की राजनीतिक समीक्षकों का मानना है कि अभी तक कमलनाथ के 18 महीने के कार्यकाल को कटघरे में खड़ा कर रही भाजपा का चुनाव के 6 महीने पहले पूर्व मुख्मंयत्री के दो दशक पुराने कार्यकाल को निशाना बनाने का फैसला यूं हीं नहीं है। राजनीतिक पंडितों और भाजपा सूत्रों के आधार पर कहा जा सकता है कि जिस तरह की खबरें आ रही हैं , कि एंटी इंकम्बेंसी के चलते प्रदेश में कांग्रेस सरकार बना सकती है। भाजपा फिलहाल इसकी कोई मजबूत काट नहीं ढूंढ पाई है, और वह अपनी जीत के लिए दिग्विजय सिंह को कारगर मान रही है।

    वैसे तो दिग्विजय सिंह हमेशा से ही भाजपा के निशाने पर रहते आए हैं, क्योंकि आमतौर पर उनकी तल्ख टिप्पणियां भाजपा और आरएसएस को नाराज करती रही हैं। भाजपा उन्हें मि. बंटाधार के रूप में प्रचारित करती रही है। उनके बयान भाजपा को कई बार धार्मिक ध्रुवीकरण करने में मदद कर चुके हैं, जिसका भाजपा चुनाव में फायदा भी उठा कर चुकी है । जानकारों का यह भी कहना है कि दिग्विजय सिंह के पूरे प्रदेश में समर्थक हैं , उनका विरोध करने पर पूरे प्रदेश से प्रतिक्रिया होती है ,जिससे स्थानीय स्तर पर भाजपा के पदाधिकारी व कार्यकर्ता सक्रिय हो जाते हैं।  इस तरह से वे राष्ट्रीय स्तर के नेता का विरोध करने का मौका पाए जाते हैं। इसलिए दिग्विजय का विरोध भाजपा को ज्यादा फायदेमंद लगता है।

    दिग्विजय की सक्रियता से चिंता ?

    इसके अलावा इस बार कांग्रेस आलाकमान लगातार हार रही लगभग 70 सीटों पर फोकस कर रही है और उसमें से लगभग सभी सीटों पर दावेदारी मजबूत करने की जिम्मेदारी दिग्विजय सिंह को दी गई है। दिग्विजय सिंह पूरी सक्रियता के साथ लगातार इन क्षेत्रों में जाकर कार्यकर्ताओं, नेताओं से बात कर जमीनी हकीकत को जान परख रहे  हैं । उनकी इस कोशिश से कार्यकर्ताओं में उत्साह है और अनेक स्थानों पर जहां पार्टी मृत अवस्था में थी वहां भी कुछ सुगबुगाहट नजर आने लगी है। दिग्विजय सिंह के विरोधी भी उनकी नेतृत्व और संगठन क्षमता एहतराम करते रहे हैं। प्रदेश भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को दिग्विजय की सक्रियता ने चिंतित और भयभीत कर दिया है और उन्हें लगता है कि कहीं दिग्विजय की मेहनत भाजपा के सपनों को ध्वस्त न कर दे।  इसीलिए चुनाव में उनका फोकस कमलनाथ से हटकर दिग्विजय पर हो गया है।

    भाजपा की यह कोशिश दिग्विजय के राजनीतिक कौशल को एक तरह से स्वीकार करती लगती है।

  • लगातार हार रही सीटों पर कांग्रेस तीन महीने पहले ही तय कर सकती है उम्मदीवारों के नाम !

    लगातार हार रही सीटों पर कांग्रेस तीन महीने पहले ही तय कर सकती है उम्मदीवारों के नाम !

    भोपाल// साल के अंत में होने वाले चुनाव में कांग्रेस लगातार हार रही सीटों पर फोकस कर रही है अब कांग्रेसमें इस तरह की सीटों पर पहले से उम्मीदवार घोषित करने की समय सीमा तय कर दिया बताया जाता है कि पार्टी लगातर हार रही या कम अंतर से हारी सीटों पर 3 महीने पहले ही उम्मीदवारों के नाम घोषित कर सकती है।

     इसकी वजह यह बताई जा रही है कि इससे उम्मीदवारों को जमीनी स्तर पर काम करने और प्रचार-प्रसार का भरपूर समय मिलेगा। साथ ही पार्टी को यह भी लग रहा है कि इस बार टिकट न मिलने पर कुछ नेता बगावत कर सकते हैं, उन्हें बैठाने, दावेदारी वापस लेने व मनाने के लिए भी पार्टी को वक्त मिलेगा।

    कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ पहले ही सर्वे रिपोर्ट के आधार पर टिकट देने की बात करते रहे हैं। बताया जाता है कि दो सर्वे कराए भी जा चुके हैं और कमलनाथ और दिग्विजय सिंह लगातार विधानसभा क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं और हारी हुई सीटों की जमीनी हकीकत जानने और कार्यकर्ताओं का फीडबैक लेने में लगे हुए हैं।वही आईसीसी द्वारा नियुक्त ऑब्जर्वर भी रिपोर्ट के आधार पर सभी पहलुओं को देखकर पार्टी टिकट का निर्णय करेगी।

    आधार पर तैयार होगी ऑब्जर्वर की रिपोर्ट

    बताया जा रहा है कि पीसीसी अध्यक्ष कमलनाथ के द्वारा दो सर्वे कराए गए हैं। यह सर्वे रिपोर्ट ऑब्जर्वर को सौंप दी गई है। ऑब्जर्वर ऐसे 70 विधानसभा क्षेत्रों की मैदानी स्थिति को देखेंगे । साथ ही सर्वे में जिनके नाम आए हैं उनकी स्थिति जमीनी तौर पर कैसी है? जीत सकते हैं कि नहीं ? जिनके नाम आए हैं उनसे भी चर्चा की जाएगी । इसके अलावा पार्टी के कार्यकर्ता वरिष्ठ नेता और मतदाताओं का रुझान भी लिया जाएगा। ऑब्जर्वर एक विधानसभा में 1 दिन बिताएंगे।

  • सूबे के मंत्रियों को उनके ही क्षेत्रों में घेरेगी कांग्रेस !

    सूबे के मंत्रियों को उनके ही क्षेत्रों में घेरेगी कांग्रेस !

    भोपाल//नवंबर में होने वाले चुनाव के लिए कांग्रेस लगातार रणनीति बना रही है । नई रणनीति के तहत पार्टी की अब भाजपा सरकार के मंत्रियों को उनके निर्वाचन क्षेत्र में ही घेरने की योजना है और इस पूरी कवायद की कमान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के हाथ में होगी। इसमें वरिष्ठ नेता लगातार भाजपा के वरिष्ठ मंत्रियों के क्षेत्रों में जाएंगे और कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे । इसके साथ ही अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक भी इन क्षेत्रों में दौरा करेंगे मंत्रियों के क्षेत्र में एक एक जनसभा भी जल्द आयोजित की जाएगी।

    इस कार्ययोजना की शुरुआत 18 मई से हो सकती है जब कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव के विधानसभा क्षेत्र बदनावर पहुंचेंगे। वहीं दिग्विजय सिंह गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के क्षेत्र दतिया में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के लगातार प्रदेश में जो दौरे हो रहे हैं इन्हें गति दी जाएगी।

    इन पर होगी खास नजर

    प्रदेश कांग्रेस ने चुनाव अभियान कीइस घेराबंदी की अभी जो कार्ययोजना बनाई है उसमें जिन मंत्रियों की घेराबंदी को प्राथमिकता से राहत रखा गया है उसमें गोविंद सिंह राजपूत ,तुलसीराम सिलावट, प्रद्युम्न सिंह तोमर सहित वह मंत्री भी शामिल है जो कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए थे । इसके अलावा डॉ नरोत्तम मिश्रा, भूपेंद्र सिंह, कमल पटेल ,अरविंद भदौरिया, विश्वास सारंग के निर्वाचन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान रखा जाएगा।

    दतिया खुरई क्षेत्र में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को झूठे मामलों में फंसाकर प्रताड़ित करने के सर्वाधिक मामले हैं। कमल पटेल और अरविंद भदौरिया किसान कर्ज माफी को लेकर कांग्रेस पर लगातार हमले करते रहे हैं। तो विश्वास सारंग पार्टी के नेताओं के निशाने पर हैं। पार्टी के सभी सहयोगी संगठनों से कहा गया है कि वह मंत्रियों के क्षेत्र में मतदान केंद्र स्तर पर मतदाताओं से संपर्क कर इस कार्यक्रम को गति दे। मतदाता सूची का सत्यापन कराएं ।

    प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष केके मिश्रा ने बताया कि प्रमाणित जानकारियों के साथ भ्रष्टाचार ,कुशासन और कुप्रबंधन को लेकर अपनी बात जनता के सामने रखेंगे मंत्रियों को लेकर उनके क्षेत्र में नाराजगी है हम इसके आधार पर उन्हें वही घेरेंगे .

  • भाजपा पहली बार जिलों में नियुक्त करेगी प्रवक्ता

    भाजपा पहली बार जिलों में नियुक्त करेगी प्रवक्ता

    भोपाल// भारतीय जनता पार्टी आगामी चुनाव को लेकर अपनी बात जनता तक पहुंचाने के लिए अब प्रत्येक जिले में प्रवक्ता नियुक्त करेगी। यह पहली बार होगा अभी सभी जिलों में मीडिया प्रभारी और सह मीडिया प्रभारी है लेकिन जिला प्रवक्ता नहीं है। गुरुवार को प्रदेश कार्यालय में आयोजित मीडिया विभाग की प्रदेश स्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया है। बैठक को पार्टी के प्रदेश प्रभारी मुरलीधर राव प्रदेश । अध्यक्ष एवं सांसद विष्णु दत्त शर्मा एवं प्रदेश संगठन मंत्री हितानंद ने संबोधित किया।

     बैठक में जिला प्रवक्ता ना होने की बात कही गई जिसमें सभी ने एक सुर से कहा कि विधानसभा चुनाव नजदीक होने के नाते पार्टी को प्रत्येक जिले में प्रवक्ता नियुक्त करने चाहिए जिससे कि पार्टी और संगठन के कार्यों की जानकारी मीडिया तक पहुंचा जा सके । इसको लेकर वरिष्ठ नेताओं ने सहमति जताई और जल्दी ही इनकी नियुक्ति करने की बात कहते हुए इसकी जवाबदारी प्रदेश मीडिया विभाग को सौंपी गई है।

     मुरलीधर राव ने कहा कि पार्टी अब चुनाव मोड में आ गई है इन चुनाव के लिए पार्टी ने अपने लक्ष्य किए हैं इनमें से एक 200 से ज्यादा सीटें हासिल करना दूसरा 51% वोट शेयर हासिल करना है। यह मीडिया विभाग की जिम्मेदारी है कि वह अपने स्तर पर पार्टी को इन लक्ष्य तक पहुंचाने के काम में सहभागी बने।

     प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने कहा कि मीडिया विभाग की छवि उसके चेहरे को उभारता है।  जनता में पार्टी के प्रति धारणा बनाता है। उन्होंने कहा कि विरोधियों द्वारा फैलाए जा रहे झूठ को बेनकाब करना उनके, दुष्प्रचार और हथकंडे को पहचानना तथा डर्टी पॉलिटिक्स को पूरी ताकत से जवाब देना भी मीडिया विभाग की जिम्मेदारी है।

     नवनियुक्त प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने नई जिम्मेदारी के लिए संगठन का धन्यवाद करते हुए कहा कि  नवाचार पार्टी मीडिया टीम की प्राथमिकता रहेगी।

  • आदिवासी सीटों पर गैर राजनीतिक चेहरों की तलाश में है कांग्रेस ?

    आदिवासी सीटों पर गैर राजनीतिक चेहरों की तलाश में है कांग्रेस ?

    भोपाल// नए राजनीतिक समीकरणों और नगरीय निकायों के अनुभव को देखते हुए नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस आदिवासी क्षेत्रों में नए चेहरे की तलाश कर रही है। पार्टी ने वरिष्ठ नेताओं को आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में ऐसे नए चेहरों को खोजने को कहा है जो राजनीतिक पृष्ठभूमि से ना आते हो पर सामाजिक तौर पर सक्रिय हों । कांग्रेस पिछली बार की तरह इस बार भी आदिवासी वर्ग की ज्यादा से ज्यादा सीट जीतने पर फोकस कर रही है।

    2018 में जब डेढ़ दशक बाद कांग्रेस ने सत्ता में वापसी की थी तो उसका एक बड़ा कारण आदिवासी वर्ग का कांग्रेस को समर्थन मिलना था। कांग्रेस ने 47 आदिवासी सीटों में से 30 पर जीत हासिल की थी। पार्टी इस प्रदर्शन को फिर दोहराना चाहती है । दरअसल नगरीय निकाय चुनाव में पार्टी ने महापौर पद के लिए कई नए चेहरों को आजमाया था और उसके परिणाम भी सुखद रहे थे । पहली बार था कि कांग्रेस के 5 महापौर चुने गए । इस बार कांग्रेस द्वारा चुनावों में  जीत सुनिश्चित करने के लिए हर संभावनाओं पर काम किया जा रहा है । यही कारण है कि कांग्रेस ने 50 फ़ीसदीसीटों पर  प्रत्याशी के रूप में युवा ,अनुसूचित जाति जनजाति, पिछड़ा वर्ग और महिलाओं को मैदान में उतारने की योजना बनाई है। वरिष्ठ नेताओं के अलावा सभी सहयोगी संगठनों, हर क्षेत्र के विशेषज्ञ गणमान्य और प्रभावशाली लोगों से सुझाव लिए जा रहे हैं । इतना ही नहीं सेवानिवृत्त अधिकारियों और आदिवासी क्षेत्रों में काम करने वाले एनजीओ की मदद से उन व्यक्तियों की जानकारी जुटाई जा रही है जो चाहे राजनीतिक पृष्ठभूमि से ना हो सामाजिक रूप से सक्रिय और प्रतिष्ठित हो । इसमें सेवानिवृत्त अधिकारी ही नहीं वर्तमान अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं।

    विगत चुनाव में जय युवा आदिवासी शक्ति संगठन (जयस) के संरक्षक डॉ हीरालाल अलावा को चुनाव लड़या था वह जीते थे । कांग्रेस ने 114 सीटें जीती थी जिनमें से 49 विधायक आरक्षित सीटों पर जीते थे। इसके बाद निकाय चुनाव में छिंदवाड़ा से विक्रम अहाके को महापौर पद के लिए मैदान में  उतारा था वह भी जीते। इसी को  कांग्रेस फिर दोहराना चाहती है।

    जयस की गतिविधियों पर दोनों पार्टी की नजर

    इधर दोनों ही राजनीतिक दल जय युवा आदिवासी शक्ति संगठन (जयस ) की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं । जयस ने 80 विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्याशी उतारने की घोषणा की है। जाहिर है कि आदिवासी वोटों के बंटवारे का नुकसान दोनों दलों को होगा, क्योंकि 47 में से 30 सीटें अभी कांग्रेस के पास हैं, कांग्रेस इसमें कमी आने नहीं देना चाहती है। वहीं भाजपा ने भी आदिवासी क्षेत्रों में अपनी गतिविधि बढ़ाई है । शिवराज सरकार ने पेसा कानून लागू करके यह संदेश देने का काम किया है कि वह आदिवासी वर्ग की सबसे बड़ी हितेषी है।

  • अब कांग्रेस की नज़र भाजपा के असंतुष्टों पर ?

    अब कांग्रेस की नज़र भाजपा के असंतुष्टों पर ?

    पार्टी में शामिल कराने का होगा प्रयास

    भोपाल//इन दिनों प्रदेशमें भाजपा के आंतरिक सर्वे और फीडबैक की काफी चर्चा है बताया जाता है कि इस पूरी कवायद में भाजपा के कार्यकर्ताओं के असंतुष्ट होने की बात सबसे मुखर होकर सामने आई है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता अपनी उपेक्षा से काफी नाराज हैं। एक और भाजपा इन असंतुष्ट नेताओं कार्यकर्ताओं से बात कर और उनकी मान मनौव्वल कर डैमेज कंट्रोल में जुटी हुई है। वरिष्ठ नेता अलग-अलग जिलों में ऐसे कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ बैठकें और अलग-अलग चर्चा भी कर रहे हैं। वही कांग्रेस की नजर इन असंतुष्ट नेताओं पर है । कांग्रेस इसे  एक अवसर के रूप में देख रही है ।क्योंकि कांग्रेस इस चुनाव के लिए हर वो प्रयास करती नज़र आ रही है जो उसकी जीत की संभावनाओं को मजबूत करता हो।

    खबर है कि कांग्रेस ने पार्टी के 16 वरिष्ठ नेताओं को भाजपा के इसी तरह के असंतुष्ट नेताओं से संपर्क करने की क्षेत्रवार जिम्मेदारी सौंपी है।  कांग्रेस ने यह भी तय किया है कि भाजपा के जिन नेताओं और कार्यकर्ताओं का जनाधार मजबूत है उन्हें बडे़ आयोजन कर कांग्रेस में शामिल करने का प्रयास किया जाए।

    कांग्रेस ने चुनाव अभियान की जो कार्ययोजना बनाई है उसमें भाजपा के असंतुष्ट नेताओं से संपर्क करना भी शामिल है । प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ सहित अन्य नेता लगातार दावा कर रहे हैं कि भाजपा के कई नेता उनके संपर्क में है और जिन्हें समय आने पर पार्टी में शामिल किया जाएगा।

    पिछले माह निमाड़ क्षेत्र में असर रखने वाले भाजपा के पूर्व सांसद माखन सिंह सोलंकी को पूर्व मंत्री दिग्विजय सिंह और मुंगावली के पूर्व विधायक राव देशराज सिंह यादव के पुत्र यादवेंद्र यादव को कमलनाथ की उपस्थिति में कांग्रेस की सदस्यता दिलाई गई थी विंध्य क्षेत्र में प्रभाव रखने वाली बसा पार्क से पूर्व विधायक शीला त्यागी भी कांग्रेस में शामिल हो चुकी हैं। वही नर्मदापुरम ( होशंगाबाद) जिले  में भाजपा के एक पूर्व विधायक के कांग्रेस में शामिल होने की भी जोर शोर से चर्चा है।

    लाल पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी कांतिलाल भूरिया अरुण यादव, अजय सिंह  , नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर गोविंद सिंह, नटराजन मीनाक्षी नटराजन बाला बच्चन सज्जन सिंह वर्मा जीतू पटवारी तरुण भनोट कमलेश्वर पटेल जयवर्धन सिंह लाखन सिंह यादव रामनिवास रावत फूल सिंह बरैया और केपी सिंह को जिम्मेदारी दी गई है कि वह आवंटित जिलों में भाजपा के असंतुष्ट नेताओं से संपर्क करें।

  • अब कांग्रेस चलाएगी पूरे प्रदेश में परिवर्तन संकल्प अभियान

    अब कांग्रेस चलाएगी पूरे प्रदेश में परिवर्तन संकल्प अभियान

    वरिष्ठ नेता करेंगें सभी विधान सभा सीटों का भ्रमण, कार्यकर्ताओं और आमजन को दिलाएंगे भाजपा के कुशासन और भ्रष्टाचार से मुक्ति का संकल्प।

    भोपाल//  छह महीने बाद होने वाले  विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में परिवर्तन संकल्प अभियान चलाएगी। इसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता भ्रमण कर कार्यकर्ताओं के साथ आमजन को भाजपा के 18 साल के कथित कुशासन और भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाने के लिए संकल्प दिलाएंगे।

    हर विधानसभा में होगी जनसभा

    मंडल, सेक्टर और बूथ कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की जाएंगी। तत्कालीन कांग्रेस सरकार की उपलब्धि और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ द्वारा सरकार बनने पर किए जाने वाले कार्यों को लेकर जो घोषणाएं की गई हैं, उन्हें प्रचारित किया जाएगा। पार्टी के निष्क्रिय कार्यकर्ताओं से संपर्क कर उन्हें सक्रिय करने और सरकार द्वारा प्रताड़ित कार्यकर्ताओं की जानकारी भी जुटाई जाएगी। प्रत्येक विधानसभा में एक जनसभा होगी।

    आभियान खाका है तैयार,
    बूथ प्रबंधन पर होगा पूरा जोर

    प्रदेश कांग्रेस ने चुनाव अभियान को लेकर कार्ययोजना तैयार की है। इसमें सर्वाधिक जोर बूथ प्रबंधन पर रहेगा। वरिष्ठ नेता बूथ, मंडलम और सेक्टर समितियों के साथ ही सभी सहयोगी संगठनों द्वारा मतदान केंद्र स्तर पर की जा रही तैयारियों की समीक्षा करेंगे। विधानसभा क्षेत्र के जातीय और सामाजिक समीकरणों को देखते हुए प्रभावशाली लोगों से संपर्क करके उनकी अपेक्षाएं जानी जाएंगी। कार्यकर्ताओं के साथ सरकार के इशारे पर दर्ज हो रहे झूठे प्रकरणों की सूची तैयार की जाएगी।

    नेता करेंगें विधानसभा क्षेत्रों में रात्रि विश्राम

    परिवर्तन संकल्प अभियान के दौरान वरिष्ठ नेताओं का रात्रि विश्राम भी विधानसभा क्षेत्रों में होगा। इस दौरान वे पार्टी के नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक करके बूथ प्रबंधंन पर चर्चा करेंगे। सामूहिक भोज होगा, जिसमें सभी सहयोगी संगठनों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा।

    किसान कर्जमाफी और बिजली की दरों में कमी की दिलाई जाएगी याद

    पार्टी ने तय किया है कि मतदाताओं को तत्कालीन कमल नाथ सरकार के समय हुई किसान कर्जमाफी और बिजली की दरों में कमी याद दिलाई जाएगी। आदिवासी क्षेत्र में साहूकारी ऋण से मुक्ति, धार्मिक स्थलों के विकास के साथ अन्य योजनाओं के बारे में बताया जाएगा। साथ ही सरकार में आने पर महिलाओं को डेढ़ हजार रुपये महीना सम्मान निधि, पांच सौ रुपये में रसोई गैस सिलेंडर, पुरानी पेंशन की बहाली करने सहित जो अन्य वचन दिए गए हैं, उनका प्रचार-प्रसार किया जाएगा।

    16 स्थानों पर होंगी बड़ी सभाएं

    विधानसभा क्षेत्रों में होने वाली सभाओं में प्रमुख स्थानों पर पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। प्रदेश के बुंदेलखंड, विंध्य, महाकोशल, मालवा-निमाड़ क्षेत्र के 16 स्थानों पर बड़ी सभाएं होंगी।

  • दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस संगठन  को लेकर दिया बड़ा बयान ?

    दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस संगठन को लेकर दिया बड़ा बयान ?

    भोपाल// प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रीऔर वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने चुनाव से पहले  कांग्रेस संगठन की स्थिति को लेकर एक बड़ा बयान दिया है । दिग्विजय सिंह ने कहा कि लोग कांग्रेस को वोट देना चाहते हैं लेकिन हमें स्वीकारने में जरा भी एतराज नहीं है कि हमारा संगठन ही कमजोर है। चुनाव वाले दिन बूथ मैनेजमेंट पर हम असफल रहते हैं, उस प्रकार की तैयारी हमारी नहीं रहती जैसी होना चाहिए। हम संगठन की कमी की वजह से इसे पूरा नहीं कर पाते हैं। हमारा संगठन संगठन जैसा होना चाहिए वैसा नहीं है। लेकिन अब कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ ने बूथ मैनेजमेंट को लेकर रणनीति बनाई है। पूरे प्रदेश की विधानसभा सीटों को सही तरीके से सेक्टर मंडलम में बांटा है।  प्रदेश में हारी हुई विधानसभा सीटों पर दौरा कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी और यह रिपोर्ट कमलनाथ को सौंपी जाएगी।

    पिछ्ले दिनों सीहोर में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा की कमलनाथ ने उन्हें प्रदेश की 66 सीटों की जिम्मेदारी दी है ।जहां से कांग्रेसी हारती आई है  उनमें से अब तक वह 23 विधानसभा सीटों पर जाकर पार्टी पदाधिकारी संगठन के साथ बैठकर कर चुके हैं।

    श्री सिंह ने कहा कि कांग्रेसी कार्यकर्ता पूरी तरह से एकजुट है और चुनाव के लिए जमीनी स्तर पर कार्य कर रहा है। इस बार कांग्रेस की सरकार मध्यप्रदेश में बनेगी।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में 2018 में हुए चुनाव में कांग्रेस की सरकार बन गई थी लेकिन कुछ लोग गए जो गरीब विधायक थे वे नहीं बिके लेकिन जो राजा महाराजा टाइप के लोग थे में बिक गए इसलिए सरकार चली गई।

  • लगातार हार रही सीटों पर पहले ही प्रत्याशी घोषित करेगी कांग्रेस ?

    लगातार हार रही सीटों पर पहले ही प्रत्याशी घोषित करेगी कांग्रेस ?

    भोपाल// सूबे में इस बार  कांग्रेस विधानसभा चुनाव की तैयारी में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है,  कांग्रेस भाजपा के गढ़ माने जाने वाली सीटों पर ज्यादा ध्यान देने के मूड है, विशेष रूप से तीन बार से ज्यादा हारी सीटों को वापस लेने की रणनीति  बनाने में जुटी हुई है ।

    बताया जाता है कि जिन सीटों पर कांग्रेस लगातार हार रही है वहां पुराने चेहरों के बजाय नए चेहरों को टिकट देने की रणनीति अपनाई जा सकती है । खबरों के मुताबिक लगातार हार रही सीटों के लिए स्थानीय संगठन से जीत की रणनीति और योजना बनाने को कहा गया है। पार्टी सर्वे पर ज्यादा जोर दे रही है। इसके अलावा एआईसीसी के सचिवों को स्थानीय संगठनों से चर्चा करने कीऔर फीडबैक लेने जिम्मेदारी दी गई है।साथ ही टिकिट देने में स्थानीय संगठन की भूमिका बढ़ाने की ओर से सुनाई दे रही है। स्थानीय संगठन  जिसके साथ होगा टिकट में उसे प्राथमिकता मिलेगी। कहा जा रहा है कि चुनाव लड़ने के लिए बाहरी नेता नहीं होगा । 

    इस बात को लेकर भी पार्टी के भीतर विचार विमर्श चल रहा है कि कांग्रेस कमजोर सीटों यानी जहां पिछले 5-6 बार से लगातार रही है उन सीटों पर पहले से ही प्रत्याशियों की घोषणा कर दी जाए।