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  • आदिवासी सीटों पर गैर राजनीतिक चेहरों की तलाश में है कांग्रेस ?

    आदिवासी सीटों पर गैर राजनीतिक चेहरों की तलाश में है कांग्रेस ?

    भोपाल// नए राजनीतिक समीकरणों और नगरीय निकायों के अनुभव को देखते हुए नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस आदिवासी क्षेत्रों में नए चेहरे की तलाश कर रही है। पार्टी ने वरिष्ठ नेताओं को आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में ऐसे नए चेहरों को खोजने को कहा है जो राजनीतिक पृष्ठभूमि से ना आते हो पर सामाजिक तौर पर सक्रिय हों । कांग्रेस पिछली बार की तरह इस बार भी आदिवासी वर्ग की ज्यादा से ज्यादा सीट जीतने पर फोकस कर रही है।

    2018 में जब डेढ़ दशक बाद कांग्रेस ने सत्ता में वापसी की थी तो उसका एक बड़ा कारण आदिवासी वर्ग का कांग्रेस को समर्थन मिलना था। कांग्रेस ने 47 आदिवासी सीटों में से 30 पर जीत हासिल की थी। पार्टी इस प्रदर्शन को फिर दोहराना चाहती है । दरअसल नगरीय निकाय चुनाव में पार्टी ने महापौर पद के लिए कई नए चेहरों को आजमाया था और उसके परिणाम भी सुखद रहे थे । पहली बार था कि कांग्रेस के 5 महापौर चुने गए । इस बार कांग्रेस द्वारा चुनावों में  जीत सुनिश्चित करने के लिए हर संभावनाओं पर काम किया जा रहा है । यही कारण है कि कांग्रेस ने 50 फ़ीसदीसीटों पर  प्रत्याशी के रूप में युवा ,अनुसूचित जाति जनजाति, पिछड़ा वर्ग और महिलाओं को मैदान में उतारने की योजना बनाई है। वरिष्ठ नेताओं के अलावा सभी सहयोगी संगठनों, हर क्षेत्र के विशेषज्ञ गणमान्य और प्रभावशाली लोगों से सुझाव लिए जा रहे हैं । इतना ही नहीं सेवानिवृत्त अधिकारियों और आदिवासी क्षेत्रों में काम करने वाले एनजीओ की मदद से उन व्यक्तियों की जानकारी जुटाई जा रही है जो चाहे राजनीतिक पृष्ठभूमि से ना हो सामाजिक रूप से सक्रिय और प्रतिष्ठित हो । इसमें सेवानिवृत्त अधिकारी ही नहीं वर्तमान अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं।

    विगत चुनाव में जय युवा आदिवासी शक्ति संगठन (जयस) के संरक्षक डॉ हीरालाल अलावा को चुनाव लड़या था वह जीते थे । कांग्रेस ने 114 सीटें जीती थी जिनमें से 49 विधायक आरक्षित सीटों पर जीते थे। इसके बाद निकाय चुनाव में छिंदवाड़ा से विक्रम अहाके को महापौर पद के लिए मैदान में  उतारा था वह भी जीते। इसी को  कांग्रेस फिर दोहराना चाहती है।

    जयस की गतिविधियों पर दोनों पार्टी की नजर

    इधर दोनों ही राजनीतिक दल जय युवा आदिवासी शक्ति संगठन (जयस ) की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं । जयस ने 80 विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्याशी उतारने की घोषणा की है। जाहिर है कि आदिवासी वोटों के बंटवारे का नुकसान दोनों दलों को होगा, क्योंकि 47 में से 30 सीटें अभी कांग्रेस के पास हैं, कांग्रेस इसमें कमी आने नहीं देना चाहती है। वहीं भाजपा ने भी आदिवासी क्षेत्रों में अपनी गतिविधि बढ़ाई है । शिवराज सरकार ने पेसा कानून लागू करके यह संदेश देने का काम किया है कि वह आदिवासी वर्ग की सबसे बड़ी हितेषी है।

  • जासूसी के आरोप में डीआरडीओ का वैज्ञानिक गिरफ्तार, पाकिस्तानी महिला को गुप्त सूचना देंने का आरोप

    जासूसी के आरोप में डीआरडीओ का वैज्ञानिक गिरफ्तार, पाकिस्तानी महिला को गुप्त सूचना देंने का आरोप

    मुंबई। महाराष्ट्र एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) की टीम ने पाकिस्तानी महिला को गुप्त सूचना देने वाले पुणे डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गनाइनेशन (डीआरडीओ) के अधिकारी प्रदीप कुरुलकर को गिरफ्तार कर लिया है। प्रदीप कुरुलकर पर आरोप है कि उन्होंने हनीट्रैप में फंसकर भारतीय सुरक्षा से संबंधित जानकारी पाकिस्तानी महिला को दी है। इस मामले की गहन छानबीन एटीएस की टीम कर रही है।

    जानकारी के अनुसार, प्रदीप कुरुलकर पाकिस्तान इंटेलिजेंस ऑपरेटिव्स (पीआईओ) के एक महिला के संपर्क में थे। सोशल मीडिया पर महिलाओं की तस्वीरों से पाकिस्तान के एजेंट ने उसे फंसाया। वह पिछले साल सितंबर-अक्टूबर से पाकिस्तानी एजेंट के कांटेक्ट में था।उन्होंने पुणे स्थित कार्यालय से सोशल मीडिया और वाट्सएप के माध्यम से वॉयस मैसेज और वीडियो कॉल के माध्यम से पाकिस्तानी जासूस के साथ सूचनाओं का आदान-प्रदान किया था। साथ ही कुरुलकर ने अपने पद का गलत इस्तेमाल करते हुए संवेदनशील सरकारी सूचनाएं पाकिस्तान को मुहैया कराईं थी। इस मामले में उन्हें एटीएस ने गिरफ्तार किया है।

    पुलिस का कहना है कि यह हनीट्रैप का मामला प्रतीत हो रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर महिलाओं की फोटो का इस्तेमाल कर उन्हें फंसाया गया। प्रदीप कुरुलकर के रिटायरमेंट के छह महीने बचे थे।

    सोशल मीडिया पर महिलाओं की तस्वीरों से पाकिस्तान के एजेंट ने उसे फंसाया। वह पिछले साल सितंबर-अक्टूबर से पाकिस्तानी एजेंट के कांटेक्ट में था।

  • कौन से शहर के लोग हैं सबसे ज्यादा भुलक्कड़? ऐसे भी जो  कैब में भूल जाते हैं टीवी से लेकर कमोड तक ?

    कौन से शहर के लोग हैं सबसे ज्यादा भुलक्कड़? ऐसे भी जो कैब में भूल जाते हैं टीवी से लेकर कमोड तक ?

    नई दिल्ली // पिछ्ले दिनों ऊबर ने अपने लोस्ट एण्ड फाउन्ड इन्डैक्स के 2023 संस्करण को जारी किया है, जो सबसे ज़्यादा भूले जाने वाले आइटमों, सबसे ज़्यादा भूलने वाले शहरों और सप्ताह के उन दिनों एवं साल के उस समय के बारे में रोचक जानकारी देता है।

    क्या आप जानते है कि देश में किस शहर के लोग सबसे ज्यादा भुलक्कड़ हैं। कैब प्रोवाइडर ऊबर की लॉस्ट एण्ड फाउन्ड इन्डैक्स 2023 रिपोर्ट इस बारे में रोचक जानकारी देती है । इस रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के लोग सबसे ज्यादा भुलक्कड़ है, वह सूची में पहले नम्बर पर है,जबकि मुंबई दूसरे नम्बर पर, हैदराबाद तीसरे और बेंगलुरु चौथे स्थान पर है। यह रिपोर्ट ऊबर के कैब में सामान भूलने के आधार पर तैयार की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल के दौरान देश भर में ऐसे मामले सबसे ज़्यादा पाए गए जब ऊबर में बैठने वाले लोग अपने फोन, बैग, वॉलेट और कपड़ों जैसे आइटम कैब में ही भूल गए, इसके अलावा उपयोगी सामान जैसे पानी की बोतल, चाबी और एक्सेसरीज़ जैसे चश्मा, ज्वैलरी आदि भूलने के मामले भी अधिक संख्या में पाए गए।  लोग अजीब-अजीब चीज़ें कैब में ही छोड़ कर चले गए जैसे झाड़ू, कॉलेज का एडमिट कार्ड या अपने बच्चे का स्ट्रोलर। एक राइडर तो अपनी छड़ी भूल कर चला गया, वहीं एक और राइडर अपना बड़ी स्क्रीन वाला टेलीविजन ही कैब में छोड़ गया।

    शानिवार को लोग सबसे ज्यादा भूले सामान
    इतना ही नहीं यह रिपोर्ट भूलने वाले दिन, समय और रंग के बारे में भी रोचक जानकारी देती है जैसे यह  बताती है कि  लोग सबसे ज़्यादा शनिवार के दिन अपनी चीज़ें कैब में भूलते हैं। इसके बाद रविवार और शुक्रवार का नंबर आता है। मार्च और अप्रैल में लोग ज्यादा भूलते हैं।
      फोन की बात करें तो ऊबर में आईफोन की तुलना में 3 गुना एंड्रोइड फोन भूले गए।   लोगों ने ऊबर में सबसे ज़्यादा रैड कलर के आइटम छोड़े।  शाम के समय तकरीबन 7 बजे के आस-पास लोग सबसे ज़्यादा चीज़ें भूलकर चले गए।

    10 सबसे अजीब चीज़ें जिन्हें राइडर ऊबर में ही भूल कर चले गए
    इस सूची में    टीवी ,वेस्टर्न कमोड,   3 पैकेट दूध और पर्दे,  झाडू ,कॉलेज का एडमिट कार्ड ,छड़ी, इंडक्शन स्टोव, फैमिली कोलाज,हैवी मशीनरी, प्रिंटेड ‘दुपट्टा (स्कार्फ)

    10 सबसे ज़्यादा भूले जाने वाले आइटमों में     फोन, लैपटॉप बैग.वॉलेट,कपड़े,हैडफोन,पानी की बोतल, चश्मा/ सनग्लासेज़, चाबी, ज्वैलरी,घड़ी

    5 रंग के आइटम जो सबसे ज़्यादा भूले जाते हैं    लाल,  नीला, पीला, रोज़, गुलाबी

    उबर के डायरेक्टर (सेंट्रल ऑपरेशंस) नितीश भूषण ने बताया कि इस सालाना सर्वेक्षण के परिणाम बेहद दिलचस्प हैं, जो बताते हैं कि लोग किस तरह का सामान कैब्स में भूलकर चले जाते हैं और कैसे ऐप में ही दिए गए विकल्पों की मदद से उन्हें अपना यह सामान सुरक्षित वापस भी मिल सकता है। उन्होंने कहा कि गर्मियों का सीजन सबसे व्यस्त ट्रैवल सीजन माना जाता है, ऐसे में यह इस रिपोर्ट को जारी करने और इसके माध्यम से लोगों को अलर्ट और अवेयर करने का सबसे अच्छा समय है।

  • भारतीय पत्रकारिता संकट में ? प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में भारत की रेंकिंग गिरी, 161 स्थान पर पहुंचा .

    नई दिल्ली // विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बुधवार (3 मई) को वैश्विक मीडिया निगरानी संस्था ‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स’ (RSF- Reporters sans frontières) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित की. फ्रांस आधारित यह एनजीओ दुनियाभर के देशों में प्रेस की स्वतंत्रता पर हर वर्ष रिपोर्ट प्रकाशित करती है. रिपोर्ट में विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक (World Press Freedom Index) में भारत की स्थिति पर चिंता जताई गई है . आरएसएफ की रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 के विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत 11 पायदान गिरकर 161वें स्थान पर पहुंच गया. रिपोर्ट में 31 देशों की स्थिति पत्रकारिता के लिए क्रिटिकल (गंभीर ) बताई गई है ,इसमें भारत भी शामिल है .

    रिपोर्ट्स विदाउट बोर्डर्स द्वारा जारी इस रिपोर्ट्स में चेतावनी दी गई है की फेक न्यूज़ का खतरा तेजी से बढ़ा है सरकारी दमन की स्थिति और भी चिंतनीय हो गई है  संयुक्त राष्ट्र के अनुसार दुनिया के 85% लोग उन देशों में रहते हैं जहाँ प्रेस फ्रीडम में गिरावट आई है .

    मीडिया स्वतंत्रता के मामले में टॉप पांच देशों में नार्वे ,आयरलेंड ,डेनमार्क ,स्वीडन और फिनलेंड हैं ,वहीं सबसे ख़राब स्थिति तानाशाह किम जोंग उन के देश उत्तरी कोरिया की है ,वह 180 वें स्थान पर है ,ठीक वैसी ही स्थिति चीन की है उसकी रैंक 179 वीं है.

    पिछले साल इंडेक्स में इस नंबर पर था भारत

    आरएसएफ ने पिछले साल 180 देशों के एक सर्वेक्षण में भारत को 150वां स्थान दिया था. आरएसएफ की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘तीन देशों- ताजिकिस्तान (एक स्थान गिरकर 153वें स्थान पर), भारत (11 स्थान गिरकर 161वें स्थान पर) और तुर्किये (16 स्थान गिरकर 165वें स्थान पर) में स्थिति ‘समस्याग्रस्त’ से ‘बहुत खराब’ हो गई है.’’ रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘अन्य स्थिति जो सूचना के मुक्त प्रवाह को खतरनाक रूप से प्रतिबंधित करती है, वह नेताओं के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखने वाले कुलीन वर्गों की ओर से मीडिया संस्थानों का अधिग्रहण है.’’

    यह रैंकिंग पांच व्यापक श्रेणियों राजनैतिक ,विधायी ,आर्थिक,सामाजिक और पत्रकारों की सुरक्षा जैसे संकेतकों के प्रदर्शन पर आधारित होती है . इसमें भारत की रेंकिंग पत्रकारों को सुरक्षा श्रेणी में सबसे कम (172) व् सामाजिक श्रेणी में सर्वाधिक (143) रही .भारत में इस साल अब तक एक पत्रकार की हत्या हुई और दस को हिरासत में लिया गया .

    मीडिया संगठनों ने जताई चिंता

    इंडियन वुमन्स प्रेस कोर, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया और प्रेस एसोसिएशन ने सूचकांक में देश के स्थान में गिरावट पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए एक संयुक्त बयान जारी किया. संयुक्त बयान में कहा गया है, ‘‘आरएसएफ की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत सहित कई देशों में प्रेस स्वतंत्रता के सूचकांक खराब हुए हैं.’’

    बयान में कहा गया, ‘‘ग्लोबल साउथ में विकासशील लोकतंत्रों के लिए जहां असमानता की गहरी खाई मौजूद है, मीडिया की भूमिका को कम करके नहीं आंका जा सकता है. इसी तरह अनुबंध (Contract) पर बहाली जैसी अस्थिर कामकाजी परिस्थितियां भी प्रेस की स्वतंत्रता के समक्ष चुनौतियां हैं. असुरक्षित कामकाजी परिस्थितियां कभी भी स्वतंत्र प्रेस में योगदान नहीं दे सकतीं.’’

    हम सभी के लिए शर्म से सिर झुकने समय- शशि थरूर 

    कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत के स्थान में गिरावट को लेकर टिप्पणी की. उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘हम सभी के लिए शर्म से सिर झुकने समय: विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में भारत 180 देशों में 161वें स्थान पर पहुंचा.’’

  • एक ट्रेनिंग स्कूल जहाँ 15 मिनट में एटीएम तोड़ना सिखाया जाता है ?

    एक ट्रेनिंग स्कूल जहाँ 15 मिनट में एटीएम तोड़ना सिखाया जाता है ?

    लखनऊ  //  बिहार के छपरा जिले में एक “स्टार्टअप” है जो बेरोजगार युवाओं को 15 मिनट में एटीएम तोड़ने का प्रशिक्षण दे रहा है.. यह स्टार्टअप सुधीर मिश्रा नाम का एक  एक युवक चला रहा है .

    यह खुलासा किया लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाना क्षेत्र में एक एटीएम से कथित रूप से 39.58 लाख रुपये चोरी करने के आरोप में चार युवकों को गिरफ्तार किए जाने के बाद हुआ है ।

    हालांकि पुलिस ने उनके कब्जे से 9.13 लाख रुपये बरामद किए हैं,  और अब पुलिस इस अखिल भारतीय गिरोह के सरगना मिश्रा को गिरफ्तार करने में जुट गई है

    तीन महीने का क्रेश कोर्स ?

    पुलिस सूत्रों के मुताबिक़ मिश्रा विभिन्न राज्यों से बेरोजगार युवाओं को छपरा लता है और उन्हें एटीएम तोड़ने का तीन महीने का क्रैश कोर्स दिया जाता है. इस दौरान उन्हें सिखाया जाता है कि कैसे तेजी से एटीएम में प्रवेश किया जाए, एटीएम बूथ की कांच की दीवारों पर और कैमरे पर अपनी पहचान छिपाने के लिए मिस्टी लिक्विड स्प्रे किया जाए और एटीएम के कैश बॉक्स को काटकर 15 मिनट के अंदर कैसे फरार हुआ जाय ।

    प्रशिक्षण के बाद 15 दिन का लाइव डेमोस्ट्रेशन भी कराया जाता है। अधिकारी ने बताया कि “15 मिनट या उससे कम समय में कार्य पूरा करने वाले सदस्यों को ही फील्ड पर भेजा जाता है।”

    ऐसे हत्थे चढ़े आरोपी

    एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एटीएम चोरी के आरोपियों का पता लगाने के लिए यूपी पुलिस ने 1,000 सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल डेटा और लखनऊ के आसपास के 20 से अधिक टोलों की जांच की। “जांच के दौरान एटीएम के पास घर से एक सीसीटीवी फुटेज मिला। नीले रंग की एक कार का पता चला, जिससे बदमाश शहर में घुसे थे और भाग गए थे।” इसके बाद टीम बिहार के सीतामढ़ी में उसके मालिक के पास पहुंची। इस बीच, यूपी पुलिस की एक और टीम ने उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर रोड पर उसी कार को रोका और चारों को गिरफ्तार कर लिया।

    गोल्फ सिटी के एसएचओ शैलेंद्र गिरी ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों में से एक नीरज नाम का व्यक्ति भी था जो इसगिरोह का स्थायी सदस्य है और उसके खिलाफ पांच मामले दर्ज थे। पूछताछ में नीरज ने इस मामले की तकनीक को सीखने को स्वीकार किया है  गिरी ने कहा, “नीरज ने खुलासा किया कि उसने मिश्रा से व्यापार के गुर सीखे।” सूत्रों ने कहा कि मिश्रा एक अच्छी तरह से संगठित  गिरोह का संचालन करता है और विभिन्न राज्यों के बेरोजगार युवाओं को काम पर रखता है।

    पुलिस ने कहा कि देश भर में पिछले एक साल में गिरोह द्वारा ऐसे 30 से अधिक मामले किए गए हैं।

    (बिज़नेस इनसाइडर इंडिया से)

  • अब स्कूलों  में नहीं पढ़ाया जाएगा डार्विन का प्रसिद्ध सिद्धान्त ?

    अब स्कूलों  में नहीं पढ़ाया जाएगा डार्विन का प्रसिद्ध सिद्धान्त ?

    वानरों से मनुष्य की उत्पत्ति के इस सिद्धान्त को हटाने के विरोध में उतरे देश भर के वैज्ञानिक

    नई दिल्ली//  राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा 9 और 10 के सिलेबस से दुनिया के महान वैज्ञानिक चार्ल्स डार्विन की प्रसिद्ध इवोल्यूशन थ्योरी यानी विकास के सिद्धांत को हटाने का फैसला किया है।  भारत के लगभग 18 सौ से अधिक वैज्ञानिकों और शिक्षकों ने एनसीईआरटी के इस फैसले का विरोध किया है । कक्षा 9 और 10 के लिए विज्ञान की पाठ्य पुस्तकों से डार्विन के विकास के सिद्धांत को हटाने की निंदा करते हुए एनसीईआरटी को लिखे खुले पत्र पर वैज्ञानिकों शिक्षकों ने हस्ताक्षर किए हैं। इस थ्योरी में  प्रमुख रूप से यह बताया गया है कि पृथ्वी पर मानव की उत्पत्ति बंदर की प्रजाति के जानवरों से हुई यानी मनुष्य के पूर्वज मूल रूप से वानर वंश के थे ।

    इसका विरोध जताते हुए ब्रेकथ्रू साइंस सोसायटी ने एक प्रेस स्टेटमेंट जारी किया है जिसमें कोर्स से थ्योरी ऑफ इवोल्यूशन हटाने के खिलाफ एक अपील शीर्षक वाला पत्र शामिल है।  इस पर भारतीय विज्ञान संस्थान टाटा इंस्टीट्यूट आफ फंडामेंटल रिसर्च, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के वैज्ञानिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किए हैं।

    कोविड महामारी के बाद छात्रों पर बोझ को कम करने के लिए और कोर्स को तर्कसंगत बनाने की कोशिश के नाम पर पहले ही मुगलों से जुड़े कई प्रसंग हटाए गए थे. वहीं अब विज्ञान की पाठ्यपुस्तक के अध्याय 9, ‘आनुवांशिकता और विकास’ को ‘आनुवंशिकता’ से बदल दिया गया था. 

    शिक्षाविदों का मानना था कि ऐसा सिर्फ एक शैक्षणिक शासन के लिए किया गया है ,मगर अब स्थाई तौर पर सिलेबस से हटा दिया गया है। वैज्ञानिक समुदाय का मानना है कि डार्विन के विकास सिद्धांत सिद्धांत को कोर्स से हटाना शिक्षा का उपहास है। वैज्ञानिकों द्वारा लिखे पत्र में कहा गया है कि विकास का सिद्धांत बच्चों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और डार्विन का प्राकृतिक चयन का सिद्धांत छात्रों को जरूरी सोच और वैज्ञानिक पद्धति के महत्व के बारे में शिक्षित करता है। यह है कि जैविक दुनिया लगातार बदल रही है और विकास इसकी अनिवार्य प्रक्रिया है जबसे डार्विन ने अपने सिद्धांत को प्रतिपादित किया है तब से तर्कसंगत सोच की आधारशिला रखी गई है।

  • आधार कार्ड आयु के निर्धारण का आधार नहीं- हाईकोर्ट

    आधार कार्ड आयु के निर्धारण का आधार नहीं- हाईकोर्ट

    जुवेनाइल जस्टिस पर महत्वपूर्ण निर्णय

    जबलपुर // मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय कहा है कि आयु निर्धारण के लिए आधार कार्ड स्वीकार नहीं है . इस मामले में उच्च न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों पर भरोसा किया जिसमे कहा गया कि आधार केवल UIDAI द्वारा जारी किया गया एक दस्तावेज है और इस प्रकार जेजे अधिनियम के वैधानिक प्रावधानो का अधिक्रमण नही कर सकता है।
    मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की जबलपुर पीठ ने हाल ही में कहा है कि आधार कार्ड नाबालिग बलात्कार पीड़िता की उम्र निर्धारित करने का प्रमाण नहीं है। [मनोज कुमार यादव बनाम मध्य प्रदेश राज्य]।

    एकल न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल ने कहा कि नाबालिग बलात्कार पीड़िता की उम्र निर्धारित करने के लिए अदालतों को किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम के तहत निर्धारित प्रक्रिया पर विचार करना होगा।

    मामले में तथ्य यह है कि याचिकाकर्ता पर नाबालिग से कथित रूप से बलात्कार करने का मुकदमा चल रहा है .सुनवाई के दौरान उसने ट्रायल कोर्ट के समक्ष आवेदान दिया ,जिसमे नाबालिग शिकायतकर्ता के आधार कार्ड की मूल प्रति लाने का निर्देश देने की मांग की गई ,कोर्ट ने यह आवेदन निरस्त कर दिया ,इसके खिलाफ उसने हाई कोर्ट का रुख किया .

    पीठ ने कहा कि जेजे एक्ट किसी व्यक्ति की आयु निर्धारित करने के लिए जन्म प्रमाण पत्र और स्कूल छोड़ने के प्रमाण पत्र पर निर्भर होने का प्रावधान करता है। बेंच ने कहा कि उन दस्तावेजों की अनुपस्थिति में, अधिनियम में किसी व्यक्ति की उम्र निर्धारित करने के लिए अस्थि परीक्षण का प्रावधान है।

    पीठ ने 19 अप्रैल के आदेश में कहा, “इसलिए, उपलब्ध वैधानिक प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए और अधिनियम के तहत निर्धारित अनुमान और आयु के निर्धारण के लिए आधार कार्ड को आयु के प्रमाण के रूप में लेने का कोई प्रावधान नहीं है, मेरी राय है कि इस उच्च न्यायालय के पुनरीक्षण क्षेत्राधिकार में हस्तक्षेप की मांग करने वाले आक्षेपित आदेश में कोई अवैधता नहीं है।”

    न्यायमूर्ति अग्रवाल को एक विशेष अदालत द्वारा 8 अप्रैल, 2023 को आयु के प्रमाण के रूप में आधार कार्ड को स्वीकार करने से इनकार करने के आदेश में संशोधन की मांग करने वाली एक याचिका जब्त की गई थी।

    अपीलकर्ता ने जब्बार बनाम राज्य के मामले में दिए गए दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले पर भरोसा किया, जिसमें उच्च न्यायालय ने कहा था कि आधार एक श्रेष्ठ दस्तावेज है और उम्र का निर्धारण करते समय इस पर विचार किया जाना चाहिए।

    पीठ ने, हालांकि, जरनैल सिंह बनाम हरियाणा राज्य के मामले में सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियों पर भरोसा किया, जिसमें शीर्ष अदालत ने कहा था कि जेजे अधिनियम के तहत वैधानिक नियमों को केवल इसलिए नहीं बदला जा सकता है क्योंकि भारत सरकार द्वारा एक विशेष दस्तावेज जारी किया गया है। .

    वास्तव में वह दस्तावेज भारत सरकार द्वारा जारी नहीं किया जाता है, बल्कि एक स्वतंत्र एजेंसी, अर्थात् भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) द्वारा जारी किया जाता है।

    शीर्ष अदालत के फैसले का हवाला देते हुए न्यायमूर्ति अग्रवाल ने कहा,

    “इस प्रकार, मेरी राय में चूंकि आधार कार्ड अभियोजिका की उम्र का प्रमाण नहीं है और उसकी उम्र को जेजे अधिनियम के अनुसार आवश्यक रूप से निर्धारित किया जाना है, यह पुनरीक्षण याचिका विफल होती है और खारिज की जाती है।”

  • अब कांग्रेस की नज़र भाजपा के असंतुष्टों पर ?

    अब कांग्रेस की नज़र भाजपा के असंतुष्टों पर ?

    पार्टी में शामिल कराने का होगा प्रयास

    भोपाल//इन दिनों प्रदेशमें भाजपा के आंतरिक सर्वे और फीडबैक की काफी चर्चा है बताया जाता है कि इस पूरी कवायद में भाजपा के कार्यकर्ताओं के असंतुष्ट होने की बात सबसे मुखर होकर सामने आई है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता अपनी उपेक्षा से काफी नाराज हैं। एक और भाजपा इन असंतुष्ट नेताओं कार्यकर्ताओं से बात कर और उनकी मान मनौव्वल कर डैमेज कंट्रोल में जुटी हुई है। वरिष्ठ नेता अलग-अलग जिलों में ऐसे कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ बैठकें और अलग-अलग चर्चा भी कर रहे हैं। वही कांग्रेस की नजर इन असंतुष्ट नेताओं पर है । कांग्रेस इसे  एक अवसर के रूप में देख रही है ।क्योंकि कांग्रेस इस चुनाव के लिए हर वो प्रयास करती नज़र आ रही है जो उसकी जीत की संभावनाओं को मजबूत करता हो।

    खबर है कि कांग्रेस ने पार्टी के 16 वरिष्ठ नेताओं को भाजपा के इसी तरह के असंतुष्ट नेताओं से संपर्क करने की क्षेत्रवार जिम्मेदारी सौंपी है।  कांग्रेस ने यह भी तय किया है कि भाजपा के जिन नेताओं और कार्यकर्ताओं का जनाधार मजबूत है उन्हें बडे़ आयोजन कर कांग्रेस में शामिल करने का प्रयास किया जाए।

    कांग्रेस ने चुनाव अभियान की जो कार्ययोजना बनाई है उसमें भाजपा के असंतुष्ट नेताओं से संपर्क करना भी शामिल है । प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ सहित अन्य नेता लगातार दावा कर रहे हैं कि भाजपा के कई नेता उनके संपर्क में है और जिन्हें समय आने पर पार्टी में शामिल किया जाएगा।

    पिछले माह निमाड़ क्षेत्र में असर रखने वाले भाजपा के पूर्व सांसद माखन सिंह सोलंकी को पूर्व मंत्री दिग्विजय सिंह और मुंगावली के पूर्व विधायक राव देशराज सिंह यादव के पुत्र यादवेंद्र यादव को कमलनाथ की उपस्थिति में कांग्रेस की सदस्यता दिलाई गई थी विंध्य क्षेत्र में प्रभाव रखने वाली बसा पार्क से पूर्व विधायक शीला त्यागी भी कांग्रेस में शामिल हो चुकी हैं। वही नर्मदापुरम ( होशंगाबाद) जिले  में भाजपा के एक पूर्व विधायक के कांग्रेस में शामिल होने की भी जोर शोर से चर्चा है।

    लाल पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पचौरी कांतिलाल भूरिया अरुण यादव, अजय सिंह  , नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर गोविंद सिंह, नटराजन मीनाक्षी नटराजन बाला बच्चन सज्जन सिंह वर्मा जीतू पटवारी तरुण भनोट कमलेश्वर पटेल जयवर्धन सिंह लाखन सिंह यादव रामनिवास रावत फूल सिंह बरैया और केपी सिंह को जिम्मेदारी दी गई है कि वह आवंटित जिलों में भाजपा के असंतुष्ट नेताओं से संपर्क करें।

  • अब छात्र पांचवी से सीधे आठवीं में ले सकेगा दाखिला

    अब छात्र पांचवी से सीधे आठवीं में ले सकेगा दाखिला

    नई दिल्ली// अब पांचवी से विद्यार्थी विद्यार्थी सीधे आठवीं कक्षा में दाखिला ले सकेगा और यह संभव होगा अतिरिक्त क्रेडिट अंक से। नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क (एनसीएफ ) का फार्मूला सिर्फ उच्च शिक्षा या कौशल विकास से जुड़े कोर्स तक नहीं सीमित रहेगा बल्कि स्कूली शिक्षा में भी प्रभावी रहेगा।

     इस इसे फिलहाल चार स्तरों में बांटा गया है इसमें पहला बाल वाटिका से पांचवीं कक्षा के स्तर तक का दूसरा छठी से आठवीं ,तीसरा नौवीं से दसवीं तथा चौथा 11वीं और 12वीं कक्षा के स्तर का होगा। सभी स्तरों के 4040 क्रेडिट स्कोर होंगे। पूरी स्कूली शिक्षा का क्रेडिट स्कोर 160 होगा । इस दौरान कोई भी छात्र अतिरिक्त क्रेडिट अंकों के आधार पर सीधे दूसरे स्तर में भी दाखिला पा सकेगा।

    छात्र को इसके लिए पढ़ाई के अलावा अन्य गतिविधियों में महारत हासिल कर अतिरिक्त क्रेडिट अंक जुटाने होंगे।

     इस फार्मूले में कौशल विकास से जुड़े छात्रों को भी नियमित शिक्षा से जोड़ने का मौका दिया गया है यानी आईटीआई पास छात्र 12वीं के समकक्ष माना जाएगा और दूसरे 12वीं के छात्रों की तरह विश्वविद्यालय में दाखिला लेने के योग्य होगा हालांकि इसके लिए उसे एनआईओएस( ओपन स्कूल) से किसी एक भाषा से जुड़ा कोर्स करना होगा। खास बात यह कि स्कूली शिक्षा में नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क को पहली बार लागू करने की तैयारी है।

    कम से कम 30 घंटे देने पर एक क्रेडिट स्कोर हासिल होगा 

    शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क का फार्मूला सभी स्तर के लिए एक समान रखा गया है यानी किसी भी छात्र को एक क्रेडिट स्कोर तभी मिलेगा जब उस क्षेत्र में कम से कम 30 घंटे का समय देगा मैं भले ही पढ़ाई या फिर कुछ नया सीखने के लिए लगाया हो वही एक चरण को पूरा पार करने के लिए न्यूनतम 40 क्रेडिट हासिल करना होगा। व्यवस्था स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक के स्तर पर एक समान रखी गई है इस दौरान स्कूली शिक्षा के चारों चरणों को पूरा करने पर 160 क्रेडिट मिलेगा जबकि 3 वर्षीय स्नातक कोर्स पूरा करने पर 120 क्रेडिट मिलेंगे।

  • अब कुत्तों को भी मिला मूल निवासी का अधिकार ?

    अब कुत्तों को भी मिला मूल निवासी का अधिकार ?

    नई दिल्ली// पिछ्ले दिनों सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार केंद्र सरकार ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत पशु( कुत्ता) जन्म नियंत्रण नियमावली को अधिसूचित कर दिया है। इस नियमावली के अनुसार पशुओं पर अत्याचार रोकने के लिए देश में पहली बार 1960 में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम लाया गया था। केंद्र सरकार ने इसी अधिनियम 5 के तहत पशु (कुत्ता) जन्म नियंत्रण नियमावली 2023 को  अधिसूचित किया है। नई नियमावली में स्पष्ट किया गया है कि उन क्षेत्रों में कुत्तों को खिलाने या आश्रय देने से भी कोई मना नहीं कर सकता जहां यह कुत्ते रह रहे हैं । किसी क्षेत्र से कुत्तों को भगाए या हटाए बिना भी मनुष्यों एवं आवारा कुत्तों के बीच संघर्षों से निपटने के उपाय तलाशे जा सकते हैं।

      सुप्रीम कोर्ट के अनुसार पिछले दिनों कई स्थानों पर कुत्तों की बर्बरता के बाद उन से छुटकारा पाने की मांग तेज होने लगी थी, लेकिन पशु प्रेमियों के लिए अच्छी खबर यह है कि कुत्तों को भी मूलनिवासी का अधिकार मिल गया है । अब कुत्तों को भगाया नहीं जा सकता। कुत्ता भले ही लोगों को काटता हो, उसे उसके मोहल्ले या गांव से विस्थापित नहीं किया जा सकता, वह चाहे जहां रह सकता है या अपनी मर्जी से जा भी सकता है इस मामले में किसी भी व्यक्ति कोई अधिकार नहीं है कि वह बिना वजह से किसी भी कुत्ते को मारे। कुत्ते के पक्ष में कोई व्यक्ति इस तरह के अपराधी के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है ।

    दरअसल,सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई आदेशों में विशेष रूप से उल्लेख किया है कि कुत्तों को विस्थापित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। निगमों को पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी)  तथा रेबीज विरोधी कार्यक्रम संयुक्त रूप से चलाना चाहिए। उनके साथ साथ जिन क्षेत्रों में कुत्ते ज्यादा परेशान करते हैं उन क्षेत्रों में भारतीय पशु कल्याण बोर्ड द्वारा कुत्तों की नसबंदी अभियान चलाने की अनुमति होनी चाहिए नसबंदी करते समय कुत्ते पर किसी प्रकार की क्रूरता नहीं बरती जानी चाहिए।

    स्थानीय निकायों से आग्रह

    नई नियमावली को अधिसूचित करने के साथ ही केंद्र सरकार ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों, पशुपालन विभाग एवं शहरी विकास विभाग के प्रधान सचिवों को पत्र जारी कर दिया है। स्थानीय निकायों से आग्रह किया गया है कि वे नियमों का अक्षरश: क्रियान्वित करें और किसी भी ऐसी संस्था को ऐसे कार्यक्रम चलाने की अनुमति न दें जिसे भारतीय पशु कल्याण बोर्ड से मान्यता नहीं है और एबीसी कार्यक्रम के लिए अनुमोदित या नियमावली में वर्णित नहीं हैं।