Category: केरल

  • इस राज्य में लोग मेगा स्टायलिश अंत्येष्टि पर लाखों रूपये खर्च करने को तैयार ?

    इस राज्य में लोग मेगा स्टायलिश अंत्येष्टि पर लाखों रूपये खर्च करने को तैयार ?

    तिरुवनंतपुरम// अभी तक आपने शादी और अन्य समारोहों को भव्य और महंगा होने की बाते सुनी होगीं पर अब लोग अंत्येष्टि को भी भव्य बनाने के लिए खासी रकम खर्च करने को तैयार हैं .

    हिन्दू में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार इन दिनो केरल में अंतिम संस्कार का बाजार फल-फूल रहा है और लोग मेगा स्टाइलिश अंत्येष्टि पर लाखों रुपये तक खर्च करने को तैयार हैं। बढ़ते प्रवासी भारतीयों , विशेषकर ईसाई समुदाय के कारण, केरल में  अत्येष्टि का कार्यक्रम “लार्जर दें लाइफ”  बनाता जा रहा है

    कोरोना महामारी के बाद अंतिम संस्कार सेवाओं में विशेषज्ञता रखने  वाली कई इवेंट मैनेजमेंट कंपनियां सामने आई हैं . महामारी से पहले केवल कुछ ही कंपनियां थीं जो ये सेवाएं प्रदान करती थीं,पर कोविड के चरम पर कुछ इवेंट मैनेजमेंट फर्मों ने अपने कारोबार को इसके लिए खोल दिया, क्योंकि  विवाह सहित सभी सार्वजनिक कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

    आम तौर पर ये कंपनियां अंतिम संस्कार की सेवाओं के लिए 50,000 से 10 लाख रुपये के बीच शुल्क लेती हैं, पर अतिरिक्त मांग लागत को बढ़ा देता है । उदाहरण के लिए, एक ताबूत ₹4,500 में उपलब्ध है, लेकिन लकड़ी और अन्य सामान के आधार पर ₹ 1 लाख में भी उपलब्ध है।

    इरिंजलाकुडा की कायरोस फ्यूनरल सर्विस, जिसे गूगल  पर पांच सितारा रेटिंग प्राप्त है, के पास ग्लास पैनल और साटन पर्दे वाले एम्बुलेंस और कस्टम-निर्मित शव वाहन का एक बड़ा बेड़ा है।

    रिपोर्ट के अनुसार एजेंसियों द्वारा दी जाने वाली सेवाओं में शव की ड्रेसिंग, लाइव अंतिम संस्कार बैंड, कार्यक्रम की लाइव-स्ट्रीमिंग, ताबूत और कब्र को सजाना और वह सब कुछ शामिल है जो एक परिवार मांग सकता है। मृतक का मेकअप ‘पैकेज’ में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस तरह की सेवा दे रही कम्पनी कोकोनाडु इवेंट मैनेजमेंट, तिरुवल्ला की संजय जॉर्ज मैथ्यू कहते हैं, “विदेशी रिश्तेदार और मृतक के करीबी लोग शव को अधिक जीवंत रूप में देखना चाहते हैं।” लिपस्टिक और आईशैडो के साथ-साथ फाउंडेशन भी लगाया जाता है। अधिकांश हल्के टच-अप के लिए कहते हैं, लेकिन कई लोग भारी मेकअप के लिए कहते हैं, यह देखते हुए कि यह आखिरी बार होगा जब किसी व्यक्ति को देखा जाएगा।  इसके अलावा अंतिम संस्कार सेवाओं के लिए आम अनुरोध में अक्सर मृतक को ब्लेज़र, सूट या जैकेट जैसी औपचारिक पोशाक पहनाना शामिल होता है, हालांकि कुछ विचित्र  अनुरोध भी होते हैं, जैसे कि मृतक को रे-बैन धूप का चश्मा पहनना।

    ताबूत को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है, जरूरत पड़ने पर और मेहमानों को  सुरक्षा प्रदान की जाती है देखभाल के लिए कर्मचारी तैनात किए जाते हैं। चर्च या श्मशान तक जुलूस और उसके बाद दावत की जिम्मेदारी इवेंट मैनेजमेंट कंपनी की होती है।

    त्रिशूर के निवासी पॉल जिफ़ी, जिन्होंने हाल ही में एक अंतिम संस्कार सेवा कंपनी का उपयोग किया है को लगता है कि इस तरह की सर्विस और सहायता व्यावहारिक है.उनका मानना है कि

    एकल या छोटे परिवार या शहर से बाहर से आए परिवार दुखी होते हैं और इस तरह के कई काम अक्सर उनको भारी पड़ सकते हैं । मिस्टर जिफ़ी को लगता है कि मृतक का हल्का मेकअप इसे  गरिमापूर्ण बनाता है, क्योंकि शव को सार्वजनिक श्रद्धांजलि के लिए रखा जाता  है। कंपनी परिवार के सदस्यों से इनपुट लेकर लेती है यह सेवा का एक महत्वपूर्ण पहलू है.

    (हिन्दू में प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर )(फोटो हिन्दू से साभार )

  • केरल हाईकोर्ट ने कहा- नग्नता और अश्लीलता हमेशा एक नहीं होती..!

    केरल हाईकोर्ट ने कहा- नग्नता और अश्लीलता हमेशा एक नहीं होती..!

    कोर्ट ने अर्धनग्न शरीर पर बच्चों से पेंटिंग करवाने वाली महिला को किया बरी

    कोच्चि // केरल हाईकोर्ट ने पास्को कानून से जुड़े एक मामले में महिला अधिकार कार्यकर्ता को बरी कर दिया! 33 वर्षीय रेहाना फातिमा नाम की इस महिला अधिकार एक्टिविस्ट के विरुद्ध बच्चों का यौन शोषण से संरक्षण (पॉक्सो ) कानून किशोर न्यायालय और सूचना एवं प्रौद्योगिकी कानून के तहत मुकदमा चल रहा था।

    क्या है पूरा मामला?

     कुछ महीनों पहले रेहाना फातिमा का एक वीडियो सामने आया था जिसमें वे अपने नाबालिग बच्चों के सामने अर्धनग्न (सेमी न्यूड) खड़ी थी और उन्होंने उन्हें अपने शरीर पर पेंटिंग की अनुमति दी थी।  इसका वीडियो वायरल होने के बाद उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था । रेहाना आरोपों का सामना कर रही थी । निचली अदालत ने फातिमा को दोष मुक्त करने वाली याचिका को खारिज कर दिया था । फातिमा ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी । 

    उच्च न्यायालय में फातिमा ने कहा था कि “बॉडी पेंटिंग” समाज के उस दृष्टिकोण के खिलाफ एक राजनीतिक बयान के रूप में थी, जिनमें सभी मानते हैं कि महिलाओं के शरीर का नग्न उपरी हिस्सा किसी भी रूप में यौन संतुष्टि या यौन क्रियाओं से जुड़ा है, जबकि पुरुषों के शरीर के निर्वस्त्र ऊपरी हिस्से को इस रूप में नहीं देखा जाता ।

    उच्च न्यायालय ने क्या कहा ?

    केरल हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति कौसर एदाप्पागथ  ने फातिमा को आरोप मुक्त करते हुए कहा कि -आधी आबादी को अपने शरीर पर स्वायत्तता का अधिकार नहीं मिलता, अपने शरीर व जीवन के संबंध में फैसले लेने के कारण उन्हें परेशानी व दंड का सामना करना पड़ता है और अलग-थलग कर दिया जाता है।

     जस्टिस कौसर एदाप्पागथ ने कहा कि महिला कार्यकर्ता के खिलाफ लगाए गए आरोप के आधार पर किसी के लिए यह तय करना संभव नहीं है कि बच्चों का किसी भी रूप से यौन संतुष्टि के लिए उपयोग हुआ है। उन्होंने बस अपने शरीर को कैनवास के रूप में अपने बच्चों को इस्तेमाल करने दिया था।  अदालत ने कहा कि अपने शरीर के बारे में फैसले लेने का अधिकार महिलाओं की समानता और निजता के मौलिक अधिकार के मूल में  है।

    उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि ऐसी” निर्दोष कलात्मक” अभिव्यक्ति को किसी भी रूप में यौन क्रिया से जोड़ना क्रूर है।  अभियोजन पक्ष ने अपनी दलील में इसे अश्लील और असभ्य बताया था । इस दलील को नकारते हुए अदालत ने कहा कि नग्नता और अश्लीलता हमेशा पर्यायवाची नहीं होते।  नग्नता को अनिवार्य रूप से अश्लील , असभ्य या अनैतिक करार देना गलत है। अदालत ने कहा कि एक समय में केरल की निचली जाति की महिलाओं ने अपने स्तन ढकने के अधिकार की लड़ाई लड़ी थी। देश के विभिन्न प्राचीन और सार्वजनिक स्थानों पर तमाम देवी-देवताओं और प्रतिमाएं और कलाकृतियां हैं जो अर्धनग्न अवस्था में है उन्हें पवित्र माना जाता है । अदालत ने कहा कि कुछ लोग ऐसे भी हैं जो महिलाओं की नग्नता को कलंक मानते हैं और उसे सिर्फ यौन तुष्टी से जोड़कर भर देखते हैं । फातिमा द्वारा जारी वीडियो का मकसद समाज में मौजूद इस दौरे में मापदंड का पर्दाफाश करना था। न्यायालय ने कहा कि नग्नता को सेक्स के साथ जोड़ना नहीं जोड़ना चाहिए।

    (नवभारत टाइम्स और एजेंसी खबरों के आधार पर )